कोविड-19: अति-आवश्यक सेवाएँ जारी रखने में प्रवासियों का अहम योगदान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 टीकाकरण योजनाओं में सभी प्रवासियों को शामिल किया जाना, सर्वजन के स्वास्थ्य व सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये अहम है. यूएन प्रमुख ने बुधवार, 16 जून, को ‘पारिवारिक धन प्रेषण का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर जारी अपने सन्देश में कहा कि महामारी के दौरान, प्रवासियों ने मेज़बान देशों में, अति-आवश्यक सेवाओं और अर्थव्यवस्थाओं को सुचारू रूप से जारी रखने में अहम भूमिका निभाई है.

रोज़गार और बेहतर जीवन की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने घर से दूर अन्य देशों का रुख़ करते हैं और फिर अपने परिवारों को रक़म भेजते हैं.

Remittances are a lifeline for many & have proved more dependable than expected during the pandemic.On #FamilyRemittances Day, let’s reaffirm our solidarity with migrants who play an important role in keeping essential services & the economy running in many parts of the world. pic.twitter.com/OsOGe9vMvD— António Guterres (@antonioguterres) June 16, 2021

लगभग 20 करोड़ प्रवासी कामगारों, महिलाओं व पुरुषों के इसी योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से हर वर्ष 16 जून को ‘पारिवारिक धन प्रेषण का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ (International Day of Family Remittances) मनाया जाता है.
ये प्रवासी कामगार, 80 करोड़ से ज़्यादा अपने परिवारजनों को रक़म भेजते हैं.
महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रवासी पहले अपने परिवारों की ज़रूरतों को आगे रखते हैं, निजी ख़र्चों को कम करते हैं और अपनी बचत पर भरोसा करते हैं.
यूएन प्रमुख के मुताबिक प्रवासी कामगारों की रक्षा और समर्थन सुनिश्चित करने के लिये प्रयासों को जारी रखना होगा.
यूएन प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 की शुरुआत से ही, महामारी के कारण धन प्रेषण पर होने वाले सम्भावित असर पर चिन्ता जताई जाती रही हैं.   
“भाग्यवश, धन-प्रेषण उम्मीद से कहीं ज़्यादा सुदृढ़ और भरोसेमन्द साबित हुए हैं.”
विश्व बैन्क के नए आँकड़े दर्शाते हैं कि निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में धन प्रेषण, वर्ष 2020 में 540 अरब डॉलर पहुँच गया. 2019 के आँकड़े (548 अरब डॉलर) की तुलना में यह महज़ 1.6 प्रतिशत ही कम है.
“मेज़बान देशों में वित्तीय उपायों से प्रवासी कामगारो के लिये घर धन भेजना सम्भव हुआ है.”
महत्वपूर्ण योगदान
उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी ने दर्शाया है कि, दुनिया के अनेक हिस्सों में, अति-आवश्यक सेवाओं और अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखने में वे अहम भूमिका निभाते हैं.
“क़ानूनी आप्रवासन दर्जे की परवाह किये बग़ैर, कोविड-19 वैक्सीन वितरण योजनाओं में सभी प्रवासियों को शामिल किये जाने को सुनिश्चित करना, सर्वजन के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिये अहम है.”
यूएन महासचिव ने सभी हितधारकों से, धन-प्रेषण की क़ीमत को घटाने के लिये प्रयासों को जारी रखने की अपील की है.
उन्होंने इसे विकासशील जगत की जीवनरेखा क़रार देते हुए कहा कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा के अनुरूप इसे जितना सम्भव हो सके, कम करना होगा.
साथ ही, निर्धन ग्रामीण इलाक़ों में प्रवासियों और उनके परिवारों को वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना होगा.  
सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिये ग्लोबल कॉम्पैक्ट, इसी सिलसिले में कार्रवाई के लिये एक एकीकृत फ़्रेमवर्क प्रदान करता है.  
हर वर्ष 16 जून को मनाए जाने वाले इस दिवस पर सरकारों, निजी संस्थाओं और नागरिक समाज संगठनों से असरदार उपाय लागू करने का आहवान किया जाता है ताकि वैयक्तिक और सामूहिक प्रयासों के ज़रिये धन-प्रेषण को ज़्यादा प्रभावी बनाया जा सके.  , संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 टीकाकरण योजनाओं में सभी प्रवासियों को शामिल किया जाना, सर्वजन के स्वास्थ्य व सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये अहम है. यूएन प्रमुख ने बुधवार, 16 जून, को ‘पारिवारिक धन प्रेषण का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर जारी अपने सन्देश में कहा कि महामारी के दौरान, प्रवासियों ने मेज़बान देशों में, अति-आवश्यक सेवाओं और अर्थव्यवस्थाओं को सुचारू रूप से जारी रखने में अहम भूमिका निभाई है.

रोज़गार और बेहतर जीवन की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने घर से दूर अन्य देशों का रुख़ करते हैं और फिर अपने परिवारों को रक़म भेजते हैं.

Remittances are a lifeline for many & have proved more dependable than expected during the pandemic.

On #FamilyRemittances Day, let’s reaffirm our solidarity with migrants who play an important role in keeping essential services & the economy running in many parts of the world. pic.twitter.com/OsOGe9vMvD

— António Guterres (@antonioguterres) June 16, 2021

लगभग 20 करोड़ प्रवासी कामगारों, महिलाओं व पुरुषों के इसी योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से हर वर्ष 16 जून को ‘पारिवारिक धन प्रेषण का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ (International Day of Family Remittances) मनाया जाता है.

ये प्रवासी कामगार, 80 करोड़ से ज़्यादा अपने परिवारजनों को रक़म भेजते हैं.

महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रवासी पहले अपने परिवारों की ज़रूरतों को आगे रखते हैं, निजी ख़र्चों को कम करते हैं और अपनी बचत पर भरोसा करते हैं.

यूएन प्रमुख के मुताबिक प्रवासी कामगारों की रक्षा और समर्थन सुनिश्चित करने के लिये प्रयासों को जारी रखना होगा.

यूएन प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 की शुरुआत से ही, महामारी के कारण धन प्रेषण पर होने वाले सम्भावित असर पर चिन्ता जताई जाती रही हैं.   

“भाग्यवश, धन-प्रेषण उम्मीद से कहीं ज़्यादा सुदृढ़ और भरोसेमन्द साबित हुए हैं.”

विश्व बैन्क के नए आँकड़े दर्शाते हैं कि निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में धन प्रेषण, वर्ष 2020 में 540 अरब डॉलर पहुँच गया. 2019 के आँकड़े (548 अरब डॉलर) की तुलना में यह महज़ 1.6 प्रतिशत ही कम है.

“मेज़बान देशों में वित्तीय उपायों से प्रवासी कामगारो के लिये घर धन भेजना सम्भव हुआ है.”

महत्वपूर्ण योगदान

उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी ने दर्शाया है कि, दुनिया के अनेक हिस्सों में, अति-आवश्यक सेवाओं और अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखने में वे अहम भूमिका निभाते हैं.

“क़ानूनी आप्रवासन दर्जे की परवाह किये बग़ैर, कोविड-19 वैक्सीन वितरण योजनाओं में सभी प्रवासियों को शामिल किये जाने को सुनिश्चित करना, सर्वजन के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिये अहम है.”

यूएन महासचिव ने सभी हितधारकों से, धन-प्रेषण की क़ीमत को घटाने के लिये प्रयासों को जारी रखने की अपील की है.

उन्होंने इसे विकासशील जगत की जीवनरेखा क़रार देते हुए कहा कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा के अनुरूप इसे जितना सम्भव हो सके, कम करना होगा.

साथ ही, निर्धन ग्रामीण इलाक़ों में प्रवासियों और उनके परिवारों को वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना होगा.  

सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिये ग्लोबल कॉम्पैक्ट, इसी सिलसिले में कार्रवाई के लिये एक एकीकृत फ़्रेमवर्क प्रदान करता है.  

हर वर्ष 16 जून को मनाए जाने वाले इस दिवस पर सरकारों, निजी संस्थाओं और नागरिक समाज संगठनों से असरदार उपाय लागू करने का आहवान किया जाता है ताकि वैयक्तिक और सामूहिक प्रयासों के ज़रिये धन-प्रेषण को ज़्यादा प्रभावी बनाया जा सके.  

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