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कोरोना काल में होमियोपैथी की उपायोगिता बता रहे हैं: डॉ एम डी सिंह

June 02
14:46 2020

सारा विश्व कोरोना वायरस कोविद-19 से युद्ध रत है। यह निश्चित है कि जीतेगा आदमी ही, किंतु अभी तो करोना ही बढ़त बनाए हुए हैं। ऐसा तब तक रहेगा जब तक हम इससे लड़ने के लिए कोई अमोघ न प्राप्त कर लें। हमें पाता है कि यह अपने से चल नहीं सकता फिर भी वोहान चीन से निकल कर सारी दुनिया घूम चुका है। देश की सीमाओं को लांघता हुआ शहरों की सीमाओं से आगे बढ़कर अब गांवों तक भी पांव पसारने लगा है।

राष्ट्रों ने अपनी सीमाएं बंद कर लीं, लोगों ने घर। काम बंद हो गए ,व्यवसाय सिमट गए ,व्यापार ठप हुए। इसे नाम दिया गया लाक डाउन। जिस देश ने जितना जल्दी जितना प्रभावी ढंग से इसे संपादित किया और उसके नागरिकों ने जितने बढ़िया ढंग से इसका अनुपालन किया कोरोना की गति उतनी ही कम हुई। हमारा देश और देशवासी इस मामले में अग्रणी रहे और अभी तक जनसंख्या और विशाल क्षेत्रफल को देखते हुए न्यूनतम प्रभावित भी हुए हैं।

व्यवसाय किस तरह से प्रभावित हुआ है इसका प्रमाण हमारे देश में सड़कों पर दौड़ रहे ,अपने अपने घरों की ओर पलाइत हो रहे लाखों मजदूरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। इनके साथ कोरोना भी गांवों तक पहुंचने लगा है। हमारे सामने चुनौती और परीक्षा की असली घड़ी अब आई है। यह मान लेना घातक होगा कि हमने जंग जीत लिया है। मुंह बांध कर रखना ,बहुत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर जाना और साफ सफाई एवं हैंड सैनिटाइजिंग अभी भी समय की मांग है।

इस संदर्भ में अपने देश की विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का योगदान भी महत्वपूर्ण है ।दुनिया में सबसे ज्यादा चिकित्सा पद्धतियों का अपने देश में होना भी काफी सहायक सिद्ध हुआ है। जहां एलोपैथी ने प्रतिरोधक टीका ढूंढने में अपनी पूरी शक्ति लगा रखी है वहीं आयुर्वेद और होम्योपैथी मनुष्य के इम्यून सिस्टम को ताकत देने में समर्थ अपनी अनेक औषधियों को लेकर उपस्थित हो गई हैं और निश्चित रूप से सफलता भी पा रही हैं। जब अब यह कहा जाने लगा है कोरोना के साथ रहकर लड़ना ,करना और जीना सीखना होगा तो आयुष मंत्रालय की भूमिका काफी बढ़ जाएगी। उसे आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी ,सिद्धा और योग सबके द्वारा प्रदत्त संपूर्ण औषधियों एवं शक्तियों का निश्चित प्रयोग और सहयोग लेना होगा ।

सच पूछा जाए तो जब किसी रोग से लड़ाई लाक्षणिक तौर पर लड़ने की बात आ जाए तो होमियोपैथी से ज्यादा मजबूत कोई पैथी नहीं। आज देश में होमियोपैथिक चिकित्सकों की संख्या पर्याप्त है जिनका सहयोग आने वाले समय में कोरोना केंद्रों पर अनिवार्य हो जाएगी। कोरोना पीड़ित मरीजों को अन्य औषधियों के साथ लाक्षणिक होम्योपैथिक औषधियां भी होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा दिलवाना सुनिश्चित करना चाहिए।

तब जो रोग मुक्त होने की गति 43ः तक पहुंच चुकी है वह बहुत जल्द 80:तक पहुंच सकती है बिना किसी दुष्परिणाम और न्यूनतम खर्च पर। यदि विश्व में मानवता का पूर्णकालिक स्वास्थ्य समाधान प्राप्त करना है तो इस अवसर पर पूर्ण हानिरहित होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति को अपनी उपयोगिता सिद्ध करने का अवसर देना ही चाहिए। जहां कोई भी चिकित्सा पद्धति आज दावा करने की स्थिति में नहीं है वहीं अधिकतम औषधियों की स्वामी होम्योपैथी को हाथ पर हाथ धरे बैठाए रखना बुद्धिमानी नहीं हो सकती।

ऐसे में कुछ होमियोपैथिक मदर टिंचर जो आमतौर पर वाह्य प्रयोग के लिए बहुत ही सफल सिद्ध हुए हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेद भी अपने ढंग से अतीत काल से करता आ रहा है। वे इंडियन होम्योपैथिक फार्माकोपिया के दिशा निर्देशों के आधार पर बने हुए वाह्य प्रयोगी मदर टिंचर हैं-

1-अजाडिरेक्टा इन्डिका क्यू जो नीम से बना हुआ है
2- कैलेंडुला क्यू जो मेरीगोल्ड से बना हुआ है
3-आसिमम सैंकटम क्यू जो तुलसी से बना है

यदि शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की बात की जाए तो इसमें भी होम्योपैथी काफी संपन्न है और कारगर भी। यह सभी औषधियां भी उन्हीं हर्बल जड़ी बूटियों से बनी है जिन्हें पूरा संसार एवं अपना देश काफी समय से आयुर्वेद में प्रयोग करता रहा है। किंतु जब आज पूरे संसार को ऐसी हर्बल औषधियों की आवश्यकता है तो शायद वे सबकी आवश्यकता पूरी न कर सकें और काफी महंगी भी साबित हों। ऐसी अवस्था में होम्योपैथिक पद्धति से बने उनके मदर टिंचर की कुछ बूंदें काफी उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं।

एक बार में फिर कहूंगा लाक्षणिक आधार पर शक्तिकृत होम्योपैथिक औषधियों का एलोपैथिक अथवा आयुर्वेदिक औषधियों के साथ प्रयोग करके आशातीत लाभ प्राप्त किया जा सकता है। और इस महामारी पर संयुक्त प्रहार करके विजय प्राप्त किया जा सकता है।

डॉ एम डी सिंह महाराज गंज, गाजीपुर ऊ प्र (भारत) में पिछले पचास बरसों से होमियोपैथी के चिकिस्तक के रूप में ग्रामीण लोगों की सेवा कर रहे हैं ।

(लेखक के अपने विचार हैं)

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