कोरोनावायरस संकट: 90 फ़ीसदी देशों में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान जारी

वैश्विक महामारी कोविड-19 को एक वर्ष से भी ज़्यादा समय बीतने के बावजूद, दुनिया के 90 फ़ीसदी देशो में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में उत्पन्न व्यवधान अब भी जारी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नए सर्वेक्षण के नतीजों को पेश करते हुए कहा है कि वर्ष 2020 में यह सर्वे पहली बार कराया गया था, लेकिन उसके बाद से अब तक हालात में कोई ठोस बदलाव नज़र नहीं आया है.

हालांकि, प्रगति के कुछ संकेत नज़र आ रहे हैं. जिन देशों में वर्ष 2020 में जब यह सर्वेक्षण कराया गया, उनमें, औसतन, लगभग 50 फ़ीसदी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हुई थीं. 

Over one year into the #COVID19 pandemic, about 9⃣0⃣% of countries surveyed still report one or more disruptions to essential health services. Major efforts are required to restore and strengthen services in all countries.👉 https://t.co/P34xPKY1Io pic.twitter.com/UYDQPX67Vw— World Health Organization (WHO) (@WHO) April 23, 2021

वर्ष 2021 के पहले तीन महीनों में यह आँकड़ा घटकर लगभग 33 फ़ीसदी रह गया है.
महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओँ में आये व्यवधान से निपटने के लिये बहुत से देश प्रयास कर रहे हैं. इनमें जनता को सेवा मुहैया कराये जाने के तरीक़ों में आने वाले बदलावों और सुरक्षित ढँग से स्वास्थ्य देखभाल हासिल करने के बारे में सूचित किया जाना शामिल है. 
साथ ही, उन मरीज़ों को शिनाख़्त के बाद प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्हें सेवा की तत्काल आवश्यकता है. 
आधे से ज़्यादा संख्या में देशों का कहना है कि स्वास्थ्य कार्यबल को मज़बूती प्रदान करने के लिये अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की गई है. 
मरीज़ों को अन्य देखभाल केन्द्रों में भेजा गया है और सेवा मुहैया कराने के लिये वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया गया है. 
इन प्रयासों के तहत, घर आधारित सेवाएँ प्रदान करना, उपचारों के लिये अनेक महीनों के नुस्ख़े लिखे जाना और घर बैठकर ही परामर्श हासिल किये जाने के इस्तेमाल को बढ़ाना है. 
विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझीदार संगठन, स्वास्थ्य प्रणालियों के समक्ष पेश आई इन चुनौतियों का सामना करने के लिये हरसम्भव मदद प्रदान कर रहे हैं. 
साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल ढाँचे को मज़बूती दी जा रही है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के दायरे को आगे बढ़ाने के लिये प्रयास हो रहे हैं. 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “यह देखना उत्साहजनक है कि देश अपनी अहम स्वास्थ्य सेवाओँ को फिर से बहाल कर रहे हैं, मगर अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.”
मुश्किल हालात बरक़रार
देशों को, कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई के दौरान, अन्य स्वास्थ्य सेवाओँ पर होने उसके असर पर महत्वपूर्ण निर्णयों को लेना पड़ रहा है. 
कोविड-19 के लिये कर्मचारियों की पुनर्तैनाती की गई है और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं व केन्द्रों को अस्थाई रूप से बन्द किया गया है. 
नए कर्मचारियों की भर्ती के बावजूद, 66 प्रतिशत देशों में सेवाओं में व्यवधान आने की वजह स्वास्थ्य कार्यबल से सम्बन्धित कारण हैं.  
एक-तिहाई से अधिक देशों में सप्लाई चेन में भी व्यवधान आया है, जिससे महत्वपूर्ण दवाओं, निदानों और निजी बचाव उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हुई है. 
आधे से ज़्यादा संख्या में देशों में, मरीज़ संक्रमण के भय और भरोसे की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल के लिये नहीं आ रहे हैं, जिससे सेवाओं में व्यवधान आया है. 43 प्रतिशत देशों में व्यवधान की वजह वित्तीय चुनौतियों को बताया गया है. 
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के आँकड़े दर्शाते हैं कि लाखों लोग अब भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल को हासिल नहीं कर पा रहे हैं. करीब पचास फ़ीसदी देशों ने बताया कि दैनिक प्राथमिक देखभाल और सबसे अहम स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबन्धन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. 
लम्बे समय से चली आ रही स्वास्थ्य अवस्थाओं के लिये देखभाल, पुनर्वास और दर्दनिवारक देखभाल सेवाओँ में भी व्यवधान आया है. 
20 फ़ीसदी देशों का कहना है कि जीवनदायी आपातसेवा, महत्वपूर्ण सर्जरी में अब भी व्यवधान है. सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक मानसिक स्नायुतन्त्र सम्बन्धी, टीबी, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, कैंसर स्क्रीनिंग सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं. 
इसके अलावा, अन्य ग़ैर-संचारी रोगों जैसेकि उच्चरक्तचाप, डायबिटीज़, परिवार नियोजन, गर्भ-निरोधक, दाँतों और कुपोषण सम्बन्धी सेवाओं पर भी असर हुआ है.
एक-तिहाई से अधिक देशों ने कहा है कि टीकाकरण सेवाएँ में अब भी व्यवधान है, मगर वर्ष 2020 के स्तर की तुलना में इसमें थोड़ी गिरावट आई है. 
संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ने से उपजी चुनौती से निपटने के लिये देशों को समर्थन जारी रहेगा. , वैश्विक महामारी कोविड-19 को एक वर्ष से भी ज़्यादा समय बीतने के बावजूद, दुनिया के 90 फ़ीसदी देशो में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में उत्पन्न व्यवधान अब भी जारी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नए सर्वेक्षण के नतीजों को पेश करते हुए कहा है कि वर्ष 2020 में यह सर्वे पहली बार कराया गया था, लेकिन उसके बाद से अब तक हालात में कोई ठोस बदलाव नज़र नहीं आया है.

हालांकि, प्रगति के कुछ संकेत नज़र आ रहे हैं. जिन देशों में वर्ष 2020 में जब यह सर्वेक्षण कराया गया, उनमें, औसतन, लगभग 50 फ़ीसदी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हुई थीं. 

वर्ष 2021 के पहले तीन महीनों में यह आँकड़ा घटकर लगभग 33 फ़ीसदी रह गया है.

महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओँ में आये व्यवधान से निपटने के लिये बहुत से देश प्रयास कर रहे हैं. इनमें जनता को सेवा मुहैया कराये जाने के तरीक़ों में आने वाले बदलावों और सुरक्षित ढँग से स्वास्थ्य देखभाल हासिल करने के बारे में सूचित किया जाना शामिल है. 

साथ ही, उन मरीज़ों को शिनाख़्त के बाद प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्हें सेवा की तत्काल आवश्यकता है. 

आधे से ज़्यादा संख्या में देशों का कहना है कि स्वास्थ्य कार्यबल को मज़बूती प्रदान करने के लिये अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की गई है. 

मरीज़ों को अन्य देखभाल केन्द्रों में भेजा गया है और सेवा मुहैया कराने के लिये वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया गया है. 

इन प्रयासों के तहत, घर आधारित सेवाएँ प्रदान करना, उपचारों के लिये अनेक महीनों के नुस्ख़े लिखे जाना और घर बैठकर ही परामर्श हासिल किये जाने के इस्तेमाल को बढ़ाना है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझीदार संगठन, स्वास्थ्य प्रणालियों के समक्ष पेश आई इन चुनौतियों का सामना करने के लिये हरसम्भव मदद प्रदान कर रहे हैं. 

साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल ढाँचे को मज़बूती दी जा रही है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के दायरे को आगे बढ़ाने के लिये प्रयास हो रहे हैं. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “यह देखना उत्साहजनक है कि देश अपनी अहम स्वास्थ्य सेवाओँ को फिर से बहाल कर रहे हैं, मगर अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.”

मुश्किल हालात बरक़रार

देशों को, कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई के दौरान, अन्य स्वास्थ्य सेवाओँ पर होने उसके असर पर महत्वपूर्ण निर्णयों को लेना पड़ रहा है. 

कोविड-19 के लिये कर्मचारियों की पुनर्तैनाती की गई है और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं व केन्द्रों को अस्थाई रूप से बन्द किया गया है. 

नए कर्मचारियों की भर्ती के बावजूद, 66 प्रतिशत देशों में सेवाओं में व्यवधान आने की वजह स्वास्थ्य कार्यबल से सम्बन्धित कारण हैं.  

एक-तिहाई से अधिक देशों में सप्लाई चेन में भी व्यवधान आया है, जिससे महत्वपूर्ण दवाओं, निदानों और निजी बचाव उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हुई है. 

आधे से ज़्यादा संख्या में देशों में, मरीज़ संक्रमण के भय और भरोसे की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल के लिये नहीं आ रहे हैं, जिससे सेवाओं में व्यवधान आया है. 43 प्रतिशत देशों में व्यवधान की वजह वित्तीय चुनौतियों को बताया गया है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के आँकड़े दर्शाते हैं कि लाखों लोग अब भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल को हासिल नहीं कर पा रहे हैं. करीब पचास फ़ीसदी देशों ने बताया कि दैनिक प्राथमिक देखभाल और सबसे अहम स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबन्धन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. 

लम्बे समय से चली आ रही स्वास्थ्य अवस्थाओं के लिये देखभाल, पुनर्वास और दर्दनिवारक देखभाल सेवाओँ में भी व्यवधान आया है. 

20 फ़ीसदी देशों का कहना है कि जीवनदायी आपातसेवा, महत्वपूर्ण सर्जरी में अब भी व्यवधान है. सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक मानसिक स्नायुतन्त्र सम्बन्धी, टीबी, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, कैंसर स्क्रीनिंग सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं. 

इसके अलावा, अन्य ग़ैर-संचारी रोगों जैसेकि उच्चरक्तचाप, डायबिटीज़, परिवार नियोजन, गर्भ-निरोधक, दाँतों और कुपोषण सम्बन्धी सेवाओं पर भी असर हुआ है.

एक-तिहाई से अधिक देशों ने कहा है कि टीकाकरण सेवाएँ में अब भी व्यवधान है, मगर वर्ष 2020 के स्तर की तुलना में इसमें थोड़ी गिरावट आई है. 

संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ने से उपजी चुनौती से निपटने के लिये देशों को समर्थन जारी रहेगा. 

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *