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हल्दी के औषधीय गुणों से चमत्कृत हैं विदेशी चिकित्सक

हल्दी के औषधीय गुणों से चमत्कृत हैं विदेशी चिकित्सक
October 29
09:01 2019

इनसाईट  ऑनलाइन न्यूज

हल्दी के औषधीय गुणोें को परखकर विदेशी चिकित्सक भी चमत्कृत हैं। कुछ तो इसका अपने हक में पेटेंट कराने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि भारत में इसका खूब विरोध हुआ।  वस्तुतः भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद ने हल्दी के चिकित्सकीय गुणों की इतनी खोज की है कि उसका लाभ युगों-युगों से लोग उठा रहे हैं।
हल्दी भारतीय वनस्पति है। भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है और धार्मिक रूप से इसको बहुत शुभ माना जाता है। विवाह में तो हल्दी की रसम का अपना एक विशेष महत्व है।


गर्म दूध में कच्ची हल्दी उबालकर पीने से मधुमेह यानी डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण पाया जाता है इसलिए मधुमेह के रोगी प्रतिदिन किसी न किसी रूप में हल्दी का प्रयोग करते हैं।  हल्दी पाचन तन्त्र की समस्याओं, गठिया, रक्त-प्रवाह की समस्याओं, कैंसर, जीवाणुओं (बेक्टीरिया) के संक्रमण, उच्च रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की समस्या और शरीर की कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत में लाभकारी है।

हल्दी कफ-वात शामक, पित्त रेचक व पित्त शामक है। रक्त स्तम्भन, मूत्र रोग, प्रमेह, त्वचा रोग, वात-पित्त-कफ में इसका प्रयोग बहुत लाभकारी है। यकृत की वृद्धि में इसका लेप किया जाता है। नाड़ी शूल के अतिरिक्त पाचन क्रिया के रोगों अरुचि (भूख न लगना) विबंध, कमला, जलोदर व कृमि में भी यह लाभकारी पाई गई है। इसी प्रकार हल्दी की एक किस्म काली हल्दी के रूप में भी होती है। उपचार में काली हल्दी पीली हल्दी के मुकाबले अधिक लाभकारी होती है।

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दाग-धब्बे और झाइयां हटाने में हल्दी का कोई सानी नहीं। हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर लगाने से त्वचा साफ और निखरी हो जाती है। हल्दी और दूध से बना पेस्ट भी त्वचा का रंग निखरने और चेहरे को खिला-खिला रखने के लिए बहुत असरदार होता हैं।


शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी यह इजाफा करती है। इससे शरीर कई बीमारियों से बचा रहता है। साथ ही इसमें एन्टी बैक्टीरियल, एंटी वायरल और एंटी फंगल गुण भी विशेष रूप से पाए जाते हंै।
मसाले के रूप में प्रयोग की जाने वाली हल्दी का सही मात्रा में प्रयोग पेट में जलन एवं अल्सर की समस्या को दूर करने में बहुत ही लाभकारी होता है। हल्दी का पीला रंग कुरकमिन नामक अवयव के कारण होता है और यही चिकित्सा में प्रभावी होता है। चिकित्सा क्षेत्र के मुताबिक कुरकमिन पेट की बीमारियों जैसे जलन एवं अल्सर में काफी प्रभावी रहा है। हल्दी दंत रोगों में गुणकारी है।

चोट लगने पर हल्दी बहुत फायदा करती है। मांसपेशियों में खिंचाव होने पर या अंदरूनी चोट लगने पर हल्दी मिला गर्म दूध पीने से दर्द और सूजन में तुरन्त राहत मिलती है। चोट पर हल्दी और पानी का लेप लगाने से भी आराम मिलता है।
अगर एकदम से खांसी आने लगे तो हल्दी की एक छोटी सी गांठ मुंह में रख कर चूसें, इससे खांसी नहीं आएगी। खांसी के साथ कफ की समस्या होने पर एक गिलास गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीना फायदेमंद है।

आँखों के लिए हल्दी का उपयोग लाभकारी है। हल्दी कई चमत्कारिक औषधीय गुणों से भरपूर है। हल्दी सौन्दर्यवर्धक भी मानी जाती है और प्राचीनकाल से ही इसका उपयोग रूप को निखारने के लिए किया जाता रहा है। वर्तमान समय में हल्दी का प्रयोग उबटन से लेकर विभिन्न तरह की क्रीमों में भी किया जा रहा है।

मिसिसिपी मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय के डाॅ सुमन के दास के अनुसार हल्दी से पैर में अल्सर का बिना काटे भी उपचार किया जा सकता है। दूध में हल्दी डालकर दिन में दो बार छह महीने तक इसका सेवन करने से उसका उपचार निश्चित रूप से जाता है। यही कारण है कि हल्दी का भारतीय रसोईघर में भी अपना विशिष्ट स्थान है।

 

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