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भारी हंगामे के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश, पक्ष में 293 जबकि विपक्ष में 82 वोट पड़े

भारी हंगामे के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश, पक्ष में 293 जबकि विपक्ष में 82 वोट पड़े
December 09
08:35 2019
  • सरकार-विपक्ष में जोरदार बहस

नयी दिल्ली 09 दिसंबर। विपक्ष के तीखे विरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने लाेकसभा में आज नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध और जैन समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश हो गया है। संसद में बिल पर चर्चा करने के प्रस्ताव के पक्ष में 293 जबकि विपक्ष में 82 वोट पड़े हैं। शिवसेना ने बिल को पेश करने के समर्थन में वोट किया है। अब सत्तापक्ष और विपक्ष बिल पर चर्चा करेंगे जिसके बाद इसपर वोटिंग कराई जाएगी। यदि विधेयक लोकसभा से पास हो जाता है तो इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग आदि विपक्षी दलों ने इस विधेयक को धार्मिक आधार पर नागरिकता तय करके संविधान की मूल भावना को आहत करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे संविधान के अनुच्छेद पांच, दस, 14, 15, 25 एवं 26 का उल्लंघन होता है।

गृह मंत्री अमित शाह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि इससे संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं हुआ है। इन तीन देशों में इस्लाम राज्य का धर्म है और धार्मिक उत्पीड़न गैर इस्लामिक समुदायों का ही होता आया है। इसलिए ऐसे छह समुदायों को ‘तर्कसंगत वर्गीकरण’ के अंतर्गत नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग वर्तमान नियमों के अनुसार ही नागरिकता का आवेदन कर सकेंगे और उन पर उसी के अनुरूप विचार भी किया जाएगा।

गृह मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और उसने विधेयक पेश करने के प्रस्ताव पर मतविभाजन की मांग की जिसे 82 के मुकाबले 293 मतों से मंजूर कर लिया गया और श्री शाह ने विधेयक पेश किया।

  • एससी/एसटी के लिए विधायिका में आरक्षण जारी रखने वाला विधेयक लोकसभा में पेश

अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) के लिए लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं में आरक्षण जारी रखने के लिए सरकार ने ‘126वाँ संविधान संशोधन विधेयक’ सोमवार को लोकसभा में पेश किया।

विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में यह विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित करने का प्रावधान फिलहाल 25 जनवरी तक के लिए है। इसे 10 साल के लिए और बढ़ाने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने यह कहते हुये विधेयक पेश किये जाने का विरोध किया कि इसमें एंग्लो-इंडियनों के लिए लोकसभा में दो और राज्यों की विधानसभाओं में नौ सीटों पर नामांकन का प्रावधान समाप्त किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान के अनुच्छेद 334 के जरिये एससी/एसटी और एंग्लो इंडियनों के लिए सीटें आरक्षित रखने की व्यवस्था की थी। सरकार एंग्लो इंडियनों के 70 साल से चले आ रहे अधिकार को समाप्त करना चाहती है।

श्री प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में सिर्फ 296 एंग्लो इंडियन रह गये हैं।

इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पेश करने की अनुमति प्रदान कर दी।

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक

इस बिल के पारित होते ही छह दशक पुराना नागरिकता कानून-1955 बदल जाएगा और तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानस्तिान से आने वाले गैरमुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया बेहद सहज हो जाएगी। सरकार की योजना सोमवार को लोकसभा में यह बिल पारित कराने के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी इस पर मंजूरी की मुहर लगवा लेने की है।

वार्ता

बलात्कार की घटनाओं पर लोकसभा में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जमकर तकरार

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