कोलम्बिया: हिंसा में अनेक हताहत, शान्ति बनाए रखने की अपील

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कोलम्बिया के काली शहर में हुई हिंसा पर गहरी चिन्ता जताई है जहाँ पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने की घटना में, अनेक लोगों के हताहत होने की ख़बरें हैं.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय – OHCHR की प्रवक्ता मार्टा हरतैदो ने कहा कि कोलम्बिया में यूएन मानवाधिकार कार्यालय, हताहतों की सही संख्या के बारे में जानकारी हासिल करने पर काम कर रहा है.
यह भी मालूम करने की कोशिश की जा रही है कि काली में ये घटना क्यों और किस तरह हुई.
प्रवक्ता ने कहा, “हम काली में हुई घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हैं और जिन लोगों की ज़िन्दगियाँ इस घटना में ख़त्म हो गई हैं, उनके साथ, और घायलों व प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हैं.”
उन्होंने बताया कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व पैरोकारों को भी प्रताड़ित किये जाने व डराए-धमकाने की ख़बरें मिली हैं.
देश में, गत बुधवार, 28 अप्रैल को, प्रस्तावित टैक्स सुधारों के मुद्दे पर आम हड़ताल के साथ, विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो कोलम्बिया के राष्ट्रपति कार्यालय की रविवार को की गई इस घोषणा के बाद भी जारी रहे कि ये सुधार विधेयक, कांग्रेस की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा. देश के वित्त मंत्री के इस्तीफ़ा देने की भी ख़बरें हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, अभी तक अधिकतर प्रदर्शन शान्तिपूर्ण ही रहे हैं लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में, प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अभी तक, कम से कम 14 मौतें होने की भी ख़बरें मिली हैं, जिनमें कम से कम एक पुलिस अधिकारी भी है. 
अत्यन्त तनावपूर्ण स्थिति
बुधवार को भी एक विशाल प्रदर्शन का आहवान किया गया था.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा, “अत्यन्त तनावपूर्ण स्थिति के मद्देनज़र, जब प्रदर्शनों की निगरानी के लिये, सैनिक व पुलिस अधिकारी तैनात किये गए हैं, हम शान्ति बनाए रखने की अपील करते हैं.”
प्रवक्ता ने सरकारी अधिकारियों को, मानवाधिकारों की रक्षा करने की उनकी ज़िम्मेदारी भी याद दिलाई, जिसमें व्यक्तियों का जीवन व सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है.
साथ ही, सरकारी अधिकारियों की ये भी ज़िम्मेदारी है कि वो लोगों को शान्तिपूर्ण सभाएँ करने के अधिकार को इस्तेमाल करने के अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करें.
प्रवक्ता ने कहा, “हम ये भी ज़ोर देकर कहते हैं कि क़ानून लागू करने वाले आधिकारियों को, प्रदर्शनों के दौरान व्यवस्था सम्भालने के दौरान, वैधता, ऐहतियात, अनिवार्यता और बल प्रयोग के अनुपात पहलुओं का भी पालन करें.”
“घातक हथियारों का प्रयोग केवल अन्तिम उपाय के तौर पर ही किया जा सकता है जब किसी के जीवन को तात्कालिक ख़तरा या गम्भीर चोट लगने का जोखिम हो और ऐसा करने से रोका जाना ज़रूरी हो.”, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कोलम्बिया के काली शहर में हुई हिंसा पर गहरी चिन्ता जताई है जहाँ पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने की घटना में, अनेक लोगों के हताहत होने की ख़बरें हैं.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय – OHCHR की प्रवक्ता मार्टा हरतैदो ने कहा कि कोलम्बिया में यूएन मानवाधिकार कार्यालय, हताहतों की सही संख्या के बारे में जानकारी हासिल करने पर काम कर रहा है.

यह भी मालूम करने की कोशिश की जा रही है कि काली में ये घटना क्यों और किस तरह हुई.

प्रवक्ता ने कहा, “हम काली में हुई घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हैं और जिन लोगों की ज़िन्दगियाँ इस घटना में ख़त्म हो गई हैं, उनके साथ, और घायलों व प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हैं.”

उन्होंने बताया कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व पैरोकारों को भी प्रताड़ित किये जाने व डराए-धमकाने की ख़बरें मिली हैं.

देश में, गत बुधवार, 28 अप्रैल को, प्रस्तावित टैक्स सुधारों के मुद्दे पर आम हड़ताल के साथ, विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो कोलम्बिया के राष्ट्रपति कार्यालय की रविवार को की गई इस घोषणा के बाद भी जारी रहे कि ये सुधार विधेयक, कांग्रेस की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा. देश के वित्त मंत्री के इस्तीफ़ा देने की भी ख़बरें हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, अभी तक अधिकतर प्रदर्शन शान्तिपूर्ण ही रहे हैं लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में, प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अभी तक, कम से कम 14 मौतें होने की भी ख़बरें मिली हैं, जिनमें कम से कम एक पुलिस अधिकारी भी है. 

अत्यन्त तनावपूर्ण स्थिति

बुधवार को भी एक विशाल प्रदर्शन का आहवान किया गया था.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा, “अत्यन्त तनावपूर्ण स्थिति के मद्देनज़र, जब प्रदर्शनों की निगरानी के लिये, सैनिक व पुलिस अधिकारी तैनात किये गए हैं, हम शान्ति बनाए रखने की अपील करते हैं.”

प्रवक्ता ने सरकारी अधिकारियों को, मानवाधिकारों की रक्षा करने की उनकी ज़िम्मेदारी भी याद दिलाई, जिसमें व्यक्तियों का जीवन व सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है.

साथ ही, सरकारी अधिकारियों की ये भी ज़िम्मेदारी है कि वो लोगों को शान्तिपूर्ण सभाएँ करने के अधिकार को इस्तेमाल करने के अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करें.

प्रवक्ता ने कहा, “हम ये भी ज़ोर देकर कहते हैं कि क़ानून लागू करने वाले आधिकारियों को, प्रदर्शनों के दौरान व्यवस्था सम्भालने के दौरान, वैधता, ऐहतियात, अनिवार्यता और बल प्रयोग के अनुपात पहलुओं का भी पालन करें.”

“घातक हथियारों का प्रयोग केवल अन्तिम उपाय के तौर पर ही किया जा सकता है जब किसी के जीवन को तात्कालिक ख़तरा या गम्भीर चोट लगने का जोखिम हो और ऐसा करने से रोका जाना ज़रूरी हो.”

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