कोविड-19 ने दुनिया भर में मलेरिया पर क़ाबू पाने के प्रयास किये धीमे

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि जीवन-रक्षक स्वास्थ्य सेवाओं में ख़ामियों के कारण मलेरिया पर क़ाबू पाने के प्रयासों में नकारात्मक असर पड़ रहा है और कोरोनावायरस महामारी, मलेरिया बीमारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों को और ज़्यादा धक्का पहुँचा सकती है.

सोमवार को जारी विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीका के उच्च दबाव वाले देशों में, ख़ासतौर से स्थिति चिन्ताजनक है. 
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने देशों व स्वास्थ्य साझीदारों से मलेरिया के ख़िलाफ़ जद्दोजहद में प्रयास तेज़ करने का आग्रह किया है, और इसमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, नए उपकरण व और ज़्यादा धन निवेश शामिल हों.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है, “पूरे अफ्रीका क्षेत्र और दुनिया भर के नेतृत्वकर्ताओं के लिये अब बिल्कुल सही समय है, कि वो मलेरिया की चुनौती का सामना करने के लिये एक बार फिर कमर कस लें, बिल्कुल उसी तरह, जैसे कि 21वीं सदी शुरू होने के समय से ब तक हासिल की गई प्रगति की बुनियाद डाली गई थी.”
“संयुक्त कार्रवाई, और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ देने के संकल्प के साथ, हम, मलेरिया से मुक्त दुनिया का अपना साझा सपना पूरा कर सकते हैं.”
मलेरिया वैसे तो एक ऐसी बीमारी है जिसे होने से पहले ही रोका जा सकता है, और ये बीमारी होने के बाद भी इसका इलाज सम्भव है, मगर फिर भी हर वर्ष
दुनिया भर में मलेरिया के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है. 
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार दुनिया भर की लगभग आधी आबादी मलेरिया को जोखिम का सामना कर रही है, और मलेरिया बीमारी फैलने और इससे मौतें होने के ज़्यादातर मामले सब सहारा अफ्रीका में होते हैं.
मलेरिया, दरअसल, मादा मच्छर के काटने से फैलने वाले संक्रमण के कारण होती है और मच्छरों से बचाने वाली मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, और घरों के अन्दर ऐसे सुरक्षित रसायनों का छिड़काव करके भी मलेरिया के फैलाव को रोकने में मदद की जा सकती है जिनसे मच्छर दूर भागते हों.
प्रगति में रोड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में दुनिया भर में मलेरिया बीमारी से लगभग 22 करोड़ 90 लाख लोग बीमार हुए. इस वार्षिक अनुमान व संख्या में पिछले चार वर्षों के दौरान कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.

UNICEF/Baglaमलेरिया का जोखिम कम करने और मच्छरों का फैलाव रोकने के लिये दवा का छिड़काव भी एक कारगर उपाय है.

वर्ष 2019 में, मलेरिया से लगभग 4 लाख 9 हज़ार लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2018 में, मलेरिया ने लगभग 4 लाख, 11 हज़ार लोगों की ज़िन्दगी छीन ली थी.
मलेरिया के 90 प्रतिशत मामले, पिछले वर्षों की ही तरह, हाल के समय में भी, अफ्रीका क्षेत्र में ही देखे गए हैं.
इस क्षेत्र में मलेरिया के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2000 के बाद से काफ़ी प्रगति हासिल की गई है, जिसकी बदौलत मलेरिया से होने वाली मौतों में 44 प्रतिशत की कमी हुई है, जो लगभग 6 लाख 80 हज़ार मौतों से घटकर, क़रीब 3 लाख, 84 हज़ार पर आ गई है. 
लेकिन मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या में आ रही ये कमी, हाल के वर्षों में धीमी पड़ गई है, ख़ासतौर से उन देशों में जहाँ बीमारी का प्रकोप बहुत ज़्यादा है.
कामयाबी में रोड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में दुनिया भर में मलेरिया बीमारी से लगभग 22 करोड़ 90 लाख लोग बीमार हुए. इस वार्षिक अनुमान व संख्या में पिछले चार वर्षों के दौरान कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. 
वर्ष 2019 में, मलेरिया से लगभग 4 लाख 9 हज़ार लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2018 में, मलेरिया ने लगभग 4 लाख, 11 हज़ार लोगों की ज़िन्दगी छीन ली थी.
मलेरिया के 90 प्रतिशत मामले, पिछले वर्षों की ही तरह, हाल के समय में भी, अफ्रीका क्षेत्र में ही देखे गए हैं.
इस क्षेत्र में मलेरिया के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2000 के बाद से काफ़ी प्रगति हासिल की गई है, जिसकी बदौलत मलेरिया से होने वाली मौतों में 44 प्रतिशत की कमी हुई है, जो लगभग 6 लाख 80 हज़ार मौतों से घटकर, क़रीब 3 लाख, 84 हज़ार पर आ गई है. 
लेकिन मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या में आ रही ये कमी, हाल के वर्षों में धीमी पड़ गई है, ख़ासतौर से उन देशों में जहाँ बीमारी का प्रकोप बहुत ज़्यादा है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय और घरेलू, दोनों स्तरों पर धन संसाधनों की कमी के कारण, भविष्य में मलेरिया के ख़िलाफ़ प्रयासों में प्रगति के लिये ख़तरा पैदा हो गया है. 
वर्ष 2019 में, कुल रक़म 3 अरब डॉलर थी, जबकि वैश्विक लक्ष्य 5 अरब 60 करोड़ डॉलर का था, परिणामस्वरूप, मलेरिया पर क़ाबू पाने के कामयाब उपकरणों की उपलब्धता के लिये धन की कमी रह गई.
वर्ष 2020 में, कोविड-19 महामारी, दुनिया भर में ज़रूरी व बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिये अतिरिक्त चुनौती बनकर उभरी है.
वैसे तो, ज़्यादातर मलेरिया रोकथाम अभियान बिना किसी ख़ास देरी के, आगे बढ़ने में कामयाब रहे, मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिन्ता जताते हुए कहा कि अगर मलेरिया के इलाज के लिये स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में मामूली सी भी बाधा पैदा हुई तो भारी संख्या में लोगों की ज़िन्दगियों का नुक़सान हो सकता है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि जीवन-रक्षक स्वास्थ्य सेवाओं में ख़ामियों के कारण मलेरिया पर क़ाबू पाने के प्रयासों में नकारात्मक असर पड़ रहा है और कोरोनावायरस महामारी, मलेरिया बीमारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों को और ज़्यादा धक्का पहुँचा सकती है.

सोमवार को जारी विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीका के उच्च दबाव वाले देशों में, ख़ासतौर से स्थिति चिन्ताजनक है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने देशों व स्वास्थ्य साझीदारों से मलेरिया के ख़िलाफ़ जद्दोजहद में प्रयास तेज़ करने का आग्रह किया है, और इसमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, नए उपकरण व और ज़्यादा धन निवेश शामिल हों.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है, “पूरे अफ्रीका क्षेत्र और दुनिया भर के नेतृत्वकर्ताओं के लिये अब बिल्कुल सही समय है, कि वो मलेरिया की चुनौती का सामना करने के लिये एक बार फिर कमर कस लें, बिल्कुल उसी तरह, जैसे कि 21वीं सदी शुरू होने के समय से ब तक हासिल की गई प्रगति की बुनियाद डाली गई थी.”

“संयुक्त कार्रवाई, और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ देने के संकल्प के साथ, हम, मलेरिया से मुक्त दुनिया का अपना साझा सपना पूरा कर सकते हैं.”

मलेरिया वैसे तो एक ऐसी बीमारी है जिसे होने से पहले ही रोका जा सकता है, और ये बीमारी होने के बाद भी इसका इलाज सम्भव है, मगर फिर भी हर वर्ष

दुनिया भर में मलेरिया के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार दुनिया भर की लगभग आधी आबादी मलेरिया को जोखिम का सामना कर रही है, और मलेरिया बीमारी फैलने और इससे मौतें होने के ज़्यादातर मामले सब सहारा अफ्रीका में होते हैं.

मलेरिया, दरअसल, मादा मच्छर के काटने से फैलने वाले संक्रमण के कारण होती है और मच्छरों से बचाने वाली मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, और घरों के अन्दर ऐसे सुरक्षित रसायनों का छिड़काव करके भी मलेरिया के फैलाव को रोकने में मदद की जा सकती है जिनसे मच्छर दूर भागते हों.

प्रगति में रोड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में दुनिया भर में मलेरिया बीमारी से लगभग 22 करोड़ 90 लाख लोग बीमार हुए. इस वार्षिक अनुमान व संख्या में पिछले चार वर्षों के दौरान कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.


UNICEF/Bagla
मलेरिया का जोखिम कम करने और मच्छरों का फैलाव रोकने के लिये दवा का छिड़काव भी एक कारगर उपाय है.

वर्ष 2019 में, मलेरिया से लगभग 4 लाख 9 हज़ार लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2018 में, मलेरिया ने लगभग 4 लाख, 11 हज़ार लोगों की ज़िन्दगी छीन ली थी.

मलेरिया के 90 प्रतिशत मामले, पिछले वर्षों की ही तरह, हाल के समय में भी, अफ्रीका क्षेत्र में ही देखे गए हैं.

इस क्षेत्र में मलेरिया के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2000 के बाद से काफ़ी प्रगति हासिल की गई है, जिसकी बदौलत मलेरिया से होने वाली मौतों में 44 प्रतिशत की कमी हुई है, जो लगभग 6 लाख 80 हज़ार मौतों से घटकर, क़रीब 3 लाख, 84 हज़ार पर आ गई है.

लेकिन मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या में आ रही ये कमी, हाल के वर्षों में धीमी पड़ गई है, ख़ासतौर से उन देशों में जहाँ बीमारी का प्रकोप बहुत ज़्यादा है.

कामयाबी में रोड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में दुनिया भर में मलेरिया बीमारी से लगभग 22 करोड़ 90 लाख लोग बीमार हुए. इस वार्षिक अनुमान व संख्या में पिछले चार वर्षों के दौरान कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.

वर्ष 2019 में, मलेरिया से लगभग 4 लाख 9 हज़ार लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2018 में, मलेरिया ने लगभग 4 लाख, 11 हज़ार लोगों की ज़िन्दगी छीन ली थी.

मलेरिया के 90 प्रतिशत मामले, पिछले वर्षों की ही तरह, हाल के समय में भी, अफ्रीका क्षेत्र में ही देखे गए हैं.

इस क्षेत्र में मलेरिया के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2000 के बाद से काफ़ी प्रगति हासिल की गई है, जिसकी बदौलत मलेरिया से होने वाली मौतों में 44 प्रतिशत की कमी हुई है, जो लगभग 6 लाख 80 हज़ार मौतों से घटकर, क़रीब 3 लाख, 84 हज़ार पर आ गई है.

लेकिन मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या में आ रही ये कमी, हाल के वर्षों में धीमी पड़ गई है, ख़ासतौर से उन देशों में जहाँ बीमारी का प्रकोप बहुत ज़्यादा है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय और घरेलू, दोनों स्तरों पर धन संसाधनों की कमी के कारण, भविष्य में मलेरिया के ख़िलाफ़ प्रयासों में प्रगति के लिये ख़तरा पैदा हो गया है.

वर्ष 2019 में, कुल रक़म 3 अरब डॉलर थी, जबकि वैश्विक लक्ष्य 5 अरब 60 करोड़ डॉलर का था, परिणामस्वरूप, मलेरिया पर क़ाबू पाने के कामयाब उपकरणों की उपलब्धता के लिये धन की कमी रह गई.

वर्ष 2020 में, कोविड-19 महामारी, दुनिया भर में ज़रूरी व बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिये अतिरिक्त चुनौती बनकर उभरी है.

वैसे तो, ज़्यादातर मलेरिया रोकथाम अभियान बिना किसी ख़ास देरी के, आगे बढ़ने में कामयाब रहे, मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिन्ता जताते हुए कहा कि अगर मलेरिया के इलाज के लिये स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में मामूली सी भी बाधा पैदा हुई तो भारी संख्या में लोगों की ज़िन्दगियों का नुक़सान हो सकता है.

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