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शाह को सराहौं कि सराहौं शिवराज को

शाह को सराहौं कि सराहौं शिवराज को
December 11
13:03 2019
  • यह तीसरा चरण ले जाएगा सत्ता की ओर, हर तरफ भ्रम ही भ्रम

श्याम किशोर चौबे

रांची: झारखंड विधानसभा के चुनाव का तीसरा चरण गुरुवार को संपन्न होगा। इस बार 17 सीटों पर मतदान होना है, जबकि पूर्व के दो चरणों में 33 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। तीसरे चरण की समाप्ति के साथ पचासा लग जाएगा।

यदि कोई एक दल या एक गठबंधन इन 50 सीटों में से 42 फतह कर ले, तो समझ लीजिए कि उसका बेड़ा पार। शायद यही कारण है कि इस चरण के लिए भाजपा, झामुमो, कांग्रेस सहित सभी दलों ने खूब जोर लगाया। दूसरे चरण तक कई दल सभी सीटें जीतने का दावा करते रहे। इस कारण चारों ओर भ्रम ही भ्रम नजर आ रहा है।

पिछले दो चरणों की हिंसक वारदात को देखते हुए अब सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। यह भी अजीब है कि पुलिस की जबर्दस्त नाकेबंदी के बीच हमें निष्पक्ष, निर्भीक और स्वतंत्र मतदान करना है।

मतदाताओं ने पिछली बार इस चरण की 17 सीटों में से भाजपा के नाम आठ सीटें की थी। चुनाव के बाद भाजपा ने दो जेवीएम से झटक ली और यह चुनाव आते-आते उसने कांग्रेस और झामुमो से एक-एक विधायक अपनी ओर कर लिए।

इस प्रकार 11 सीटों में से वह कितनी बचा पाती है और यदि 65 पार जाना है कि अतिरिक्त कितनी सीटें जोड़ पाती है। 23 दिसंबर को चुनाव परिणाम के दिन यह जानना भी कम दिलचस्प नहीं होगा। इसी चिंता से ग्रस्त पार्टी ने दिल्ली तक के अपने सारे बड़े नेताओं को झोंक दिया। हालांकि कांग्रेस ने भी यही सब किया लेकिन अपनी-अपनी औकात की बात है, जिसके पास जितने नाम, उसने उतने को भुनाने की कोशिश की। शिबू, हेमंत, सुदेश, बाबूलाल आदि-आदि सभी इसी अंधी दौड़ में दौड़़ते नजर आए।

अबतक की चुनावी प्रक्रिया में भाजपा और आजसू के रिश्ते कोई समझ नहीं पाया। आजसू जहां भाजपा पर मद्धिम ही हमलावर रही, वहीं कुछ अरसा पहले तक भाजपा आजसू पर वार करने से बचती रही थी। भाजपा प्रमुख अमित शाह ने तो यहां तक कह दिया था कि आजसू अपना है।

हम भले ही चुनाव अलग-अलग लड़ रहे हैं लेकिन बहुमत आने पर भी हम आजसू को साथ रखेंगे। दूसरी ओर भाजपा के एक स्टालवार्ट नेता मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मंगलवार को यह कहकर चैंका दिया कि आजसू थाली का बैंगन है, वह जिधर पलड़ा भारी देखता है, उधर ही झुक जाता है। राजनीति का यही मिजाज बड़े-बड़ों की समझ से कभी-कभी बाहर हो जाता है। समझ से बाहर है कि शाह को सराहौं कि सराहौं शिवराज को।

यह एक अत्यंत दिलचस्प चरण है, जिसमें आजसू प्रमुख सुदेश महतो तो अपने लिए भी दम-खम लगा ही रहे हैं, उनके मौसा सांसद चंद्रप्रकाश चैधरी की पत्नी, भाई सहित उनके पूर्व पीएस तक मैदान में हैं।

हालांकि सबकी नजरें बेसाख्ता मांडू सीट पर भी अटक जा रही है, जिससे झामुमो पलट विधायक जेपी पटेल भाजपा के प्रत्याशी हैं तो उनके बड़े भाई रामप्रवेश भाई पटेल झामुमो के और चचेरे भाई चंद्रनाथ भाई पटेल झाविमो के टिकट पर मैदान में हैं।

प्रथम चरण की लातेहार सीट का ही दृश्य बरही में उत्पन्न हो गया है, जहां कांग्रेस छोड़कर विधायक मनोज यादव भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं तो भाजपा छोड़कर पूर्व मंत्री उमाशंकर अकेला कांग्रेसी उम्मीदवार हैं। हालांकि बड़कागांव सीट भी कम चर्चे में नहीं है। यहां विधायक रहे माता-पिता निर्मला देवी और

योगेंद्र साव पर चल रहे केस-मुकदमों को देखते हुए कांग्रेस के टिकट पर पुत्री अंबा प्रसाद मैदान में हैं।

झारखण्ड विधानसभा चुनाव बहुत दिलचस्प है दूसरे चरण का मतदान
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