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झारखंड में आसन्न विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट

झारखंड में आसन्न विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट
August 12
09:40 2019

भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दल हुये सक्रिय

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

रांची: झारखंड विधानसभा के चुनाव वर्ष 2019 के अंतिम महीने में संपन्न होने हैं। इसके साथ ही राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। चुनावी आकलन और मूल्यांकन के दौर राजनीतिक दलों के अपने-अपने खेमे में शुरू हो गये हैं।

भाजपा के शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व ने आने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अग्रिम तैयारियों को गति देने के लिए अपने राज्यस्तरीय चुनाव प्रभारियों की भी नियुक्ति कर दी है।
विपक्षी दल सकते में हैं और विपक्षी दलों में बड़ा दल झारखंड मुक्ति मोर्चा जो एक स्थानीय दल है और जिसका मूल आधार झारखंड ही है उसने भी अपनी तैयारी को रूप देना शुरू कर दिया है।

गत लोकसभा चुनाव में जो तालमेल की स्थिति थी उसी आधार पर विधानसभा चुनाव लड़ने का विचार झारखंड मुक्ति मोर्चा कर रहा है। ऐसी स्थिति में एक सशक्त गठबंधन और भाजपा के बीच अधिकतर सीटों पर सीधा मुकाबला संभव है।

ज्ञातव्य हो कि 2014 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जो सबसे बड़ी पार्टी हैं 81 में से 37 सीटें प्राप्त कर उभरी थी जहां दूसरे नंबर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा 19 सीटों पर काबिज हुआ। वहीं तीसरे नंबर पर झारखंड विकास मोर्चा ने 8 सीटें प्राप्त की थी।

भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं था फिर भी सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण उसे सरकार बनाने का अवसर मिला। कुटनीति अपनाते हुये भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने झारखंड विकास मोर्चा के आठ में से छह सदस्यों को तोड़कर अपने दल में मिलाया और उनकी संख्या 43 हो गई। इस तरह सरकार चलाने के लिए उनकी पूर्ण बहुमत से दो सीटें अधिक हो गई।

आज की परिस्थिति में भाजपा पिछले दो महीने से बार-बार अलग-अलग बैठक कर 65 सीटें जीतने का दावा कर रही है। यह दावा हाल के लोकसभा चुनाव में उनकी अप्रत्याशित विजय और लोकसभा के अंतर्गत पड़ने वाले विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में उनकी बढ़त के आधार पर की जा रही है।

विपक्षी दल, खासकर राष्ट्रीय कांग्रेस, जिसे पिछले चुनाव में सिर्फ 6 सीटें प्राप्त हुई थीं वह झारखंड में दशा-दिशा विहीन है और बहुत अंतःर्कलह के नाजुक दौर से गुजर रही है। ऐसी स्थिति में क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा से तालमेल के बाद भी, भाजपा जो एक संगठित संगठन है, से अपने जर्जर संगठन के आधार पर कोई मोर्चा ले पायेगी! यह सवाल भी खड़ा होता है कि अपनी पुरानी छह सीटों को स्थिति बरकरार रख पायेगी।

झारखंड में राष्ट्रीय जनता दल का 2014 में खाता ही नहीं खुला जबकि आजसू जो भाजपा गठबंधन का सहयोगी दल रहा है, उसे पांच सीटें प्राप्त हुई थी इसी प्रकार छह सीटों पर अन्य राजनीतिक नामधारी पार्टियों को विजय हासिल हुई थी और वर्तमान परिस्थिति में उनकी भी स्थिति बहुत डावांडोल दिखती नजर आ रही है क्योंकि जनमानस विपक्षी पार्टियों और निर्दलियों उम्मीदवारों के विरूद्ध होता जा रहा है।

सारे समीकरण और परिस्थितियों का झुकाव वोटों के ध्रुवीकरण में भाजपा के प्रति साफ दिखाई दे रहा है। इस परिपेक्ष्य में भाजपा का आकलन और मूल्यांकन सही साबित हो सकता है।

विपक्षी दलों और नामधारी दलों के लिए यह चुनाव बहुत चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

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