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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: आकलन एवं संभावनाएं: जातीय समीकरण

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: आकलन एवं संभावनाएं: जातीय समीकरण
November 08
11:11 2019
  • झारखंड में क्या कहते हैं जातीय समीकरण

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ से कुमार की रिपोर्ट

झारखंड में जातीय संरचना अद्भुत है। जहां इसे आदिवासी बहुल राज्य माना जाता है वहीं आदिवासियों की कुल संख्या झारखंड की कुल संख्या का मात्र 26 प्रतिशत ही है। आदिवासी समाज में, उरांव, मुंडा, खड़िया, हो, संताल, गोंड़, जैसी उपजातियां झारखंड के रांची, सिमडेगा, गुमला, खूंटी, प.सिंहभूम एवं संताल परगना में बसती हैं। संरचना अदभुत इसलिए है कि झारखंड के 24 जिलों में सिर्फ 13 जिले ही आदिवासी बहुल हैं और उन जिलों में भी भारी मात्रा में विभिन्न गैरआदिवासी जातियों के लोग भी रहते हैं।

आंकड़े के अनुसार 74 प्रतिशत गैरआदिवासियों की संख्या झारखंड में बसती है। जबकि देश के नक्शे में इसे आदिवासी बहुल क्षेत्र माना जाता है? यही नहीं इसकी तुलना नाॅर्थइस्ट के कुछ आदिवासी बहुल राज्यों तथा छत्तीसगढ़ जैसेे राज्य से की जाती है।

आदिवासी समाज की कुल आबादी झारखंड में लगभग 26 प्रतिशत है जिसमें सरना आदिवासियों की संख्या लगभग 23 प्रतिशत है वहीं क्रिश्चियन धर्म मानने वाले आदिवासियों की संख्या 03 प्रतिशत है। क्रिश्चियन आदिवासियों का दबदबा रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला जिलों के साथ-साथ संताल परगना के चार जिलों में है। इनके मत परंपरागत कांग्रेस, जेएमएम और राजद गठबंधन को जाते हैं। इसबार कुछ मत विखरने की बात चल रही है पर यदि इस समाज के मत तटस्त रहे तो इन जिलों में गठबंधन के पक्ष में जायेंगे।

सरना आदिवासी समाज से रांची, गुमला, सिमडेगा, खूंटी में 65-70 प्रतिशत परंपरागत मत भाजपा के पक्ष में जाते हैं। जबकि प.सिंहभूम के जिलों में ये मत क्रमश: भाजपा, जेएमएम और कांग्रेस को 35 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और 15 प्रतिशत मिलते हैं। इसलिए प. सिंहभूम में जेएमएम का पलड़ा भारी रहता है। इस चुनाव में और भी मजबूत होना होगा यदि जेएमएम, कांग्रेस गठबंधन में कोई भीतरघात न हो। संताल परगना में जहां सरना संतालों की संख्या बहुत अधिक है जिसमें भाजपा, जेएमएम, कांग्रेस, जेवीएम को क्रमश: 35 प्रतिशत, 40 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत में बंट जाते हैं।

गैरआदिवासियों में सबसे बड़ी आबादी कुरमी समाज की है जो अलग-अलग जिलों में फैली हुई है और इनके मतों को परंपरागत रूप से जेएमएम, बीजेपी और आजसू जैसे दल हासिल करते रहे हैं । फिर भी भाजपा को अधिकतम हिस्सा मिलता रहा है और दूसरे स्थान पर जेएमएम और तीसरे स्थान पर आजसू के खाते में जाता रहा है।

झारखंड में कुशवाहा समाज, तेली समाज, चंद्रवंशी समाज, रौतिया समाज, तथा अपनी सारी उप जातियों सहित वैश्य समाज एवं अन्य छोटी-बड़ी पिछड़ी जातीयां भी परंपरागत रूप से भाजपा के साथ हैं।

झारखंड में हरिजन समुदाय के विभिन्न उपजातियों के लोग कुछ एक निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर जहां जेएमएम के साथ हैं वहीं झारखंड के अन्य क्षेत्रों में भाजपा के पक्ष में मतदान करते हैं।

झारखंड में मुस्लिम समुदाय की कुल आबादी में आधुनिक विचार वाले कुछ नवजवानों के वर्ग के साथ मुस्लिम समुदाय की उच्च जातियों के लगभग 03 प्रतिशत मत भाजपा के पक्ष में जाते हैं और अन्य मत गठबंधन को प्राप्त होते हैं। झारखंड में सारे जिलों में मुस्लिम आबादी पसरी हुई है और कुछ जिलों में इनके मतों से ही उम्मीदवार का फैसला होता है। इनकी कुल आबादी झारखंड में लगभग 12.5 प्रतिशत है।

झारखंड में यादवों की भी भारी संख्या है और इनके परंपरागत मत राजद के पक्ष में जाते रहे हैं पर पिछले चुनाव और आने वाले चुनाव के पहले यादवों के भारी-भरखम नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया। हाल में कांग्रेस के जिस नेता ने भाजपा का दामन थामा यह उसके लिए मजबूरी बन गई थी चूंकि लोकसभा के चुनाव में सारे यादव भाजपा के पक्ष में चले गये थे।

कांग्रेस, जेएमएम और राजद गठबंधन में कोई भीतरघात नहीं हुआ तो जातीय समीकरण भी क्षेत्र के हिसाब से पलटते नजर आयेंगे और भाजपा को भी भारी मशक्कत करनी पड़ेगी। संभावना के अनुसार भाजपा बहुत सहज नहीं रह पायेगी।

झारखंड में उच्च जातियों की संख्या लगभग 20-22 प्रतिशत है और नरेंद्र मोदी के उदय के बाद इनके 70-75 प्रतिशत मत भाजपा के खाते में जाने लगे हैं। शेष मत अन्य दलों में बंट जाते हैं।

इनसाईट ऑनलाइन न्यूज द्वारा जातीय समीकरण का विश्लेषण पूर्व में हुये चुनाव परिणामों पर आधारित है। 2019 के विधानसभा चुनाव में यदि यही स्थिति बनी रही तो गठबंधन एवं अन्य दलों को इन समीकरणों में सेंध मारने में बहुत संघर्ष करना पड़ेगा। अगर सेंध मारने में गठबंधन और अन्य दल कामयाब होते हैं तो झारखंड में चुनावी नतीजे चैंकाने वाले होंगे।

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: अल्पसंख्यक मतों की बिखरने और बंटने की संभावना ?

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: आकलन एवं संभावनाएं

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