कोविड सम्बन्धित क़र्ज़ पर मुद्रा कोष और विश्व बैंक के उपायों का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 के असर से उबरने की कोशिश में लगी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के सामने, क़र्ज़ राहत और अन्य वित्तीय दबाल के हालात में मदद करने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह की विकास समिति द्वारा उठाए गए क़दमों का स्वागत किया है. उन्होंने इन विश्व संगठनों के क़दमों को, “आशा के संकेत और नवीनीकृत बहुपक्षवाद क़रार दिया है.”

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अपने प्रवक्ता द्वारा शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को, कोरोनावायरस संकट से उबरने के प्रयासों में, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का इन्तज़ाम करने के लिये संघर्ष करना पड़ा है, उनके लिये, इससे उबरना तो दूर की बात है.
वक्तव्य में कहा गया है कि यूएन महासचिव ने, इस संकट के शुरू से ही, विशेष रक़म निकासी अधिकारों (SDRs) के ज़रिये धन की उपलब्धता बनाए रखे जाने का आहवान किया है.
ये अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा, ज़रूरतमन्द देशों की मदद करने के लिये तैयार किया गया एक विशेष वित्तीय उपकरण है. इसके तहत, अप्रयुक्त अधिकारों का पुनः आबंटन किये जाने का भी प्रावधान है. 
एंतोनियो गुटेरेश ने क़र्ज़ बोझ का सामना करने के लिये, तीन स्तरीय उपायों का प्रस्ताव रखा है: क़र्ज़ वसूली में यथास्थिति बनाए रखना, सबसे कमज़ोर हालात वाले देशों को लक्षित क़र्ज़ राहत, और अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे में सुधार किया जाना. 
नई कोषों का संकल्प
यूएन महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा , विशेष रक़म निकासी अधिकारों (SDRs) के नए आबंटन, व ज़रूरतमन्द देशों को, स्वैच्छिक पुनः आबंटन की ठोस पुकार का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा कि वो क़र्ज़ सेवा स्थगन पहल के लिये दिये गए समर्थन को देखकर भी उत्साहित हैं, जिसके तहत कमज़ोर हालात वाले देशों को 5 अरब डॉलर की अस्थाई राहत मुहैया कराई गई है.
उन्होंने साथ ही, जी20 अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों द्वारा सहमत, क़र्ज़ स्थगन के लिये सामान्य ढाँचे पर भी ऐसा ही उत्साह महसूस किया है.
वक्तव्य में कहा गया है, “क़र्ज़ यथास्थिति और राहत, उन देशों तक बढ़ानी होगी जिन्हें इनकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता है – इनमें मध्य आय वाले देश शामिल हैं, जहाँ विश्व भर के कुल निर्धन लोगों की लगभग 60 प्रतिशत आबादी बसती है.”
“और ऐसा, कोई कलंकित छवि बनाए बिना या उनके सम्प्रभु दर्जे पर कोई नकारात्मक छाप छोड़े बिना करना होगा.”
क़र्ज़ ढाँचे में बदलाव
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने रेखांकित करते हुए कहा कि कोविड-19 आपदा, टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति को, पहुँच से बाहर कर देगी, ऐसे हालात में, अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे में सुधार किया जाना बहुत हम है.
“अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे पर इस सप्ताह हुआ विचार-विमर्श, सही दिशा में उठाया गया एक प्रमुख क़दम है.”
महासचिव ने तमाम देशों व संस्थानों से, आज के दौर को परिभाषित करने वाले क़र्ज़ ढाँचे के सिद्धान्तों के बारे में, नए सिरे से सोचे जाने के वैश्विक प्रयासों में शामिल होने का आहवान किया.
साथ ही, उन्होंने मौजूदा वित्तीय उपकरणों को, क़र्ज़ संकट की ज़्यादा प्रभावशाली समाधान प्रणाली से मेल खाने के लिये, कार्रवाई किये जाने का भी आग्रह किया.
उन्होंने, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक द्वारा, एक टिकाऊ, समावेशी, स्मार्ट और हरित पुनर्बहाली पर ज़ोर दिये जाने को भी, उत्साहजनक क़रार दिया है. , संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 के असर से उबरने की कोशिश में लगी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के सामने, क़र्ज़ राहत और अन्य वित्तीय दबाल के हालात में मदद करने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह की विकास समिति द्वारा उठाए गए क़दमों का स्वागत किया है. उन्होंने इन विश्व संगठनों के क़दमों को, “आशा के संकेत और नवीनीकृत बहुपक्षवाद क़रार दिया है.”

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अपने प्रवक्ता द्वारा शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को, कोरोनावायरस संकट से उबरने के प्रयासों में, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का इन्तज़ाम करने के लिये संघर्ष करना पड़ा है, उनके लिये, इससे उबरना तो दूर की बात है.

वक्तव्य में कहा गया है कि यूएन महासचिव ने, इस संकट के शुरू से ही, विशेष रक़म निकासी अधिकारों (SDRs) के ज़रिये धन की उपलब्धता बनाए रखे जाने का आहवान किया है.

ये अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा, ज़रूरतमन्द देशों की मदद करने के लिये तैयार किया गया एक विशेष वित्तीय उपकरण है. इसके तहत, अप्रयुक्त अधिकारों का पुनः आबंटन किये जाने का भी प्रावधान है. 

एंतोनियो गुटेरेश ने क़र्ज़ बोझ का सामना करने के लिये, तीन स्तरीय उपायों का प्रस्ताव रखा है: क़र्ज़ वसूली में यथास्थिति बनाए रखना, सबसे कमज़ोर हालात वाले देशों को लक्षित क़र्ज़ राहत, और अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे में सुधार किया जाना. 

नई कोषों का संकल्प

यूएन महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा , विशेष रक़म निकासी अधिकारों (SDRs) के नए आबंटन, व ज़रूरतमन्द देशों को, स्वैच्छिक पुनः आबंटन की ठोस पुकार का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा कि वो क़र्ज़ सेवा स्थगन पहल के लिये दिये गए समर्थन को देखकर भी उत्साहित हैं, जिसके तहत कमज़ोर हालात वाले देशों को 5 अरब डॉलर की अस्थाई राहत मुहैया कराई गई है.

उन्होंने साथ ही, जी20 अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों द्वारा सहमत, क़र्ज़ स्थगन के लिये सामान्य ढाँचे पर भी ऐसा ही उत्साह महसूस किया है.

वक्तव्य में कहा गया है, “क़र्ज़ यथास्थिति और राहत, उन देशों तक बढ़ानी होगी जिन्हें इनकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता है – इनमें मध्य आय वाले देश शामिल हैं, जहाँ विश्व भर के कुल निर्धन लोगों की लगभग 60 प्रतिशत आबादी बसती है.”

“और ऐसा, कोई कलंकित छवि बनाए बिना या उनके सम्प्रभु दर्जे पर कोई नकारात्मक छाप छोड़े बिना करना होगा.”

क़र्ज़ ढाँचे में बदलाव

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने रेखांकित करते हुए कहा कि कोविड-19 आपदा, टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति को, पहुँच से बाहर कर देगी, ऐसे हालात में, अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे में सुधार किया जाना बहुत हम है.

“अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे पर इस सप्ताह हुआ विचार-विमर्श, सही दिशा में उठाया गया एक प्रमुख क़दम है.”

महासचिव ने तमाम देशों व संस्थानों से, आज के दौर को परिभाषित करने वाले क़र्ज़ ढाँचे के सिद्धान्तों के बारे में, नए सिरे से सोचे जाने के वैश्विक प्रयासों में शामिल होने का आहवान किया.

साथ ही, उन्होंने मौजूदा वित्तीय उपकरणों को, क़र्ज़ संकट की ज़्यादा प्रभावशाली समाधान प्रणाली से मेल खाने के लिये, कार्रवाई किये जाने का भी आग्रह किया.

उन्होंने, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक द्वारा, एक टिकाऊ, समावेशी, स्मार्ट और हरित पुनर्बहाली पर ज़ोर दिये जाने को भी, उत्साहजनक क़रार दिया है. 

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