Latest News Site

News

काशी विश्वनाथ मंदिर परिपथ में मिले मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली के -प्रो.मारूति तिवारी

June 24
17:35 2019

  – इन मंदिरों को प्रकाश में लाने का श्रेय पीएम मोदी को

वाराणसी, 24 जून(हि.स.)। निर्माणाधीन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिपथ (कोरिडोर) में पिछले एक वर्ष में लगभग 30 से अधिक मंदिर आवासीय घरों के भीतर से निकले हैं। सभी मंदिर शिव को समर्पित है, जिनके गर्भगृह में पर स्थापित शिवलिंग और गर्भ गृह के भीतर चारों ओर की भित्तियों पर सूर्य, विष्णु, गणेश एवं शक्ति की आकृतियां बनी हैं।
सोमवार को यह जानकारी बीएचयू के पूर्व एमिरेटस प्रोफेसर प्रो.मारुति नन्दन प्रसाद तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि घरों से मिले मंदिर सामान्यतः छोटे और लगभग दस से अधिक उदाहरणों में बडे़ आकार के हैं। जिनका निर्माण अहिल्याबाई निर्मित विश्वेश्वर यानि काशी विश्वनाथ मंदिर (1777 ई0) के बाद 18वीं शदी के उत्तरार्थ से 19वीं शदी ई0 के अन्त के मध्य हुआ है।
  उन्होंने बताया सभी मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली के हैं जिनमें तल योजना (प्लान) में अर्धमण्डप, मण्डप और गर्भगृह तथा सम्मुख योजना (एलिवेशन) में जगती, अधिष्ठान, जंघा (या मण्डोवर), वरण्ड और शिखर तथा सबसे उत्तर कलश तथा त्रिशूल है।
प्रो.तिवारी ने बताया कि मणिकर्णिका घाट के समीप 19वीं शदी ई. के उत्तरार्थ के एक मात्र मंदिर में ही बाहृयभित्तियों पर मूर्तियों का मनोहारी उकेरन हुआ है, जिनमें देव मूर्तियों के अतिरिक्त अप्सराओं (या पुन्तलिकाओं) एवं पशु पक्षी विशेषतः मयूर का सुन्दर अंकन देखा जा सकता है। कलात्मक दृष्टि से तथा स्थापत्य अलंकरण की दृष्टि से भी यही मंदिर विश्वनाथ परिपथ का सबसे सुन्दर मंदिर है। जिसमें गर्भगृह के बाहर सुन्दर तोरण एवं मयूरो का अलंकरण तथा बाहृय भित्तियों पर समुद्र मंथन, शेषशार्मी, विष्णु, कृष्ण द्वारा यमुना में स्नान करती गोपियों के वस्त्रों का हरण दृश्य, शिव बारात तथा विष्णु के अवतार स्वरुपों का अंकन शिल्पी की अभिव्यक्ति के सहज सामथ्र्य को व्यक्त करता है।
उन्होंने बताया कि स्थापत्य और शिल्प की दृष्टि से यह मंदिर मणिकर्णिकाघाट स्थित अमेठी के शिव मंदिर (19वीं शदी का पूर्वार्ध) के समान ही भव्य है, जबकि शिल्प रचना के विषय एवं प्रस्तुति रामनगर के दुर्गा या सुमेरु मंदिर (18वीं शदी का उत्तरार्थ) से नैकट्य दर्शाता है।
प्रो.तिवारी की मानें तो सरकारी विवरणों में विश्वनाथ मंदिर परिपथ के देवालयों को मौर्य एवं गुप्त काल का भी बदला दिया गया है, जबकि अभिलेख स्थापत्य एवं मूर्ति शैली के आधार पर निश्चित रुप से ये मंदिर 18वीं शदी ई0 के उत्तरार्थ से 19वीं शदी के अन्त के मध्य बने है। दो मंदिरों पर तो सम्वत् 1877 (1820 ई0) और सम्वत् 1899 (1842 ई0) के लेख उनका निश्चित निर्माण काल भी निर्धारित कर देते हैं। साथ ही इन दो लेखों में मंदिरो के क्रमशः विश्वेश्वर एवं रुदे्रश्वर नामों का भी उल्लेख हुआ है।
  उन्होंने बताया कि ललिता घाट के समीप परिपथ निर्माण में पंच पाण्डव मंदिर पंचायतन मंदिर है, जबकि परिपथ का एक अन्य मंदिर विश्वनाथ गली के विश्वेश्वर मंदिर के समान ही मुगल देवालयों वाला है। इन मंदिरों को प्रकाश में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी जी की विश्वनाथ मंदिर परिपथ योजना को जाता है जो एक और मणिकर्णिका घाट तो दूसरी ओर ललिता घाट से वर्तमान विश्वनाथ मंदिर को सीधे जोड़ देता है। उन्होंने अफसोस जाते हुए कहा कि हमारी धार्मिक आस्था के विरासत के उदाहरण इन मंदिरो को हमारे ही लोगों ने अपने घरों के बीच में कैद कर आस्था को आहत किया था।
[slick-carousel-slider design="design-6" centermode="true" slidestoshow="3"]

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Only registered users can comment.

Sponsored Ad

SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS

LATEST ARTICLES

    भारतीय एवं विश्व इतिहास में 05 जून की प्रमुख घटनाएं

भारतीय एवं विश्व इतिहास में 05 जून की प्रमुख घटनाएं

Read Full Article