कोरोनावायरस के नए प्रकार – वैक्सीनों की कारगरता पर सवाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने आगाह किया है कि कोरोनावायरस के नए प्रकारों के फैलाव से चिन्ता व्याप्त है और ये भी सवाल उठ रहे हैं कि संक्रमण की रोकथाम के लिये मौजूदा टीके कितना कारगर साबित होंगे. उन्होंने कहा कि वैक्सीनों में आवश्यकता के अनुरूप बदलाव किये जाने होंगे ताकि कोविड-19 की रोकथाम के लिये टीकों की कारगरता क़ायम रखने में मदद मिल सके. 

यूएन स्वास्थ्य एजेन्सी के महानिदेशक डॉक्टर घेबरेयेसस ने सोमवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए ध्यान दिलाया कि वायरस के नए प्रकारों के सामने आने से मौजूदा वैक्सीनों के उनके ख़िलाफ़ असरदार साबित होने पर सवाल खड़े हो गये हैं. 

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/NZKuARdHIP— World Health Organization (WHO) (@WHO) February 8, 2021

उन्होंने ऑक्सफ़र्ड-एस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन का उदाहरण दिया जोकि गम्भीर कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम में असरदार नज़र आ रही वैक्सीनों में शामिल है. 
“कल, दक्षिण अफ़्रीका ने ऑक्सफ़र्ड-एस्ट्रेज़ेनेका वैक्सीन के टीकाकरण पर अस्थाई रोक लगाये जाने की घोषणा की है.”
यह क़दम एक अध्ययन के बाद उठाया गया है जो दर्शाता है कि दक्षिण अफ़्रीका में कोरोनावायरस के जिस नए प्रकार की शिनाख़्त हुई थी, उसके मामूली या सामान्य संक्रमण की रोकथाम में वैक्सीन कम ही असर दिखा पाई है 
महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से चिन्ताजनक ख़बर है, लेकिन यह भी ध्यान में रखा जाना ज़रूरी है कि इस परीक्षण में सीमित संख्या में नमूनों की जाँच की गई, और शोध में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी युवा व आम तौर पर स्वस्थ थे. 
उन्होंने कहा कि यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि गम्भीर बीमारियों की रोकथाम में वैक्सीन कारगर है या फिर नहीं. 
“ये नतीजे एक बार फिर ध्यान दिलाते हैं कि वायरस के फैलाव को घटाने के लिये हमें साबित हो चुके बुनियादी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की मदद से हरसम्भव प्रयास करने की आवश्यकता है.”
वायरस का नया प्रकार
यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक बहुत से देशों को वायरस पर क़ाबू पाने में सफलता मिल रही है, उनमें भी जहाँ इसका नया प्रकार फैल रहा है. 
उन्होंने आगाह किया है कि वैक्सीन निर्माताओं को वायरस के बदलते प्रकारों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में टीकों में बदलाव करते रहना होगा.
“हम जानते हैं कि वायरस अपना रूप बदलते हैं, और हम जानते हैं कि वैक्सीनों को कारगर बनाये रखने के लिये हमें ज़रूरत के अनुरूप बदलाव के लिये तैयार रहना है.”
कोविड-19 महामारी के वाहक वायरस के प्रकारों की निगरानी व समीक्षा के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास एक ढाँचा मौजूद है. 
महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि देश वायरस के इन बदलते प्रकारों के बारे में यूएन एजेंसी को सूचित करना जारी रखें. 
इससे उनके असर की निगरानी करने और आवश्यकता के अनुसार देशों को सलाह दे पाना सम्भव हो सकेगा. 
इसी प्रणाली के तहत वैक्सीन तैयार करने वाले विनिर्माताओं और देशों को दिशानिर्देश उपलब्ध कराये जाएँगे ताकि वायरस के नए प्रकारों के सम्पर्क में आने से पहले ही लोगों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके. , विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने आगाह किया है कि कोरोनावायरस के नए प्रकारों के फैलाव से चिन्ता व्याप्त है और ये भी सवाल उठ रहे हैं कि संक्रमण की रोकथाम के लिये मौजूदा टीके कितना कारगर साबित होंगे. उन्होंने कहा कि वैक्सीनों में आवश्यकता के अनुरूप बदलाव किये जाने होंगे ताकि कोविड-19 की रोकथाम के लिये टीकों की कारगरता क़ायम रखने में मदद मिल सके. 

यूएन स्वास्थ्य एजेन्सी के महानिदेशक डॉक्टर घेबरेयेसस ने सोमवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए ध्यान दिलाया कि वायरस के नए प्रकारों के सामने आने से मौजूदा वैक्सीनों के उनके ख़िलाफ़ असरदार साबित होने पर सवाल खड़े हो गये हैं. 

उन्होंने ऑक्सफ़र्ड-एस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन का उदाहरण दिया जोकि गम्भीर कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम में असरदार नज़र आ रही वैक्सीनों में शामिल है. 

“कल, दक्षिण अफ़्रीका ने ऑक्सफ़र्ड-एस्ट्रेज़ेनेका वैक्सीन के टीकाकरण पर अस्थाई रोक लगाये जाने की घोषणा की है.”

यह क़दम एक अध्ययन के बाद उठाया गया है जो दर्शाता है कि दक्षिण अफ़्रीका में कोरोनावायरस के जिस नए प्रकार की शिनाख़्त हुई थी, उसके मामूली या सामान्य संक्रमण की रोकथाम में वैक्सीन कम ही असर दिखा पाई है 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से चिन्ताजनक ख़बर है, लेकिन यह भी ध्यान में रखा जाना ज़रूरी है कि इस परीक्षण में सीमित संख्या में नमूनों की जाँच की गई, और शोध में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी युवा व आम तौर पर स्वस्थ थे. 

उन्होंने कहा कि यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि गम्भीर बीमारियों की रोकथाम में वैक्सीन कारगर है या फिर नहीं. 

“ये नतीजे एक बार फिर ध्यान दिलाते हैं कि वायरस के फैलाव को घटाने के लिये हमें साबित हो चुके बुनियादी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की मदद से हरसम्भव प्रयास करने की आवश्यकता है.”

वायरस का नया प्रकार

यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक बहुत से देशों को वायरस पर क़ाबू पाने में सफलता मिल रही है, उनमें भी जहाँ इसका नया प्रकार फैल रहा है. 

उन्होंने आगाह किया है कि वैक्सीन निर्माताओं को वायरस के बदलते प्रकारों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में टीकों में बदलाव करते रहना होगा.

“हम जानते हैं कि वायरस अपना रूप बदलते हैं, और हम जानते हैं कि वैक्सीनों को कारगर बनाये रखने के लिये हमें ज़रूरत के अनुरूप बदलाव के लिये तैयार रहना है.”

कोविड-19 महामारी के वाहक वायरस के प्रकारों की निगरानी व समीक्षा के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास एक ढाँचा मौजूद है. 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि देश वायरस के इन बदलते प्रकारों के बारे में यूएन एजेंसी को सूचित करना जारी रखें. 

इससे उनके असर की निगरानी करने और आवश्यकता के अनुसार देशों को सलाह दे पाना सम्भव हो सकेगा. 

इसी प्रणाली के तहत वैक्सीन तैयार करने वाले विनिर्माताओं और देशों को दिशानिर्देश उपलब्ध कराये जाएँगे ताकि वायरस के नए प्रकारों के सम्पर्क में आने से पहले ही लोगों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके. 

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