अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस: शारीरिक व मानसिक तंदरुस्ती को बढ़ावा

संयुक्त राष्ट्र, सोमवार, 21 जून, को सातवां ‘अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस’ मना रहा है जिसके ज़रिये, समग्र स्वास्थ्य एवँ मानव कल्याण के लिये इस प्राचीन ज्ञान की अहमियत को रेखांकित किया जा रहा है. 

योग एक ऐसी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक व्यायाम प्रक्रिया है जो भारत में शुरू हुई थी और अब दुनिया भर में विभिन्न रूपों में लोकप्रिय व प्रचलित है.
योग शब्द का मूल संस्कृत भाषा में है जिसका अर्थ है – संयोजन या जुड़ना. इसका भावार्थ शरीर और चेतना को एक करने से है.

#Yoga🧘‍♀️asks us not only to reconnect with our own breath, but to rebuild our bonds with an earth🌏 we have long neglected, and repair our oneness across borders, nationalities, races, and creeds. – #UNRC 🇮🇳, Renata Dessallien#YogaDay #YogaForWellness #YogaForAll@UNinIndia @UN pic.twitter.com/xutQ2aRo1o— UNESCO New Delhi (@unesconewdelhi) June 21, 2021

वर्ष 2021 में यह दिवस ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब कोविड-19 महामारी के दौरान, विश्व भर में व्यक्तियों व समुदायों के जीवन व आजीविका पर भीषण असर हुआ है. 
कोविड-19 महामारी की वजह से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिये अनेक चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं. 
अनेक देशों में ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र लागू की पाबन्दियों से मनोसामाजिक पीड़ा, मानसिक तनाव व अवसाद, बेचैनी जैसी समस्याएँ और गम्भीर हुई हैं. 
इन दबावों और तनावों से निपटने के लिए भी योग को एक शक्तिशाली औज़ार के रूप में देखा जाता है. 
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, शारीरिक व मानसिक कल्याण के लिये, योग के सन्देश को बढ़ावा दिया जाना, मौजूदा समय में बेहद महत्वपूर्ण है.
विश्व भर में, बड़ी संख्या में लोग, स्वस्थ व स्फूर्तिवान जीवन के लिये योग व स्वस्थ जीवनशैली को अपना रहे हैं और इसका उपयोग, महामारी के दौरान सामाजिक अलगाव और मानसिक अवसाद से निपटने में भी किया जा रहा है. 
कोविड-19 संक्रमितों के बीमारी से उबर जाने के बाद भी, मनो-सामाजिक देखभाल और पुनर्वास में योग ने, एक अहम भूमिका निभाई है ताकि पीड़ितों की आशंकाओं व बेचैनी को दूर किया जा सके. 
इस दिवस पर, संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थाई मिशन, 21 जून को एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है. 
इस कार्यक्रम के दौरान यूएन महासभा अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर और संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना मोहम्मद के सन्देश प्रसारित किये जाएँगे. 
इसके बाद, शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की बेहतरी में सहायक योग आसनों को दर्शाया जाएगा. 
साथ ही एक चर्चा को भी आयोजित किया गया है जिसका विषय है: तंदरुस्ती के लिये योग.
संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव संख्या 69/131 के ज़रिये 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था.
भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की पहल और प्रोत्साहन के तहत ये निर्णय लिया गया था. उन्होंने महासभा के 69वें सत्र में कहा था, “योग मस्तिष्क और शरीर का सम्मिलन करता है, ये एक ऐसी समग्र प्रक्रिया है जो हमारे स्वास्थ्य और जीवन की बेहतरी के लिए मूल्यवान है.”, संयुक्त राष्ट्र, सोमवार, 21 जून, को सातवां ‘अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस’ मना रहा है जिसके ज़रिये, समग्र स्वास्थ्य एवँ मानव कल्याण के लिये इस प्राचीन ज्ञान की अहमियत को रेखांकित किया जा रहा है. 

योग एक ऐसी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक व्यायाम प्रक्रिया है जो भारत में शुरू हुई थी और अब दुनिया भर में विभिन्न रूपों में लोकप्रिय व प्रचलित है.

योग शब्द का मूल संस्कृत भाषा में है जिसका अर्थ है – संयोजन या जुड़ना. इसका भावार्थ शरीर और चेतना को एक करने से है.

#Yoga🧘‍♀️asks us not only to reconnect with our own breath, but to rebuild our bonds with an earth🌏 we have long neglected, and repair our oneness across borders, nationalities, races, and creeds. – #UNRC 🇮🇳, Renata Dessallien#YogaDay #YogaForWellness #YogaForAll@UNinIndia @UN pic.twitter.com/xutQ2aRo1o

— UNESCO New Delhi (@unesconewdelhi) June 21, 2021

वर्ष 2021 में यह दिवस ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब कोविड-19 महामारी के दौरान, विश्व भर में व्यक्तियों व समुदायों के जीवन व आजीविका पर भीषण असर हुआ है. 

कोविड-19 महामारी की वजह से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिये अनेक चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं. 

अनेक देशों में ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र लागू की पाबन्दियों से मनोसामाजिक पीड़ा, मानसिक तनाव व अवसाद, बेचैनी जैसी समस्याएँ और गम्भीर हुई हैं. 

इन दबावों और तनावों से निपटने के लिए भी योग को एक शक्तिशाली औज़ार के रूप में देखा जाता है. 

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, शारीरिक व मानसिक कल्याण के लिये, योग के सन्देश को बढ़ावा दिया जाना, मौजूदा समय में बेहद महत्वपूर्ण है.

विश्व भर में, बड़ी संख्या में लोग, स्वस्थ व स्फूर्तिवान जीवन के लिये योग व स्वस्थ जीवनशैली को अपना रहे हैं और इसका उपयोग, महामारी के दौरान सामाजिक अलगाव और मानसिक अवसाद से निपटने में भी किया जा रहा है. 

कोविड-19 संक्रमितों के बीमारी से उबर जाने के बाद भी, मनो-सामाजिक देखभाल और पुनर्वास में योग ने, एक अहम भूमिका निभाई है ताकि पीड़ितों की आशंकाओं व बेचैनी को दूर किया जा सके. 

इस दिवस पर, संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थाई मिशन, 21 जून को एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है. 

इस कार्यक्रम के दौरान यूएन महासभा अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर और संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना मोहम्मद के सन्देश प्रसारित किये जाएँगे. 

इसके बाद, शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की बेहतरी में सहायक योग आसनों को दर्शाया जाएगा. 

साथ ही एक चर्चा को भी आयोजित किया गया है जिसका विषय है: तंदरुस्ती के लिये योग.

संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव संख्या 69/131 के ज़रिये 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था.

भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की पहल और प्रोत्साहन के तहत ये निर्णय लिया गया था. उन्होंने महासभा के 69वें सत्र में कहा था, “योग मस्तिष्क और शरीर का सम्मिलन करता है, ये एक ऐसी समग्र प्रक्रिया है जो हमारे स्वास्थ्य और जीवन की बेहतरी के लिए मूल्यवान है.”

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