आतंकवाद के क्रूर हाथों अपना बेटा गँवाने वाली एक माँ ने उठाया अमन का बीड़ा

मोरक्को मूल की एक फ्रांसीसी महिला लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन को, युवाओं में अतिवाद का मुक़ाबला करने प्रयासों में, असाधारण साहस दिखाने के लिये पुरस्कृत किया गया है, जिनका बेटा, लगभग एक दशक पहले, एक आतंकवादी हमले में मौत के मुँह में धकेल दिया गया था. ये महिला अपने इस अथाह दुख को, ’प्रेम की पुकार’ से भरने की कोशिशों में सक्रिय हैं.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन को मानव बन्धुत्व के लिये ज़ायद पुरस्कार से संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया है. उन्हें ये पुरस्कार, फ़रवरी 2021 के आरम्भ में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के साथ मिला है.
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन का 30 वर्षीय बेटा इमाद, फ्रांसीसी सेना में, एक पैराट्रूपर था.
मार्च 2012 में, फ्रांस के दक्षिणी हिस्से में, एक आतंकवादी मोहम्मद मेराह ने, नौ दिनों तक चलाए गए अपने हत्या अभियान में, 7 लोगों को मौत के मुँह में धकेल दिया था, लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन का बेटा इमाद भी जान गँवाने वालों में था.
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने अपने बेटे इमाद की मौत के, लगभग एक महीने के भीतर ही, ‘इमाद एसोसिएशन फ़ॉर यूथ एण्ड पीस’ की स्थापना कर डाली. ये संगठन सहनशीलता और शान्ति को बढ़ावा देता है.
उसके बाद से तो लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने युवाओं को विद्रोही और अतिवादी बनने से रोकने के लिये, फ्रांस में और विदेश में, परिवारों और समुदायों के साथ मिलकर काम किया है. इन प्रयासों के तहत वो, शान्ति, सम्वाद और आपसी सम्मान का पैग़ाम फैला रही हैं.
एक दुखी माँ का सफ़र
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने, यूएन न्यूज़ अरबी भाषा के सहयोगियों के साथ बातचीत में याद करते हुए हुए बताया कि उन्होंने किस तरह उस शहर ताउलाउज़ की यात्रा की, जहाँ उनके बेटे इमाद की हत्या की गई थी, दुख का पहाड़ टूट पड़ने की वजह तलाश करने की ख़ातिर.
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन बताती हैं, “मैंने अपने घुटनों पर झुककर देखने की कोशिश की. मुझे ज़मीन पर उसका (अपने बेटे का) रक्त पड़ा हुआ नज़र आया. मैंने अपने हाथों में मिट्टी भरी और अपने बेटे के रक्त को रगड़ते हुए, दुआ माँगी, ‘ओ मेरे ख़ुदा, मेरी मदद कर, या मेरे ख़ुदा.’ मैं दहाड़ मारकर चीख पड़ी.”
दुख और सदमे का सामना कर रही इस माँ का दर्द उस समय तब और बढ़ गया जब उन्होंने ये देखा…
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ताउलाउज़ शहर की पूर्वोत्तर बस्ती लेस इज़ार्द्स में थीं, जहाँ उनके बेटे के हत्यारे ने परवरिश पाई थी, और जहाँ एक पुलिस कार्रवाई में, उस हत्यारे के जीवन का भी अन्त हो गया था.
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने, वहाँ रास्तों पर यूँ ही भटक रहे या समय काट रहे कुछ युवाओं को देखा तो उनके पास जाकर पूँछा कि मोहम्मद मेराह कहाँ रहता था.
उन युवाओं में से एक ने, कुछ रहस्यमयी मुस्कान दिखाई, तो लतीफ़ा को ख़ुद पर ही कुछ अचरज हुआ कि उनके सवाल में क्या कोई अजीब बात थी.
“उस युवा ने कहा, ‘लेकिन क्या आप टेलीविज़न नहीं देखती हैं? मैडम, क्या आप अख़बार नहीं पढ़ती हैं? मैंने कहा, कृपया, मैं पूछ रही हूँ कि मोहम्मद मेराह कहाँ रहता था? उसने मुझे बताया: मोहम्मद मेरा एक शहीद है. इस्लाम का एक हीरो. उसने फ्रांस को घुटनों पर झुका दिया!’”
दुख तकलीफ़ से निकलकर…
मोहम्मद मेराह के क़ातिलाना वहशीपने ने देश को हिलाकर रख दिया था. उसने ताऊलाउज़ शहर और पास के माउंटाउबन में अन्धाधुन्ध गोलियाँ चलाकर जिस पहले व्यक्ति को मौत के मुँह में धकेला, वो इमाद इब्न ज़ायतेन ही था. मोहम्मद मेराह ने वर्ष 2012 में 11 से 19 मार्च तक ये गोलीबारी की थी.
उसके वहशीपने का शिकार होने वालों में दो अन्य सैनिक थे जो उस समय ड्यूटी पर नहीं थे. एक यहूदी स्कूल में एक रब्बाई (यहूदी धार्मिक प्रचारक या शिक्षक) और तीन बच्चे भी मोहम्मद मेराह की गोलियाँ का शिकार हुए. पाँच लोग घायल भी हुए थे.
इमाद इब्न ज़ायतेन की ही तरह, मोहम्मद मेराह भी, एक आप्रवासी परिवार का बेटा था. लेकिन इन आप्रवासी परिवारों में से एक के बेटे (इमाद) ने देश की सेवा करने का रास्ता चुना, जबकि दूसरे परिवार के बेटे (मोहम्मद मेराह) ने आतंकवाद की राह पकड़ी. 

IMAD Associationलतीफ़ इब्न ज़ायतेन को वर्ष 2021 का ज़ायद मानव बन्धुत्व पुरस्कार, यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के साथ संयुक्त रूप से मिला है.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन इसकी वजह पर ध्यान खींचते हुए कहती हैं, “दुख के साथ कहना पड़ता है कि कुछ युवाओं के पास शिक्षा नहीं है, उन्हें माता-पिता की मौजूदगी नहीं मिली है, उन्हें कोई मददगार और सहारा देने वाला माहौल नहीं मिला है.”
उन्होंने आगे कहा कि ये युवा भटके हुए हैं और हमें उन्हें सही रास्ते पर लाना है, हमें उनके साथ मिलकर काम करना ही होगा.
“हमें इन युवाओं के साथ सम्पर्क और सम्वाद स्थापित करना ही होगा, क्योंकि वो ही तो भविष्य हैं.”
सहनशीलता का सन्देश
लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने ये काम उस संगठन के माध्यम से करने का बीड़ा उठाया है जो उनके दिवंगत बेटे के नाम पर बनाया गया है.
वो फ्रांस में अनेक इलाक़ों का दौरा करके, सहनशीलता का सन्देश फैला रही हैं. वो हाई स्कूलों के छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों तक पहुँचकर, अपनी बात कह रही हैं. इनमें बहुत से अध्यापक और जेलों के निदेशक भी हैं जो उनके पास ये सन्देश फैलाने का अनुरोध लेकर आते हैं.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने भी ये पुरस्कार संयुक्त रूप से स्वीकार करते हुए एक वक्तव्य में, 5 बच्चों की माँ लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन के प्रयासों को सराहा. 
उन्होंने कहा कि लतीफ़ा ने, अत्यन्त गम्भीर निजी सदमे से उबरकर, युवा लोगों को सहारा व समर्थन देने और आपसी समझदारी को बढ़ावा देने के समर्पित प्रयासों की बदौलत, देश-दुनिया में, वाह-वाही बटोरी है.
सुन्दर सपने देखें
लतीफ़ा ने एक ऐसे युवा के साथ अपनी मुलाक़ात को याद किया जिसने कहा था कि वो एक ऐसी धरती पर भी उपेक्षित और अलग-थलग महसूस करता है जिसका नारा ही स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व है.
लतीफ़ा ने उस युवक से कहा कि वो किस तरह एक बन्धुत्व वाले और सामुदायिक फ्रांस का निर्माण करने का सपना देखती हैं, जहाँ हर किसी के लिये अपनी एक जगह हो.
लतीफ़ा ने उस युवक को कुछ ऐसी सलाह भी दी ताकि वो, मोहम्मद मेराह की तरह, अतिवाद के जाल में ना फँस जाएँ.
लतीफ़ा ने कहा, “अपने हालात का पन्ना पलटने की कोशिश करो, पढ़ाई करो. किसी ख़ूबसूरत चीज़ के बारे में कोई सपना देखो… और जब तुम इबादत करो, तो अमन-चैन के लिये दुआ माँगो; मोहब्बत की दुआ.”, मोरक्को मूल की एक फ्रांसीसी महिला लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन को, युवाओं में अतिवाद का मुक़ाबला करने प्रयासों में, असाधारण साहस दिखाने के लिये पुरस्कृत किया गया है, जिनका बेटा, लगभग एक दशक पहले, एक आतंकवादी हमले में मौत के मुँह में धकेल दिया गया था. ये महिला अपने इस अथाह दुख को, ’प्रेम की पुकार’ से भरने की कोशिशों में सक्रिय हैं.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन को मानव बन्धुत्व के लिये ज़ायद पुरस्कार से संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया है. उन्हें ये पुरस्कार, फ़रवरी 2021 के आरम्भ में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के साथ मिला है.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन का 30 वर्षीय बेटा इमाद, फ्रांसीसी सेना में, एक पैराट्रूपर था.

मार्च 2012 में, फ्रांस के दक्षिणी हिस्से में, एक आतंकवादी मोहम्मद मेराह ने, नौ दिनों तक चलाए गए अपने हत्या अभियान में, 7 लोगों को मौत के मुँह में धकेल दिया था, लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन का बेटा इमाद भी जान गँवाने वालों में था.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने अपने बेटे इमाद की मौत के, लगभग एक महीने के भीतर ही, ‘इमाद एसोसिएशन फ़ॉर यूथ एण्ड पीस’ की स्थापना कर डाली. ये संगठन सहनशीलता और शान्ति को बढ़ावा देता है.

उसके बाद से तो लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने युवाओं को विद्रोही और अतिवादी बनने से रोकने के लिये, फ्रांस में और विदेश में, परिवारों और समुदायों के साथ मिलकर काम किया है. इन प्रयासों के तहत वो, शान्ति, सम्वाद और आपसी सम्मान का पैग़ाम फैला रही हैं.

एक दुखी माँ का सफ़र

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने, यूएन न्यूज़ अरबी भाषा के सहयोगियों के साथ बातचीत में याद करते हुए हुए बताया कि उन्होंने किस तरह उस शहर ताउलाउज़ की यात्रा की, जहाँ उनके बेटे इमाद की हत्या की गई थी, दुख का पहाड़ टूट पड़ने की वजह तलाश करने की ख़ातिर.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन बताती हैं, “मैंने अपने घुटनों पर झुककर देखने की कोशिश की. मुझे ज़मीन पर उसका (अपने बेटे का) रक्त पड़ा हुआ नज़र आया. मैंने अपने हाथों में मिट्टी भरी और अपने बेटे के रक्त को रगड़ते हुए, दुआ माँगी, ‘ओ मेरे ख़ुदा, मेरी मदद कर, या मेरे ख़ुदा.’ मैं दहाड़ मारकर चीख पड़ी.”

दुख और सदमे का सामना कर रही इस माँ का दर्द उस समय तब और बढ़ गया जब उन्होंने ये देखा…

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ताउलाउज़ शहर की पूर्वोत्तर बस्ती लेस इज़ार्द्स में थीं, जहाँ उनके बेटे के हत्यारे ने परवरिश पाई थी, और जहाँ एक पुलिस कार्रवाई में, उस हत्यारे के जीवन का भी अन्त हो गया था.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने, वहाँ रास्तों पर यूँ ही भटक रहे या समय काट रहे कुछ युवाओं को देखा तो उनके पास जाकर पूँछा कि मोहम्मद मेराह कहाँ रहता था.

उन युवाओं में से एक ने, कुछ रहस्यमयी मुस्कान दिखाई, तो लतीफ़ा को ख़ुद पर ही कुछ अचरज हुआ कि उनके सवाल में क्या कोई अजीब बात थी.

“उस युवा ने कहा, ‘लेकिन क्या आप टेलीविज़न नहीं देखती हैं? मैडम, क्या आप अख़बार नहीं पढ़ती हैं? मैंने कहा, कृपया, मैं पूछ रही हूँ कि मोहम्मद मेराह कहाँ रहता था? उसने मुझे बताया: मोहम्मद मेरा एक शहीद है. इस्लाम का एक हीरो. उसने फ्रांस को घुटनों पर झुका दिया!’”

दुख तकलीफ़ से निकलकर…

मोहम्मद मेराह के क़ातिलाना वहशीपने ने देश को हिलाकर रख दिया था. उसने ताऊलाउज़ शहर और पास के माउंटाउबन में अन्धाधुन्ध गोलियाँ चलाकर जिस पहले व्यक्ति को मौत के मुँह में धकेला, वो इमाद इब्न ज़ायतेन ही था. मोहम्मद मेराह ने वर्ष 2012 में 11 से 19 मार्च तक ये गोलीबारी की थी.

उसके वहशीपने का शिकार होने वालों में दो अन्य सैनिक थे जो उस समय ड्यूटी पर नहीं थे. एक यहूदी स्कूल में एक रब्बाई (यहूदी धार्मिक प्रचारक या शिक्षक) और तीन बच्चे भी मोहम्मद मेराह की गोलियाँ का शिकार हुए. पाँच लोग घायल भी हुए थे.

इमाद इब्न ज़ायतेन की ही तरह, मोहम्मद मेराह भी, एक आप्रवासी परिवार का बेटा था. लेकिन इन आप्रवासी परिवारों में से एक के बेटे (इमाद) ने देश की सेवा करने का रास्ता चुना, जबकि दूसरे परिवार के बेटे (मोहम्मद मेराह) ने आतंकवाद की राह पकड़ी. 


IMAD Association
लतीफ़ इब्न ज़ायतेन को वर्ष 2021 का ज़ायद मानव बन्धुत्व पुरस्कार, यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के साथ संयुक्त रूप से मिला है.

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन इसकी वजह पर ध्यान खींचते हुए कहती हैं, “दुख के साथ कहना पड़ता है कि कुछ युवाओं के पास शिक्षा नहीं है, उन्हें माता-पिता की मौजूदगी नहीं मिली है, उन्हें कोई मददगार और सहारा देने वाला माहौल नहीं मिला है.”

उन्होंने आगे कहा कि ये युवा भटके हुए हैं और हमें उन्हें सही रास्ते पर लाना है, हमें उनके साथ मिलकर काम करना ही होगा.

“हमें इन युवाओं के साथ सम्पर्क और सम्वाद स्थापित करना ही होगा, क्योंकि वो ही तो भविष्य हैं.”

सहनशीलता का सन्देश

लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन ने ये काम उस संगठन के माध्यम से करने का बीड़ा उठाया है जो उनके दिवंगत बेटे के नाम पर बनाया गया है.

वो फ्रांस में अनेक इलाक़ों का दौरा करके, सहनशीलता का सन्देश फैला रही हैं. वो हाई स्कूलों के छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों तक पहुँचकर, अपनी बात कह रही हैं. इनमें बहुत से अध्यापक और जेलों के निदेशक भी हैं जो उनके पास ये सन्देश फैलाने का अनुरोध लेकर आते हैं.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने भी ये पुरस्कार संयुक्त रूप से स्वीकार करते हुए एक वक्तव्य में, 5 बच्चों की माँ लतीफ़ा इब्न ज़ायतेन के प्रयासों को सराहा. 

उन्होंने कहा कि लतीफ़ा ने, अत्यन्त गम्भीर निजी सदमे से उबरकर, युवा लोगों को सहारा व समर्थन देने और आपसी समझदारी को बढ़ावा देने के समर्पित प्रयासों की बदौलत, देश-दुनिया में, वाह-वाही बटोरी है.

सुन्दर सपने देखें

लतीफ़ा ने एक ऐसे युवा के साथ अपनी मुलाक़ात को याद किया जिसने कहा था कि वो एक ऐसी धरती पर भी उपेक्षित और अलग-थलग महसूस करता है जिसका नारा ही स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व है.

लतीफ़ा ने उस युवक से कहा कि वो किस तरह एक बन्धुत्व वाले और सामुदायिक फ्रांस का निर्माण करने का सपना देखती हैं, जहाँ हर किसी के लिये अपनी एक जगह हो.

लतीफ़ा ने उस युवक को कुछ ऐसी सलाह भी दी ताकि वो, मोहम्मद मेराह की तरह, अतिवाद के जाल में ना फँस जाएँ.

लतीफ़ा ने कहा, “अपने हालात का पन्ना पलटने की कोशिश करो, पढ़ाई करो. किसी ख़ूबसूरत चीज़ के बारे में कोई सपना देखो… और जब तुम इबादत करो, तो अमन-चैन के लिये दुआ माँगो; मोहब्बत की दुआ.”

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *