कोविड-19 के नए रूप पर सख़्त निगरानी, ब्रिटेन से यात्राओं पर अनेक देशों में रोक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में, कोरोनावायरस के जो अन्य प्रकार या रूप पाए गए हैं, उनके बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल करने के लिये, वैज्ञानिक काम पर जुटे हुए हैं. 

ख़बरों के अनुसार, कोरोनोवायरस का नया रूप पाए जाने पर गहराई चिन्ताओं के बीच, 40 से ज़्यादा देशों ने, ब्रिटेन से आने वाली विमान उड़ानों पर पाबन्दी लगा दी है.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/v4Nk0RLAJ9— World Health Organization (WHO) (@WHO) December 21, 2020

इस वायरस के नए रूप के बारे में कहा गया है कि यह ज़्यादा आसानी से संक्रमित होने वाला है, अलबत्ता, स्वास्थ्य अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा है कि इस बात के की सबूत नहीं हैं कि वायरस का ये नया रूप घातक है.
साथ ही इसके भी कोई सबूत नहीं हैं कि वायरस के इस नए रूप पर, आपात स्थिति में इस्तेमाल किये जाने के लिये मंज़ूर की गई वैक्सीन का कोई असर नहीं होगा.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “सबसे अहम बात ये है कि हमें कोविड-19 वायरस के फैलाव को जल्द से जल्द रोकना है.”
उन्होंने कहा, “हम इस वायरस को जितना और ज़्यादा फैलने देंगे, उतना ही ज़्यादा समय, इस वायरस को अपने रूप या प्रकार बदलने के लिये मिलेगा.”
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि वर्ष 2021 के शुरू में ही, निम्न व मध्य आय वाले लगभग 20 प्रतिशत देशों के लिये कोविड-19 की वैक्सीन ख़रीदने की ख़ातिर, लगभग 4 अरब 60 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त रक़म की ज़रूरत होगी.
उन्होंने कहा, “इससे ये सुनिश्चित किया जा सकेगा कि स्वास्थ्यकर्मी और कोरोनावायरस से प्रभावित ख़तरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को वैक्सीन मिल सके. ये स्वास्थ्य सेवाओं व अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करने, और वैश्विक पुनर्बहाली का सबसे तीव्र तरीक़ा होगा.”
नए उपायों की तलाश
विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ़ और विश्व बैंक द्वारा चलाए गए एक प्रमुख अभियान पहल 100-100 पहल के तहत, 100 देशों को तीव्र परीक्षण व जाँच-पड़ताल के लिये तैयारियाँ करने और देशों की ज़रूरतों के अनुरूप वैक्सीन की योजनाएँ, 100 दिनों के भीतर तैयार करने व कोविड-19 के ख़िलाफ़ अन्य उपकरण व उपायों में मदद की जा रही है. 
इस पहल के तहत, 89 देशों ने अपने यहाँ आकलन का काम पूरा भी कर लिया है और टीमें, ये सुनिश्चित करने के लिये दिन-रात काम कर रही हैं कि सरकारें और स्वास्थ्य प्रणालियाँ, वैक्सीन जारी होने की स्थिति को संभालने के लिये तैयार हैं.
डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि कोरोनावायरस ने एक तरफ़ तो दुनिया भर की कमज़ोरियों और असमानताओं को उजागर किया है और उनकी वजह से ही इसे फलने-फूलने का भी मौक़ा मिला है.
दूसरी तरफ़, इस महामारी ने ये भी दिखा दिया है कि इस असाधारण संकट की घड़ी में, हम सभी इसका नए तरीक़ों से मुक़ाबला करने के लिये एकजुट भी हो सकते हैं.
“हर एक संकट, कामकाज करने के हमारे मौजूदा तरीक़ों पर पुनर्विचार करने का एक मौक़ा भी होता है, और इसी मौक़े के फ़ायदा उठाकर, हम किसी संकट का मुक़ाबला करने या अपने तौर-तरीक़े बदलने के नए रास्ते भी तलाश कर सकते हैं.”, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में, कोरोनावायरस के जो अन्य प्रकार या रूप पाए गए हैं, उनके बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल करने के लिये, वैज्ञानिक काम पर जुटे हुए हैं. 

ख़बरों के अनुसार, कोरोनोवायरस का नया रूप पाए जाने पर गहराई चिन्ताओं के बीच, 40 से ज़्यादा देशों ने, ब्रिटेन से आने वाली विमान उड़ानों पर पाबन्दी लगा दी है.

इस वायरस के नए रूप के बारे में कहा गया है कि यह ज़्यादा आसानी से संक्रमित होने वाला है, अलबत्ता, स्वास्थ्य अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा है कि इस बात के की सबूत नहीं हैं कि वायरस का ये नया रूप घातक है.

साथ ही इसके भी कोई सबूत नहीं हैं कि वायरस के इस नए रूप पर, आपात स्थिति में इस्तेमाल किये जाने के लिये मंज़ूर की गई वैक्सीन का कोई असर नहीं होगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “सबसे अहम बात ये है कि हमें कोविड-19 वायरस के फैलाव को जल्द से जल्द रोकना है.”

उन्होंने कहा, “हम इस वायरस को जितना और ज़्यादा फैलने देंगे, उतना ही ज़्यादा समय, इस वायरस को अपने रूप या प्रकार बदलने के लिये मिलेगा.”

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि वर्ष 2021 के शुरू में ही, निम्न व मध्य आय वाले लगभग 20 प्रतिशत देशों के लिये कोविड-19 की वैक्सीन ख़रीदने की ख़ातिर, लगभग 4 अरब 60 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त रक़म की ज़रूरत होगी.

उन्होंने कहा, “इससे ये सुनिश्चित किया जा सकेगा कि स्वास्थ्यकर्मी और कोरोनावायरस से प्रभावित ख़तरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को वैक्सीन मिल सके. ये स्वास्थ्य सेवाओं व अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करने, और वैश्विक पुनर्बहाली का सबसे तीव्र तरीक़ा होगा.”

नए उपायों की तलाश

विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ़ और विश्व बैंक द्वारा चलाए गए एक प्रमुख अभियान पहल 100-100 पहल के तहत, 100 देशों को तीव्र परीक्षण व जाँच-पड़ताल के लिये तैयारियाँ करने और देशों की ज़रूरतों के अनुरूप वैक्सीन की योजनाएँ, 100 दिनों के भीतर तैयार करने व कोविड-19 के ख़िलाफ़ अन्य उपकरण व उपायों में मदद की जा रही है. 

इस पहल के तहत, 89 देशों ने अपने यहाँ आकलन का काम पूरा भी कर लिया है और टीमें, ये सुनिश्चित करने के लिये दिन-रात काम कर रही हैं कि सरकारें और स्वास्थ्य प्रणालियाँ, वैक्सीन जारी होने की स्थिति को संभालने के लिये तैयार हैं.

डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि कोरोनावायरस ने एक तरफ़ तो दुनिया भर की कमज़ोरियों और असमानताओं को उजागर किया है और उनकी वजह से ही इसे फलने-फूलने का भी मौक़ा मिला है.

दूसरी तरफ़, इस महामारी ने ये भी दिखा दिया है कि इस असाधारण संकट की घड़ी में, हम सभी इसका नए तरीक़ों से मुक़ाबला करने के लिये एकजुट भी हो सकते हैं.

“हर एक संकट, कामकाज करने के हमारे मौजूदा तरीक़ों पर पुनर्विचार करने का एक मौक़ा भी होता है, और इसी मौक़े के फ़ायदा उठाकर, हम किसी संकट का मुक़ाबला करने या अपने तौर-तरीक़े बदलने के नए रास्ते भी तलाश कर सकते हैं.”

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