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कुंभ 2019 : किन्नर अखाड़े की पेशवाई सब पर भारी

कुंभ 2019 : किन्नर अखाड़े की पेशवाई सब पर भारी
January 06
11:18 2019

प्रयागराज, 06 जनुअरी : प्रयागराज में दुनिया के सबसे बड़े आध्यामिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ से पहले रविवार को निकली किन्नरों की पेशवाई लोकप्रियता के लिहाज से सभी 13 अखाड़ों पर भारी पड़ी।

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किन्नरों के देवत्त यात्रा में दो लाख से अधिक जनसमुदाय ने सड़क के दोनों तरफ खड़े होकर पेशवाई का स्वागत किया। किन्नरों की देवत्त यात्रा के इंतजार में तड़के से ही बच्चे, बुजुर्ग और महिलायें कतारबद्ध होकर सड़क के दोनो ओर खड़े हो गये थे। यात्रा सुबह नौ बजे रामभवन से शुरू हुई।

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किन्नर अखाड़ा के आचार्य मांडेलस्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ऊंट पर सवार दोनो तरफ खड़े श्रद्धालुओ का झुक कर अभिवादन स्वीकार कर रहे है।

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के सभी अखाड़ों की पेशवाई में महामंडलेश्वर, मंडेलश्वर और महंत ट्रैक्टर के रथ पर सवार थे लेकिन किन्नर सफेद घोड़ो की बग्घी पर सवार थे और श्रद्धालुओं पर गले मे पहने फूलो की माला से फूल तोड़कर लूट रहे थे।

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सुरक्षा में चल रहे जवानों को भीड़ को नियंत्रण करने में पसीने बहाने पड़े।

कुम्भ को अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर उकेरने की डिजिटल पहल

दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ की महत्ता को अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर उजागर करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार जल्द ही कुम्भ मेला-2019 की वेबसाईट लांच करेगी।


आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि उत्तर प्रदेश की समृद्धशाली सांस्कृतिक परम्परा को देश के कलाकारों के अतिरिक्त रामलीला आदि के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां करायी जायेंगी। संस्कृति विभाग की यह पहल वेबसाईट के माध्यम से गतिमान होगी।

इस वेबसाईट के माध्यम से कुम्भ-2019 का इतिहास एवं भारतीय मिथक परम्परा को व्यापक रूप से प्रसारित किया जायेगा। कुम्भ मेले की सांस्कृतिक गतिविधियों को वेबसाईट के विभिन्न सोशल मीडिया चैनल तथा- फेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम आदि के माध्यम से संचालित किया जायेगा।

कुम्भ मेला-2019 की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं गतिविधियों के समय, स्थान एवं कलाकारों की जानकारी सभी दर्शकों को सहज रूप में प्राप्त हो सकेगी। इस वेबसाईट के माध्यम से प्रदेश के विविध अंचलों पर बनी डाक्यूमेन्ट्री फिल्मों का भी प्रसारण होगा। इस वेबसाईट पर कुम्भ मेले की 360 डिग्री वीडियो कवरेज, टाईम लैप्स और द्रोण कैमरा फुटेज को भी अवलोकित किया जा सकेगा।  सूत्रों ने बताया कि आॅनलाईन यूजर्स को कृत्रिम ज्ञान और विशिष्ट अनुभूति प्राप्त हो सकेगी। संस्कृति विभाग की डिजिटल ब्रान्डिग कार्यप्रणाली द्वारा कलाकारों और कला प्रेमियों को सोशल मीडिया के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर सम्पर्क एवं प्रोत्साहित किया जायेगा।

नागा संन्यासी भस्म और नदियों के रेत से संवारते हैं केश
कुम्भ मेले के दौरान सांस्कृतिक मंचों गंगा, यमुना, सरस्वती, त्रिवेणी एवं भारद्वाज पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां करायी जायेंगी जिसमें गंगा मंच की क्षमता दस हजार, यमुना मंच की क्षमता दो हजार तथा सरस्वती, त्रिवेणी और भारद्वाज मंचों की क्षमता एक-एक हजार व्यक्तियों की होगी। पूरे प्रयागराज के 20 स्थानों पर छोटे-छोटे मंच बनवाकर 45 दिवसीय कार्यक्रम में 35 दिवस लोक कलाकारों, नुक्कड़ नाटक, जादू, कठपुतली, लोक गीत, ढ़ोलक, सारंगी, बमरसिया आदि की प्रस्तुतियां करायी जायेंगी।

इसके अलावा पांच मंचों पर लोक, शास्त्रीय एवं उप शास्त्रीय परम्पराओं एवं लोकप्रिय संगीत के 450 दलों द्वारा प्रस्तुतियां की जायेंगीं जिसमें देश के सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व होगा। संस्कार भारती द्वारा नाटक एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।  कलाग्राम के अन्तर्गत देश के सात जोनल सांस्कृतिक केन्द्रों के माध्यम से पूरे देश के कलाकारों का संगम होगा जिससे सांस्कृतिक कुम्भ के अभूतपूर्व वातावरण का सृजन होगा जिसमें प्रत्येक प्रदेश और उत्तर प्रदेश के समस्त अंचलों के शास्त्रीय एवं लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।

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उन्होंने बताया कि कुम्भ मेले में पद्भ विभूषण राजन-साजन मिश्र, पद्मश्री गुलाबो का कालबेलिया, पद्म विभूषण राजा-राधा रेड्डी का कुचीपुड़ी, पद्मश्री मालिनी अवस्थी का लोकप्रिय गायन, राइजिंग स्टार की उत्कृष्ट जैकी की कलाकार मैथिली ठाकुर का भोजपुरी गायन, सारेगामा की रनर अप राधा श्रीवास्तव का भोजपुरी गायन, फिल्म स्टार और पद्मश्री के शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियाॅं, उषा मंगेशकर दल की प्रस्तुतियाॅं, राजू श्रीवास्तव एवं राजीव निगम का हास्य व्यंग, जोगिया बैण्ड सहित बन्दा बैरागी का राम-कृष्ण-शिव भजन, ब्रज की कुंजलता मिश्रा के कृष्ण नृत्य के साथ-साथ कबीर, तुलसी और सूर जैसे युगद्रष्टा कवियों की कालजयी कृतियों का गायन प्रस्तुत किया जायेगा।  सूत्रों नं बताया कि कुम्भ मेला-2019 में रामायण की कथा को मंचित करने के लिए 11 देशों की रामलीला मण्डलियों यथा-हिन्दू विश्वविद्यालय-इण्डोनेशिया, बाल रामदीला ग्रुप हिन्दू प्रचार केन्द्र-पोर्ट आफ स्पेन-त्रिनिदाद, परफारमिंग आर्ट्स डिपार्टमेन्ट-थाईलैण्ड सरकार-थाईलैण्ड, पद्मश्री गेन्नादी पिचनिकोव मेमोरियल दिशा रामलीला-मास्को-रूस, पद्मश्री रामली इब्राहिम-मलेशिया, विजुअल एण्ड परफारमिंग आर्टस-श्रीलंका, रामायण सेन्टर-माॅरीशस, स्टिचंग रामलीला-सूरीनाम, जनकपुर धाम रामलीला समिति-नेपाल, विवेकानन्द सांस्कृतिक केन्द्र-बांग्लादेश, श्रीराम भारती कला केन्द्र-नई दिल्ली का प्रदर्शन भी किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि कुम्भ तथा प्रयाग के इतिहास पर आधारित अभिलेख प्रदर्शनी भी जनसामान्य हेतु लगायी जायेगी जिसमें सन् 1861, 1870 और 1882 में आयोजित माघ मेला/कुम्भ मेला सम्बन्धी रिपोर्ट तथा अखाड़ों एवं तीर्थ यात्रियों के विवरण के सम्बन्धित अभिलेख प्रदर्शित किये जायेंगे।

तीर्थराज प्रयाग एवं त्रिवेणी संगम की महत्ता तथा गंगा-यमुना की स्तुति पर आधारित संस्कृत भाषा की पाण्डुलिपि प्रदर्शित की जायेगी। अबुल फजल द्वारा संस्कृत से फारसी में अनुवादित रज्मनामा (महाभारत) से समुद्र मंथन की कथा का उल्लेख करने वाले महत्वपूर्ण अभिलेख प्रदर्शित किये जायेंगें।

कुम्भ मेले में अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी ‘कला के रंग कुम्भ के संग’ में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, नई दिल्ली, आसाम, चण्डीगढ़, उत्तराखण्ड आदि के 275 कलाकारों की 491 कलाकृतियों के छायाचित्र प्रदशित किये जायेंगे। इसके साथ ही अखिल भारतीय छायाचित्र प्रदर्शनी भी लगायी जायेगी।

पूरे कुम्भ को चतुर्दिक-राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जायेगा।

एजेंसी

 

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