कोविड-19: ‘ऐतिहासिक’ चरण – कोवैक्स के तहत भारत से वैक्सीन ख़ुराकें रवाना 

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली ‘कोवैक्स पहल’ के तहत, भारत से कोरोनावायरस वैक्सीनों की खेप, घाना सहित अन्य ज़रूरतमन्द देशों के लिये, रवाना किये जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की भारत में प्रतिनिधि डॉक्टर यासमीन अली हक़ ने कोवैक्स वैक्सीन वितरण की शुरुआत को ऐतिहासिक क़रार देते हुए इसे, कोविड-19 महामारी पर क़ाबू पाने की दिशा में लिया गया एक बड़ा क़दम बताया है. 

The first batch of #COVID19 vaccines have left India for the world 🌍..@DrYasminAHaque, Representative, #UNICEF India shares how the COVAX Facility, a combined effort of @UNICEF, @WHO, @GAVI and @CEPIvaccines, is aiding the global response to the pandemic. pic.twitter.com/K1DYX1o7S6— UNICEF India (@UNICEFIndia) February 26, 2021

ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की पाँच लाख से ज़्यादा ख़ुराकों की खेप शुक्रवार को आइवरी कोस्ट पहुँची, जो इन टीकों को पाने वाला दूसरा अफ़्रीकी देश है. 
इससे पहले, इस सप्ताह की शुरुआत में छह लाख ख़ुराकें घाना भेजी जा चुकी हैं. 
ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित कोविड वैक्सीन का उत्पादन, भारत में महाराष्ट्र के पुणे स्थित सीरम संस्थान में किया जा रहा है. 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) व उसके साझीदार संगठनों – वैक्सीन अलायन्स (GAVI) और महामारी से मुक़ाबले की तैयारी के लिये गठबन्धन (Coalition for Epidemic Preparedness Innovations/CEPI) की ‘कोवैक्स पहल’ का लक्ष्य, सभी ज़रूरतमन्द देशों के लिये कोविड-19 वैक्सीन का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है.
ऐतिहासिक पहल
भारत में, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) की प्रतिनिधि डॉक्टर यासमीन अली हक़ ने 24 फ़रवरी को महाराष्ट्र के पुणे शहर में भारत के सीरम संस्थान (Serum Institute of India) का दौरा करके, वहाँ से वैक्सीनों की खेप रवाना किये जाने की तैयारियों का जायज़ा लिया. 
डॉक्टर हक़ ने वैक्सीनों के वितरण को मूर्त रूप दिये जाने को, कोविड-19 महामारी पर क़ाबू पाने के दिशा में एक बड़ा क़दम क़रार दिया है.
“मैंने कोवैक्स साझीदारी के तहत वैक्सीनों की खेप रवाना करने के शुरुआती काम का जायज़ा लेने के लिये, ‘भारतीय सीरम संस्थान’ का दौरा किया. वास्तव में यह प्रेरणादायी है!” 
“कोवैक्स सुविधा के तहत भारत से कोविड वैक्सीनों के पहले बैच की खेप का रवाना होना ऐतिहासिक है.”
“इस महामारी पर क़ाबू पाने के वैश्विक प्रयासों की दिशा में यह एक बड़ा क़दम है, और इन जीवनरक्षक वैक्सीनों की विश्व में न्यायसंगत सुलभता की ओर एक असाधारण उपलब्धि.”
वैक्सीन वितरण के प्रयासों में तेज़ी लाते हुए टीकों की आपूर्ति, जल्द ही उन सदस्य देशों को भी की जाएगी, जिन्होंने उसके वितरण के लिये अनिवार्य शर्तें पूरी कर ली हैं.
यूनीसेफ़ के भारत कार्यालय की मदद से ये वैक्सीन ख़ुराकें, 82 निम्न और मध्य आय वाले देशों में भेजे जाने की योजना है, जोकि कोवैक्स पहल का हिस्सा हैं.  
भारत की भूमिका 
घाना और आइवरी कोस्ट भेजे गए टीकों का उत्पादन भारत के सीरम संस्थान में किया गया है, और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली ‘कोवैक्स पहल’ के तहत ये टीके, भारत से बाहर भेजे गए हैं.
यूनीसेफ़ ने वैक्सीन की इन ख़ुराकों की नई खेप को मुम्बई से रवाना किया है, जोकि दुबई स्थित क्षेत्रीय आपूर्ति केन्द्र से होते हुए आइवरी कोस्ट की राजधानी अबिजान पहुँची है.  
इस साझेदारी के अन्तर्गत, वर्ष 2021 के अन्त तक कोरोनावायरस की दो अरब ख़ुराकों का इन्तज़ाम किये जाने की योजना है. 

© UNICEF/UN0421736/Krishnanऑक्सफ़र्ड युनिवर्सिटी और ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित इन वैक्सीनों का उत्पादन भारत के सीरम संस्थान में किया जा रहा है.

यूएन के शीर्ष अधिकारियों ने अनेक अवसरों पर दोहराया है कि कोविड-19 महामारी का अन्त तब तक सम्भव नहीं है, जब तक उसे हर स्थान पर क़ाबू नहीं पा लिया जाता. 
इसके मद्देनज़र, ज़रूरतमन्द विकासशील देशों में त्वरित गति से वैक्सीन वितरण की अहमियत को रेखांकित किया गया है. 
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिये भारत में, पहले से मौजूद वैक्सीन उत्पादन का मज़बूत ढाँचा एक अहम भूमिका निभा सकता है, जिसके माध्यम से वैक्सीन वितरण में, धनी और निर्धन देशों के बीच पनपे अन्तर को पाटने का इरादा है. 
दुनिया भर में कोविड-19 संक्रमण के अब तक 11 करोड़ 24 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 24 लाख 97 हज़ार लोगों की मौत हुई है. , संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली ‘कोवैक्स पहल’ के तहत, भारत से कोरोनावायरस वैक्सीनों की खेप, घाना सहित अन्य ज़रूरतमन्द देशों के लिये, रवाना किये जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की भारत में प्रतिनिधि डॉक्टर यासमीन अली हक़ ने कोवैक्स वैक्सीन वितरण की शुरुआत को ऐतिहासिक क़रार देते हुए इसे, कोविड-19 महामारी पर क़ाबू पाने की दिशा में लिया गया एक बड़ा क़दम बताया है. 

ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की पाँच लाख से ज़्यादा ख़ुराकों की खेप शुक्रवार को आइवरी कोस्ट पहुँची, जो इन टीकों को पाने वाला दूसरा अफ़्रीकी देश है. 

इससे पहले, इस सप्ताह की शुरुआत में छह लाख ख़ुराकें घाना भेजी जा चुकी हैं. 

ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित कोविड वैक्सीन का उत्पादन, भारत में महाराष्ट्र के पुणे स्थित सीरम संस्थान में किया जा रहा है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) व उसके साझीदार संगठनों – वैक्सीन अलायन्स (GAVI) और महामारी से मुक़ाबले की तैयारी के लिये गठबन्धन (Coalition for Epidemic Preparedness Innovations/CEPI) की ‘कोवैक्स पहल’ का लक्ष्य, सभी ज़रूरतमन्द देशों के लिये कोविड-19 वैक्सीन का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है.

ऐतिहासिक पहल

भारत में, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) की प्रतिनिधि डॉक्टर यासमीन अली हक़ ने 24 फ़रवरी को महाराष्ट्र के पुणे शहर में भारत के सीरम संस्थान (Serum Institute of India) का दौरा करके, वहाँ से वैक्सीनों की खेप रवाना किये जाने की तैयारियों का जायज़ा लिया. 

डॉक्टर हक़ ने वैक्सीनों के वितरण को मूर्त रूप दिये जाने को, कोविड-19 महामारी पर क़ाबू पाने के दिशा में एक बड़ा क़दम क़रार दिया है.

“मैंने कोवैक्स साझीदारी के तहत वैक्सीनों की खेप रवाना करने के शुरुआती काम का जायज़ा लेने के लिये, ‘भारतीय सीरम संस्थान’ का दौरा किया. वास्तव में यह प्रेरणादायी है!” 

“कोवैक्स सुविधा के तहत भारत से कोविड वैक्सीनों के पहले बैच की खेप का रवाना होना ऐतिहासिक है.”

“इस महामारी पर क़ाबू पाने के वैश्विक प्रयासों की दिशा में यह एक बड़ा क़दम है, और इन जीवनरक्षक वैक्सीनों की विश्व में न्यायसंगत सुलभता की ओर एक असाधारण उपलब्धि.”

वैक्सीन वितरण के प्रयासों में तेज़ी लाते हुए टीकों की आपूर्ति, जल्द ही उन सदस्य देशों को भी की जाएगी, जिन्होंने उसके वितरण के लिये अनिवार्य शर्तें पूरी कर ली हैं.

यूनीसेफ़ के भारत कार्यालय की मदद से ये वैक्सीन ख़ुराकें, 82 निम्न और मध्य आय वाले देशों में भेजे जाने की योजना है, जोकि कोवैक्स पहल का हिस्सा हैं.  

भारत की भूमिका 

घाना और आइवरी कोस्ट भेजे गए टीकों का उत्पादन भारत के सीरम संस्थान में किया गया है, और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली ‘कोवैक्स पहल’ के तहत ये टीके, भारत से बाहर भेजे गए हैं.

यूनीसेफ़ ने वैक्सीन की इन ख़ुराकों की नई खेप को मुम्बई से रवाना किया है, जोकि दुबई स्थित क्षेत्रीय आपूर्ति केन्द्र से होते हुए आइवरी कोस्ट की राजधानी अबिजान पहुँची है.  

इस साझेदारी के अन्तर्गत, वर्ष 2021 के अन्त तक कोरोनावायरस की दो अरब ख़ुराकों का इन्तज़ाम किये जाने की योजना है. 


© UNICEF/UN0421736/Krishnan
ऑक्सफ़र्ड युनिवर्सिटी और ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित इन वैक्सीनों का उत्पादन भारत के सीरम संस्थान में किया जा रहा है.

यूएन के शीर्ष अधिकारियों ने अनेक अवसरों पर दोहराया है कि कोविड-19 महामारी का अन्त तब तक सम्भव नहीं है, जब तक उसे हर स्थान पर क़ाबू नहीं पा लिया जाता. 

इसके मद्देनज़र, ज़रूरतमन्द विकासशील देशों में त्वरित गति से वैक्सीन वितरण की अहमियत को रेखांकित किया गया है. 

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिये भारत में, पहले से मौजूद वैक्सीन उत्पादन का मज़बूत ढाँचा एक अहम भूमिका निभा सकता है, जिसके माध्यम से वैक्सीन वितरण में, धनी और निर्धन देशों के बीच पनपे अन्तर को पाटने का इरादा है. 

दुनिया भर में कोविड-19 संक्रमण के अब तक 11 करोड़ 24 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 24 लाख 97 हज़ार लोगों की मौत हुई है. 

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