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जिसे जहाँ जाना है चला जाए, मेरी शुभकामनाएं हैं: नीतीश

जिसे जहाँ जाना है चला जाए, मेरी शुभकामनाएं हैं: नीतीश
January 23
09:06 2020
  • पवन वर्मा व पीके को नीतीश की दो टूक
  • जिसे जहाँ जाना है चला जाए, मेरी शुभकामनाएं हैं: नीतीश
  • प्रशांत किशोर ने अमित शाह को सीएए और एनआरसी लागू करने की दी थी चुनौती
  • पवन वर्मा ने नीतीश को सीएए पर रुख स्पष्ट करने और पार्टी छोड़ने की धमकी दी थी

पटना, 23 जनवरी । नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) का विरोध कर रहे जदयू नेता प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को दो टूक शब्दों में कहा है कि जिसे जहां जाना है, चला जाए, मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। नीतीश ने कहा ये लोग विद्वान हैं। मैं इनकी इज्जत करता हूं, भले ही वे मेरा सम्मान न करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों के बयान वाले नजरिये से जदयू को नहीं देखना चाहिए। जदयू बहुत ही दृढ़ता से अपना काम करता है। हम लोगों का स्टैंड साफ होता है। एक भी चीज पर हम लोग कन्फ्यूजन में नहीं रहते हैं। नीतीश ने कहा कि अगर किसी के मन में कुछ है तो आकर बातचीत करनी चाहिए। पार्टी की बैठक में इसकी चर्चा होनी चाहिए। प्रशांत किशोर ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कहा था कि सीएम ने कहा है कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा। पीके ने बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सीएए और एनआरसी लागू करने की चुनौती तक दे दी है।

पूर्व सांसद पवन वर्मा ने सीएए पर पार्टी के फैसले के खिलाफ नीतीश कुमार को पत्र लिखा था। मंगलवार को पवन वर्मा ने कहा था कि नीतीश कुमार को एनआरसी और सीएए जैसे ज्‍वलंत मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। नीतीश ने मेरे पत्र का जवाब नहीं दिया है। जवाब मिलने के बाद तय करूंगा कि पार्टी में रहूंगा या नहीं।

दरअसल, पवन वर्मा नहीं चाहते थे कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में जदयू भाजपा के साथ चुनावी मैदान में उतरे। उन्होंने इसके खिलाफ नीतीश को लिखे पत्र में अपनी बात रखी थी। गुरुवार को पवन ने कहा कि जदयू का भाजपा के साथ गठबंधन बिहार तक सीमित था। इसे दिल्ली में विस्तार दिया गया। मैंने तो यही प्रश्न किया था कि क्या यह फैसला पार्टी में विचार-विमर्श और वैचारिक स्पष्टिकरण के बाद लिया गया था? सीएए पर वैचारिक मतभेद के चलते भाजपा की पुरानी सहयोगी पार्टी अकाली दल ने दिल्ली में गठबंधन नहीं किया।

वशिष्ठ नारायण सिंह ने दिए थे कार्रवाई के स्पष्ट संकेत

जदयू ने प्रशांत और पवन वर्मा के बयानों को अनुशासनहीनता माना है। बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था कि वे इस मसले पर मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से बात करेंगे। पवन हों या प्रशांत, इनकी जदयू के निर्माण में कोई भूमिका नहीं है। अगर उन्होंने किसी जगह जाने का मन बना लिया है तो वे स्वतंत्र हैं। उनके बयानों को देखकर लगता है कि वे दूसरी पार्टी के संपर्क में हैं। दिल्ली में जदयू-भाजपा और लोजपा का गठबंधन हो गया तो इसमें गलत क्या है? सीएए पर पार्टी का स्टैंड साफ है।

(हि.स.)

सीएए-एनआरसी पर 19 जनवरी के बाद बोलेंगे : नीतीश

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