कोविड-19: ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के फ़ायदे, जोखिम से कहीं ज़्यादा सकारात्मक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अधिकारी ने कहा है कि कोविड-19 वायरस की ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के लाभ अब भी व्यापक रूप में सकारात्मक ही हैं, और रक्त के थक्के जमने के बहुत कम लेकिन अत्यन्त गम्भीर मामलों की तुलना में, कहीं ज़्यादा लाभप्रद भी हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में नियमन व पूर्व-गुणवत्ता मामलों के निदेशक डॉक्टर रोजेरीय पिन्टो डी सा गैस्पर ने मंगलवार को, नियमित प्रेस वार्ता के दौरान, पत्रकारों द्वारा वैक्सीन व रक्त के थक्कों के बीच सम्बन्ध के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में ये बात कही.
योरोपीय चिकित्सा एजेंसी (ईएमए) ने मंगलवार को इन ख़बरों का खंडन किया कि उसने वैक्सीन व रक्त के थक्के जमने के मामलों के बीच कोई सम्बन्ध होने के सबूत पाए हैं.
ऐसी ख़बरें आई थीं कि एजेंसी के एक विशेषज्ञ ने ऐसा कोई सम्बन्ध होने की बात कही थी.
समीक्षाएँ
इस बीच, ताज़ा आँकड़ों की समीक्षा करने के लिये, ईएमए की, औषधियों की सुरक्षा की निगरानी वाली कमेटी की बैठक हो रही है.
इन आँकड़ों की समीक्षा, ब्रिटेन में एक नियामक संस्था भी कर रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन, इन समीक्षाओं की प्रक्रिया पर नज़र टिकाए हुए है.
डॉक्टर रोजेरीय पिन्टो डी सा गैस्पर ने कहा, “हम फ़िलहाल मौजूद जानकारी और आँकड़ों की ही बात कर सकते हैं, विशेषज्ञ इस जानकारी व आँकड़ों की समीक्षा कर रहे हैं. और इन सभी का निष्कर्ष ये है कि वैक्सीन के जोखिम की तुलना में, इसके फ़ायदे कहीं ज़्यादा हैं.”
उन्होंने बताया कि रक्त के थक्के जमने के मामले बहुत ही कम हैं, और अब जनसंख्या के अनुपात में, उनका वर्गीकरण किया जा रहा है.
“फ़िलहाल ऐसे कोई सबूत नहीं है कि वैक्सीन से होने वाले लाभों के बारे में आकलन को बदले जाने की कोई ज़रूरत है. और ब्रिटेन व अन्य देशों से मिलने वाले आँकड़ों में पता चलता है कि आबादियों में मृत्यु दर को कम करने के लिये, वैक्सीन के फ़ायदे बहुत महत्वपूर्ण हैं.”
वैक्सीन सुरक्षा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक परामर्श कमेटी, की बुधवार को एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इस ताज़ा जानकारी व आँकड़ों की समीक्षा की जाएगी.
सप्ताह के अन्त तक कोई निष्कर्ष अपेक्षित है.
कलंकित मानसिकता व वायरस के रूप
विश्व स्वास्थ्य संगठन, दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर, नवीन कोरोनावायरस के नए रूपों के नाम निर्धारित करने पर काम कर रहा है. इसी वायरस के ज़रिये कोविड-19 महामारी का संक्रमण फैलता है.
बहुत से लोग, जिनमें कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शामिल हैं, कोरोनावायरस के इन रूपों को, उन देशों के नाम से पुकार रहे हैं जहाँ वो सबसे पहले पाए जा रहे हैं. जबकि यूएन स्वास्थ्य एजेंसी इस चलन को बदलना चाहती है.
कोविड-19 पर यूएन एजेंसी की अग्रणी प्रवक्ता डॉक्टर मारिया वॉन करख़ोव ने एक दक्षिण अफ्रीकी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि वायरस के प्रकारों के जो भी नाम प्रयोग किये जाएँ, उनसे जाने-आनजाने में, किसी व्यक्ति पर कोई कलंक ना लगे, या किसी के नाम व स्थान के साथ कोई सम्बन्ध ना नज़र आए.”
“कोरोनावायरस के इन नए रूपों के साथ कोई कलंक या धब्बा नहीं जोड़ा जाना चाहिये, लेकिन अफ़सोस है कि हम ऐसा होते हुए देख रहे हैं.”
इस समय कोरोनावायरस से तीन प्रकार या रूप देखे गए हैं: बी117, जोकि प्रथमतः ब्रिटेन में चिन्हित किया गया; बी 1.351, जोकि सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पाया गया, और पी1, जिसकी पहचान सबसे पहले जापान में हुई, लेकिन ये ब्राज़ील में भी फैल रहा है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अधिकारी ने कहा है कि कोविड-19 वायरस की ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के लाभ अब भी व्यापक रूप में सकारात्मक ही हैं, और रक्त के थक्के जमने के बहुत कम लेकिन अत्यन्त गम्भीर मामलों की तुलना में, कहीं ज़्यादा लाभप्रद भी हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में नियमन व पूर्व-गुणवत्ता मामलों के निदेशक डॉक्टर रोजेरीय पिन्टो डी सा गैस्पर ने मंगलवार को, नियमित प्रेस वार्ता के दौरान, पत्रकारों द्वारा वैक्सीन व रक्त के थक्कों के बीच सम्बन्ध के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में ये बात कही.

योरोपीय चिकित्सा एजेंसी (ईएमए) ने मंगलवार को इन ख़बरों का खंडन किया कि उसने वैक्सीन व रक्त के थक्के जमने के मामलों के बीच कोई सम्बन्ध होने के सबूत पाए हैं.

ऐसी ख़बरें आई थीं कि एजेंसी के एक विशेषज्ञ ने ऐसा कोई सम्बन्ध होने की बात कही थी.

समीक्षाएँ

इस बीच, ताज़ा आँकड़ों की समीक्षा करने के लिये, ईएमए की, औषधियों की सुरक्षा की निगरानी वाली कमेटी की बैठक हो रही है.

इन आँकड़ों की समीक्षा, ब्रिटेन में एक नियामक संस्था भी कर रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन, इन समीक्षाओं की प्रक्रिया पर नज़र टिकाए हुए है.

डॉक्टर रोजेरीय पिन्टो डी सा गैस्पर ने कहा, “हम फ़िलहाल मौजूद जानकारी और आँकड़ों की ही बात कर सकते हैं, विशेषज्ञ इस जानकारी व आँकड़ों की समीक्षा कर रहे हैं. और इन सभी का निष्कर्ष ये है कि वैक्सीन के जोखिम की तुलना में, इसके फ़ायदे कहीं ज़्यादा हैं.”

उन्होंने बताया कि रक्त के थक्के जमने के मामले बहुत ही कम हैं, और अब जनसंख्या के अनुपात में, उनका वर्गीकरण किया जा रहा है.

“फ़िलहाल ऐसे कोई सबूत नहीं है कि वैक्सीन से होने वाले लाभों के बारे में आकलन को बदले जाने की कोई ज़रूरत है. और ब्रिटेन व अन्य देशों से मिलने वाले आँकड़ों में पता चलता है कि आबादियों में मृत्यु दर को कम करने के लिये, वैक्सीन के फ़ायदे बहुत महत्वपूर्ण हैं.”

वैक्सीन सुरक्षा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक परामर्श कमेटी, की बुधवार को एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इस ताज़ा जानकारी व आँकड़ों की समीक्षा की जाएगी.

सप्ताह के अन्त तक कोई निष्कर्ष अपेक्षित है.

कलंकित मानसिकता व वायरस के रूप

विश्व स्वास्थ्य संगठन, दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर, नवीन कोरोनावायरस के नए रूपों के नाम निर्धारित करने पर काम कर रहा है. इसी वायरस के ज़रिये कोविड-19 महामारी का संक्रमण फैलता है.

बहुत से लोग, जिनमें कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शामिल हैं, कोरोनावायरस के इन रूपों को, उन देशों के नाम से पुकार रहे हैं जहाँ वो सबसे पहले पाए जा रहे हैं. जबकि यूएन स्वास्थ्य एजेंसी इस चलन को बदलना चाहती है.

कोविड-19 पर यूएन एजेंसी की अग्रणी प्रवक्ता डॉक्टर मारिया वॉन करख़ोव ने एक दक्षिण अफ्रीकी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि वायरस के प्रकारों के जो भी नाम प्रयोग किये जाएँ, उनसे जाने-आनजाने में, किसी व्यक्ति पर कोई कलंक ना लगे, या किसी के नाम व स्थान के साथ कोई सम्बन्ध ना नज़र आए.”

“कोरोनावायरस के इन नए रूपों के साथ कोई कलंक या धब्बा नहीं जोड़ा जाना चाहिये, लेकिन अफ़सोस है कि हम ऐसा होते हुए देख रहे हैं.”

इस समय कोरोनावायरस से तीन प्रकार या रूप देखे गए हैं: बी117, जोकि प्रथमतः ब्रिटेन में चिन्हित किया गया; बी 1.351, जोकि सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पाया गया, और पी1, जिसकी पहचान सबसे पहले जापान में हुई, लेकिन ये ब्राज़ील में भी फैल रहा है.

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