एशिया-प्रशान्त: महामारी से पुनर्बहाली में टिकाऊ ऊर्जा पर ज़ोर

एशिया-प्रशान्त के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) की ऊर्जा समिति के तीसरे सत्र में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों ने ज़ोर देकर कहा है कि जैसे-जैसे एशिया-प्रशान्त क्षेत्र, कोविड-19 महामारी के बाद पुनर्बहाली की ओर बढ़ रहा है,  एक स्थाई, और कम कार्बन उत्सर्जन पर आधारित ऊर्जा की ओर क़दम उठाना अब पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

इस सप्ताह, 24 से 26 फरवरी तक, थाईलैण्ड की राजधानी बैन्कॉक में, एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में स्थित देशों के प्रतिनिधि, ऑनलाइन बैठक में शिरकत कर, क्षेत्र के लिये ऊर्जा प्राथमिकताओं पर प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं.
इसमें आधुनिक ऊर्जा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना और सतत विकास के लिये 2030 एजेण्डा के अनुरूप नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और ऊर्जा दक्षता की रफ़्तार को तेज़ करना शामिल है.

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कोविड-19 महामारी ने इस मुद्दे पर ध्यान विशेष रूप से केन्द्रित किया है कि समाज और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र, कोरोनावायरस संकट जैसे झटकों को सहने की क्षमता किस तरह बढ़ा सकते हैं.
कोविड-19 के कारण पेश आई चुनौतियों के बावजूद, क्षेत्र की ऊर्जा प्रणालियों ने महामारी के दौरान भी अपना कार्य जारी रखा है.
यूएन आयोग की नई रिपोर्ट, Shaping a sustainable energy future in Asia and the Pacific: A greener, more resilient and inclusive energy system, दर्शाती है कि ऊर्जा की माँग में आई कमी ने मुख्य रूप से, जीवाश्म ईंधन और तेल व गैस की क़ीमतों को ही ज़्यादा प्रभावित किया है.
चीन और भारत जैसे देशों में अक्षय ऊर्जा विकास 2020 में अच्छी गति से जारी है. संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव, आर्मिदा सालसाहिया अलिसजबाना ने समिति को सम्बोधित करते हुए कहा कि “बीता साल, एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिये एक चुनौती भरा और परिवर्तनकारी वर्ष रहा है.”  
उन्होंने कहा, “जैसेकि हम कोविड-19 महामारी से उबरने के लिये मिलकर काम कर रहे हैं, ESCAP अपने सदस्यों को बेहतर पुनर्निर्माण की दीर्घकालिक चुनौती का सामना करने में मदद देने के लिये अपने मंच का उपयोग कर रहा है.”
“ऊर्जा ना केवल अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधा प्रणालियाँ जारी रखने के लिये ज़रूरी है, बल्कि ऊर्जा के ज़रिये उन प्रणालियों को भी सुचारू रूप से कार्य करने में मदद मिलती है, जिन पर हम दूरस्थ कार्यों के लिये निर्भर हैं, या जिनके ज़रिये हम दूरस्थ शिक्षा लेते हैं, या फिर आवश्यक स्वास्थ्य जानकारी प्रदान कर रहे हैं.”
“ऊर्जा पर सतत विकास लक्ष्य-7 की प्रगति में तेज़ी लाने से इस क्षेत्र के देशों को, महामारी से उबरने के दौरान, एक स्वच्छ और निम्न कार्बन भविष्य की ओर रूख करने का अवसर मिलता है.” 
थाईलैण्ड के ऊर्जा मन्त्रालय के स्थाई सचिव, शकुलित सोमत्सिरी ने कहा कि कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई के हिस्से के रूप में, सतत ऊर्जा विकास और आर्थिक सुधार के उपायों को सुनिश्चित करने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा, “दुनिया के किसी और क्षेत्र की तुलना में एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में ऊर्जा की माँग अधिक तेज़ी से बढ़ रही है. जबकि हमें बढ़ती माँग को पूरा करने, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, ऊर्जा प्रणाली की सततता,कम क़ीमत व निम्न कार्बन सुनिश्चित करना है,”
“वहीं, हम सभी को इस नई सामान्य स्थिति के अनुरूप ढलने की भी आवश्यकता है. इसके लिये, सभी सदस्यों के बीच घनिष्ठ सहयोग और समन्वय की आवश्यकता होगी, जिसमें ESCAP इस बदलाव की प्रक्रिया को पूर्ण व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”
इस वर्ष समिति, सीमा पार पावर ग्रिड कनेक्टिविटी को बढ़ाने के फैसलों का समर्थन करने और टिकाऊ विकास लक्ष्य -7 प्राप्त करने के लिये नीतिगत ढाँचे को विकसित करने के लिये सहायक देशों को मदद जारी रखेगी.
ये भी पढ़ें – एशिया प्रशान्त: टिकाऊ ऊर्जा ही कोविड-19 से पुनर्बहाली की कुँजी
 , एशिया-प्रशान्त के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) की ऊर्जा समिति के तीसरे सत्र में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों ने ज़ोर देकर कहा है कि जैसे-जैसे एशिया-प्रशान्त क्षेत्र, कोविड-19 महामारी के बाद पुनर्बहाली की ओर बढ़ रहा है,  एक स्थाई, और कम कार्बन उत्सर्जन पर आधारित ऊर्जा की ओर क़दम उठाना अब पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

इस सप्ताह, 24 से 26 फरवरी तक, थाईलैण्ड की राजधानी बैन्कॉक में, एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में स्थित देशों के प्रतिनिधि, ऑनलाइन बैठक में शिरकत कर, क्षेत्र के लिये ऊर्जा प्राथमिकताओं पर प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं.

इसमें आधुनिक ऊर्जा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना और सतत विकास के लिये 2030 एजेण्डा के अनुरूप नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और ऊर्जा दक्षता की रफ़्तार को तेज़ करना शामिल है.

कोविड-19 महामारी ने इस मुद्दे पर ध्यान विशेष रूप से केन्द्रित किया है कि समाज और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र, कोरोनावायरस संकट जैसे झटकों को सहने की क्षमता किस तरह बढ़ा सकते हैं.

कोविड-19 के कारण पेश आई चुनौतियों के बावजूद, क्षेत्र की ऊर्जा प्रणालियों ने महामारी के दौरान भी अपना कार्य जारी रखा है.

यूएन आयोग की नई रिपोर्ट, Shaping a sustainable energy future in Asia and the Pacific: A greener, more resilient and inclusive energy system, दर्शाती है कि ऊर्जा की माँग में आई कमी ने मुख्य रूप से, जीवाश्म ईंधन और तेल व गैस की क़ीमतों को ही ज़्यादा प्रभावित किया है.

चीन और भारत जैसे देशों में अक्षय ऊर्जा विकास 2020 में अच्छी गति से जारी है. संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव, आर्मिदा सालसाहिया अलिसजबाना ने समिति को सम्बोधित करते हुए कहा कि “बीता साल, एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिये एक चुनौती भरा और परिवर्तनकारी वर्ष रहा है.”  

उन्होंने कहा, “जैसेकि हम कोविड-19 महामारी से उबरने के लिये मिलकर काम कर रहे हैं, ESCAP अपने सदस्यों को बेहतर पुनर्निर्माण की दीर्घकालिक चुनौती का सामना करने में मदद देने के लिये अपने मंच का उपयोग कर रहा है.”

“ऊर्जा ना केवल अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधा प्रणालियाँ जारी रखने के लिये ज़रूरी है, बल्कि ऊर्जा के ज़रिये उन प्रणालियों को भी सुचारू रूप से कार्य करने में मदद मिलती है, जिन पर हम दूरस्थ कार्यों के लिये निर्भर हैं, या जिनके ज़रिये हम दूरस्थ शिक्षा लेते हैं, या फिर आवश्यक स्वास्थ्य जानकारी प्रदान कर रहे हैं.”

“ऊर्जा पर सतत विकास लक्ष्य-7 की प्रगति में तेज़ी लाने से इस क्षेत्र के देशों को, महामारी से उबरने के दौरान, एक स्वच्छ और निम्न कार्बन भविष्य की ओर रूख करने का अवसर मिलता है.” 

थाईलैण्ड के ऊर्जा मन्त्रालय के स्थाई सचिव, शकुलित सोमत्सिरी ने कहा कि कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई के हिस्से के रूप में, सतत ऊर्जा विकास और आर्थिक सुधार के उपायों को सुनिश्चित करने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, “दुनिया के किसी और क्षेत्र की तुलना में एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में ऊर्जा की माँग अधिक तेज़ी से बढ़ रही है. जबकि हमें बढ़ती माँग को पूरा करने, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, ऊर्जा प्रणाली की सततता,कम क़ीमत व निम्न कार्बन सुनिश्चित करना है,”

“वहीं, हम सभी को इस नई सामान्य स्थिति के अनुरूप ढलने की भी आवश्यकता है. इसके लिये, सभी सदस्यों के बीच घनिष्ठ सहयोग और समन्वय की आवश्यकता होगी, जिसमें ESCAP इस बदलाव की प्रक्रिया को पूर्ण व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”

इस वर्ष समिति, सीमा पार पावर ग्रिड कनेक्टिविटी को बढ़ाने के फैसलों का समर्थन करने और टिकाऊ विकास लक्ष्य -7 प्राप्त करने के लिये नीतिगत ढाँचे को विकसित करने के लिये सहायक देशों को मदद जारी रखेगी.

ये भी पढ़ें – एशिया प्रशान्त: टिकाऊ ऊर्जा ही कोविड-19 से पुनर्बहाली की कुँजी

 

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