Online News Channel

News

अभी भी बड़ी गहरी हैं जातीय श्रेष्ठता की जड़ें

अभी भी बड़ी गहरी हैं जातीय श्रेष्ठता की जड़ें
October 25
09:13 2018

हीनता की भावना से पैदा होता है श्रेष्ठता का गुमान

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

सुप्रसिद्ध मनोविज्ञानी डाक्टर शाहिद हसन का मानना है कि जातीय श्रेष्ठता की मानसिकता की शुरूआत पृथ्वी पर मनुष्य के आने से पहले ही शुरू हुई है। जब अल्लाह ने आदम को फरिश्तों से सजदा करने को कहा और इब्लीस (शैतान) को छोड़कर सभी फरिश्तों ने आदम को सजदा किया। इस प्रकार ईश्वर ने मानव जाति को सभी जातियों से श्रेष्ठ बनाया, क्योंकि ईश्वर ने मनुष्य को ज्ञान की सारी बातें सिखलायीं। स्वर्ग वाटिका से जब आदम और हौआ को पृथ्वी पर भेजा गया, उस समय पति-पत्नी के रूप में दोनों ने नई जिन्दगी की शुरूआत की।

ईश्वर ने पुरूष को स्त्री की तुलना में शक्तिशाली बनाया और नारी को कोमल। स्वभाव एवं शारीरिक शक्ति के अनुसार इसी तरह दोनों के व्यवहार भी निर्धारित हो गए।
समय के अंतराल में मनुष्यों की संख्या बढ़ती गयी। भौगोलिक परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण मनुष्य सारी दुनिया में फैलने लगे। पर्यावरण की भिन्नता के कारण मनुष्यों की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति में फर्क दिखाई पड़ने लगे। गर्म क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के रंग सांवले और काले होते गए। इसी तरह सर्द क्षेत्रों में वास करने वालों के रंग गोरे होने लगे।

अभी भी बड़ी गहरी हैं जातीय श्रेष्ठता की जड़ें

गर्म देशों के लोगों को जटिल भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता। पानी के अभाव में सुलभ रूप में कृषि से लाभ कम मिलते थे। शिकार और पशुपालन उनकी मुख्य जीविका थी। इसके विपरीत ठंडे क्षेत्रों में रहनेवालों को कई लाभ मिल रहे थे। उनके शारीरिक विकास और बौद्धिक विकास में भी संतुलन था। संसाधनों की पर्याप्तता के कारण पर्यावरण से उनकी समयोजन क्षमता भी सहजता से विकसित होने लगी, इन्हीं कारणों से गोरे लोगों में श्रेष्ठता की भावना पनपने लगी।

इतिहासकार मानते हैं कि जातीय श्रेष्ठता के प्रमाण आर्य जातियों के उद्भव से भी प्राप्त होते हैं। ग्रीस, रोम, ईरान एवं जर्मन की प्रजाति स्वयं को श्रेष्ठ मानती रही। प्रकृति की पूजा और बहुदेववाद का वहां बोलबाला था। धीरे-धीरे आर्य पूरब और पश्चिम की ओर अपनी कुशाग्र बुद्धि और सैन्य कौशल के कारण फैलने लगे। आर्य जाति के प्रभाव के पूर्व विश्व के कई क्षेत्रों में शासक वर्ग में श्रेष्ठता की भावना थी। बाकी जनता उनकी गुलाम हुआ करती थी।

अभी भी बड़ी गहरी हैं जातीय श्रेष्ठता की जड़ें

भारत का इतिहास भी आर्यों के आने से पहले द्रविड़ों पर केन्द्रित था। आर्य उत्तर-पश्चिम की ओर से आने लगे और अपनी सैन्य श्रेष्ठता के कारण धीरे-धीरे शासक बनने लगे। यदि कार्ल गुस्टाव युंग के जातीय अवचेतन को मानें तो जातीय श्रेष्ठता की भावना सदियों से मनुष्य के अवचेतन में पलती रही है। समय-समय पर इसकी अभिव्यक्ति देखने को भी मिलती है।

हिटलर जैसे तानाशाह ने जातीय श्रेष्ठता की मनोवृति के अनुरूप सारी दुनिया में शासन करने का मनसूबा बनाया। उसने इस मनोग्रस्तता के कारण 60 लाख यहुदियों की हत्या करवाई। आर्य जाति की शुद्ध नस्ल पैदा करने के लिए उसने शुद्ध नस्ल के जोड़ों से प्रजनन कराने का भी उपाय किया। महज इसलिए कि आर्य नस्ल की बहुतायत होने से उसी नस्ल के लोग पूरी दुनिया में फैलें और शासन करें। किन्तु हिटलर का यह मनसूबा पूरा नहीं हुआ। उसका यह दिवास्वप्न एक दुःस्वप्न साबित हुआ। मनोवैज्ञानिकों ने हिटलर के इस पागलपन पर जितना भी अध्ययन किया, उससे कई कारण निकले पर एडलर की दृष्टि में हिटलर पूरी तरह हीनता की ग्रंथि से पीड़ित था। एडलर का मानना है कि व्यक्ति के अंदर मुख्य चालक उर्जा श्रेष्ठता के लिए संघर्ष है। यह संघर्ष अपने अंदर की कमियों को दूर करने के लिए होता है।

अभी भी बड़ी गहरी हैं जातीय श्रेष्ठता की जड़ें

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति में हीनता की भावना जरूर रहती है। कोई व्यक्ति पूर्ण नहीं होता। उसी हीनता की भावना को दूर करने के लिए मनुष्य उसे छुपाता है और अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए विविध उपाय और प्रदर्शन करता रहता है। वस्तुतः हिटलर भी शारीरिक और मानसिक रूप से अन्य जर्मन के मुकाबले बहुत दुर्बल था, जिसकी भरपाई के लिए इतने हिंसक कारनामे किए।

डाक्टर शाहिद हसन के अनुसार सर्बिया और बोत्सनिया के बीच युद्ध इसी श्रेणी का उदाहरण है। जातीय श्रेष्ठता को दुनिया के सामने दिखाने के लिए सर्बो ने बोत्सनिया और क्रोएशिया पर आक्रमण किया। बोत्सनिया युद्ध की मंशा जातीय सफाया थी। इस जातीय श्रेष्ठता की कीमत भी सर्बिया को चुकानी पड़ी। दक्षिण अफ्रीका में भी गोरों की अल्पसंख्यक सरकार जातीय श्रेष्ठता से ग्रसित थी। गांधी जी को प्रथम श्रेणी के कम्पार्टमेन्ट से बाहर फेंक देने और क्रिकेट टीम में सिर्फ गोरों को ही शामिल करने की घटनाएं इसी जातीय श्रेष्ठता के मनोभाव को प्रदर्शित करती है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में जातीय श्रेष्ठता की जड़ें बहुत गहरी हैं। ऋगवेद में कहा जाता है कि ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, उदर से वैश्य और पांव से शूद्र का जन्म हुआ। श्रेष्ठता की यह भावना युगों से भारतीयों के मन को ग्रस्त किए हुए है। आज का भारत भी इस दंश से मुक्त नहीं हो सका है। यज्ञोपवीत जैसे संस्कार श्रेष्ठता की भावना के प्रतीक हैं।

डा0 शाहिद हसन मानते हैं कि जातीय श्रेष्ठता का रोग संक्रमण की तरह भारतीय मुसलमानों में भी फैल गया है। सैयद, पठान, शेख, मल्लिक, इराकी, जुलाहे, धोबी, हलालखोर, दर्जी, धुनिया, दुफाली, मिरयासीन आदि जातियों को दो श्रेणी में बांटकर देखा जाता है। श्रेष्ठ जातियां अपने को अफजाल (श्रेष्ठ) मानती हैं। गैर अफजालों के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करने में संकोच करती हैं। पिछडी जाति के कुछ लोग भी दूसरी जातियों से रिश्ता जोड़ना पसंद नहीं करते हैं।

अभी भी बड़ी गहरी हैं जातीय श्रेष्ठता की जड़ें

अपने को मुसलमान कहनेवाली ये जातियां पैगम्बर मोहम्मद (सं) के अंतिम प्रवचन को भूल जाती हैं, जिसमें उन्होंने (सं) कहा कि आज के दिन से अरब वालों को गैर अरबवालों की अपेक्षा कोई श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है और ना ही गोरों को काले से, अमीरों को गरीबों से कोई श्रेष्ठता प्राप्त है। आज मैं (स.) इन अभिशापों को अपने पैरों से नीचे रखकर रौंदता हूँ। अल्लाह की नजर में वह व्यक्ति सबसे श्रेष्ठ है जिसे अल्लाह का डर सबसे ज्यादा है। तुम सभी आदम की संतान हो-आज से तुम सभी एक दूसरे के भाई हो। डाक्टर शाहिद हसन उपरोक्त वचनों के साथ गुरूनानक देव के इस वचन का भी उदाहरण देते हैं कि -‘मानव की जाति बस एक ही है-पहचानिये।’

बहरहाल डा0 हसन जैसे बौद्धिकों का विश्वास है कि लोगों में मनोवैज्ञानिक क्रांति आ रही है, जिससे समाज के प्रत्यक्षीकरण, संवेग, मनोवृति, आकांक्षा,, मूल्य, विश्वास आदि बदलने लगे हैं और लोग समंजन की ओर बढ़ रहे हैं। जिस दिन मानव श्रेष्ठता की कुंठा और आडंबर को त्याग देगा, उस दिन समाज का स्वरूप बदल जायेगा। दुनिया को उसी समय और समाज का इंतजार है।

जीवन की सार्थकता का ज्ञान प्रदान करता है अध्यात्म

Reshika Boutique
Paul Opticals
New Anjan Engineering Works
Akash
Metro Glass
Puma
Krsna Restaurant
VanHuesen
W Store
Ad Impact
Chotanagpur Handloom
Bhatia Sports
Home Essentials
Abhushan
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Write a Comment

Poll

Economic performance compared to previous government ?

LATEST ARTICLES

    निर्दालिये एनोस एक्का 2005 से 2008 तक मिली जुली  सरकार में बड़े ब्लैकमेलर थे

निर्दालिये एनोस एक्का 2005 से 2008 तक मिली जुली सरकार में बड़े ब्लैकमेलर थे

0 comment Read Full Article

Subscribe to Our Newsletter