कोरोनावायरस वैक्सीन, एक वैश्विक सार्वजनिक भलाई – यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19, दुनिया के लिये असाधारण पीड़ा की वजह बनी है, और इस पर क़ाबू पाने के लिये, जीवनरक्षक कोविड-19 वैक्सीनों को वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखा जाना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अनेक देशों में, जंगल में आग की तरह फैल रहे वायरस को रोकने का कोई अन्य रास्ता नहीं है.

यूएन प्रमुख ने शुक्रवार को लन्दन से वीडियो लिन्क के ज़रिये पत्रकारों को जानकारी देते हुए यह बात कही है, जहाँ वो अग्रणी औद्योगिक देशों के समूह, जी-7 की ब्रिटेन में हो रही बैठक में शिरकत के लिये पहुँचे हैं.

At a press briefing today, @antonioguterres outlines his expectations for the @G7 which he will attend this weekend. Full transcript 👇👇👇 #G7Cornwall #G7UK https://t.co/EoP2m2wzbK pic.twitter.com/xX64OeiTaC— UN Spokesperson (@UN_Spokesperson) June 11, 2021

उन्होंने न्यायसंगत ढँग से, सामूहिक रूप से टीकाकरण पर बल दिया है और ध्यान दिलाया है कि वैक्सीन की ख़ुराकों को सभी के लिये उपलब्ध बनाया जाना होगा.
“यह ना सिर्फ़ निष्पक्षता और न्याय का मामला है, बल्कि दक्षता का भी सवाल है.”
महासचिव ने कहा कि विकासशील देशों में जंगल में आग की तरह फैल रहे वायरस को हराने का कोई अन्य रास्ता नहीं है.
उन्होंने कहा कि वायरस के अपना रूप व प्रकार बदलने का भी ख़तरा है, और सबसे ख़तरनाक वायरस बच जाते हैं, तेज़ी से फैलते हैं और अन्तत: वैक्सीन को बेअसर कर देते हैं.
उन्होंने क्षोभ जताते हुए कहा कि अब तक टीकाकरण कार्यक्रम, विषमतापूर्ण साबित हुए हैं.
यूएन प्रमुख के मुताबिक जी-7 समूह की बैठक से पहले, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैन्क, विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व व्यापार संगठन द्वारा, विकासशील देशों में वैक्सीन वितरण के लिये 50 अरब डॉलर की योजना को पेश किया जाना, उत्साहजनक क़दम है.  
महासचिव गुटेरेश ने अमेरिका और ब्रिटेन की उन घोषणाओं का भी स्वागत किया है जिनमें वैक्सीन की 50 करोड़ से अधिक ख़ुराकों को उन देशों में दान करने की बात कही गई है, जो उसका ख़र्चा वहन करने में सक्षम नहीं हैं.
महासचिव ने, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन की उस घोषणा की भी सराहना की है जिसमें उम्मीद जताई गई है कि जी-7 समूह, शिखर बैठक के समापन पर वैक्सीन की एक अरब ख़ुराकें प्रदान करने का संकल्प लेगा.  
उन्होंने ध्यान दिलाया कि दुनिया, वायरस के ख़िलाफ़ युद्ध कर रही है, और कोविड-19 महामारी असाधारण पीड़ा का कारण बनी है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरी क्षति हुई है.
उन्होंने इस वायरस को हराने के लिये अपने “हथियारों” को मज़बूत बनाने और वैश्विक टीकाकरण योजना को मूर्त रूप देने का आहवान किया है.
महासचिव गुटेरेश ने उम्मीद जताई है कि जी-7 समूह की बैठक से भविष्य में नए और महत्वपूर्ण निर्णयों को लिये जाने का रास्ता खुलेगा., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19, दुनिया के लिये असाधारण पीड़ा की वजह बनी है, और इस पर क़ाबू पाने के लिये, जीवनरक्षक कोविड-19 वैक्सीनों को वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखा जाना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अनेक देशों में, जंगल में आग की तरह फैल रहे वायरस को रोकने का कोई अन्य रास्ता नहीं है.

यूएन प्रमुख ने शुक्रवार को लन्दन से वीडियो लिन्क के ज़रिये पत्रकारों को जानकारी देते हुए यह बात कही है, जहाँ वो अग्रणी औद्योगिक देशों के समूह, जी-7 की ब्रिटेन में हो रही बैठक में शिरकत के लिये पहुँचे हैं.

At a press briefing today, @antonioguterres outlines his expectations for the @G7 which he will attend this weekend. Full transcript 👇👇👇 #G7Cornwall #G7UK https://t.co/EoP2m2wzbK pic.twitter.com/xX64OeiTaC

— UN Spokesperson (@UN_Spokesperson) June 11, 2021

उन्होंने न्यायसंगत ढँग से, सामूहिक रूप से टीकाकरण पर बल दिया है और ध्यान दिलाया है कि वैक्सीन की ख़ुराकों को सभी के लिये उपलब्ध बनाया जाना होगा.

“यह ना सिर्फ़ निष्पक्षता और न्याय का मामला है, बल्कि दक्षता का भी सवाल है.”

महासचिव ने कहा कि विकासशील देशों में जंगल में आग की तरह फैल रहे वायरस को हराने का कोई अन्य रास्ता नहीं है.

उन्होंने कहा कि वायरस के अपना रूप व प्रकार बदलने का भी ख़तरा है, और सबसे ख़तरनाक वायरस बच जाते हैं, तेज़ी से फैलते हैं और अन्तत: वैक्सीन को बेअसर कर देते हैं.

उन्होंने क्षोभ जताते हुए कहा कि अब तक टीकाकरण कार्यक्रम, विषमतापूर्ण साबित हुए हैं.

यूएन प्रमुख के मुताबिक जी-7 समूह की बैठक से पहले, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैन्क, विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व व्यापार संगठन द्वारा, विकासशील देशों में वैक्सीन वितरण के लिये 50 अरब डॉलर की योजना को पेश किया जाना, उत्साहजनक क़दम है.  

महासचिव गुटेरेश ने अमेरिका और ब्रिटेन की उन घोषणाओं का भी स्वागत किया है जिनमें वैक्सीन की 50 करोड़ से अधिक ख़ुराकों को उन देशों में दान करने की बात कही गई है, जो उसका ख़र्चा वहन करने में सक्षम नहीं हैं.

महासचिव ने, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन की उस घोषणा की भी सराहना की है जिसमें उम्मीद जताई गई है कि जी-7 समूह, शिखर बैठक के समापन पर वैक्सीन की एक अरब ख़ुराकें प्रदान करने का संकल्प लेगा.  

उन्होंने ध्यान दिलाया कि दुनिया, वायरस के ख़िलाफ़ युद्ध कर रही है, और कोविड-19 महामारी असाधारण पीड़ा का कारण बनी है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरी क्षति हुई है.

उन्होंने इस वायरस को हराने के लिये अपने “हथियारों” को मज़बूत बनाने और वैश्विक टीकाकरण योजना को मूर्त रूप देने का आहवान किया है.

महासचिव गुटेरेश ने उम्मीद जताई है कि जी-7 समूह की बैठक से भविष्य में नए और महत्वपूर्ण निर्णयों को लिये जाने का रास्ता खुलेगा.

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