कोरोनावायरस संकट: घरेलू कर्मचारियों के लिये कठिन हुए हालात

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने कहा है कि  कोविड-19 के कारण, दुनिया भर में घरेलू कर्मचारियो पर गहरा असर हुआ है. उनके रोज़गार ख़त्म हो गए हैं और अन्य सैक्टरों की तुलना में कामकाजी घण्टों में भी ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक गाय राइडर ने सचेत किया किया है कि श्रम क़ानूनों और सामाजिक संरक्षा उपायों के सिलसिले में प्रगति हुई है, मगर बहुत से देशों में, अहम सेवाएँ प्रदान करने वाले ये कर्मचारी इतनी निर्बलता का शिकार कभी नहीं हुए.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन  ने घरेलू कर्मचारियों के सम्बन्ध में एक अहम सन्धि के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर चिन्ता जताई कि कोविड-19 ने श्रम बाज़ार में घरेलू कर्मचारियों की निरन्तर क़ायम मुश्किलों को उजागर कर दिया है. 
यूएन एजेंसी के प्रमुख ने कहा, “कार्यबल के अन्य हिस्सों की तुलना में, इन कर्मचारियों के कहीं ज़्यादा संख्या में रोज़गार ख़त्म हुए हैं, या उनके कामकाजी घण्टों में अधिक गिरावट आई है.”

The #COVID19 pandemic has highlighted the vital role that domestic #workers play in supporting the care needs of households, as well as the vulnerability they face earning a living behind closed doors. Is #decentwork now a reality for them?More info: https://t.co/NIaYomQGbL pic.twitter.com/DP5poG0pOy— International Labour Organization (@ilo) June 15, 2021

यूएन श्रम एजेंसी के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में अधिकाँश लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई देशों में, महामारी से पूर्व के स्तर की तुलना में, घरेलू कर्मचारियों की संख्या में 25 से 50 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. 
अधिकाँश योरोपीय देशों और कैनेडा व दक्षिण अफ़्रीका में, घरेलू कर्मचारियों के रोज़गारों में पाँच से 20 फ़ीसदी तक की कमी देखी गई. 
जिन 20 देशों में हालात की समीक्षा की गई है, उनमें से 13 देशों में इन नुक़सान के परिणामस्वरूप, कामकाजी घण्टों में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है. कोरोनावयारस संकट का घरेलू कर्मचारियों पर भी भारी असर हुआ है. 
यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि देशों को कार्रवाई की आवश्यकता है – हर दस में से 8 घरेलू कर्मचारी के पास अनौपचारिक रोज़गार है जिसकी वजह से उनके क़ानूनी व संरक्षा उपायों का अभाव है.  
उनकी निर्बलताएँ ख़राब कामकाजी परिस्थितियों के कारण भी गहरी हो गई है. अनेक कर्मचारियों को बन्द दरवाज़ों के भीतर काम करना पड़ता है और उनके पास कहीं और सुनवाई का ज़रिया नहीं है. 
अक्सर घरेलू कर्मचारी अपने नियोक्ता (Employers) के साथ रहते है और रोज़गार का साधन चले जाने के बाद, उनका देश में दर्जा प्रभावित हो सकता है.
ब्राज़ील, घरेलू कर्मचारियों के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है. यहाँ हर 10 में से सात कर्मचारी अनौपचारिक रूप से काम करते हैं.  
यूएन श्रम एजेंसी में विशेषज्ञ क्लेयर हॉबडेन ने बताया कि जब कोविड-19 महामारी शुरू हुई तो 40 प्रतिशत से भी कम घरेलू कर्मचारियों के पास सामाजिक संरक्षा उपायों तक पहुँच थी.  
सामाजिक सुरक्षा का अभाव
इसके मद्देनज़र, उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि ब्राज़ील में घरेलू कर्मचारियों के कामकाज को औपचारिक रूप देना बेहद आवश्यक है. 
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के साढ़े सात करोड़ घरेलू कर्मचारी हैं, यानि विश्व में रोज़गार प्राप्त हर 25 व्यक्तियों में एक व्यक्ति. इनमें तीन-चौथाई से अधिक महिलाएँ हैं.   
महिला घरेलू कर्मचारियों की सबसे बड़ी संख्या, लातिन अमेरिका और कैरीबियाई देशों में है, जोकि 91 प्रतिशत और 89 फ़ीसदी है. योरोप, मध्य एशिया और अमेरिकी क्षेत्र में, घरेलू कर्मचारियों के कार्यबल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक है.
वहीं अरब देशों व उत्तर अफ़्रीका, पुरुष कर्मचारियों की संख्या अधिक है जबकि दक्षिणी एशिया में यह लगभग बराबर है. 
वर्ष 2011 में, घरेलू कर्मचारियों के सम्बन्ध में ऐतिहासिक सन्धि के पारित होने के बाद, यूएन एजेंसी के 187 सदस्य देशों में से 32 ने इस पर मुहर लगाई है. 
महानिदेशक राइडर ने कहा कि पहले की तुलना में 16 प्रतिशत ज़्यादा कर्मचारी, श्रम क़ानून संरक्षण के दायरे में हैं. इसके बावजूद, सैक्टर का 36 प्रतिशत हिस्सा अब भी इसके दायरे से पूरी तरह बाहर है और एशिया-प्रशान्त व अरब देशों में यह खाई ज़्यादा बड़ी है. 
यूएन श्रम एजेंसी ने आगाह किया है कि जिन देशों में श्रम व सामाजिक संरक्षा क़ानून उपलब्ध भी हैं, वहाँ उन्हें प्रभावी ढँग से लागू नहीं किया गया है.
इस मुद्दे पर यूएन संगठन की ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि इस क्षेत्र में, हर पाँच में से सिर्फ़ एक कर्मचारी को ही कारगर ढँग से, रोज़गार सम्बन्धी, सामाजिक संरक्षा कवरेज हासिल है.  
श्रम संगठन के प्रमुख ने ध्यान दिलाया है कि घरेलू कर्मचारी, आर्थिक ढाँचे का एक अहम हिस्सा हैं और उनके अधिकारों को बढ़ावा दिया जाना होगा. , अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने कहा है कि  कोविड-19 के कारण, दुनिया भर में घरेलू कर्मचारियो पर गहरा असर हुआ है. उनके रोज़गार ख़त्म हो गए हैं और अन्य सैक्टरों की तुलना में कामकाजी घण्टों में भी ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक गाय राइडर ने सचेत किया किया है कि श्रम क़ानूनों और सामाजिक संरक्षा उपायों के सिलसिले में प्रगति हुई है, मगर बहुत से देशों में, अहम सेवाएँ प्रदान करने वाले ये कर्मचारी इतनी निर्बलता का शिकार कभी नहीं हुए.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन  ने घरेलू कर्मचारियों के सम्बन्ध में एक अहम सन्धि के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर चिन्ता जताई कि कोविड-19 ने श्रम बाज़ार में घरेलू कर्मचारियों की निरन्तर क़ायम मुश्किलों को उजागर कर दिया है. 

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने कहा, “कार्यबल के अन्य हिस्सों की तुलना में, इन कर्मचारियों के कहीं ज़्यादा संख्या में रोज़गार ख़त्म हुए हैं, या उनके कामकाजी घण्टों में अधिक गिरावट आई है.”

The #COVID19 pandemic has highlighted the vital role that domestic #workers play in supporting the care needs of households, as well as the vulnerability they face earning a living behind closed doors. Is #decentwork now a reality for them?

More info: https://t.co/NIaYomQGbL pic.twitter.com/DP5poG0pOy

— International Labour Organization (@ilo) June 15, 2021

यूएन श्रम एजेंसी के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में अधिकाँश लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई देशों में, महामारी से पूर्व के स्तर की तुलना में, घरेलू कर्मचारियों की संख्या में 25 से 50 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. 

अधिकाँश योरोपीय देशों और कैनेडा व दक्षिण अफ़्रीका में, घरेलू कर्मचारियों के रोज़गारों में पाँच से 20 फ़ीसदी तक की कमी देखी गई. 

जिन 20 देशों में हालात की समीक्षा की गई है, उनमें से 13 देशों में इन नुक़सान के परिणामस्वरूप, कामकाजी घण्टों में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है. कोरोनावयारस संकट का घरेलू कर्मचारियों पर भी भारी असर हुआ है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि देशों को कार्रवाई की आवश्यकता है – हर दस में से 8 घरेलू कर्मचारी के पास अनौपचारिक रोज़गार है जिसकी वजह से उनके क़ानूनी व संरक्षा उपायों का अभाव है.  

उनकी निर्बलताएँ ख़राब कामकाजी परिस्थितियों के कारण भी गहरी हो गई है. अनेक कर्मचारियों को बन्द दरवाज़ों के भीतर काम करना पड़ता है और उनके पास कहीं और सुनवाई का ज़रिया नहीं है. 

अक्सर घरेलू कर्मचारी अपने नियोक्ता (Employers) के साथ रहते है और रोज़गार का साधन चले जाने के बाद, उनका देश में दर्जा प्रभावित हो सकता है.

ब्राज़ील, घरेलू कर्मचारियों के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है. यहाँ हर 10 में से सात कर्मचारी अनौपचारिक रूप से काम करते हैं.  

यूएन श्रम एजेंसी में विशेषज्ञ क्लेयर हॉबडेन ने बताया कि जब कोविड-19 महामारी शुरू हुई तो 40 प्रतिशत से भी कम घरेलू कर्मचारियों के पास सामाजिक संरक्षा उपायों तक पहुँच थी.  

सामाजिक सुरक्षा का अभाव

इसके मद्देनज़र, उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि ब्राज़ील में घरेलू कर्मचारियों के कामकाज को औपचारिक रूप देना बेहद आवश्यक है. 

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के साढ़े सात करोड़ घरेलू कर्मचारी हैं, यानि विश्व में रोज़गार प्राप्त हर 25 व्यक्तियों में एक व्यक्ति. इनमें तीन-चौथाई से अधिक महिलाएँ हैं.   

महिला घरेलू कर्मचारियों की सबसे बड़ी संख्या, लातिन अमेरिका और कैरीबियाई देशों में है, जोकि 91 प्रतिशत और 89 फ़ीसदी है. योरोप, मध्य एशिया और अमेरिकी क्षेत्र में, घरेलू कर्मचारियों के कार्यबल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक है.

वहीं अरब देशों व उत्तर अफ़्रीका, पुरुष कर्मचारियों की संख्या अधिक है जबकि दक्षिणी एशिया में यह लगभग बराबर है. 

वर्ष 2011 में, घरेलू कर्मचारियों के सम्बन्ध में ऐतिहासिक सन्धि के पारित होने के बाद, यूएन एजेंसी के 187 सदस्य देशों में से 32 ने इस पर मुहर लगाई है. 

महानिदेशक राइडर ने कहा कि पहले की तुलना में 16 प्रतिशत ज़्यादा कर्मचारी, श्रम क़ानून संरक्षण के दायरे में हैं. इसके बावजूद, सैक्टर का 36 प्रतिशत हिस्सा अब भी इसके दायरे से पूरी तरह बाहर है और एशिया-प्रशान्त व अरब देशों में यह खाई ज़्यादा बड़ी है. 

यूएन श्रम एजेंसी ने आगाह किया है कि जिन देशों में श्रम व सामाजिक संरक्षा क़ानून उपलब्ध भी हैं, वहाँ उन्हें प्रभावी ढँग से लागू नहीं किया गया है.

इस मुद्दे पर यूएन संगठन की ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि इस क्षेत्र में, हर पाँच में से सिर्फ़ एक कर्मचारी को ही कारगर ढँग से, रोज़गार सम्बन्धी, सामाजिक संरक्षा कवरेज हासिल है.  

श्रम संगठन के प्रमुख ने ध्यान दिलाया है कि घरेलू कर्मचारी, आर्थिक ढाँचे का एक अहम हिस्सा हैं और उनके अधिकारों को बढ़ावा दिया जाना होगा. 

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