कोविड-19: विफलताओं से उबरने के लिये सोच-पद्धति में बदलाव की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विकास के लिये वित्तीय पोषण (Financing for Development) विषय पर आयोजित मंच को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि कोविड-19 सहित भावी चुनौतियो से निपटने के लिये, निजी क्षेत्र को, ख़ुद को, वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा सम्भव बनाने के लिये सोच-विचार के ढाँचे और कार्यपद्धतियों में पूर्ण रूप से बदलाव की आवश्यकता होगी.

सोमवार को आयोजित इस बैठक में टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा की दिशा में हुई प्रगति व मौजूदा हालात पर चर्चा हुई.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने वर्ष 2020 की एक उदास तस्वीर उकेरते हुए बताया कि कोरोनावायरस के कारण लगभग 30 लाख लोगों की मौत हो चुकी है.

As we race to recover from #COVID19, we are starting to see a sharply diverging world. At the same time, we are facing a serious risk of a lost decade for the #SDGs. How can we prevent this? Follow #Fin4Dev Forum to find out: https://t.co/nzQKsvn7Qv #FinancingOurFuture pic.twitter.com/CHdSGeI8zX— UN DESA (@UNDESA) April 12, 2021

12 करोड़ लोग चरम ग़रीबी के गर्त में धँस गए हैं और 25 करोड़ से ज़्यादा पूर्णकालिक रोज़गारों के तुल्य आजीविका के अवसर खो गए हैं.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि संक्रमण के मामले फिर से रफ़्तार पकड़ रहे हैं, जोकि दिखाते हैं कि यह संकट अभी टला नहीं है.
महासचिव गुटेरेश के मुताबिक़ इन ख़तरनाक रुझानों को पलटने, संक्रमणों की लगातार उठती लहरों की रोकथाम करने और एक लम्बी वैश्विक आर्थिक मन्दी से बचने के लिये “उच्चतम राजनैतिक स्तर पर एक विशाल प्रयास की आवश्यकता है.”
उन्होंने, साथ ही, इस प्रक्रिया में टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के मार्ग पर आगे बढ़ने की अहमियत को भी रेखांकित किया है.
एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया कि महामारी से उबरने के लिये न्यायोचित वैश्विक जवाबी कार्रवाई को आगे बढ़ाना, बहुपक्षवाद के लिय एक परीक्षा है. “अब तक, हम इसमें विफल हुए हैं.”
इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि कोरोनावायरस वैक्सीन की 75 प्रतिशत ख़ुराकें केवल 10 देशों में दी गई हैं.
महासचिव गुटेरेश ने इस पृष्ठभूमि में ज़िन्दगियों को बचाने और देशों को, विनाशकारी क़र्ज़ के दबाव में धँसने से बचाने के लिये एकता और एकजुटता की पुकार लगाई है.
महत्वपूर्ण कार्रवाई का आहवान
यूएन प्रमुख ने कोविड-19 पर असरदार कार्रवाई और टिकाऊ व सुदृढ़ पुनर्बहाली का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से, छह क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है.
इसके तहत, सर्वप्रथम, यूएन के नेतृत्व वाली कोवैक्स पहल के लिये ज़रूरी वित्तीय पोषण की कमी को दूर किया जाना होगा.
उन्होंने बताया कि महामारी पर हमेशा के लिये विराम लगाने के लिये हर किसी के लिये, हर स्थान पर वैक्सीन का न्यायोचित वितरण महत्वपूर्ण है.
साथ ही, उन्होंने विकास सहायता की भी पुकार लगाई है, जिन्हें सबसे अधिक ज़रूरतमन्द देशों तक पहुँचाया जाना होगा.
महासचिव के अनुसार, क़र्ज़ संकट को भी कारगर ढँग से सुलझाया जाना होगा, और कुछ समय के लिये क़र्ज़ अदायगी पर रोक लगाते हुए राहत प्रदान करनी होगी और नक़दी मुहैया कराई जानी होगी.
“लेकिन हमें क़र्ज़ राहत से कहीं आगे बढ़ने की आवश्यकता है…एक अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे को मज़बूती प्रदान करनी होगी, ताकि क़र्ज़ की लहरों, वैश्विक ऋण संकट और खोए हुए दशकों के घातक चक्र का अन्त किया जा सके.”
समावेशी विकास
बताया गया है कि एक नए सामाजिक अनुबन्ध में निवेश करना होगा, जोकि शिक्षा, हरित रोज़गारों, सामाजिक संरक्षा, और स्वास्थ्य प्रणालियों में एकजुटता पर आधारित होगा.
उन्होंने इसे टिकाऊ और समावेशी विकास की बुनियाद क़रार दिया है.
“इस मंच को महत्वाकाँक्षा और गति प्रदान करनी होगी, ताकि एक सुदृढ़, समावेशी, न्यायसंगत और सभी के लिये टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिये वित्तीय संसाधनों का इन्तज़ाम हो सके.”
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान पिछले 90 सालों में पहली बार, इतने बड़े स्तर पर आर्थिक संकुचन देखा गया है, और इन हालात में, ज़िन्दगियााँ व आजीविकाएँ तबाह हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि वैक्सीन की बदौलत, एक अंधेरी सुरंग के छोर पर रौशनी दिखाई देने लगी है, मगर इसके बावजूद, वर्षों तक इसके सामाजिक-आर्थिक असर झेलने पड़ सकते हैं.
महासभा प्रमुख ने विकास के लिये वित्तीय पोषण की 2021 में मंच को एक ऐसा अवसर क़रार दिया है, जिससे एक उपयुक्त पुनर्बहाली की बुनियाद तैयार की जा सकती है., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विकास के लिये वित्तीय पोषण (Financing for Development) विषय पर आयोजित मंच को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि कोविड-19 सहित भावी चुनौतियो से निपटने के लिये, निजी क्षेत्र को, ख़ुद को, वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा सम्भव बनाने के लिये सोच-विचार के ढाँचे और कार्यपद्धतियों में पूर्ण रूप से बदलाव की आवश्यकता होगी.

सोमवार को आयोजित इस बैठक में टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा की दिशा में हुई प्रगति व मौजूदा हालात पर चर्चा हुई.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने वर्ष 2020 की एक उदास तस्वीर उकेरते हुए बताया कि कोरोनावायरस के कारण लगभग 30 लाख लोगों की मौत हो चुकी है.

12 करोड़ लोग चरम ग़रीबी के गर्त में धँस गए हैं और 25 करोड़ से ज़्यादा पूर्णकालिक रोज़गारों के तुल्य आजीविका के अवसर खो गए हैं.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि संक्रमण के मामले फिर से रफ़्तार पकड़ रहे हैं, जोकि दिखाते हैं कि यह संकट अभी टला नहीं है.

महासचिव गुटेरेश के मुताबिक़ इन ख़तरनाक रुझानों को पलटने, संक्रमणों की लगातार उठती लहरों की रोकथाम करने और एक लम्बी वैश्विक आर्थिक मन्दी से बचने के लिये “उच्चतम राजनैतिक स्तर पर एक विशाल प्रयास की आवश्यकता है.”

उन्होंने, साथ ही, इस प्रक्रिया में टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के मार्ग पर आगे बढ़ने की अहमियत को भी रेखांकित किया है.

एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया कि महामारी से उबरने के लिये न्यायोचित वैश्विक जवाबी कार्रवाई को आगे बढ़ाना, बहुपक्षवाद के लिय एक परीक्षा है. “अब तक, हम इसमें विफल हुए हैं.”

इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि कोरोनावायरस वैक्सीन की 75 प्रतिशत ख़ुराकें केवल 10 देशों में दी गई हैं.

महासचिव गुटेरेश ने इस पृष्ठभूमि में ज़िन्दगियों को बचाने और देशों को, विनाशकारी क़र्ज़ के दबाव में धँसने से बचाने के लिये एकता और एकजुटता की पुकार लगाई है.

महत्वपूर्ण कार्रवाई का आहवान

यूएन प्रमुख ने कोविड-19 पर असरदार कार्रवाई और टिकाऊ व सुदृढ़ पुनर्बहाली का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से, छह क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है.

इसके तहत, सर्वप्रथम, यूएन के नेतृत्व वाली कोवैक्स पहल के लिये ज़रूरी वित्तीय पोषण की कमी को दूर किया जाना होगा.

उन्होंने बताया कि महामारी पर हमेशा के लिये विराम लगाने के लिये हर किसी के लिये, हर स्थान पर वैक्सीन का न्यायोचित वितरण महत्वपूर्ण है.

साथ ही, उन्होंने विकास सहायता की भी पुकार लगाई है, जिन्हें सबसे अधिक ज़रूरतमन्द देशों तक पहुँचाया जाना होगा.

महासचिव के अनुसार, क़र्ज़ संकट को भी कारगर ढँग से सुलझाया जाना होगा, और कुछ समय के लिये क़र्ज़ अदायगी पर रोक लगाते हुए राहत प्रदान करनी होगी और नक़दी मुहैया कराई जानी होगी.

“लेकिन हमें क़र्ज़ राहत से कहीं आगे बढ़ने की आवश्यकता है…एक अन्तरराष्ट्रीय क़र्ज़ ढाँचे को मज़बूती प्रदान करनी होगी, ताकि क़र्ज़ की लहरों, वैश्विक ऋण संकट और खोए हुए दशकों के घातक चक्र का अन्त किया जा सके.”

समावेशी विकास

बताया गया है कि एक नए सामाजिक अनुबन्ध में निवेश करना होगा, जोकि शिक्षा, हरित रोज़गारों, सामाजिक संरक्षा, और स्वास्थ्य प्रणालियों में एकजुटता पर आधारित होगा.

उन्होंने इसे टिकाऊ और समावेशी विकास की बुनियाद क़रार दिया है.

“इस मंच को महत्वाकाँक्षा और गति प्रदान करनी होगी, ताकि एक सुदृढ़, समावेशी, न्यायसंगत और सभी के लिये टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिये वित्तीय संसाधनों का इन्तज़ाम हो सके.”

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान पिछले 90 सालों में पहली बार, इतने बड़े स्तर पर आर्थिक संकुचन देखा गया है, और इन हालात में, ज़िन्दगियााँ व आजीविकाएँ तबाह हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि वैक्सीन की बदौलत, एक अंधेरी सुरंग के छोर पर रौशनी दिखाई देने लगी है, मगर इसके बावजूद, वर्षों तक इसके सामाजिक-आर्थिक असर झेलने पड़ सकते हैं.

महासभा प्रमुख ने विकास के लिये वित्तीय पोषण की 2021 में मंच को एक ऐसा अवसर क़रार दिया है, जिससे एक उपयुक्त पुनर्बहाली की बुनियाद तैयार की जा सकती है.

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