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झारखण्ड में विपक्षी दलों ने हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में भरोसा जताया

झारखण्ड में विपक्षी दलों ने हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में भरोसा जताया
October 02
09:48 2019

संभावित राजनीतिक धुव्रीकरण में तीन विपक्षी आदिवासी चेहरे एक तरफ और भाजपा का गैर आदिवासी चेहरा एक तरफ: क्या कोई गुल खिलाने में कामयाब होगा?

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

झारखण्ड में लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस, झामुमो, झाविमो, राजद के बीच तय हुई शत्र्तों पर अमल करने की दिशा में कांग्रेस ने अपना रूख साफ कर दिया। कल 01.10.19 को कांग्रेस के झारखण्ड प्रभारी आर.पी.एन. सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष डा0 रामेश्वर उराॅंव एवं कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के साथ झामुमो के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन से मुलाकात कर उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने के पूर्व में लिये गये निर्णय पर मुहर लगा दी।

इस कड़ी में अभी झाविमो के अध्यक्ष बाबुलाल मराण्डी ने अपना पत्ता नहीं खोला है। जहां तक राजद का सवाल है, उसका इस गठबंधन में शामिल होना निश्चित माना जा रहा है। यदि बाबुलाल मराण्डी इस गठबंधन में शामिल नहीं होते हैं, तो हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव तीन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, राजद और झामुमो ही लड़ेंगे।

जहाॅं एक ओर भाजपा ने रघुवर दास के नेतृत्व में भरोसा जताया है, वहीं इन तीन विपक्षी दलों ने हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में भरोसा जताया है। हेमन्त सोरेन एक दिग्गज आदिवासी नेता के रूप में जाने जाते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में इन तीन मुख्य विपक्षी दलों का चेहरा होंगे। इस गठबंधन में यदि बाबुलाल मराण्डी की पार्टी भी शामिल हो जाती है और हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में चुनाव का फैसला लेती है, तो लड़ाई बहुत दिलचस्प होगी।

दिलचस्प इस तरह कि एक तरफ तीन दिग्गज आदिवासी चेहरे हेमन्त सोरेन, डा0 रामेश्वर उराॅंव एवं बाबुलाल मराण्डी तथा दूसरी तरफ भाजपा के झारखण्ड के मुख्यमंत्री गैर आदिवासी चेहरा रघुवर दास। हेमन्त सोरेन भी पूर्व मुख्यमंत्री, डा0 रामेश्वर उराॅंव पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं बाबुलाल मराण्डी झारखण्ड के प्रथम पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं।

झारखण्ड की स्थापना का उद्देश्य था कि आदिवासी ही इस प्रदेश का नेतृत्व करें। परम्परागत कांग्रेस एवं भाजपा इसका पालन करती रही है। परन्तु पिछले चुनाव के बाद अर्जुन मुण्डा की हार से भाजपा के पास बड़े चेहरे की कमी होने के कारण भाजपा को गैर आदिवासी चेहरा रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा।

भाजपा इस बार 65 का आंकड़ा जुटाने हेतु ऐड़ी-चोटी लगा रही है और जोड़-तोड़ में भी लगी है। लोकसभा चुनाव में राजद से दो महत्वपूर्ण नेताओं अन्नपूर्णा देवी एवं गिरिनाथ सिंह को भाजपा ने अपने पाले में लेकर बता दिया कि जो काम पहले कांग्रेस और राजद करते थे, उसमें हम भी पीछे नहीं है। इसी प्रकार विधानसभा चुनाव के पहले कतिपय दूसरी पंक्ति के नेता लगातार भाजपा में शामिल होते जा रहे हैं, जिसमें कांग्रेस में रहे पूर्व विधायक देवकुमार धान और राजद से लगातार चुनाव लड़ रहे कोईरी समाज के शशिभूषण प्रसाद मेहता भी शामिल हैं।

संभावना तो कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत की भी बन रही थी, परन्तु एकाएक राजनैतिक परिस्थिति बदल गयी। आजसू के लोहरदगा से पूर्व विधायक कमल किशोर भगत, जो एक आपराधिक कांड में सजामुक्त हुए हैं। आजसू का दावा लोहरदगा सीट पर बढ़ जायेगा। ऐसी परिस्थिति में भाजपा सुखदेव भगत को लोहरदगा से उम्मीदवारी देने में असमर्थ है जिससे सुखदेव भगत ने पुनः कांग्रेस का रूख ले लिया है।

कांग्रेस की विडम्बना यह है कि यहां में तरजीह पाने वाले पूर्व कंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी कांग्रेस को तिलांजलि देने की दिशा में पहल कर रहे हैं। चूॅंकि गैर आदिवासी चेहरे के रूप में वह प्रदेश कांग्रेस की कमान चाहते थे।

परम्परागत मूल्यों का निर्वाह करते हुए कांग्रेस ने इस बार गैर आदिवासी चेहरे को स्थान नहीं दिया। इसलिए डा0 रामेश्वर उराॅंव अध्यक्ष बनाये गये। सुबोधकांत सहाय, जो कांग्रेस के अन्दर ‘सुबोधकांत कांग्रेस’ चला रहे थे, वह विरोधी शक्तियों को कितना कमजोर कर पायेंगे, यह आने वाला वक्त बतायेगा।

राजनीतिक धुव्रीकरण के परिपेक्ष्य में यदि यह संभावना बनी कि तीन प्रमुख विपक्षी आदिवासी चेहरे एक तरफ रहें और भाजपा का एकमात्र गैर आदिवासी चेहरा एक तरफ मुकाबले में झारखण्ड में क्या गुल खिलेग समय बतायेगा।

भाग 1 – झारखंड में आसन्न विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट
भाग 2 – भाजपा का 65 सीटों का दावा: 80 प्रतिशत एसटी एवं एससी सीटों को हासिल करना बड़ी चुनौती
भाग 3 – झारखंड वि.स. चुनाव पूर्व भाजपा में शामिल होंगे कांग्रेस विधायक मनोज यादव, सुखदेव भगत, बादल पत्रलेख और बिट्टू सिंह ?
भाग 4 – भाजपा में भी खदबदाहट, कई दिग्गज बेटिकट हो सकते हैं
भाग 5झारखंड विधानसभा चुनाव: झारखंड में भाजपा ने रघुवर दास के नेतृत्व पर जताया भरोसा
भाग 6झारखंड में एआइएमआइएम की धमक से फीकी पड़ सकती है विपक्षी दलों की चमक
झारखंड में अपनी दुर्दशा के लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दोषी
महंगाई, मंदी, बेरोजगारी बनाम जातीय एवं समाजिक ध्रुवीकरण के बीच होगा झारखंड विधानसभा का चुनाव
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