कोविड-19: यूएन पहल के तहत 145 देशों में अहम कामगारों को मिलेगी वैक्सीन

वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम और बचाव के लिये 145 देशों में अहम सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य निर्बल व्यक्तियों को इस वर्ष की पहली छमाही में वैक्सीन मिल जानी चाहिये. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और साझीदार संगठनों ने बुधवार को इस आशय की घोषणा करते हुए बताया कि यह मदद कोरोनावायरस वैक्सीन के न्यायसंगत वितरण के लिये संचालित मुहिम कोवैक्स के तहत उपलब्ध कराई जाएगी. 

इस टीकाकरण मुहिम को संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली साझा पहल ‘कोवैक्स’ के तहत मूर्त रूप दिया जाएगा जिसका लक्ष्य वैक्सीन का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है.

.@CEPIvaccines, @gavi & WHO, as co-leads of the #COVAX initiative for equitable 🌍 access to #COVID19 vaccines, alongside key delivery partner @UNICEF, are pleased to publish COVAX’s 1st interim distribution forecast: https://t.co/RybRS5Fbuy #VaccinEquitypic.twitter.com/lrk6SNWnkq— World Health Organization (WHO) (@WHO) February 3, 2021

इस सम्बन्ध में देशों को अभी से लेकर जून महीने के अन्त तक के लिये ब्यौरा उपलब्ध कराया जाएगा कि किन टीकों की आपूर्ति अपेक्षित है. 
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) दुनिया भर में टीकाकरण अभियानों में अहम भूमिका निभाता रहा है और उसने इस ख़बर का स्वागत करते हुए कहा है कि यह पहली बार है जब इतने व्यापक पैमाने पर वैक्सीन की ख़रीद और आपूर्ति अभियान संचालित किये जाने की योजना है. 
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर ने बताया, “हमें इसे सही ढँग से करना होगा.”
उन्होंने कहा है कि इस सिलसिले में यूएन एजेंसी के देशीय कार्यालय टीकाकरण की पहली लहर को आगे बढ़ाने में सरकारों को समर्थन देंगे. इसके तहत शीतल भण्डारण की आवश्यकताओं वाली वैक्सीन की उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित किया जायेगा. 
“इनमें स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन के भण्डारण और देखरेख के लिये पूर्ण रूप से प्रशिक्षित करना भी शामिल है…”
“बहुत सी ख़ुराकें शहरी इलाक़ों में स्वास्थ्यकर्मियों को मिलेंगी जोकि कोविड-19 संक्रमण का सबसे ज़्यादा जोखिम झेल रहे हैं.”
‘Pfizer-BioNTech’ वैक्सीन की 12 लाख ख़ुराकों के बेहद ठण्डे तापमान में भण्डारण की आवश्यकता होती है और उन्हें इस साल की पहली तिमाही में 18 देशों में पहुँचाया जाएगा. 
कुल मिलाकर चार करोड़ टीक पहुँचाए जाने हैं. 
वैक्सीन वितरण की तैयारी
इसके अतिरिक्त एस्ट्राज़ेनेका/ऑक्सफ़र्ड द्वारा विकसित वैक्सीन की 33 करोड़ ख़ुराकें लगभग हर उस देश में भेजने के लिये तैयार की जानी हैं जो कोवैक्स पहल का हिस्सा हैं. 
इन टीकों को अफ़ग़ानिस्तान से लेकर ज़िम्बाब्वे तक भेजने के लिये पहले यूएन स्वास्थ्य एजेंसी से मंज़ूरी मिलने की आवश्यकता है. 
वैक्सीन की इन ख़ुराकों के ज़रिये औसतन लक्षित देशों में 3.3 फ़ीसदी आबादी की कवरेज सुनिश्चित की जाएगी. इससे सरकारों के लिये अपने सबसे निर्बल नागरिकों और अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्यकर्मियों की रक्षा कर पाना सम्भव होगा. 
यूनीसेफ़ की प्रमुख हेनरीएटा फ़ोर बुधवार को इस घोषणा से पहले कह चुकी हैं यूएन एजेंसी पचास करोड़ सिरींज के भण्डारण में जुटी है और आपूर्ति में व्यवधान की सम्भावना से निपटने के लिये एयरलाइन्स, सरकारों और साझीदारों से मिलकर बात कर रही है.
बुधवार को ही हेनरीएटा फ़ोर ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने की घोषणा की है जिसके तहत 100 देशों के लिये कोविड-19 वैक्सीन की एक अरब दस करोड़ ख़ुराकों का इन्तज़ाम किया गया है.
यह समझौता भारत में सीरम इन्स्टीट्यूट के साथ एस्ट्राज़ेनेका/ऑक्सफ़र्ड वैक्सीन और नोवावैक्स वैक्सीन के लिये किया गया है.
यूनीसेफ़ प्रमुख ने कहा कि निम्न और मध्य आय वाले देश प्रति ख़ुराक तीन डॉलर का भुगतान करेंगे.
उनके मुताबिक़ कोवैक्स दानदाताओं के लिये बढ़िया क़ीमत है जिसमें कोवैक्स के बुनियादी सिद्धान्तों की झलक मिलती है – संसाधनों को जुटाकर सर्वश्रेष्ठ समाधानों के लिये मिलजुलकर प्रयास किया जा सकता है., वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम और बचाव के लिये 145 देशों में अहम सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य निर्बल व्यक्तियों को इस वर्ष की पहली छमाही में वैक्सीन मिल जानी चाहिये. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और साझीदार संगठनों ने बुधवार को इस आशय की घोषणा करते हुए बताया कि यह मदद कोरोनावायरस वैक्सीन के न्यायसंगत वितरण के लिये संचालित मुहिम कोवैक्स के तहत उपलब्ध कराई जाएगी. 

इस टीकाकरण मुहिम को संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली साझा पहल ‘कोवैक्स’ के तहत मूर्त रूप दिया जाएगा जिसका लक्ष्य वैक्सीन का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है.

इस सम्बन्ध में देशों को अभी से लेकर जून महीने के अन्त तक के लिये ब्यौरा उपलब्ध कराया जाएगा कि किन टीकों की आपूर्ति अपेक्षित है. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) दुनिया भर में टीकाकरण अभियानों में अहम भूमिका निभाता रहा है और उसने इस ख़बर का स्वागत करते हुए कहा है कि यह पहली बार है जब इतने व्यापक पैमाने पर वैक्सीन की ख़रीद और आपूर्ति अभियान संचालित किये जाने की योजना है. 

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर ने बताया, “हमें इसे सही ढँग से करना होगा.”

उन्होंने कहा है कि इस सिलसिले में यूएन एजेंसी के देशीय कार्यालय टीकाकरण की पहली लहर को आगे बढ़ाने में सरकारों को समर्थन देंगे. इसके तहत शीतल भण्डारण की आवश्यकताओं वाली वैक्सीन की उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित किया जायेगा. 

“इनमें स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन के भण्डारण और देखरेख के लिये पूर्ण रूप से प्रशिक्षित करना भी शामिल है…”

“बहुत सी ख़ुराकें शहरी इलाक़ों में स्वास्थ्यकर्मियों को मिलेंगी जोकि कोविड-19 संक्रमण का सबसे ज़्यादा जोखिम झेल रहे हैं.”

‘Pfizer-BioNTech’ वैक्सीन की 12 लाख ख़ुराकों के बेहद ठण्डे तापमान में भण्डारण की आवश्यकता होती है और उन्हें इस साल की पहली तिमाही में 18 देशों में पहुँचाया जाएगा. 

कुल मिलाकर चार करोड़ टीक पहुँचाए जाने हैं. 

वैक्सीन वितरण की तैयारी

इसके अतिरिक्त एस्ट्राज़ेनेका/ऑक्सफ़र्ड द्वारा विकसित वैक्सीन की 33 करोड़ ख़ुराकें लगभग हर उस देश में भेजने के लिये तैयार की जानी हैं जो कोवैक्स पहल का हिस्सा हैं. 

इन टीकों को अफ़ग़ानिस्तान से लेकर ज़िम्बाब्वे तक भेजने के लिये पहले यूएन स्वास्थ्य एजेंसी से मंज़ूरी मिलने की आवश्यकता है. 

वैक्सीन की इन ख़ुराकों के ज़रिये औसतन लक्षित देशों में 3.3 फ़ीसदी आबादी की कवरेज सुनिश्चित की जाएगी. इससे सरकारों के लिये अपने सबसे निर्बल नागरिकों और अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्यकर्मियों की रक्षा कर पाना सम्भव होगा. 

यूनीसेफ़ की प्रमुख हेनरीएटा फ़ोर बुधवार को इस घोषणा से पहले कह चुकी हैं यूएन एजेंसी पचास करोड़ सिरींज के भण्डारण में जुटी है और आपूर्ति में व्यवधान की सम्भावना से निपटने के लिये एयरलाइन्स, सरकारों और साझीदारों से मिलकर बात कर रही है.

बुधवार को ही हेनरीएटा फ़ोर ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने की घोषणा की है जिसके तहत 100 देशों के लिये कोविड-19 वैक्सीन की एक अरब दस करोड़ ख़ुराकों का इन्तज़ाम किया गया है.

यह समझौता भारत में सीरम इन्स्टीट्यूट के साथ एस्ट्राज़ेनेका/ऑक्सफ़र्ड वैक्सीन और नोवावैक्स वैक्सीन के लिये किया गया है.

यूनीसेफ़ प्रमुख ने कहा कि निम्न और मध्य आय वाले देश प्रति ख़ुराक तीन डॉलर का भुगतान करेंगे.

उनके मुताबिक़ कोवैक्स दानदाताओं के लिये बढ़िया क़ीमत है जिसमें कोवैक्स के बुनियादी सिद्धान्तों की झलक मिलती है – संसाधनों को जुटाकर सर्वश्रेष्ठ समाधानों के लिये मिलजुलकर प्रयास किया जा सकता है.

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