कोविड-19 के दौर में कामकाजी सुरक्षा का मुद्दा

कोविड-19 महामारी के कारण, दुनिया भर में, अपने घरों से ही काम करने वालों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है, जिसने रोज़गार देने वालों के लिये इस ज़रूरत पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है कि वो कर्मचारियों व कामगारों के लिये सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें. 28 अप्रैल को, कार्यस्थलों पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये विश्व दिवस के अवसर पर, यहाँ प्रस्तुत है एक आकलन कि संयुक्त राष्ट्र, लोगों को, उनके कामकाज के दौरान समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में, रोज़गार देने वालों और सरकारों की, किस तरह मदद कर रहा है…

कोविड-19 ने कामकाजी दुनिया को उलट-पलट कर रख दिया है, और ये प्रभाव बहुत लम्बे समय तक रहने वाले हैं. महामारी का फैलाव शुरू होने से पहले, लगभग 26 करोड़ ऐसे कामकाजी लोग थे जो अपने घरों से काम करते थे (इनमें घरेलू और देखभाल कर्मी शामिल नहीं थे). 
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का अनुमन है कि ये आँकड़ा दो गुना होने की सम्भावना है क्योंकि उत्तर अमेरिका व योरोप में हर तीन में से एक व्यक्ति, अपने कार्यस्थलों से अलग स्थानों से काम कर रहे हैं जिनमें मुख्य रूप से उनके घर ही शामिल हैं. सब सहारा अफ्रीका क्षेत्र में ये आँकड़ा हर 6 में से एक व्यक्ति का है.
विशेष रूप, विकसित दुनिया में, वैक्सीन का टीकाकरण शुरू होने के बाद, लोगों के अपने मूल कार्यस्थलों को वापिस लौटकर काम शुरू करने की सम्भावनाएँ बढ़ गई हैं, मगर बहुत सी कम्पनियों और कामगारों ने, स्टाफ़ द्वारा अपने घरों से ही काम करते रहने का संकेत दिया है, क्योंकि उन्हें अपने घरों से ही कामकाज करने के अनेक फ़ायदे नज़र आए हैं.
रोज़गार देने वालों के लिये, ये अवसर संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने और सम्भवतः ख़र्चीले कार्यालय स्थलों पर कम धन ख़र्च करने का भी मौक़ा है. उधर स्टाफ़ को घर से कार्यस्थलों तक जाने और वापसी पर धन व समय ख़र्च नहीं करना पड़ेगा.
‘हताशा में घिरने लगें तो समझें, मैं आपके साथ हूँ’
बेशक, कुछ लोग टैलीमीटिंग के दौरान या तो ब्रेड बनाने का आनन्द उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग चहलक़दमी या बाहर की ताज़ा हवा में ऑक्सीज़न ले रहे हैं, जबकि कुछ अन्य लोग कार्यस्थल तक जाने और वापिस आने वाला समय, अपना कोई शौक़ पूरा करने के लिये ख़र्च कर रहे हैं. उधर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने औपचारिक व परम्परागत कार्य -जीवन में जल्दी वापिस लौटने के लिये बेताब हैं.

World Bank/Henitsoa Rafaliaमैडागास्कर में घर से काम कर रहा एक व्यक्ति अपने बच्चे की देखभाल भी कर रहा है.

न्यूयॉर्क स्थित अपने घर से काम करने वाली एक ऐसी ही कर्मचारी पॉलीना का कहना है, “मैं ख़ुद से रोज़ाना ये कहती हूँ कि मैं, अपने पास ऐसा रोज़गार होने के लिये बहुत आभारी हूँ जिसमें मेरे सहयोगी और मैनेजर बहुत समझदार हैं. लेकिन कुल मिलाकर ये बहुत कठिन अनुभव है.”
“अगर आप भी एक ऐसी कामकाजी महिला हैं जो हर दिन हताशा के समुन्दर में डूबने लगती हैं, तो समझ लीजिये कि मैं बिल्कुल आपके पास और साथ हूँ.”
“मैंने न्यूयॉर्क के अपने मकान के छोटे से किचन में रहकर ही, भोजन पकाते हुए, एक लैपटॉप और हैडफ़ोन के साथ, कामकाजी बैठकों की अगुवाई की है, और मेरे छोटे बच्चे चीख़ते-चिल्लाते, मेरे टख़नों से चिपके हुए, उन्हें गोद में उठाने की आस लगाए रहते हैं. ऐसा एक दो-बार होना तो अच्छा लग सकता है, मगर कामकाजी बैठकों के दौरान, पीछे से बच्चों की किलकारियाँ और चीख़-चिल्लाहट, शायद ज़्यादा लम्बे समय तक सहन नहीं की जा सकतीं. शायद, मुझे इसकी ज़्यादा समझ है क्योंकि मेरा सब्र, जुलाई में किसी समय जवाब दे चुका था.”
इस तरह की आपबीती वाली कहानियाँ हमें ये समझने में मदद करती हैं जिसके बारे में, आईएलओ की एक ताज़ा रिपोर्ट में भी बताया गया है कि घरों से काम करने वालों में से लगभग 41 प्रतिशत लोग, क्यों उच्च दबाव महसूस करते हैं, जबकि अपने कार्यस्थलों पर काम करने वालों में ऐसा उच्च दबाव महसूस करने वालों की संख्या केवल 25 प्रतिशत देखी गई है.
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) में, पेशेवर स्वास्थ्य और सुरक्षा मामलों के प्रमुख जोआख़िम न्यूनेस का कहना है, “कार्यस्थल पर किसी संक्रमण या दूषण के जोखिम को दूर रखने का सबसे प्रभावशाली उपाय है – जो लोग ऐसा कर सकें – टैलीवर्किंग – यानि अपने घरों या कार्यस्थलों से दूर रहकर ही काम करना. मगर हमें फिर भी कामगारों और स्टाफ़ की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बेहतरी का ख़याल रखना होगा.”
उनका कहना है कि बहुत से लोगों के कामकाज में, अब टैलीवर्किंग एक बहुत अहम कारक रहने वाला है, तो कार्यस्थल व कामकाजी नीतियों में भी इस नई वास्तविकता को स्थान व आहमियत देने के लिये बदलाव व सुधार करने होंगे.
“ऐसी बहुत अधिक सम्भावना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान टैलीवर्किंग में हुई बढ़ोत्तरी से, हमारे कामकाज करने और जीवन जीने के तरीक़ों में ही स्थाई बदलाव हो जाएँ. बहुत से देशों की सरकारों ने यह पहले ही समझ लिया है और घरों से काम करने वाले कामगारों के अधिकारों पर ताज़ा नज़र डाल रहे हैं.”
“उदाहरण स्वरूप, कम्पनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि उनके कामगार अलगाव महसूस ना करें, साथ ही उन्हें दिन में 24 घण्टे, कार्यस्थल से जुड़े रहने के बजाय, नैटवर्क से बाहर रहने का भी अधिकार दिया जाए.”
चिली में, मार्च 2020 में एक नया क़ानून बनाया गया जिसमें इस तरह की कुछ चिन्ताओं पर ध्यान दिया गया है. इस क़ानून में, घरों से काम करने वाले स्टाफ़ को 24 घण्टों में, कम से कम 12 घण्टों के लिये, अपने कामकाज से दूर रहने के अधिकार को पहचान दी गई है. इसके अतिरिक्त, उनके नियोक्ता या रोज़गार देने वाले, अपने कामगारों या स्टाफ़ से, उनके विश्राम या अवकाश दिनों में किसी संचार या सन्देश का जवाब देने की उम्मीद नहीं कर सकते.

ILO/Minette Rimandoफ़िलिपीन्स के मुनतिनलुपा शहर की एक दुकान में ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र शारीरिक दूरी बरतने, मास्क पहनने और बचाव के लिये प्लास्टिक शीट लगाने का इस्तेमाल किया जा रहा है.

एक स्वस्थ घर?
आराम व मानसिक स्वास्थ्य से भी परे, एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है – शारीरिक सुरक्षा का. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि अधिकतर दुर्घटनाएँ घरों पर होती हैं, इसलिये, अगर घरों पर ही कामकाजी सप्ताह का ज़्यादातर समय व्यतीत किया जाता है तो, क्या ये ज़िम्मेदारी नियोक्ताओं या रोज़गार देने वालों की नहीं है कि वो ये सुनिश्चित करें कि उनके स्टाफ़ के मकान, मौत की बेड़ी ना बन जाएँ.
जोआख़िम न्यूनेस का कहना है, “घरों में एक दुरुस्त कार्यस्थल वातावरण सुनिश्चित करने की बात आती है तो,  फ़िलहाल तो इस सवाल का कोई आसान जवाब नहीं है. अलबत्ता, हम ये कह सकते हैं कि जो सिद्धान्त व नियम, अन्य कार्यस्थलों के लिये लागू होते हैं, वो ही, दूरस्थ स्थानों से काम करने वालों यानि टैलीवर्करों के साथ भी लागू हों. ऐसे में, देखभाल सुनिश्चित करने की यथासम्भव मूलभूत ज़िम्मेदारी, नियोक्ताओं व रोज़गार देने वालों की है.”
“जब स्टाफ़ अपने घरों से काम करते हैं तो नियोक्ता या रोज़गार देने वाले, कार्यस्थल को नियन्त्रित नहीं कर सकते, लेकिन वो अपने कामगारों को ऐसे उपकरण व साधन उपलब्ध करा सकते हैं जो उनके काम करने में स्वास्थ्य के लिये सहायक हों, जैसेकि – उपयुक्त मेज़ – कुर्सियाँ वग़ैरा. साथ ही उन्हें अपना ख़ुद का जोखिम आकलन करने और अपनी कार्यशाली व जीवन शैली स्वस्थ रखने के बारे में, ख़ुद ही जागरूक बनने और स्वस्थ उपायों का पालन करने के लिये भी प्रोत्साहित करें.”
जोआख़िम न्यूनेस कहते हैं कि टैलीवर्किंग, श्रम मानक, नियम व क़ानूनों की निगरानी करने वाली एजेंसियों के लिये भी एक चुनौती वाला वातावरण है क्योंकि आमतौर पर, निरीक्षकों को, लोगों के निजी स्थानों पर, मुक्त रूप से निगरानी करने का मौक़ा नहीं मिलता है. नियमों व क़ानूनों का पालन सुनिश्चित करने का एक तरीक़ा हो सकता है – वर्चुअल निरीक्षण, जोकि नॉर्डिक (उत्तरी योरोपीय) देशों में पहले ही स्वेच्छिक आधार पर हो रहा है. (इस क्षेत्र के देशों में मुख्य रूप से – डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैण्ड और आइसलैण्ड शामिल हैं.)
“इस तरह के उपायों में श्रम निरीक्षक, आमतौर पर किसी कामगार के घर पर वीडियो कॉल करते हैं, और उन्हें स्टाफ़ की कामकाज करने की मेज़, कुर्सी और प्रकाश व्यवस्था दिखाई जाती है. इस तरह के निरीक्षण के ज़रिये घरों पर कार्यस्थल बनाने के इन्तज़ामों की निगरानी की जा सकती है और उसी के अनुसार परामर्श दिया जा ससता है, लेकिन इसमें, कुछ निजता सम्बन्धी चिन्ताएँ भी हैं जिन्हें ध्यान में रखना ज़रूरी है.“

ILO/Yacine Imadalouकोविड-19 महामारी संकट के दौरान, अल्जीरिया की एक दुकान में, बेकरी का सामान बेचते दुकानदार.

अग्रिम मोर्चे के भय
ऐसे में जबकि हाल ही में टैलीवर्किंग शुरू करने वाले कर्मचारी और उनके नियोक्ता, अपनी इस नई वास्तविकता को समझने और इसके साथ समायोजन करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ वैश्विक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसके पास, अपने कार्यस्थलों पर मौजूद रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.
स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के सामने दरपेश कठिनाइयों के बारे में तो काफ़ी ख़बरें देखी गई हैं, मगर अनेक अन्य तरह के उद्योगों के कर्मचारियों ने भी अपने कार्यस्थलों तक यात्रा करने का साहस दिखाया है – कभी भीड़ भरी रेलगाड़ियों या बसों में –  और उन्हें अक्सर अन्य लोगों के साथ वार्तालाप भी करना पड़ता है, जोकि उनके स्वास्थ्य के लिये एक जोखिम वाला माहौल होता है.
अमेरिका में, इस तरह के डर के माहौल के कारण, खाद्य पदार्थों की बिक्री व आपूर्ति करने वाली –  ऐमेज़ॉन की एक सहायक कम्पनी – व्होल फ़ूड्स के कर्मचारियों ने सामूहिक कार्रवाई करने का रास्ता चुना. इस कम्पनी के कर्मचारियो ने जब अपने सहयोगियों को कोविड-19 से संक्रमित होते देखा तो, उन्होंने  31 मार्च 2020 को, ऐसे सहयोगियों को बीमार घोषित किये जाने और उनके लिये बीमारी अवकाश दिये जाने की मांग करने का फ़ैसला किया. साथ ही, कोरोनावायरस का मुफ़्त टैस्ट और आपदा वेतन भी अदा किये जाने की माँग की गई. इसके बाद, अप्रैल में, अमेरिका की वॉलमार्ट, टारगेट और फ़ेडऐक्स जैसी अनेक बड़ी कम्पनियों में, कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में कामकाज भी ठप किया.
कोरोनावायरस की रोकथाम व उससे बचने के लिये, शुरुआती दिनों में तो ख़ासतौर से, हाथ साफ़ रखने, मास्क और दस्ताने पहनने व शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसे उपायों पर ज़ोर दिया गया. मगर आईएलओ ने जल्द ही समझ लिया कि कामकाजी मुद्दों से निपटने के लिये, और ज़्यादा उपाय किये जाने की ज़रूरत थी.
जोआख़िम न्यूनेस कहते हैं, “किसी कार्यस्थल पर, आपको किसी एक कर्मचारी या कामगार से कहीं ज़्यादा के बारे में सोचना पड़ता है: सम्पूर्ण वातावरण को सुरक्षित बनाना होता है. एक ऐसा उदाहरण जो हम सभी ने देखा होगा – वो हैं – दुकानें और सुपरबाज़ार, जहाँ ख़जांची और ग्राहकों के बीच, एक प्लास्टिक की पारदर्शी दीवार का नज़र आना एक आम बात हो गई है. कार्यस्थलों को भी बार-बार और जल्दी-जल्दी स्वच्छ किया जा रहा है. मगर स्वच्छता के लिये इस्तेमाल होने वाले रसायनों व स्वच्छता पदार्थों के कारण, त्वचा या साँस सम्बन्धी बीमारियाँ होने की चिन्ताएँ भी उठने लगी हैं जिनका सामना करना भी ज़रूरी है.”
स्वास्थ्य देखभाल और खुदरा बाज़ार जैसे क्षेत्र तो इस तरह के मुद्दों का सामना काफ़ी समय से कर रहे हैं, अर्थव्यवस्थाओं के अन्य हिस्से भी जल्द ही खुलने लगेंगे. अनेक देशों में, बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने वाले आयोजनों व कार्यक्रमों की अनुमति दिये जाने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं, साथ ही, अनुमति वाली पर्यटन गतिविधियों का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है.
अलबत्ता, ये सभी गतिविधियाँ होने के लिये, और अर्थव्यवस्थाओं के सुरक्षित तरीक़े से, फिर से काम करने के लिये, सरकारों और नियोक्ताओं को, कामगारों के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करना होगा कि इन कार्यस्थलों और अन्य उद्योगों में कामकाजी लोग सुरक्षित हों, और उन्हें ये भरोसा भी हो कि उन्हें अनावश्यक जोखिम का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिनमें, कोविड-19 से सम्बन्धित ख़तरे भी शामिल हैं., कोविड-19 महामारी के कारण, दुनिया भर में, अपने घरों से ही काम करने वालों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है, जिसने रोज़गार देने वालों के लिये इस ज़रूरत पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है कि वो कर्मचारियों व कामगारों के लिये सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें. 28 अप्रैल को, कार्यस्थलों पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये विश्व दिवस के अवसर पर, यहाँ प्रस्तुत है एक आकलन कि संयुक्त राष्ट्र, लोगों को, उनके कामकाज के दौरान समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में, रोज़गार देने वालों और सरकारों की, किस तरह मदद कर रहा है…

कोविड-19 ने कामकाजी दुनिया को उलट-पलट कर रख दिया है, और ये प्रभाव बहुत लम्बे समय तक रहने वाले हैं. महामारी का फैलाव शुरू होने से पहले, लगभग 26 करोड़ ऐसे कामकाजी लोग थे जो अपने घरों से काम करते थे (इनमें घरेलू और देखभाल कर्मी शामिल नहीं थे). 

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का अनुमन है कि ये आँकड़ा दो गुना होने की सम्भावना है क्योंकि उत्तर अमेरिका व योरोप में हर तीन में से एक व्यक्ति, अपने कार्यस्थलों से अलग स्थानों से काम कर रहे हैं जिनमें मुख्य रूप से उनके घर ही शामिल हैं. सब सहारा अफ्रीका क्षेत्र में ये आँकड़ा हर 6 में से एक व्यक्ति का है.

विशेष रूप, विकसित दुनिया में, वैक्सीन का टीकाकरण शुरू होने के बाद, लोगों के अपने मूल कार्यस्थलों को वापिस लौटकर काम शुरू करने की सम्भावनाएँ बढ़ गई हैं, मगर बहुत सी कम्पनियों और कामगारों ने, स्टाफ़ द्वारा अपने घरों से ही काम करते रहने का संकेत दिया है, क्योंकि उन्हें अपने घरों से ही कामकाज करने के अनेक फ़ायदे नज़र आए हैं.

रोज़गार देने वालों के लिये, ये अवसर संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने और सम्भवतः ख़र्चीले कार्यालय स्थलों पर कम धन ख़र्च करने का भी मौक़ा है. उधर स्टाफ़ को घर से कार्यस्थलों तक जाने और वापसी पर धन व समय ख़र्च नहीं करना पड़ेगा.

‘हताशा में घिरने लगें तो समझें, मैं आपके साथ हूँ’

बेशक, कुछ लोग टैलीमीटिंग के दौरान या तो ब्रेड बनाने का आनन्द उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग चहलक़दमी या बाहर की ताज़ा हवा में ऑक्सीज़न ले रहे हैं, जबकि कुछ अन्य लोग कार्यस्थल तक जाने और वापिस आने वाला समय, अपना कोई शौक़ पूरा करने के लिये ख़र्च कर रहे हैं. उधर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने औपचारिक व परम्परागत कार्य -जीवन में जल्दी वापिस लौटने के लिये बेताब हैं.


World Bank/Henitsoa Rafalia
मैडागास्कर में घर से काम कर रहा एक व्यक्ति अपने बच्चे की देखभाल भी कर रहा है.

न्यूयॉर्क स्थित अपने घर से काम करने वाली एक ऐसी ही कर्मचारी पॉलीना का कहना है, “मैं ख़ुद से रोज़ाना ये कहती हूँ कि मैं, अपने पास ऐसा रोज़गार होने के लिये बहुत आभारी हूँ जिसमें मेरे सहयोगी और मैनेजर बहुत समझदार हैं. लेकिन कुल मिलाकर ये बहुत कठिन अनुभव है.”

“अगर आप भी एक ऐसी कामकाजी महिला हैं जो हर दिन हताशा के समुन्दर में डूबने लगती हैं, तो समझ लीजिये कि मैं बिल्कुल आपके पास और साथ हूँ.”

“मैंने न्यूयॉर्क के अपने मकान के छोटे से किचन में रहकर ही, भोजन पकाते हुए, एक लैपटॉप और हैडफ़ोन के साथ, कामकाजी बैठकों की अगुवाई की है, और मेरे छोटे बच्चे चीख़ते-चिल्लाते, मेरे टख़नों से चिपके हुए, उन्हें गोद में उठाने की आस लगाए रहते हैं. ऐसा एक दो-बार होना तो अच्छा लग सकता है, मगर कामकाजी बैठकों के दौरान, पीछे से बच्चों की किलकारियाँ और चीख़-चिल्लाहट, शायद ज़्यादा लम्बे समय तक सहन नहीं की जा सकतीं. शायद, मुझे इसकी ज़्यादा समझ है क्योंकि मेरा सब्र, जुलाई में किसी समय जवाब दे चुका था.”

इस तरह की आपबीती वाली कहानियाँ हमें ये समझने में मदद करती हैं जिसके बारे में, आईएलओ की एक ताज़ा रिपोर्ट में भी बताया गया है कि घरों से काम करने वालों में से लगभग 41 प्रतिशत लोग, क्यों उच्च दबाव महसूस करते हैं, जबकि अपने कार्यस्थलों पर काम करने वालों में ऐसा उच्च दबाव महसूस करने वालों की संख्या केवल 25 प्रतिशत देखी गई है.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) में, पेशेवर स्वास्थ्य और सुरक्षा मामलों के प्रमुख जोआख़िम न्यूनेस का कहना है, “कार्यस्थल पर किसी संक्रमण या दूषण के जोखिम को दूर रखने का सबसे प्रभावशाली उपाय है – जो लोग ऐसा कर सकें – टैलीवर्किंग – यानि अपने घरों या कार्यस्थलों से दूर रहकर ही काम करना. मगर हमें फिर भी कामगारों और स्टाफ़ की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बेहतरी का ख़याल रखना होगा.”

उनका कहना है कि बहुत से लोगों के कामकाज में, अब टैलीवर्किंग एक बहुत अहम कारक रहने वाला है, तो कार्यस्थल व कामकाजी नीतियों में भी इस नई वास्तविकता को स्थान व आहमियत देने के लिये बदलाव व सुधार करने होंगे.

“ऐसी बहुत अधिक सम्भावना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान टैलीवर्किंग में हुई बढ़ोत्तरी से, हमारे कामकाज करने और जीवन जीने के तरीक़ों में ही स्थाई बदलाव हो जाएँ. बहुत से देशों की सरकारों ने यह पहले ही समझ लिया है और घरों से काम करने वाले कामगारों के अधिकारों पर ताज़ा नज़र डाल रहे हैं.”

“उदाहरण स्वरूप, कम्पनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि उनके कामगार अलगाव महसूस ना करें, साथ ही उन्हें दिन में 24 घण्टे, कार्यस्थल से जुड़े रहने के बजाय, नैटवर्क से बाहर रहने का भी अधिकार दिया जाए.”

चिली में, मार्च 2020 में एक नया क़ानून बनाया गया जिसमें इस तरह की कुछ चिन्ताओं पर ध्यान दिया गया है. इस क़ानून में, घरों से काम करने वाले स्टाफ़ को 24 घण्टों में, कम से कम 12 घण्टों के लिये, अपने कामकाज से दूर रहने के अधिकार को पहचान दी गई है. इसके अतिरिक्त, उनके नियोक्ता या रोज़गार देने वाले, अपने कामगारों या स्टाफ़ से, उनके विश्राम या अवकाश दिनों में किसी संचार या सन्देश का जवाब देने की उम्मीद नहीं कर सकते.


ILO/Minette Rimando
फ़िलिपीन्स के मुनतिनलुपा शहर की एक दुकान में ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र शारीरिक दूरी बरतने, मास्क पहनने और बचाव के लिये प्लास्टिक शीट लगाने का इस्तेमाल किया जा रहा है.

एक स्वस्थ घर?

आराम व मानसिक स्वास्थ्य से भी परे, एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है – शारीरिक सुरक्षा का. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि अधिकतर दुर्घटनाएँ घरों पर होती हैं, इसलिये, अगर घरों पर ही कामकाजी सप्ताह का ज़्यादातर समय व्यतीत किया जाता है तो, क्या ये ज़िम्मेदारी नियोक्ताओं या रोज़गार देने वालों की नहीं है कि वो ये सुनिश्चित करें कि उनके स्टाफ़ के मकान, मौत की बेड़ी ना बन जाएँ.

जोआख़िम न्यूनेस का कहना है, “घरों में एक दुरुस्त कार्यस्थल वातावरण सुनिश्चित करने की बात आती है तो,  फ़िलहाल तो इस सवाल का कोई आसान जवाब नहीं है. अलबत्ता, हम ये कह सकते हैं कि जो सिद्धान्त व नियम, अन्य कार्यस्थलों के लिये लागू होते हैं, वो ही, दूरस्थ स्थानों से काम करने वालों यानि टैलीवर्करों के साथ भी लागू हों. ऐसे में, देखभाल सुनिश्चित करने की यथासम्भव मूलभूत ज़िम्मेदारी, नियोक्ताओं व रोज़गार देने वालों की है.”

“जब स्टाफ़ अपने घरों से काम करते हैं तो नियोक्ता या रोज़गार देने वाले, कार्यस्थल को नियन्त्रित नहीं कर सकते, लेकिन वो अपने कामगारों को ऐसे उपकरण व साधन उपलब्ध करा सकते हैं जो उनके काम करने में स्वास्थ्य के लिये सहायक हों, जैसेकि – उपयुक्त मेज़ – कुर्सियाँ वग़ैरा. साथ ही उन्हें अपना ख़ुद का जोखिम आकलन करने और अपनी कार्यशाली व जीवन शैली स्वस्थ रखने के बारे में, ख़ुद ही जागरूक बनने और स्वस्थ उपायों का पालन करने के लिये भी प्रोत्साहित करें.”

जोआख़िम न्यूनेस कहते हैं कि टैलीवर्किंग, श्रम मानक, नियम व क़ानूनों की निगरानी करने वाली एजेंसियों के लिये भी एक चुनौती वाला वातावरण है क्योंकि आमतौर पर, निरीक्षकों को, लोगों के निजी स्थानों पर, मुक्त रूप से निगरानी करने का मौक़ा नहीं मिलता है. नियमों व क़ानूनों का पालन सुनिश्चित करने का एक तरीक़ा हो सकता है – वर्चुअल निरीक्षण, जोकि नॉर्डिक (उत्तरी योरोपीय) देशों में पहले ही स्वेच्छिक आधार पर हो रहा है. (इस क्षेत्र के देशों में मुख्य रूप से – डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैण्ड और आइसलैण्ड शामिल हैं.)

“इस तरह के उपायों में श्रम निरीक्षक, आमतौर पर किसी कामगार के घर पर वीडियो कॉल करते हैं, और उन्हें स्टाफ़ की कामकाज करने की मेज़, कुर्सी और प्रकाश व्यवस्था दिखाई जाती है. इस तरह के निरीक्षण के ज़रिये घरों पर कार्यस्थल बनाने के इन्तज़ामों की निगरानी की जा सकती है और उसी के अनुसार परामर्श दिया जा ससता है, लेकिन इसमें, कुछ निजता सम्बन्धी चिन्ताएँ भी हैं जिन्हें ध्यान में रखना ज़रूरी है.“


ILO/Yacine Imadalou
कोविड-19 महामारी संकट के दौरान, अल्जीरिया की एक दुकान में, बेकरी का सामान बेचते दुकानदार.

अग्रिम मोर्चे के भय

ऐसे में जबकि हाल ही में टैलीवर्किंग शुरू करने वाले कर्मचारी और उनके नियोक्ता, अपनी इस नई वास्तविकता को समझने और इसके साथ समायोजन करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ वैश्विक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसके पास, अपने कार्यस्थलों पर मौजूद रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.

स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के सामने दरपेश कठिनाइयों के बारे में तो काफ़ी ख़बरें देखी गई हैं, मगर अनेक अन्य तरह के उद्योगों के कर्मचारियों ने भी अपने कार्यस्थलों तक यात्रा करने का साहस दिखाया है – कभी भीड़ भरी रेलगाड़ियों या बसों में –  और उन्हें अक्सर अन्य लोगों के साथ वार्तालाप भी करना पड़ता है, जोकि उनके स्वास्थ्य के लिये एक जोखिम वाला माहौल होता है.

अमेरिका में, इस तरह के डर के माहौल के कारण, खाद्य पदार्थों की बिक्री व आपूर्ति करने वाली –  ऐमेज़ॉन की एक सहायक कम्पनी – व्होल फ़ूड्स के कर्मचारियों ने सामूहिक कार्रवाई करने का रास्ता चुना. इस कम्पनी के कर्मचारियो ने जब अपने सहयोगियों को कोविड-19 से संक्रमित होते देखा तो, उन्होंने  31 मार्च 2020 को, ऐसे सहयोगियों को बीमार घोषित किये जाने और उनके लिये बीमारी अवकाश दिये जाने की मांग करने का फ़ैसला किया. साथ ही, कोरोनावायरस का मुफ़्त टैस्ट और आपदा वेतन भी अदा किये जाने की माँग की गई. इसके बाद, अप्रैल में, अमेरिका की वॉलमार्ट, टारगेट और फ़ेडऐक्स जैसी अनेक बड़ी कम्पनियों में, कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में कामकाज भी ठप किया.

कोरोनावायरस की रोकथाम व उससे बचने के लिये, शुरुआती दिनों में तो ख़ासतौर से, हाथ साफ़ रखने, मास्क और दस्ताने पहनने व शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसे उपायों पर ज़ोर दिया गया. मगर आईएलओ ने जल्द ही समझ लिया कि कामकाजी मुद्दों से निपटने के लिये, और ज़्यादा उपाय किये जाने की ज़रूरत थी.

जोआख़िम न्यूनेस कहते हैं, “किसी कार्यस्थल पर, आपको किसी एक कर्मचारी या कामगार से कहीं ज़्यादा के बारे में सोचना पड़ता है: सम्पूर्ण वातावरण को सुरक्षित बनाना होता है. एक ऐसा उदाहरण जो हम सभी ने देखा होगा – वो हैं – दुकानें और सुपरबाज़ार, जहाँ ख़जांची और ग्राहकों के बीच, एक प्लास्टिक की पारदर्शी दीवार का नज़र आना एक आम बात हो गई है. कार्यस्थलों को भी बार-बार और जल्दी-जल्दी स्वच्छ किया जा रहा है. मगर स्वच्छता के लिये इस्तेमाल होने वाले रसायनों व स्वच्छता पदार्थों के कारण, त्वचा या साँस सम्बन्धी बीमारियाँ होने की चिन्ताएँ भी उठने लगी हैं जिनका सामना करना भी ज़रूरी है.”

स्वास्थ्य देखभाल और खुदरा बाज़ार जैसे क्षेत्र तो इस तरह के मुद्दों का सामना काफ़ी समय से कर रहे हैं, अर्थव्यवस्थाओं के अन्य हिस्से भी जल्द ही खुलने लगेंगे. अनेक देशों में, बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने वाले आयोजनों व कार्यक्रमों की अनुमति दिये जाने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं, साथ ही, अनुमति वाली पर्यटन गतिविधियों का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है.

अलबत्ता, ये सभी गतिविधियाँ होने के लिये, और अर्थव्यवस्थाओं के सुरक्षित तरीक़े से, फिर से काम करने के लिये, सरकारों और नियोक्ताओं को, कामगारों के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करना होगा कि इन कार्यस्थलों और अन्य उद्योगों में कामकाजी लोग सुरक्षित हों, और उन्हें ये भरोसा भी हो कि उन्हें अनावश्यक जोखिम का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिनमें, कोविड-19 से सम्बन्धित ख़तरे भी शामिल हैं.


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