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कट मनी पर ममता बोलीं- अब तक 5931 शिकायतें मिली हैं, होगी निगरानी

कट मनी पर ममता बोलीं- अब तक 5931 शिकायतें मिली हैं, होगी निगरानी
June 26
17:04 2019
कोलकाता, 26 जून (हि.स.) । राज्य की सरकारी परियोजनाओं में सत्तारूढ़ तृणमूल से जुड़े लोगों द्वारा लिए गए रिश्वत यानी कटमनी को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आखिरकार विधानसभा में अपना मुंह खोला है। पिछले दो दिनों से विपक्ष इस मामले पर मुख्यमंत्री के बयान पर अड़ा हुआ था। मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि किसी भी तरह का अन्याय अन्याय होता है और उस पर अगर मैंने निगरानी और कार्रवाई के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया है तो इसे लेकर हंगामा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतों और उसके निपटान के लिए 10 जून को मैंने सचिवालय में ग्रीवांस सेल का गठन किया है। उसमें अब तक 5931 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इसमें से 60 प्रतिशत शिकायतों का निपटान हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में भ्रष्ट लोगों पर राज्य सरकार कड़ी निगरानी रख रही है और कार्रवाई भी होगी। ममता के इस बयान के दौरान एक दावे को लेकर वाममोर्चा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती  से उनका खूब तर्क-वितर्क हुआ है। मुख्यमंत्री ने कट मनी के मामले को लेकर विधानसभा में कहा कि मैंने अपनी पार्टी की आंतरिक बैठक में कहा था कि सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार बंद करना होगा। अपनी पार्टी को निर्देशित करने का अधिकार मेरा है। अगर मैं अपने पार्टी के लोगों को ईमानदारी से काम करने के लिए कह रही हूं तो इसमें अन्याय क्या है? इसे लेकर आप लोग हंगामा क्यों कर रहे हैं?
उन्होंने कहा कि हमलोग कालाधन लेकर काम नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बहाने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला।उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान वोट के लिए बड़े पैमाने पर कालाधन का इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी क्षेत्रों में भ्रष्ट लोग हैं। मीडिया में भी हैं और हमारी पार्टी में भी ऐसे लोग हैं। इन सब पर निगरानी रखने के लिए मैंने ठोस कदम उठाया। इसके बाद चिटफंड मामले को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपना बयान विधानसभा में दिया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई और ईडी को चिटफंड का पैसा लौटाने की व्यवस्था करनी चाहिए। चिटफंड मामले पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने से काफी पहले 1980 में ही सारदा समूह ने अपना चिटफंड का कारोबार दक्षिण 24 परगना के बारुइपुर में शुरू कर दिया था। उस समय चिटफंड समूह को जमीन देने में सत्तारूढ़ पार्टी यानी कि वाममोर्चा से जुड़े एक बड़े नेता शामिल थे। जैसे ही मुख्यमंत्री ने यह बात कही, माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। वह विधानसभा के पटल पर खड़े हुए और कहा कि मुख्यमंत्री अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए झूठा दावा कर रही हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सुजन बाबू, आप गुस्सा क्यों रहे हैं? मैंने तो आपका नाम नहीं लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं चैलेंज के साथ कह रही हूं कि चिटफंड को बंगाल में स्थापित करने में वाममोर्चा के नेताओं और तत्कालीन सरकार की भूमिका थी। इसके बाद मुख्यमंत्री भी मुखर हो गई थीं।
ममता के रुख को देखकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को शांत कराया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011 के मई महीने में मेरी सरकार बनी थी और उसके बाद ही हम लोगों ने सारदा चिटफंड के मालिक सुदीप्त सेन को गिरफ्तार कराया था। सुदीप्त सेन तब जम्मू-कश्मीर भाग गया था। चिटफंड मामले में न्याय के लिए मैंने श्यामल सेन कमीशन का गठन किया। निवेशकों को लौटाने के लिए मैंने धनराशि भी आवंटित कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था और सीबीआई ने जांच की जिम्मेवारी संभाल ली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के अपने साथियों से अनुरोध कर रही हूं कि सीबीआई और ईडी को चिटफंड का पैसा लौटाने के लिए कहें। इस पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है।
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