कोविड-19 का पर्यटन पर भीषण असर – चार हज़ार अरब डॉलर के नुकसान की आशंका

वैश्विक महामारी कोविड-19 ने अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन सैक्टर को बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है और वर्ष 2020 व 2021 में विश्व अर्थव्यवस्था को लगभग चार हज़ार अरब डॉलर का आर्थिक नुक़सान होने की आशंका है. विकासशील देशों में व्यापक स्तर पर टीकाकरण प्रयासों का अभाव इसकी एक बड़ी वजह बताया गया है. 

व्यापार एवँ विकास पर यूएन सम्मेलन (UNCTAD) ने विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) के साथ बुधवार को, साझा रूप से इस सम्बन्ध में अपनी नई रिपोर्ट जारी की है.  

Despite an expected rebound in international tourism, @UNCTAD and @UNWTO project losses of between $1.7 trillion and $2.4 trillion in 2021 (3 scenarios).Developing countries will be hit the hardest, especially if the vaccine rollout remains uneven. https://t.co/b3NJ4CDTwD pic.twitter.com/n1Pd3XhX5p— UNCTAD (@UNCTAD) June 30, 2021

महामारी से पर्यटन क्षेत्र पर हुए प्रत्यक्ष असर और उससे प्रभावित अन्य सैक्टरों पर नुक़सान का आकलन करने के बाद इस आँकड़े पर पहुँचा गया है. बताया गया है कि आर्थिक हानि उम्मीद से कहीं ज़्यादा है. 
पिछले वर्ष जुलाई में, यूएन एजेंसी का अनुमान था कि अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन में आए ठहराव से विश्व अर्थव्यवस्था को एक हज़ार 200 अरब डॉलर से लेकर तीन हज़ार 300 अरब डॉलर की चपत लग सकती है. 
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में पर्यटकों के आगमन में आई तेज़ गिरावट से दो हज़ार 400 अरब डॉलर का आर्थिक नुक़सान हुआ.
रिपोर्ट में जिन परिदृश्यों को पेश किया गया है, उनके अनुसार अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन में इस वर्ष की दूसरी छमाही में बेहतरी की उम्मीद है.
इसके बावजूद वर्ष 2019 के स्तर की तुलना में एक हज़ार 700 अरब डॉलर से लेकर दो हज़ार 400 अरब डॉलर के बीच नुक़सान होने की आशंका है. यह आँकड़ा कुछ हद तक टीकाकरण की रफ़्तार पर भी निर्भर करेगा.
यूएन एजेंसी की कार्यवाहक महासचिव इज़ाबेल डुरान्ट ने बताया, “दुनिया को एक वैश्विक टीकाकरण प्रयास की आवश्यकता है, जो कामगारों की रक्षा करे, सामाजिक असर के दुष्प्रभावों को कम करे, और भावी ढाँचागत बदलावों को ध्यान में रखते हुए पर्यटन के सम्बन्ध में रणनीतिक निर्णय ले.” 
लाखों-करोड़ों लोगों के लिये पर्यटन एक जीवनरेखा है और टीकाकरण को बढ़ावा देकर समुदायों की रक्षा की जा सकती है और फिर से इस सैक्टर की सुरक्षित पुनर्बहाली को सुनिश्चित किया जा सकता है. 
इससे रोज़ागरों की रक्षा करने और अर्थव्यवस्था के लिये संसाधनों को जुटाने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से विकासशील देशों में.
विकासशील देश अधिक प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन में पिछले वर्ष लगभग एक अरब, यानि 73 प्रतिशत की गिरावट आई है. वर्ष 2021 की पहली तिमाही में यह गिरावट 88 फ़ीसदी आंकी गई. 
विकासशील देशों में पर्यटन पर महामारी का ज़्यादा असर हुआ है, और पर्यटकों के आगमन में 60 से 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. 
इन्हीं देशों में वैक्सीन वितरण में विषमता देखने को मिल रही है. यूएन एजेंसियों ने सचेत किया है कि कोविड-19 वैक्सीन की न्यायसंगत उपलब्धता के अभाव ने पर्यटन सैक्टर के लिये संकट को विशाल बना दिया है. 
रिपोर्ट के मुताबिक जिन देशों में टीकाकरण की ऊँची दर है, वहाँ पर्यटन सैक्टर के जल्द उबर पाने की उम्मीद है. उदाहरण के तौर पर, फ्राँस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका.
मगर अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन को, महामारी के पूर्व के स्तर तक लौटने में 2023 या उससे भी बाद तक का समय लग सकता है. 
अनेक प्रकार की यात्रा पाबन्दियों, वायरस पर क़ाबू पाने की धीमी रफ़्तार, यात्रियों में विश्वास की कमी और ख़राब आर्थिक माहौल इसकी वजह के रूप में गिनाए गए हैं.  , वैश्विक महामारी कोविड-19 ने अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन सैक्टर को बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है और वर्ष 2020 व 2021 में विश्व अर्थव्यवस्था को लगभग चार हज़ार अरब डॉलर का आर्थिक नुक़सान होने की आशंका है. विकासशील देशों में व्यापक स्तर पर टीकाकरण प्रयासों का अभाव इसकी एक बड़ी वजह बताया गया है. 

व्यापार एवँ विकास पर यूएन सम्मेलन (UNCTAD) ने विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) के साथ बुधवार को, साझा रूप से इस सम्बन्ध में अपनी नई रिपोर्ट जारी की है.  

Despite an expected rebound in international tourism, @UNCTAD and @UNWTO project losses of between $1.7 trillion and $2.4 trillion in 2021 (3 scenarios).

Developing countries will be hit the hardest, especially if the vaccine rollout remains uneven. https://t.co/b3NJ4CDTwD pic.twitter.com/n1Pd3XhX5p

— UNCTAD (@UNCTAD) June 30, 2021

महामारी से पर्यटन क्षेत्र पर हुए प्रत्यक्ष असर और उससे प्रभावित अन्य सैक्टरों पर नुक़सान का आकलन करने के बाद इस आँकड़े पर पहुँचा गया है. बताया गया है कि आर्थिक हानि उम्मीद से कहीं ज़्यादा है. 

पिछले वर्ष जुलाई में, यूएन एजेंसी का अनुमान था कि अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन में आए ठहराव से विश्व अर्थव्यवस्था को एक हज़ार 200 अरब डॉलर से लेकर तीन हज़ार 300 अरब डॉलर की चपत लग सकती है. 

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में पर्यटकों के आगमन में आई तेज़ गिरावट से दो हज़ार 400 अरब डॉलर का आर्थिक नुक़सान हुआ.

रिपोर्ट में जिन परिदृश्यों को पेश किया गया है, उनके अनुसार अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन में इस वर्ष की दूसरी छमाही में बेहतरी की उम्मीद है.

इसके बावजूद वर्ष 2019 के स्तर की तुलना में एक हज़ार 700 अरब डॉलर से लेकर दो हज़ार 400 अरब डॉलर के बीच नुक़सान होने की आशंका है. यह आँकड़ा कुछ हद तक टीकाकरण की रफ़्तार पर भी निर्भर करेगा.

यूएन एजेंसी की कार्यवाहक महासचिव इज़ाबेल डुरान्ट ने बताया, “दुनिया को एक वैश्विक टीकाकरण प्रयास की आवश्यकता है, जो कामगारों की रक्षा करे, सामाजिक असर के दुष्प्रभावों को कम करे, और भावी ढाँचागत बदलावों को ध्यान में रखते हुए पर्यटन के सम्बन्ध में रणनीतिक निर्णय ले.” 

लाखों-करोड़ों लोगों के लिये पर्यटन एक जीवनरेखा है और टीकाकरण को बढ़ावा देकर समुदायों की रक्षा की जा सकती है और फिर से इस सैक्टर की सुरक्षित पुनर्बहाली को सुनिश्चित किया जा सकता है. 

इससे रोज़ागरों की रक्षा करने और अर्थव्यवस्था के लिये संसाधनों को जुटाने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से विकासशील देशों में.

विकासशील देश अधिक प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन में पिछले वर्ष लगभग एक अरब, यानि 73 प्रतिशत की गिरावट आई है. वर्ष 2021 की पहली तिमाही में यह गिरावट 88 फ़ीसदी आंकी गई. 

विकासशील देशों में पर्यटन पर महामारी का ज़्यादा असर हुआ है, और पर्यटकों के आगमन में 60 से 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. 

इन्हीं देशों में वैक्सीन वितरण में विषमता देखने को मिल रही है. यूएन एजेंसियों ने सचेत किया है कि कोविड-19 वैक्सीन की न्यायसंगत उपलब्धता के अभाव ने पर्यटन सैक्टर के लिये संकट को विशाल बना दिया है. 

रिपोर्ट के मुताबिक जिन देशों में टीकाकरण की ऊँची दर है, वहाँ पर्यटन सैक्टर के जल्द उबर पाने की उम्मीद है. उदाहरण के तौर पर, फ्राँस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका.

मगर अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन को, महामारी के पूर्व के स्तर तक लौटने में 2023 या उससे भी बाद तक का समय लग सकता है. 

अनेक प्रकार की यात्रा पाबन्दियों, वायरस पर क़ाबू पाने की धीमी रफ़्तार, यात्रियों में विश्वास की कमी और ख़राब आर्थिक माहौल इसकी वजह के रूप में गिनाए गए हैं.  

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