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खुशी और समृद्धि का प्रतीक है मकर संक्रांति, जानें क्या है महत्व

खुशी और समृद्धि का प्रतीक है मकर संक्रांति, जानें क्या है महत्व
January 14
08:28 2020

Insightonlinenews Team

भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।
तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये।।
मकरसंक्रांन्तिपर्वणः सर्वेभ्यः शुभाशयाः।

मकर संक्रांति हिन्दूओं का प्रमुख त्योहर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी में प्रवेश करने को संक्रांति कहते हैं। ज्ञात हो कि लोहड़ी और मकर संक्रांति का त्योहर अक्सर लगातार 13 और 14 जनवरी को पड़ते हैं। लेकिन इस वर्ष लोहड़ी 13 जनवरी को पड़ रही है जबकि मकर संक्रांति 15 जनवरी को है। क्योंकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 02.07 बजे है। इसलिए संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। 

मकर संक्रांति के दिन लोग सुबह नदी में स्नान करने के बाद अग्निदेव और सूर्यदेव की पूजा करते हैं। मंदिरों व ब्राह्मणों व गरीबों को दान देते हैं। इसके बाद तिल के लड्डू, खिचड़ी और पकवानों की मिठास के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाते हैं। गुजरात और दिल्ली समेत देश के विभिन्न शहरों में लोग आज के दिन पतंगबाजी भी करते हैं।

मकर संक्रांति को उत्तर भारत के कुछ इलाकों में खिचड़ी के पर्व के रूप में मनाते हैं तो वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु व केरल में इसे पोंगल के रूप में मनाते हैं। पोंगल 2020 का पर्व 15 जवरी को शुरू होगा और 18 जनवरी तक चलेगा। पोंगल का पर्व नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन की गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते है सागर में जा मिली थीं। इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति को मौसम में बदलाव का सूचक भी माना जाता है। आज से वातारण में कुछ गर्मी आने लगती है और फिर बसंत ऋतु के बाद ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है।

कुछ अन्य कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और गंगा स्नान करते हैं। इस वजह से भी गंगा स्नान का आज विशेष महत्व माना गया है।
माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी भूलाकर उनके घर गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है। 

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुनरू प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ठ होता है-

माघे मासे महादेवः यो दास्यति घृतकम्बलम।
स भुक्तवा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति
।।

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