काँगो: 30 लाख बच्चों का जीवन और भविष्य जोखिम में, यूनिसेफ़ की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) में, विस्थापित लगभग 30 लाख बच्चों की गम्भीर स्थिति की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया है जिन्हें लड़ाकों की क्रूर हिंसा और अत्यन्त गम्भीर भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है.

यूनीसेफ़ ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि अनेक स्थानों पर, पूरे के पूरे गाँवों, को आग लगा दी गई है, स्वास्थ्य केन्द्र और स्कूलों में लूटपाट की गई है, और पूरे के पूरे परिवारों को, मौत के मुँह में धकेल दिया गया है. 
ये सब, काँगो के पूर्वी क्षेत्र में किये गए हमलों में किया गया, जिनमें कुदालें-कुल्हाड़ियाँ और भारी हथियारों का प्रयोग किया गया. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बहुत से लोगों को, बिना को सामान लिये ही, सुरक्षा के लिये वहाँ से भागना पड़ा है. 
काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में यूनीसेफ़ प्रतिनिधि एडुअर्ड बीजबेदेर ने कहा, “विस्थापित बच्चों ने भय, निर्धनता, और हिंसा के सिवाय, और कुछ भी नहीं देखा है. उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी, केवल जीवित रहने के बारे में सोच पाते हैं.”
“इसके बावजूद, दुनिया, उनके भाग्य के बारे में लगातार, बेपरवाह होती जा रही है. हमें, इन बच्चों को, एक बेहतर भविष्य मुहैया कराने में मदद करने के लिये, संसाधनों की आवश्यकता है.”
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में लगभग 52 लाख विस्थापित लोग हैं, इनमें से लगभग आधे लोग, पिछले लगभग 12 महीनों के दौरान विस्थापित हुए हैं. विस्थापित लोगों की इस कुल संख्या में, लगभग 30 लाख बच्चे हैं.
जिन परिवारों को उनके घरों और गाँवों से जबरन निकाल दिया गया है, वो ऐसे भीड़ भरी बस्तियों में रहने को विवश हैं जहाँ सुरक्षित जल, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य बुनियादी सेवाओं का अभाव है. कुछ लोगों को ऐसे समुदायों ने अपने यहाँ जगह दी है, जो ख़ुद भी अभावग्रस्त हालात में रहने को मजबूर हैं. 
सर्वाधिक हिंसा ग्रस्त प्रान्तों – इतूरी, उत्तर कीवू , दक्षिण कीवू और टैन्गानयिका में लगभग 80 लाख लोग, गम्भीर खाद्य असुरक्षा के हालात में जी रहे हैं., संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) में, विस्थापित लगभग 30 लाख बच्चों की गम्भीर स्थिति की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया है जिन्हें लड़ाकों की क्रूर हिंसा और अत्यन्त गम्भीर भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है.

यूनीसेफ़ ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि अनेक स्थानों पर, पूरे के पूरे गाँवों, को आग लगा दी गई है, स्वास्थ्य केन्द्र और स्कूलों में लूटपाट की गई है, और पूरे के पूरे परिवारों को, मौत के मुँह में धकेल दिया गया है. 

ये सब, काँगो के पूर्वी क्षेत्र में किये गए हमलों में किया गया, जिनमें कुदालें-कुल्हाड़ियाँ और भारी हथियारों का प्रयोग किया गया. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बहुत से लोगों को, बिना को सामान लिये ही, सुरक्षा के लिये वहाँ से भागना पड़ा है. 

काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में यूनीसेफ़ प्रतिनिधि एडुअर्ड बीजबेदेर ने कहा, “विस्थापित बच्चों ने भय, निर्धनता, और हिंसा के सिवाय, और कुछ भी नहीं देखा है. उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी, केवल जीवित रहने के बारे में सोच पाते हैं.”

“इसके बावजूद, दुनिया, उनके भाग्य के बारे में लगातार, बेपरवाह होती जा रही है. हमें, इन बच्चों को, एक बेहतर भविष्य मुहैया कराने में मदद करने के लिये, संसाधनों की आवश्यकता है.”

संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में लगभग 52 लाख विस्थापित लोग हैं, इनमें से लगभग आधे लोग, पिछले लगभग 12 महीनों के दौरान विस्थापित हुए हैं. विस्थापित लोगों की इस कुल संख्या में, लगभग 30 लाख बच्चे हैं.

जिन परिवारों को उनके घरों और गाँवों से जबरन निकाल दिया गया है, वो ऐसे भीड़ भरी बस्तियों में रहने को विवश हैं जहाँ सुरक्षित जल, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य बुनियादी सेवाओं का अभाव है. कुछ लोगों को ऐसे समुदायों ने अपने यहाँ जगह दी है, जो ख़ुद भी अभावग्रस्त हालात में रहने को मजबूर हैं. 

सर्वाधिक हिंसा ग्रस्त प्रान्तों – इतूरी, उत्तर कीवू , दक्षिण कीवू और टैन्गानयिका में लगभग 80 लाख लोग, गम्भीर खाद्य असुरक्षा के हालात में जी रहे हैं.

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