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क्या झारखंड में कांग्रेस बनेगी दागी दल-बदलुओं का अशियाना?

क्या झारखंड में कांग्रेस बनेगी दागी दल-बदलुओं का अशियाना?
February 24
08:52 2020

कुमार की रिपोर्ट

झारखंड में कांग्रेस को 2019 के विधानसभा चुनाव में 2014 के चुनाव से लगभग 3.42 प्रतिशत मत अधिक प्राप्त हुये और 2014 में जहां 06 सीटें मिली थी वहीं उन्हें 31 सीटों पर गठबंधन की भागीदारी से चुनाव लड़ने पर 16 सीटें मिली।

ये 16 सीटें कांग्रेस की निखरती हुई छवि और प्रदेश कांग्रेस के बदले हुए स्वच्छ और समर्पित नेतृत्व की देन मानी जा रही है। वहीं महागठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा को 2019 के विधानसभा चुनाव में 2014 के चुनाव से लगभग 1.71 प्रतिशत मत कम प्राप्त हुये और 2014 में जहां 19 सीटंे मिली थी वहीं उन्हें 43 सीटों पर गठबंधन की भागीरदारी से चुनाव लड़ने पर 30 सीटें प्राप्त हुई।

गौरतलब है कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के मत प्रतिशत में 2014 के मुकाबले 2019 में कमी आई है।

गौरतलब यह बात भी उभर रही है कि झारखंड में कांग्रेस की छवि और उसके समीकरण में जो इजाफा हुआ है उसको बरकरार रखने की दिशा में कहीं पार्टी फिसलती तो नहीं नजर आ रही है! छवि के फिसलने का कारण अतिउत्साहित होकर दूसरे दल से निष्काषित दागी विधायकों को संरक्षण देना माना जा रहा है।

कहा तो यह भी जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय प्रभारी ने पार्टी को और मजबूती प्रदान करने के लिए 23 जनवरी को बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम से निष्काषित दो विधायकों बंधु तिर्की और प्रदीप यादव को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता राहुल गांधी के समक्ष कांग्रेस में शामिल करा दिया जिसकी तस्वीर भी लगभग झारखंड के सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपी।

राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा है कि दलबदलु विधायकों की आवश्यकता तब पड़ती है जब सरकार बनाने में विधायकों की अतिरिक्ति संख्या की जरूरत होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां बिना आवश्यकता के इन विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर कौन सा संदेश आवाम को दिया जा रहा हैं जिसके समक्ष कांग्रेस एक नई छवि लेकर उभरी है। ये तो ’बिना मौसम मल्हार गाने वाली बात हुई’। क्या आलाकमान को जिनके बाये और दाये ये दो विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव बहुत शान से खड़े हैं, उनकी असली छवि की जानकारी है?

क. प्रदीप यादव यौन उत्पीड़न मामले में 25 जुलाई 2019 को कोर्ट में सरेंडर करने के बाद हिरासत में ले लिये गये। उन्हें 28 सितंबर 2019 को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली हैं। मुकदमा चल रहा है।

ख. 2017 में अडाणी पावर प्लांट में राजनीतिक आंदोलन की वजह से उन्हें जेल भेज दिया गया और उनको लंबेे समय तक जेल में रहना पड़ा।

ग. उनकी राजनीतिक बुनियाद आरएसएस की है और वह लगातार भाजपा में रहे तथा बाबूलाल और अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में शिक्षा मंत्री रहे।

क. आय से अधिक संपत्ति के मामले में बंधु तिर्की भेजे गये थे जेल

12 दिसंबर 2018 में मधु कोड़ा सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे जेवीएम के केंद्रीय महासचिव बंधु तिर्की को सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी सुबह छह बजे बंधु तिर्की के पंडरा ओपी क्षेत्र के बन्होरा स्थित आवास से हुई थी। 24 जनवरी 2019 को झारखंड हाईकोर्ट से पूर्व मंत्री बंधु तिर्की जमानत पर हैं। मुकदमा चल रहा है।

ख. बंधु तिर्की 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले में अभियुक्त हैं और उन्हें 04 सिंतबर 2019 को गिरफ्तार किया गया तथा 25 नवंबर 2019 को 85 दिन बाद झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत पर हैं। मुकदमा चल रहा है।

कांग्रेस हाल के दिनों में अपने तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की आंतरिक चोट से अभी उभरी कहां है वो तो जनता ने उनको धुली चटा दी।

सुखदेव भगत, जो कट्टर आरएसएस के थे, बिना जानकारी उन्हें अध्यक्ष पद से सुशोभित किया गया और वो कांग्रेस को तीलांजलि देकर अपने पुराने घर में चले गये। डाॅ अजय कुमार जो बाबूलाल के जेवीएम को छोड़कर एकाएक कांग्रेस के बहुत उंचे पद पर सुशोभित कर दिये गये और कांग्रेस का सारा लेखा-जोखा लेकर आप पार्टी में शामिल हो गये।

08 वर्षों तक अध्यक्ष और आलाकमान के प्रिय रहे प्रदीप बालमुचू, चर्चा है कि जिन्होंने रांची, जमशेदपुर और दिल्ली में कांग्रेस के पदों का दुरूपयोग करते हुये अकूत संपत्ति अर्जित किये हैं जिनको लाखों-करोड़ों से भी ऊपर आंका जा सकता है, ने अपने लोभी, लालची और पार्टी विरोधी विराट रूप के दर्शन करा दिये और आलाकमान को धन्य-धन्य कर दिया।

अगर आलाकमान, जो बेमौसम मल्हार गाने की कोशिश कर रहा है और बिना ठोक बजाके ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल कर रहा है तो उनको पूर्व में हुये घातक प्रहार से शिक्षा लेनी चाहिए।

समर्पित कांग्रेसजनों में आम चर्चा है कि यह कार्रवाई आलाकमान को अंधकार में रख कर की गई है। आने वाले दिनों में जैसे 2019 के चुनाव में तीन अध्यक्षों ने कांग्रेस को आंतरिक चोट मारी थी उसकी पुर्नरावृति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

कांग्रेस के कुछ वर्तमान कुछ विधायक और कार्यकर्ताओं को इन दो नेताओं बंधु तिर्की और प्रदीप यादव का कांग्रेस में शामिल होना गले से नीचे नहीं उतर रहा। यदि इनके शामिल होने से कांग्रेस की छवि मजबूत होती है तो ये कांग्रेस प्रभारी और आलाकमान के लिए बहुत फक्र की बात है।

  • दुर्दशा की तस्वीर की एक झलक

भाजपा, आजसू गठबंधन को 2014 में पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने का जनादेश मिलने के बावजूद भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जेवीएम से 05 विधायकों को दल-बदल कराकर शामिल किया और उसमें से कुछ को मंत्री परिषद में भी जगह दी। पुनः 2019 के चुनाव के पूर्व, कांग्रेस और अन्य दलों से तोड़कर लोगों को भाजपा में शामिल किया। 2019 के चुनाव में पार्टी सहित जो उनकी दुर्दशा हुई है वो आज के परिपेक्ष में कांग्रेस के लिए आइना दिखाने का काम कर रही है।
अब कांग्रेस को चिंतन करना है।

पार्टी विरोधी गतिविधि के आरोप में बंधु तिर्की झामुमो से निष्कासित
यौन उत्पीड़न मामले में विधायक प्रदीप यादव ने देवघर कोर्ट में किया सरेंडर
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