कोविड-19: धनी देशों से वैश्विक टीकाकरण प्रयासों के वित्त पोषण की पुकार

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने सोमवार को दुनिया के सबसे धनवान देशों से आहवान किया है कि निर्धन देशों में कोविड-19 से बचाव के लिये टीकाकरण मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये वित्तीय संसाधन मुहैया कराए जाने होंगे. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने इन प्रयासों को फलीभूत करने के लिये अगले दो वर्ष में लगभग 60 अरब डॉलर की धनराशि का इन्तज़ाम करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन की नियमित पत्रकार वार्ता के दौरान और अगले महीने जी-7 समूह की बैठक से पहले इस आशय की जानकारी दी है.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/gKyZgVmL7U— World Health Organization (WHO) (@WHO) May 3, 2021

वैश्विक शिक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत गॉर्डन ब्राउन ने आगाह किया कि कार्रवाई के अभाव में व्यापक स्तर पर दुनिया में दरारें पैदा होंगी.  
उन्होंने कहा, “अन्य देशों में टीकाकरण का दायरा तेज़ी से बढ़ाए जाने में विफल रहकर, हम यह चयन कर रहे हैं कि किसकी ज़िन्दगी बचेगी और और किसकी मौत होगी.”
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, कोविड-19 महामारी का अन्त करने के लिये वैश्विक मुहिम से जुड़े हैं, जिसके लिये उन्होंने जी-7 समूह से अपनी सम्पदा का उपयोग करने की माँग की है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि महामारी की शुरुआत के पहले छह महीनों की तुलना में, पिछले दो सप्ताह में कहीं अधिक मामलों की पुष्टि हुई है जिनमें आधे मामले भारत और ब्राज़ील से हैं.  
साझा ख़तरे, साझा समाधान
यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक़ कोविड-19 वैक्सीन को विकसित व वितरित करने के लिये स्थापित वैश्विक प्रयास, ACT Accelerator, को अब भी 19 अरब डॉलर की रक़म की आवश्यकता है.
अधिकतर वयस्कों के टीकाकरण के लिये अगले वर्ष 45 अरब डॉलर तक की धनराशि की ज़रूरत होगी.
“हमारे सामने एक साझा ख़तरा है जिस पर हम साझा समाधानों के साथ ही कामयाबी पा सकते हैं.”
“वित्तीय संसाधनों को साझा करके, वैक्सीन ख़ुराकों व उत्पादन क्षमता को साझा करके, और टैक्नॉलॉजी, तौर-तरीक़ों को साझा करके, व बौद्धिक सम्पदा में छूट देकर.”
पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने बताया कि दुनिया में सामूहिक स्तर पर टीकाकरण को एक ख़ैरात के बजाय, सर्वोत्तम बीमा नीति के रूप में देखा जाना चाहिये.  
उन्होंने कहा कि अभी भले ही इसमें अरबों डॉलर की धनराशि ख़र्च हो, मगर इसका परिणाम ट्रिलियनों डॉलर के अतिरिक्त आर्थिक नतीजे में सामने आएगा, जब कोविड-मुक्त दुनिया में व्यापार फिर शुरू होगा.
उन्होंने कहा कि 60 अरब डॉलर की सहायता धनराशि की आवश्यकता केवल वैक्सीनों के लिये नहीं है, यह महत्वपूर्ण दवाओं, निदानों व मेडिकल ऑक्सीजन के लिये भी है जो इस समय भारत व अन्य देशों में कम मात्रा में ही उपलब्ध है.
व्यय साझा करने का सुझाव
उन्होंने धनी देशों से इस व्यय को सहन करने के लिये एक फ़ॉर्मूले का सुझाव पेश किया है, जोकि राष्ट्रीय आय, मौजूदा सम्पदा, और व्यापार फिर शुरू होने पर प्राप्त होने वाले लाभों पर आधारित है.
इसके तहत, अमेरिका को 27 फ़ीसदी, योरोप को 23 फ़ीसदी, जापान को छह प्रतिशत, ब्रिटेन को पाँच फ़ीसदी, और ऑस्ट्रेलिया, कैनेडा व दक्षिण कोरिया को दो-दो फ़ीसदी का व्यय वहन करना होगा.
“मैं जी-7 से कहता हूँ… आपके पास ख़र्च की दो-तिहाई राशि का भुगतान करने और न्यायसंगत ढंग से बोझ साझा करने के फ़ॉर्मूले पर सहमत होने की सामर्थ्य व क्षमता है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य प्रावधान सुनिश्चित किया जा सकेगा.”
गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ, जी-20 समूह, कुल व्यय का 80 प्रतिशत तक वहन कर सकती हैं और तात्कालिक रूप से ज़रूरी वैक्सीनें दान कर सकती हैं.
दुनिया के सबसे धनी 30 देश, 90 प्रतिशत तक ख़र्च का भार उठा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि इसी फ़ार्मूले को आज़माया जा सकता है ताकि पहले घबराने और बाद में उपेक्षा करने के बजाय, दुनिया अभी निवेश करे, जब नक़दी की कमी है और भविष्य की महामारियों के लिये तैयारी की जाए., ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने सोमवार को दुनिया के सबसे धनवान देशों से आहवान किया है कि निर्धन देशों में कोविड-19 से बचाव के लिये टीकाकरण मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये वित्तीय संसाधन मुहैया कराए जाने होंगे. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने इन प्रयासों को फलीभूत करने के लिये अगले दो वर्ष में लगभग 60 अरब डॉलर की धनराशि का इन्तज़ाम करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन की नियमित पत्रकार वार्ता के दौरान और अगले महीने जी-7 समूह की बैठक से पहले इस आशय की जानकारी दी है.

वैश्विक शिक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत गॉर्डन ब्राउन ने आगाह किया कि कार्रवाई के अभाव में व्यापक स्तर पर दुनिया में दरारें पैदा होंगी.  

उन्होंने कहा, “अन्य देशों में टीकाकरण का दायरा तेज़ी से बढ़ाए जाने में विफल रहकर, हम यह चयन कर रहे हैं कि किसकी ज़िन्दगी बचेगी और और किसकी मौत होगी.”

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, कोविड-19 महामारी का अन्त करने के लिये वैश्विक मुहिम से जुड़े हैं, जिसके लिये उन्होंने जी-7 समूह से अपनी सम्पदा का उपयोग करने की माँग की है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि महामारी की शुरुआत के पहले छह महीनों की तुलना में, पिछले दो सप्ताह में कहीं अधिक मामलों की पुष्टि हुई है जिनमें आधे मामले भारत और ब्राज़ील से हैं.  

साझा ख़तरे, साझा समाधान

यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक़ कोविड-19 वैक्सीन को विकसित व वितरित करने के लिये स्थापित वैश्विक प्रयास, ACT Accelerator, को अब भी 19 अरब डॉलर की रक़म की आवश्यकता है.

अधिकतर वयस्कों के टीकाकरण के लिये अगले वर्ष 45 अरब डॉलर तक की धनराशि की ज़रूरत होगी.

“हमारे सामने एक साझा ख़तरा है जिस पर हम साझा समाधानों के साथ ही कामयाबी पा सकते हैं.”

“वित्तीय संसाधनों को साझा करके, वैक्सीन ख़ुराकों व उत्पादन क्षमता को साझा करके, और टैक्नॉलॉजी, तौर-तरीक़ों को साझा करके, व बौद्धिक सम्पदा में छूट देकर.”

पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने बताया कि दुनिया में सामूहिक स्तर पर टीकाकरण को एक ख़ैरात के बजाय, सर्वोत्तम बीमा नीति के रूप में देखा जाना चाहिये.  

उन्होंने कहा कि अभी भले ही इसमें अरबों डॉलर की धनराशि ख़र्च हो, मगर इसका परिणाम ट्रिलियनों डॉलर के अतिरिक्त आर्थिक नतीजे में सामने आएगा, जब कोविड-मुक्त दुनिया में व्यापार फिर शुरू होगा.

उन्होंने कहा कि 60 अरब डॉलर की सहायता धनराशि की आवश्यकता केवल वैक्सीनों के लिये नहीं है, यह महत्वपूर्ण दवाओं, निदानों व मेडिकल ऑक्सीजन के लिये भी है जो इस समय भारत व अन्य देशों में कम मात्रा में ही उपलब्ध है.

व्यय साझा करने का सुझाव

उन्होंने धनी देशों से इस व्यय को सहन करने के लिये एक फ़ॉर्मूले का सुझाव पेश किया है, जोकि राष्ट्रीय आय, मौजूदा सम्पदा, और व्यापार फिर शुरू होने पर प्राप्त होने वाले लाभों पर आधारित है.

इसके तहत, अमेरिका को 27 फ़ीसदी, योरोप को 23 फ़ीसदी, जापान को छह प्रतिशत, ब्रिटेन को पाँच फ़ीसदी, और ऑस्ट्रेलिया, कैनेडा व दक्षिण कोरिया को दो-दो फ़ीसदी का व्यय वहन करना होगा.

“मैं जी-7 से कहता हूँ… आपके पास ख़र्च की दो-तिहाई राशि का भुगतान करने और न्यायसंगत ढंग से बोझ साझा करने के फ़ॉर्मूले पर सहमत होने की सामर्थ्य व क्षमता है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य प्रावधान सुनिश्चित किया जा सकेगा.”

गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ, जी-20 समूह, कुल व्यय का 80 प्रतिशत तक वहन कर सकती हैं और तात्कालिक रूप से ज़रूरी वैक्सीनें दान कर सकती हैं.

दुनिया के सबसे धनी 30 देश, 90 प्रतिशत तक ख़र्च का भार उठा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि इसी फ़ार्मूले को आज़माया जा सकता है ताकि पहले घबराने और बाद में उपेक्षा करने के बजाय, दुनिया अभी निवेश करे, जब नक़दी की कमी है और भविष्य की महामारियों के लिये तैयारी की जाए.

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