Latest News Site

News

अक्षय नवमी पर महिलाओं ने परिवार संग आंवला पेड़ के लगाये फेरे

अक्षय नवमी पर महिलाओं ने परिवार संग आंवला पेड़ के लगाये फेरे
November 05
08:58 2019
  • पेड़ों की छांव में महिलाओं और बच्चों ने सामूहिक रूप से किया भोजन

हमीरपुर , 05 नवम्बर । जिले में घर की खुशहाली और सुहाग की रक्षा के लिये मंगलवार को महिलाओं में अक्षय नवमी (इच्छा नवमी) की धूम मच गयी हैं। आंवला पेड़ की महिलाओं ने परिवार के साथ पूजा अर्चना की बल्कि पेड़ के फेरे लगाने के बाद वहीं जमीन पर बैठकर सामूहिक रूप से भोजन भी किया। एतिहासिक मंदिरों और कम्पनी बाग में इस पर्व को लेकर आंवला पेड़ की पूजा के लिये बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ उमड़ी।

जिले में अक्षय नवमी को लेकर सुबह से ही घर-घर में तैयारियां शुरू हो गयी। घर में महिलाओं ने पकवान बनाने के बाद दोपहर हमीरपुर नगर के एतिहासिक चौरादेवी मंदिर, पतालेश्वर मंदिर में पहुंचकर पहले पूजा अर्चना की फिर आंवला के पेड़ की विधि विधान से पूजा कर पेड़ के फेरे लिये।

महिलाओं ने देशी घी से दीपक जलाकर आंवला पेड़ की आरती की। आंवला पेड़ के नीचे महिलाअओं ने इच्छा नवमी की कथा भी विधि विधान से सुनी। इसके बाद पेड़ की छांव में ही महिलाओं ने अपने पूरे परिवार के साथ सामूहिक रूप से भोजन किया। स्थानीय जिला उद्यान विभाग के कम्पनी बाग में भी सैकड़ों महिलाओं ने आंवला पेड़ की पूजा कर सामूहिक रूप से भोजन किया।

जिले के सुमेरपुर, मौदहा, राठ, सरीला, गोहांड, मुस्करा, कुरारा सहित कस्बे से लेकर ग्रामीण इलाकों में भी आंवला पेड़ की पूजा कर उसके नीचे दोपहर का भोजन करने की दौर अभी भी जारी हैं। भरुआ सुमेरपुर कस्बे के गायत्री तपोभूमि प्रांगण में तो बड़ी संख्या में महिलायें परिवार संग आंवला पेड़ की पूजा करने पहुंची हैं। अभी भी विधि विधान से पूजा अर्चना का सिलसिला चल रहा हैं जो शाम तक चलेगा।

इधर हमीरपुर के पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी, आंवला नवमी कहा जाता हैं। ये पर्व दिवाली से आठ दिन बाद पड़ता हैं। हिन्दु धर्म में अक्षय नवमी का बहुत ही महत्व बताया गया हैं।

पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि ये दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिये बेहद शुभ दिन माना गया हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक अक्षय नवमी का वैसा ही महत्व हैं जो वैशाख मास की तृतीय का हैं। अक्षय नवमी के दिन किया गया दान पुण्य कभी समाप्त नहीं होता हैं। ऐसी मान्यता हैं कि इस दिन द्वापर युग का आगाज हुआ था।

आज ही विष्णु भगवान ने कुष्माण्डक दैत्य का नाश किया था। उसके रोम से कुष्माण्डा की बेल उत्पन्न हुयी थी। इसी वजह से आज के दिन कुष्माण्ड का दान करने से उत्तम फल प्राप्त होता हैं। पंडित दुबे ने बताया कि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल की नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा की तिथि तक आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा, तर्पण तथा अन्न दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती हैं। सभी महिलाओं को आंवला पेड़ की पूजा कर उसके नीचे भोजन करने से घर में खुशहाली आती हैं और सभी को अक्षय फल मिलता हैं।

(हि.स.)

श्री करतारपुर साहिब: जहां बहता है आस्था का समंदर

[slick-carousel-slider design="design-6" centermode="true" slidestoshow="3"]

About Author

Prashant Kumar

Prashant Kumar

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Only registered users can comment.

Sponsored Ad

SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS

LATEST ARTICLES

    Fuel prices hike by Rs 2/L in Mumbai

Fuel prices hike by Rs 2/L in Mumbai

Read Full Article