आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद के 75 साल पूरे – महामारी व विकास चुनौतियों से निपटने का आहवान

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद (UNECOSOC) के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर परिषद के अध्यक्ष मुनीर अकरम ने कहा है कि इकॉसॉक का दायित्व विश्व में मौजूदा आर्थिक और स्वास्थ्य संकटों जैसी चुनौतियों से निपटना है जिसके लिये वैश्विक कार्रवाई का खाका तैयार किया जाना होगा. इकॉसॉक की स्थापना के 75 वर्ष ऐसे समय में पूरे हो रहे हैं जब दुनिया गम्भीर  संकटों से जूझ रही है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद यूएन के छह प्रमुख अंगों में से एक है. 
 

परिषद के प्रमुख मुनीर अकरम ने शनिवार को अपने सन्देश में आगाह किया कि दुनिया मौजूदा समय में यूएन व परिषद की स्थापना के बाद से अब तक के सबसे गम्भीर स्वास्थ्य व आर्थिक संकट का सामना कर रही है. 

Today is @UNECOSOC birthday & we are celebrating 75 years of global service to humanity. Did you know? The 1st meeting of ECOSOC took place in London on 23 January 1946. Learn more: https://t.co/PoZh4i2Vtr #UNECOSOC75 #GlobalGoals #SDGs #2030Agenda pic.twitter.com/pEQiLdtzEe— UN ECOSOC President (@UNECOSOC) January 23, 2021

न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने ज़ोर देकर कहा कि निर्धनता व भुखमरी बढ़ी है, टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर प्रगति सवालों के घेरे में हैं और जलवायु परिवर्तन दस्तक दे रहा है.
इन हालात में विकासशील देशों की मदद के लिये वित्तीय इन्तज़ामों को किया जाना अभी बाक़ी है.
उन्होंने कहा कि अभी यह भरोसा नहीं है कि कोविड-19 के अन्त के लिये वैक्सीन का न्यायसंगत निर्धन देशों में हो सकेगा. 
इन चुनौतियों से निपटने के सम्बन्ध में उन्होंने इकॉसॉक की अहमियत को रेखांकित किया है और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आगामी महीनों में महत्वपूर्ण बैठकों में वैश्विक कार्रवाई का खाका करने का आग्रह किया है. 
आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economics and Social Council) टिकाऊ विकास के तीन आयामों – आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण – को आगे बढ़ाने के लिये, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के केन्द्र में है.
यह परिषद पारस्परिक विमर्श और नवाचारी सोच को बढ़ावा देने, प्रगति के रास्तों पर आम सहमति और सहयोग पर बल देने और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति प्राप्त लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों के समन्वय के लिए केन्द्रीय मँच है. 
यहाँ संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सम्मेलनों और शिखर बैठकों का आयोजन किया जाता है. 
मुनीर अकरम ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत परिषद का मुख्य शासनादेश (Mandate) अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के माध्यम से बेहतर जीवन स्तर को बढ़ावा देना है.
बीस अन्तरराष्ट्रीय संगठन, क्षेत्रीय आयोग और स्वायत्त संस्थाएँ हर वर्ष आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद को रिपोर्ट करते हैं.
इकॉसॉक प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि अतीत के वर्षों में अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक और विकास नीतियों के लिये परिषद एक केन्द्रीय अंग रहा है. 
विकास के मुख्य सिद्धान्तों, जैसेकि 0.7 प्रतिशत आधिकारिक विकास सहायता का लक्ष्य, स्पेशल ड्राइन्ग राइट्स, और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में विकासशील देशों के साथ विशेष बर्ताव, ये सभी परिषद की चर्चाओं के परिणामस्वरूप ही सम्भव हो पाये हैं. 
इसके अतिरिक्त वैश्विक विकास लक्ष्यों व रणनीतियों को पारित करने में भी परिषद की अहम भूमिका रही है. इनमें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG), टिकाऊ विकास का 2030 एजेण्डा और टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्य शामिल हैं. , संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद (UNECOSOC) के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर परिषद के अध्यक्ष मुनीर अकरम ने कहा है कि इकॉसॉक का दायित्व विश्व में मौजूदा आर्थिक और स्वास्थ्य संकटों जैसी चुनौतियों से निपटना है जिसके लिये वैश्विक कार्रवाई का खाका तैयार किया जाना होगा. इकॉसॉक की स्थापना के 75 वर्ष ऐसे समय में पूरे हो रहे हैं जब दुनिया गम्भीर  संकटों से जूझ रही है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद यूएन के छह प्रमुख अंगों में से एक है. 
 

परिषद के प्रमुख मुनीर अकरम ने शनिवार को अपने सन्देश में आगाह किया कि दुनिया मौजूदा समय में यूएन व परिषद की स्थापना के बाद से अब तक के सबसे गम्भीर स्वास्थ्य व आर्थिक संकट का सामना कर रही है. 

न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने ज़ोर देकर कहा कि निर्धनता व भुखमरी बढ़ी है, टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर प्रगति सवालों के घेरे में हैं और जलवायु परिवर्तन दस्तक दे रहा है.

इन हालात में विकासशील देशों की मदद के लिये वित्तीय इन्तज़ामों को किया जाना अभी बाक़ी है.

उन्होंने कहा कि अभी यह भरोसा नहीं है कि कोविड-19 के अन्त के लिये वैक्सीन का न्यायसंगत निर्धन देशों में हो सकेगा. 

इन चुनौतियों से निपटने के सम्बन्ध में उन्होंने इकॉसॉक की अहमियत को रेखांकित किया है और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आगामी महीनों में महत्वपूर्ण बैठकों में वैश्विक कार्रवाई का खाका करने का आग्रह किया है. 

आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economics and Social Council) टिकाऊ विकास के तीन आयामों – आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण – को आगे बढ़ाने के लिये, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के केन्द्र में है.

यह परिषद पारस्परिक विमर्श और नवाचारी सोच को बढ़ावा देने, प्रगति के रास्तों पर आम सहमति और सहयोग पर बल देने और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति प्राप्त लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों के समन्वय के लिए केन्द्रीय मँच है. 

यहाँ संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सम्मेलनों और शिखर बैठकों का आयोजन किया जाता है. 

मुनीर अकरम ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत परिषद का मुख्य शासनादेश (Mandate) अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के माध्यम से बेहतर जीवन स्तर को बढ़ावा देना है.

बीस अन्तरराष्ट्रीय संगठन, क्षेत्रीय आयोग और स्वायत्त संस्थाएँ हर वर्ष आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद को रिपोर्ट करते हैं.

इकॉसॉक प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि अतीत के वर्षों में अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक और विकास नीतियों के लिये परिषद एक केन्द्रीय अंग रहा है. 

विकास के मुख्य सिद्धान्तों, जैसेकि 0.7 प्रतिशत आधिकारिक विकास सहायता का लक्ष्य, स्पेशल ड्राइन्ग राइट्स, और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में विकासशील देशों के साथ विशेष बर्ताव, ये सभी परिषद की चर्चाओं के परिणामस्वरूप ही सम्भव हो पाये हैं. 

इसके अतिरिक्त वैश्विक विकास लक्ष्यों व रणनीतियों को पारित करने में भी परिषद की अहम भूमिका रही है. इनमें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG), टिकाऊ विकास का 2030 एजेण्डा और टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्य शामिल हैं. 

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