कोविड-19: अनेक राष्ट्रविहीनों को वैक्सीन ना मिल पाने का जोखिम

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने मंगलवार को आगाह किया है कि नागरिकता या पहचान-पत्रों के अभाव में, विश्व के अनेक राष्ट्रविहीन लोगों के कोविड-19 टीकाकरण से वंचित रह जाने का जोखिम है. 

एक अनुमान के अनुसार, विश्व के 94 देशों में 42 लाख राष्ट्रविहीन लोग रहते हैं. मगर उनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है. 
कोविड-19 महामारी की शुरुआत से ही, बड़ी संख्या में राष्ट्रविहीन लोगों को स्वास्थ्य देखभाल व सामाजिक सेवाएँ पाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. 

To end this pandemic, everyone must have fair and equal access to the #Covidvaccine.But lack of citizenship or proof of identity may cause many of the world’s stateless to be missed. #EndStatelessness https://t.co/QbLkIKBK2x— UNHCR, the UN Refugee Agency (@Refugees) June 22, 2021

यूएन शरणार्थी एजेंसी में अन्तरराष्ट्रीय संरक्षण मामलों की प्रमुख जिलियन ट्रिग्स ने कहा कि दुनिया में लाखों लोग राष्ट्रविहीन हैं और उनके पास किसी देश की राष्ट्रीयता नहीं है.
“इससे उनके बुनियादी मानवाधिकारों पर हानिकारक असर हुआ है और अब उन्हें जीवनरक्षक टीकाकरण के दायरे से भी बाहर रखा जा सकता है.”
यूएन एजेंसी ने एक नई रिपोर्ट जारी की है जिसमें राष्ट्रविहीन आबादी पर कोविड-19 के असर की पड़ताल की गई है. 
रिपोर्ट दर्शाती है कि अधिकाँश राष्ट्रीय प्रतिरक्षण योजनाओं में, राष्ट्रविहीन लोगों की कवरेज के सम्बन्ध में स्पष्ट जानकारी मुहैया नहीं कराई गई है. 
साथ ही सचेत किया गया है कि जिन लोगों के पास राष्ट्रीयता या पहचान दस्तावेज़ नहीं हैं, उन्हें कोरोनावायरस वैक्सीन की ख़ुराक नहीं मिल पाएगी. 
ऐसा ना होने देने के लिये देशों से विशेष प्रयास करने का आग्रह किया गया है ताकि राष्ट्रविहीनों तक पहुँच कर उनकी विशिष्ट चुनौतियों का हल निकाला जा सके. 
नई रिपोर्ट में इस सम्बन्ध में अनुशंसाएँ पेश की गई हैं और सर्वोत्तम उपायों को साझा किया गया है. इनमें किसी व्यक्ति की शिनाख़्त के लिये अन्य दस्तावेज़ों या विकल्पों का सहारा लिये जाने की बात कही गई है. 
समावेशी स्वास्थ्य सेवाएँ अहम
संरक्षण मामलों की प्रमुख जिलियन ट्रिग्स ने बताया कि लोगों के जीवन की रक्षा करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को पुख़्ता बनाने के लिये राष्ट्रीय टीकाकरण योजनाओं को समावेशी बनाने की दरकार है. 
उन्होंने कहा कि अनेक राष्ट्रविहीन लोगों को पहले से ही व्याप्त बहिष्करण और हाशिए पर धकेले जाने का सामना करना पड़ता है.
इसके मद्देनज़र, टीकाकरण सुनिश्चित करने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करना होगा और उनके हालात पर विशेष ध्यान दिया जाना होगा. 
बहुत से राष्ट्रविहीनों को भय है कि उपचार या परीक्षण के लिये सामने आने और उनके क़ानूनी दर्जे के अभाव का पता चलने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या फिर देश से बाहर निकाला जा सकता है. 
इसके अलावा, टीकाकरण सहित मेडिकल सुविधाओं की ऊँची क़ीमत उनके लिये एक बड़ी मुश्किल है और आम तौर पर वे राष्ट्रीय, सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं के दायरे से बाहर होते हैं.  
राष्ट्रीयता अहर्ताओं को निर्धारित करने के लिये पंजीकरण सेवाओं को अहम माना जाता है, मगर यूएन एजेंसी के मुताबिक जन्म पंजीकरण सेवाओं में आए व्यवधान के कारण राष्ट्रविहीनता के नए जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं., संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने मंगलवार को आगाह किया है कि नागरिकता या पहचान-पत्रों के अभाव में, विश्व के अनेक राष्ट्रविहीन लोगों के कोविड-19 टीकाकरण से वंचित रह जाने का जोखिम है. 

एक अनुमान के अनुसार, विश्व के 94 देशों में 42 लाख राष्ट्रविहीन लोग रहते हैं. मगर उनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है. 

कोविड-19 महामारी की शुरुआत से ही, बड़ी संख्या में राष्ट्रविहीन लोगों को स्वास्थ्य देखभाल व सामाजिक सेवाएँ पाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. 

To end this pandemic, everyone must have fair and equal access to the #Covidvaccine.

But lack of citizenship or proof of identity may cause many of the world’s stateless to be missed. #EndStatelessness https://t.co/QbLkIKBK2x

— UNHCR, the UN Refugee Agency (@Refugees) June 22, 2021

यूएन शरणार्थी एजेंसी में अन्तरराष्ट्रीय संरक्षण मामलों की प्रमुख जिलियन ट्रिग्स ने कहा कि दुनिया में लाखों लोग राष्ट्रविहीन हैं और उनके पास किसी देश की राष्ट्रीयता नहीं है.

“इससे उनके बुनियादी मानवाधिकारों पर हानिकारक असर हुआ है और अब उन्हें जीवनरक्षक टीकाकरण के दायरे से भी बाहर रखा जा सकता है.”

यूएन एजेंसी ने एक नई रिपोर्ट जारी की है जिसमें राष्ट्रविहीन आबादी पर कोविड-19 के असर की पड़ताल की गई है. 

रिपोर्ट दर्शाती है कि अधिकाँश राष्ट्रीय प्रतिरक्षण योजनाओं में, राष्ट्रविहीन लोगों की कवरेज के सम्बन्ध में स्पष्ट जानकारी मुहैया नहीं कराई गई है. 

साथ ही सचेत किया गया है कि जिन लोगों के पास राष्ट्रीयता या पहचान दस्तावेज़ नहीं हैं, उन्हें कोरोनावायरस वैक्सीन की ख़ुराक नहीं मिल पाएगी. 

ऐसा ना होने देने के लिये देशों से विशेष प्रयास करने का आग्रह किया गया है ताकि राष्ट्रविहीनों तक पहुँच कर उनकी विशिष्ट चुनौतियों का हल निकाला जा सके. 

नई रिपोर्ट में इस सम्बन्ध में अनुशंसाएँ पेश की गई हैं और सर्वोत्तम उपायों को साझा किया गया है. इनमें किसी व्यक्ति की शिनाख़्त के लिये अन्य दस्तावेज़ों या विकल्पों का सहारा लिये जाने की बात कही गई है. 

समावेशी स्वास्थ्य सेवाएँ अहम

संरक्षण मामलों की प्रमुख जिलियन ट्रिग्स ने बताया कि लोगों के जीवन की रक्षा करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को पुख़्ता बनाने के लिये राष्ट्रीय टीकाकरण योजनाओं को समावेशी बनाने की दरकार है. 

उन्होंने कहा कि अनेक राष्ट्रविहीन लोगों को पहले से ही व्याप्त बहिष्करण और हाशिए पर धकेले जाने का सामना करना पड़ता है.

इसके मद्देनज़र, टीकाकरण सुनिश्चित करने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करना होगा और उनके हालात पर विशेष ध्यान दिया जाना होगा. 

बहुत से राष्ट्रविहीनों को भय है कि उपचार या परीक्षण के लिये सामने आने और उनके क़ानूनी दर्जे के अभाव का पता चलने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या फिर देश से बाहर निकाला जा सकता है. 

इसके अलावा, टीकाकरण सहित मेडिकल सुविधाओं की ऊँची क़ीमत उनके लिये एक बड़ी मुश्किल है और आम तौर पर वे राष्ट्रीय, सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं के दायरे से बाहर होते हैं.  

राष्ट्रीयता अहर्ताओं को निर्धारित करने के लिये पंजीकरण सेवाओं को अहम माना जाता है, मगर यूएन एजेंसी के मुताबिक जन्म पंजीकरण सेवाओं में आए व्यवधान के कारण राष्ट्रविहीनता के नए जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं.

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