Online News Channel

News

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो…

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो…
March 07
20:55 2019

इनसाईट आॅनलाईन न्यूज

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल आठ मार्च को मनाया जाता है। सबसे पहला दिवस, न्यूयॉर्क शहर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था।

1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया, और यह आसपास के अन्य देशों में फैल गया। इसे अब कई पूर्वी देशों में भी मनाया जाता है।

आम लोगों को भी शायद यह जानकारी होगी कि विश्व भर में महिलाओं को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष ‘8 मार्च’ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन उत्साही पुरूष और गौरवान्वित महिला वर्ग द्वारा विविध क्षेत्रों में सफल महिलाओं को सम्मान प्रदान करने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाता है।

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो...

हमारे जीवन में महिलाएं कई किरदार निभाती हैं। इन्हीं सभी किरदारों से मिलकर बनती है हमारी जिंदगी। घर में मां, बहन, पत्नी, बेटी और घर के बाहर दोस्त, प्रेमिका, सहपाठी, ऑफिस में कलिग, सीनियर, बॉस हर जगह महिलाओं की उपस्थिति होती है। ये महिलाएं अपने किरदार को निभाते हुए कई संघर्ष और चुनौतियों का सामना करती हैं, लेकिन हम उन्हें जरूरी सम्मान और अधिकार नहीं दे पाते।

संयुक्त राष्ट्र ने 1975 का पूरा एक वर्ष महिला वर्ष घोषित कर महिलाओं को, सम्मान, समानता और स्वतंत्रता के हक में समर्थन दिया था। यही नहीं ‘8 मार्च’ को विशिष्ट दिवस मान कर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी थी।

तब से निश्चित रूप से महिलाओं में आशा का संचार हुआ और अधिक मुखरता से सभी देशों में ‘8 मार्च’ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन कर महिलाओं को सम्मान प्रदान किये जाने की परम्परा शुरू हुई।

गौरतलब है कि तब से अब तक भारत की गंगा सहित विश्व की अनेक प्रतिष्ठित नदियों में ना जाने कितना पानी बह गया होगा, लेकिन मानव समाज में नारियों को बराबरी का हक नहीं मिला है।

नारी-समाज भले ही कर्मठता और सेवा के साथ मेधा और चरित्र-संभाल के मामले में पुरूषों से अधिक नैतिक और ईमानदार हो, लेकिन पुरूष वर्ग के सामने वह आज भी हीन और शोषित बनी हुई है।

हमारे देश में महिलाओं को शिक्षा, वोट देने का अधिकार और मौलिक अधिकार प्राप्त है। धीरे-धीरे परिस्थितियां बदल रही हैं। आज महिला आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्र में पुरूषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। माता-पिता अब बेटे-बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं। लेकिन यह सोच समाज के कुछ ही वर्ग तक सीमित है।

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो...

बाल विवाह, दहेज हत्या, आॅनर-किलिंग (इज्जत के लिए हत्या), डायन-हत्या, कन्या भू्रण-हत्या भी नारी समाज के प्रति अन्याय है। इन कुप्रथाओं के लिए भी कानून और समाज को एक होना होगा।

भारत ही नहीं वैश्विक स्तर पर हाल के वर्षों और पूर्व के कुछ दशकों से महिला वर्ग ने सभी क्षेत्रों में अपनी योग्यता, क्षमता और मेधा के बल पर अपनी प्रतिष्ठापना कर प्रसिद्धि प्राप्त करने में पीछे नहीं है। फिर भी वह भोग्या और केवल भोग्या के रूप में देखी जा रही है।

सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा जब विश्व भर में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जहां उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा, जहां उन्हें दहेज के लालच में जिंदा नहीं जलाया जाएगा, जहां कन्या भ्रूण हत्या नहीं की जाएगी, जहां बलात्कार नहीं किया जाएगा, जहां उसे बेचा नहीं जाएगा।

नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो,
टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो,
हर जन का तुम्हीं तो आधार हो,
नफरत की दुनिया में मात्र तुम्हीं प्यार हो,
उठो अपने अस्तित्त्व को संभालो,
केवल एक दिन ही नहीं,
हर दिन नारी दिवस बना लो,
नारी दिवस की हार्दिक बधाई !
नारी एक “मां” है उसकी पूजा करो,
नारी एक “बहन” है उससे स्नेह करो,
नारी एक “भाभी” है उसका आदर करो,
नारी एक “पत्नी” है उससे प्रेम करो,
नारी एक “औरत” है उसका सम्मान करो।

अगर हम महिलाओं के सम्मान और हक की बात कर रहे हैं तो तनिक आधुनिक अतीत में भी झाकेंगे तो पाएंगे कि नारी समाज को स्वतः बेड़ियां तोड़कर आगे बढ़ना पड़ा है।

वर्जित क्षेत्रों में भी पहुंच कर नारी वर्ग ने सम्पूर्ण समाज के लिए कार्य कर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। अन्य सद्ग्रंथों की कहानियों की तरह समाज की प्रतिष्ठित महिलाओं के बारे में जानने की भी पहल होनी चाहिए।

तभी समाज के लिए उनके अवदान का मूल्यांकन सम्भव है। वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई तो हाल में ही पैदा हुई थीं। भक्तिन मीरा, सहजो बाई अनुपम महिला साहित्यकार महादेव वर्मा, स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री सुभद्रा कुमारी चैहान, इन्दिरा गांधी, सुचेता कृपलानी से लेकर आज तक की भी अनेक महिलाओं का नाम उनकी सफलता का झंडा फहराने में पीछे नहीं है।

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो...

राजनीति हो, शिक्षा हो, खेल हो, विज्ञान हो, चिकित्सा हो, कला हो, संगीत हो, गायन हो, निर्माण हो, कुशल गृहस्थी हो या भक्ति हो कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां महिलाओं ने कामयाबी हासिल नहीं की है। बावजूद इसके सम्मान, समानता और स्वतंत्रता का हक की उसे प्रतीक्षा है।

महिलाओं के लिए मां-बहन और पुरूषों के लिए पिता जी और भैया शब्द केवल शब्द नहीं सम्बन्धों की पवित्र डोरी है। ऐसी डोरी की लंबाई और वृत का दायरा बढ़ता जाए तो पहले तो नारी का सम्मान कायम होगा और फिर देहरी के बाहर निकलने का बिना डर-भय के अवसर मिलेगा।

इसी स्थिति में सुरक्षित ‘नारी-भू्रण’ सयानी होकर समाज में प्रतिभावान, सृजनशील, पुरूष पालक माॅं के रूप में आधी आबादी का हक पाएगी और बराबर की सेवा भी देगी। वरना पुरूष कहता रहे कि ‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो……..।’ सब बेमानी होगा।

Big-Shop-2
Ad Impact
Chotanagpur Handloom
Paul Optical
Novelty Fashion Mall
Jewel India
Bhatia Sports
Home Essentials
Abhushan
Sri Alankar
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Write a Comment

Poll

Economic performance compared to previous government ?

LATEST ARTICLES

    भारतीय एवं विश्व इतिहास में 26 मार्च की प्रमुख घटनाएं

भारतीय एवं विश्व इतिहास में 26 मार्च की प्रमुख घटनाएं

0 comment Read Full Article

Subscribe to Our Newsletter