कोविड-19: अहम कर्मचारियों के लिये ज़्यादा सुरक्षा उपायों की दरकार

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का कहना है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने कार्यस्थलों पर महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को रेखांकित किया है. यूएन श्रम एजेंसी ने ‘कार्यस्थल पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये विश्व दिवस’ के अवसर पर मंगलवार को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सुरक्षा व स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बचाव व सुरक्षा उपायों पर बल दिया गया है.

नई रिपोर्ट दर्शाती है कि कोरोनावायरस संकट के शुरू होने के बाद से अब तक सात हज़ार स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है.
13 करोड़ 60 लाख स्वास्थ्य व सामजिक देखभाल कर्मचारियों पर कामकाज की वजह से कोविड-19 से संक्रमित होने का ख़तरा है.
‘Anticipate, prepare and respond to crises. Invest now in resilient OSH (Occupation Safety and Health) systems’, नामक यह रिपोर्ट बताती है कि भावी स्वास्थ्य आपात हालात के दौरान, कार्यस्थलों पर जोखिमों को कम करने के लिये, किस तरह के क़दम उठाये जा सकते हैं.

This World Day for Safety and Health at Work, let’s draw on lessons learned and experiences from the #worldofwork to strengthen & build resilient national occupational safety and health (OSH) systems during and post the #COVID19 crisis.Read more: https://t.co/diW9yw9wzr pic.twitter.com/ig9E8JwCy5— International Labour Organization (@ilo) April 27, 2021

रिपोर्ट में महामारी के दौरान पेश आने वाले मानसिक दबावों को भी रेखांकित किया गया है. बताया गया है कि दुनिया भर में, हर पाँच में से एक स्वास्थ्य देखभालकर्मी ने मानसिक अवसाद व बेचैनी के लक्षणों को महसूस किया है.
रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक महामारी के दौरान, मज़बूत कार्यस्थल दिशानिर्देशों और उनके कड़ाई से पालन किये जाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
इस क्रम में, इन दिशानिर्देशों को राष्ट्रीय संकट आपात हालात योजनाओं के साथ समाहित करने का आग्रह किया गया है.
यूएन श्रम एजेंसी के महानिदेशक गाय राइडर ने कहा कि यह रिपोर्ट, एक मज़बूत व सुदृढ़, पेशेगत सुरक्षा और स्वास्थ्य माहौल की अहमियत को बखूबी दर्शाती है.
“पुनर्बहाली व रोकथाम के लिये बेहतर राष्ट्रीय नीतियों, संस्थागत व नियामक फ़्रेमवर्क की आवश्यकता होगी, जिन्हें उपयुक्त ढँग से संकट पर जवाबी कार्रवाई के फ़्रेमवर्क में एकीकृत किया गया हो.”
हालांकि, ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं से जुड़े क्षेत्र ही कोविड-19 महामारी के फैलाव का स्रोत साबित हुए हैं.
अनेक ऐसे कार्यस्थल जहाँ कर्मचारियों को बन्द परिसरों में काम करना पड़ता है, या जहाँ वे एक दूसरे के नज़दीक रहकर समय बिताते हैं, भी प्रभावित हुए हैं.
इनमें साझा रूप से इस्तेमाल की जाने वाली परिवहन सेवाएँ और आवास व्यवस्था भी हैं.
टेलीवर्किंग की मुश्किलें
कार्यस्थल से दूर रहकर कामकाज (Teleworking) को वायरस के फैलाव को सीमित करने के नज़रिये से महत्वपूर्ण माना गया है.
मगर इससे कामकाज और निजी जीवन के बीच अन्तर धुँधला हो गया, जिससे लोगों में मानसिक तनाव उत्पन्न हुआ.
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और पेशेगत सुरक्षा व स्वास्थ्य पर जी-20 नैटवर्क (G20 OSH Network) ने जिन उद्यमों का सर्वेक्षण किया, उनमें 65 प्रतिशत का कहना है कि दूर रहकर काम करने के दौरान कर्मचारियों के उत्साह को बनाए रखना मुश्किल साबित हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, लघु- और सूक्ष्म-आकार उद्यमों में आधिकारिक रूप से ज़रूरी कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन करना कठिन था.
इसकी वजह, कोविड-19 से उपजे ख़तरों के अनुरूप बदलाव लाने के लिये आवश्यक संसाधनों की कमी बताई गई है.
दुनिया भर में डेढ़ अरब से ज़्यादा कामगार अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा है, जिनमें से अधिकाँश विकासशील देशों में हैं.
यूएन एजेंसी ने सचेत किया कि तालाबन्दियों, आवाजाही और सामाजिक गतिविधियों पर पाबन्दियों के बावजूद उन्होंने काम करना जारी रखा.
इस वजह से इन कामगारों के लिये वायरस से संक्रमित होने का जोखिम बढ़ गया, जबकि अधिकाँश को बुनियादी सामाजिक संरक्षा, जैसेकि बीमार होने पर अवकाश, या वेतन, हासिल नहीं है.
सामाजिक सम्वाद अहम
अन्तरराष्ट्रीय श्रम मानकों में बताया गया है कि इन चुनौतियों का सामना किस तरह किया जा सकता है और कार्यस्थल पर वायरस संचारण के जोखिम को किन उपायों के ज़रिये घटाया जा सकता है.
इनमें वे औज़ार प्रदान किये गए हैं जिनके ज़रिये पहले-सुरक्षा (Safety-first) उपायों को लागू किया जा सकता है.
साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि नियोक्ता (Employer) और सरकारें, महामारी से उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक परिणामों के अनुरूप बदलाव लाते हुए, शिष्ट कामकाज को बरक़रार रख पाएँ.
इन मानकों में सामाजिक सम्वाद को प्रोत्साहित किये जाने पर बल देते हुए, इसे प्रक्रियाओं व प्रोटोकॉल को असरदार ढँग से लागू किये जाने का सर्वोत्तम तरीक़ा बताया गया है., अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का कहना है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने कार्यस्थलों पर महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को रेखांकित किया है. यूएन श्रम एजेंसी ने ‘कार्यस्थल पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये विश्व दिवस’ के अवसर पर मंगलवार को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सुरक्षा व स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बचाव व सुरक्षा उपायों पर बल दिया गया है.

नई रिपोर्ट दर्शाती है कि कोरोनावायरस संकट के शुरू होने के बाद से अब तक सात हज़ार स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है.

13 करोड़ 60 लाख स्वास्थ्य व सामजिक देखभाल कर्मचारियों पर कामकाज की वजह से कोविड-19 से संक्रमित होने का ख़तरा है.

‘Anticipate, prepare and respond to crises. Invest now in resilient OSH (Occupation Safety and Health) systems’, नामक यह रिपोर्ट बताती है कि भावी स्वास्थ्य आपात हालात के दौरान, कार्यस्थलों पर जोखिमों को कम करने के लिये, किस तरह के क़दम उठाये जा सकते हैं.

रिपोर्ट में महामारी के दौरान पेश आने वाले मानसिक दबावों को भी रेखांकित किया गया है. बताया गया है कि दुनिया भर में, हर पाँच में से एक स्वास्थ्य देखभालकर्मी ने मानसिक अवसाद व बेचैनी के लक्षणों को महसूस किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक महामारी के दौरान, मज़बूत कार्यस्थल दिशानिर्देशों और उनके कड़ाई से पालन किये जाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

इस क्रम में, इन दिशानिर्देशों को राष्ट्रीय संकट आपात हालात योजनाओं के साथ समाहित करने का आग्रह किया गया है.

यूएन श्रम एजेंसी के महानिदेशक गाय राइडर ने कहा कि यह रिपोर्ट, एक मज़बूत व सुदृढ़, पेशेगत सुरक्षा और स्वास्थ्य माहौल की अहमियत को बखूबी दर्शाती है.

“पुनर्बहाली व रोकथाम के लिये बेहतर राष्ट्रीय नीतियों, संस्थागत व नियामक फ़्रेमवर्क की आवश्यकता होगी, जिन्हें उपयुक्त ढँग से संकट पर जवाबी कार्रवाई के फ़्रेमवर्क में एकीकृत किया गया हो.”

हालांकि, ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं से जुड़े क्षेत्र ही कोविड-19 महामारी के फैलाव का स्रोत साबित हुए हैं.

अनेक ऐसे कार्यस्थल जहाँ कर्मचारियों को बन्द परिसरों में काम करना पड़ता है, या जहाँ वे एक दूसरे के नज़दीक रहकर समय बिताते हैं, भी प्रभावित हुए हैं.

इनमें साझा रूप से इस्तेमाल की जाने वाली परिवहन सेवाएँ और आवास व्यवस्था भी हैं.

टेलीवर्किंग की मुश्किलें

कार्यस्थल से दूर रहकर कामकाज (Teleworking) को वायरस के फैलाव को सीमित करने के नज़रिये से महत्वपूर्ण माना गया है.

मगर इससे कामकाज और निजी जीवन के बीच अन्तर धुँधला हो गया, जिससे लोगों में मानसिक तनाव उत्पन्न हुआ.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और पेशेगत सुरक्षा व स्वास्थ्य पर जी-20 नैटवर्क (G20 OSH Network) ने जिन उद्यमों का सर्वेक्षण किया, उनमें 65 प्रतिशत का कहना है कि दूर रहकर काम करने के दौरान कर्मचारियों के उत्साह को बनाए रखना मुश्किल साबित हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक, लघु- और सूक्ष्म-आकार उद्यमों में आधिकारिक रूप से ज़रूरी कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन करना कठिन था.

इसकी वजह, कोविड-19 से उपजे ख़तरों के अनुरूप बदलाव लाने के लिये आवश्यक संसाधनों की कमी बताई गई है.

दुनिया भर में डेढ़ अरब से ज़्यादा कामगार अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा है, जिनमें से अधिकाँश विकासशील देशों में हैं.

यूएन एजेंसी ने सचेत किया कि तालाबन्दियों, आवाजाही और सामाजिक गतिविधियों पर पाबन्दियों के बावजूद उन्होंने काम करना जारी रखा.

इस वजह से इन कामगारों के लिये वायरस से संक्रमित होने का जोखिम बढ़ गया, जबकि अधिकाँश को बुनियादी सामाजिक संरक्षा, जैसेकि बीमार होने पर अवकाश, या वेतन, हासिल नहीं है.

सामाजिक सम्वाद अहम

अन्तरराष्ट्रीय श्रम मानकों में बताया गया है कि इन चुनौतियों का सामना किस तरह किया जा सकता है और कार्यस्थल पर वायरस संचारण के जोखिम को किन उपायों के ज़रिये घटाया जा सकता है.

इनमें वे औज़ार प्रदान किये गए हैं जिनके ज़रिये पहले-सुरक्षा (Safety-first) उपायों को लागू किया जा सकता है.

साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि नियोक्ता (Employer) और सरकारें, महामारी से उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक परिणामों के अनुरूप बदलाव लाते हुए, शिष्ट कामकाज को बरक़रार रख पाएँ.

इन मानकों में सामाजिक सम्वाद को प्रोत्साहित किये जाने पर बल देते हुए, इसे प्रक्रियाओं व प्रोटोकॉल को असरदार ढँग से लागू किये जाने का सर्वोत्तम तरीक़ा बताया गया है.

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