कोविड-19: महामारी धकेल सकती है, 20 करोड़ अतिरिक्त लोगों को, अत्यन्त ग़रीबी में

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी लम्बी अवधि के लिये जो गम्भीर असर पड़ने वाला है, उसके कारण वर्ष 2030 तक लगभग 20 करोड़ 70 लाख अतिरिक्त लोगों के अत्यन्त निर्धनता में धकेल दिये जाने का जोखिम है. इन्हें मिलाकर अत्यन्त ग़रीबी में जाने वाले लोगों की संख्या एक अरब से ज़्यादा हो जाएगी.

गुरुवार को जारी इस अध्ययन के अनुसार, इतने बड़े नुक़सान वाले परिदृश्य का मतलब होगा कि कोविड-19 के प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया काफ़ी लम्बे समय तक चलेगी, और ऐसे अनुमान हैं कि महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था के संकट का 80 प्रतिशत हिस्सा लगभग एक दशक तक चलेगा.
बाज़ी अभी हाथ से नहीं निकली
यूएनडीपी ने कहा है कि ये कुछ मायूस तस्वीर, अलबत्ता अभी हाथ से निकली हुई बाज़ी नहीं है.
टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये मज़बूती और ध्यान लगाकर काम करने की बदौलत, अत्यन्त निर्धनता के फैलाव को धीमा किया जा सकता है – और लगभग 14 करोड़ 60 लाख लोगों को अत्यन्त ग़रीबी की गिरफ़्त में आने से बचाया जा सकता है.

Source: UNDP-Pardee Center Reportविभिन्न परिदृश्यों में, ग़रीबी में जीने वाले लोगों की अनुमानित संख्या

यूएन विकास एजेंसी का कहना है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये इस तरह की महत्वाकाँक्षी और प्राप्ति योग्य मुहिम चलाने से ग़रीबी की लिंग आधारित खाई को भी कम किया जा सकता है और ग़रीबी में जीने वाली महिलाओं की ज़िन्दगी बेहतर बनाई जा सकती है. 
अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के मौजूदा परिदृश्य के फलस्वरूप, वर्ष 2030 तक लगभग 4 करोड़ 40 लाख अतिरिक्त लोग अत्यन्त ग़रीबी में जी रहे होंगे, जोकि महामारी के बिना या उसके पहले की दुनिया की दुनिया की तुलना में ज़्यादा होंगे.
कोविड-19 एक अहम पड़ाव
यूएन विकास कार्यक्रम के प्रशासक अख़िम स्टीनर ने ध्यान दिलाते हुए कहा है कि कोविजड-19 एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और आज लिये हुए फ़ैसलों पर, भविष्य निर्भर होगा.
“जैसाकि, निर्धनता के बारे में किये गए नए शोध से मालूम होता है, कोविड-19 एक अहम पड़ाव है, और विश्व नेता, अभी जो निर्णय लेंगे, उससे विश्व का रास्ता बदल सकता है.”
उन्होंने कहा, “हमारे पास, कार्रवाई दशक में संसाधन निवेश करना अवसर है, जिसके ज़रिये ना केवल लोगों को कोविड-19 से बचाने और उबारने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे लोगों व पृथ्वी का विकास रास्ता, एक न्यायसंगत, सहनशील और हरित भविष्य की तरफ़ जाएगा.”
ये अध्ययन यूएन विकास कार्यक्रम और डेनवर विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया है, जिसमें कोविड-19 के प्रभावों से उबरने के प्रयासों का टिकाऊ विकास पर पड़ने वाले असर का जायज़ा लिया गया है.
इस अध्ययन में, अगले 10 वर्षों के दौरान, महामारी के बहुपक्षीय प्रभावों का भू मूल्याँकन किया गया है., संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी लम्बी अवधि के लिये जो गम्भीर असर पड़ने वाला है, उसके कारण वर्ष 2030 तक लगभग 20 करोड़ 70 लाख अतिरिक्त लोगों के अत्यन्त निर्धनता में धकेल दिये जाने का जोखिम है. इन्हें मिलाकर अत्यन्त ग़रीबी में जाने वाले लोगों की संख्या एक अरब से ज़्यादा हो जाएगी.

गुरुवार को जारी इस अध्ययन के अनुसार, इतने बड़े नुक़सान वाले परिदृश्य का मतलब होगा कि कोविड-19 के प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया काफ़ी लम्बे समय तक चलेगी, और ऐसे अनुमान हैं कि महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था के संकट का 80 प्रतिशत हिस्सा लगभग एक दशक तक चलेगा.

बाज़ी अभी हाथ से नहीं निकली

यूएनडीपी ने कहा है कि ये कुछ मायूस तस्वीर, अलबत्ता अभी हाथ से निकली हुई बाज़ी नहीं है.

टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये मज़बूती और ध्यान लगाकर काम करने की बदौलत, अत्यन्त निर्धनता के फैलाव को धीमा किया जा सकता है – और लगभग 14 करोड़ 60 लाख लोगों को अत्यन्त ग़रीबी की गिरफ़्त में आने से बचाया जा सकता है.


Source: UNDP-Pardee Center Report
विभिन्न परिदृश्यों में, ग़रीबी में जीने वाले लोगों की अनुमानित संख्या

यूएन विकास एजेंसी का कहना है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये इस तरह की महत्वाकाँक्षी और प्राप्ति योग्य मुहिम चलाने से ग़रीबी की लिंग आधारित खाई को भी कम किया जा सकता है और ग़रीबी में जीने वाली महिलाओं की ज़िन्दगी बेहतर बनाई जा सकती है. 

अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के मौजूदा परिदृश्य के फलस्वरूप, वर्ष 2030 तक लगभग 4 करोड़ 40 लाख अतिरिक्त लोग अत्यन्त ग़रीबी में जी रहे होंगे, जोकि महामारी के बिना या उसके पहले की दुनिया की दुनिया की तुलना में ज़्यादा होंगे.

कोविड-19 एक अहम पड़ाव

यूएन विकास कार्यक्रम के प्रशासक अख़िम स्टीनर ने ध्यान दिलाते हुए कहा है कि कोविजड-19 एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और आज लिये हुए फ़ैसलों पर, भविष्य निर्भर होगा.

“जैसाकि, निर्धनता के बारे में किये गए नए शोध से मालूम होता है, कोविड-19 एक अहम पड़ाव है, और विश्व नेता, अभी जो निर्णय लेंगे, उससे विश्व का रास्ता बदल सकता है.”

उन्होंने कहा, “हमारे पास, कार्रवाई दशक में संसाधन निवेश करना अवसर है, जिसके ज़रिये ना केवल लोगों को कोविड-19 से बचाने और उबारने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे लोगों व पृथ्वी का विकास रास्ता, एक न्यायसंगत, सहनशील और हरित भविष्य की तरफ़ जाएगा.”

ये अध्ययन यूएन विकास कार्यक्रम और डेनवर विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया है, जिसमें कोविड-19 के प्रभावों से उबरने के प्रयासों का टिकाऊ विकास पर पड़ने वाले असर का जायज़ा लिया गया है.

इस अध्ययन में, अगले 10 वर्षों के दौरान, महामारी के बहुपक्षीय प्रभावों का भू मूल्याँकन किया गया है.

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