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झारखंड कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह पर टिकटों की सौदेबाजी का गंभीर आरोप

झारखंड कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह पर टिकटों की सौदेबाजी का गंभीर आरोप
October 11
11:21 2019
  • 2004 से ही लगातार चर्चा में हैं आरपीएन सिंह, नहीं हटाये जाते हैं तो कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनाव में केवल फजीहत ही झेलनी पड़ेगी

धर्मराज राय

पूरे झारखंड के कांग्रेसी और गैरकांग्रेसी हलकों में कुछ समय तक दबे रूप से आरोप के रूप में चर्चा थी कि कांग्रेस की खराब स्थिति के लिए झारखंड कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह मुख्य रूप से जिम्मेवार हैं।

चूंकि वह टिकटों के बंटवारे में काफी लेन-देन का हिसाब करते हैं। वर्तमान में यह चर्चा काफी जोरों पर है और कांग्रेस समर्थक और कांग्रेस के मतदाता खुलकर इस बात का इजहार एक-दूसरे से कर रहे हैं। यह चर्चा मीडिया और कांग्रेस विरोधी खेमे में भी जोरो पर है।

इमरान किदवई

आरोप यह भी है कि 2004 में रांची के एक आलीशान होटल में बैठकर आरपीएन सिंह एवं इमरान किदवई ने मिल जुलकर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष के माध्यम से काफी टिकटों में काफी लेन-देन कर हेरा-फेरी की थी।

अंजाम यह हुआ कि 2004 के लोकसभा चुनाव में जहां विपक्षी गठबंधन को 14 में 13 सीटें मिली थी वहीं विधानसभा के चुनाव में इनकी करामात से कांग्रेस का गठबंधन 29 सीट पर सिमट कर रह गया और बीजेपी को अकेले 33 सीटें प्राप्त हुई।

आरोप तो यह भी कि आलाकमान कान में रूई डालकर और आंख पर पट्टी बांधकर बैठा हुआ है। यही कारण है कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. अजय कुमार ने कांग्रेस को आधार बनाकर काफी टिकटों का व्यापार किया। आलीशान होटल में मौज-मस्ती के साथ कांग्रेस को दूहा गया।

फिर बदमानी शुरू हुई तो पार्टी को लातमार कर ’आप’ में शामिल हो गये। चर्चा है अगर आरपीएन सिंह, जो डाॅ. अजय की सौदेबाजी में एक हिस्सेदार थे, नहीं हटाये जाते हैं तो कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनाव में केवल फजीहत ही झेलनी पड़ेगी।

भाग 1 – झारखंड में आसन्न विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट
भाग 2 – भाजपा का 65 सीटों का दावा: 80 प्रतिशत एसटी एवं एससी सीटों को हासिल करना बड़ी चुनौती
भाग 3 – झारखंड वि.स. चुनाव पूर्व भाजपा में शामिल होंगे कांग्रेस विधायक मनोज यादव, सुखदेव भगत, बादल पत्रलेख और बिट्टू सिंह ?
भाग 4 – भाजपा में भी खदबदाहट, कई दिग्गज बेटिकट हो सकते हैं
भाग 5 – झारखंड विधानसभा चुनाव: झारखंड में भाजपा ने रघुवर दास के नेतृत्व पर जताया भरोसा
भाग 6 – झारखंड में एआइएमआइएम की धमक से फीकी पड़ सकती है विपक्षी दलों की चमक
झारखंड में अपनी दुर्दशा के लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दोषी
महंगाई, मंदी, बेरोजगारी बनाम जातीय एवं समाजिक ध्रुवीकरण के बीच होगा झारखंड विधानसभा का चुनाव
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