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झारखंड की विकास राशि एवं राजकोष से नाजायज तरीके से अर्जित धन का चुनाव में निवेश कर रही हैं कुछ नामधारी पार्टियां

झारखंड की विकास राशि एवं राजकोष से नाजायज तरीके से अर्जित धन का चुनाव में निवेश कर रही हैं कुछ नामधारी पार्टियां
December 09
10:17 2019

JoharLive Team

  • लूट के धन के साथ चुनावी मैदान में दमखम के साथ उपस्थित हैं कुछ नामधारी दल और उम्मीदवार

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में एक अजीबों-गरीब विडंबना का शासन-प्रशासन और आम जनता की नजर में नहीं आना दुर्भायपूर्ण है। झारखंड राज्य की सरकारों में अलग-अलग समय पर महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर रह कर विकास की राशि और राजकोष की भारी लूट करने वाले पूरे दमखम और धन-बल के साथ चुनावी मैदान में राष्ट्रीय पार्टियों की तरह अपनी उपस्थिति दिखा रहे हैं।
प्रबुद्ध एवं जागरूक झारखंड के निवासी आश्चर्यचकित हैं। जानकार सूत्र सवाल उठा रहे हैं कि आजसू जैसा एक छोटा दल जिसके नेता सामान्य किसान परिवार से आते हैं, वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं, उनके इस चुनावी मैदान में उम्मीदवारों की संख्या राष्ट्रीय पार्टी भाजपा जैसे और अन्य राजनीतिक दलों के बराबर है।

ये दल पार्टी के उम्मीदवारों पर पानी की तरह पैसा लगा रहे हैं जिसकी चर्चा ना तो मीडिया में है ना तो किसी कोने से सरकार का कोई जांच तंत्र कर रहा है। क्या उनकी लाॅटरी निकल आयी है? या ये झारखंड के विकास की राशि या राजकोष से ही नाजायज तरीके से कमाया हुआ धन है जिसका व्यवसाय में पूंजी की तरह चुनाव में निवेश कर रहे हैं। इन दलों की व्यवस्था यह है कि ऐन-केन-प्रकारेण अगर चुनाव में पुनः महत्वपूर्ण भूमिका में आते हैं तो यह पूंजीनिवेश सूद सहित लाभ पहुंचायेगा और जनता एक बार फिर किंकर्तव्र्यविमुड़ हो जायेगी।

एनोस एक्का झारखंड पार्टी के मंच से पांच-छह सीटों पर दांव लगा रहे हैं। जब अकेले जीते थे तो लाखों-करोड़ों की संपति के मालिक बन बैठे थे जो सर्वविदित है। चुनाव में जो वो पूंजीनिवेश कर रहे हैं यदि चुनाव के नतीजों के बाद सत्ता में आने के लिए राजनीतिक दलों को पुनः सीटों की जरूरत पड़ी तो उनके द्वारा पूर्व की तरह सौदेबाजी होगी। जानकार सूत्रों का ऐसा मानना है।

कमलेश सिंह जो अपनी पुरानी सीट से एनसीपी के टिकट पर दांव लगा रहे हैं। जब अकेले जीते थे तो लाखों-करोड़ों की संपति के मालिक बन बैठे थे जो सर्वविदित है। अभी चुनाव में जो वो पूंजीनिवेश कर रहे हैं यदि चुनाव के नतीजों के बाद सत्ता में आने वाले राजनीतिक दलों को पुनः सीटों की जरूरत पड़ी तो कमलेश सिंह से भी जमकर सौदेबाजी होगी। जानकार सूत्रों का ऐसा मानना है।

बंधु तिर्की भी अपनी पुरानी सीट से झाविमो के टिकट पर दांव लगा बेठे हैं। जब अकेले जीते थे तो उन पर लाखों-करोड़ों की संपति अर्जित करने का आरोप लगा जो सर्वविदित है। चुनाव में जो वो पूंजीनिवेश कर रहे हैं यदि चुनाव के नतीजों के बाद सत्ता में आने वाले राजनीतिक दलों को पुनः सीटों की जरूरत पड़ी तो बंधु तिर्की से सौदेबाजी होगी। जानकार सूत्रों का ऐसा मानना है।
भानु प्रताप शाही काफी शातिर राजनीतिज्ञ हैं और उन्होंने अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया हैं।

उनके और उनके परिवार के द्वारा झारखंड की विकास राशि और राजकोष से कमाई हुई राशि की कुछ संपत्ति को ईडी द्वारा जब्त किया गया है और केस अभी न्यायालय में चल ही रहा है। यदि भाजपा के विधायक भी बन जाते हैं और केस में उनके खिलाफ फैसला होता है तो विधायकी से भी हाथ धोना पड़ेगा। भाजपा इस झटके के लिए तैयार नजर आती है। जानकार सूत्रों का ऐसा मानना है।

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: 98 प्रतिशत अल्पसंख्यक गठबंधन के साथ ही जायेंगे

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