कोविड-19: वैक्सीन आने पर भी, टैस्ट अति महत्वपूर्ण उपाय रहेंगे

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने के मुखिया ने कहा है कि कोविड-19 का मुक़ाबला करने के उपायों में, अगर वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू भी कर दिया जाए, तब भी टैस्ट यानि परीक्षण, एक अति महत्वपूर्ण विकल्प रहेगा.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को स्वास्थ्य महामारी पर अपनी नियमित प्रेस वार्ता में ऐसे देशों की तरफ़ ध्यान दिलाया जहाँ कोरोनावायरस पर नियन्त्रण पाया गया है, वहाँ, किस तरह से, परीक्षण का विकल्प मुस्तैदी से अपनाया गया.
उन्होंने कहा, “निसन्देह, वैक्सीन जारी किये जाने के बहुत नज़दीक हैं, मगर फिर फिर भी, टैस्ट बहुत अहम भूमिका निभाते रहेंगे.”
“शुरू में तो, स्वास्थ्यकर्मी, उम्र दराज़ लोग और अन्य जोखिम का सामना करने वाले समूहों को वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिये प्राथमिकता पर रखा जाएगा.
उसके बाद भी कोरोनावायरस को अपना क़हर बरपाने के लिये बहुत जगह बची रहेगी, इसलिये टैस्ट, तब भी, इस महामारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों में एक अति महत्वपूर्ण विकल्प रहेगा.”
महानिदेशक ने टैस्ट की अहमियत पर और ज़्यादा ज़ोर देते हुए कहा, “टैस्ट करने से ये मालूम होता है कि वायरस कहाँ मौजूद है. जिस तरह से और जिस स्तर पर, एकान्तवास सुविधाओं, क्लीनिकल देखभाल, स्वास्थ्यकर्मियों की संरक्षा, संक्रमण के वाहकों का पता लगाना व अन्य सामूहिक गतिविधियों में संसाधन निवेश किये जा रहे हैं, उसी तरह से टैस्ट करने के उपायों में भी संसाधन निवेश करने होंगे.”
मूल्याँकन की ज़रूरत
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, इस बीच ये भी कहा है कि ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय और फ़ार्मास्यूटिकल कम्पनी ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित की गई वैक्सीन के बारे में अभी और ज़्यादा जानकारी एकत्र किये जाने की ज़रूरत है.
इन दोनों साझीदारों ने कुछ ही दिन पहले घोषणा की थी कि एक वैक्सीन के क्लीनिकल परीक्षणों में पाया गया कि उनकी एक वैक्सीन की आधी ख़ुराक और उसके एक महीने बाद उसकी पूरी ख़ुराक देने के नतीजे ज़्यादा असरदार थे, बनिस्बत, दो ख़ुराक देने के.
विश्व स्वास्थ्य संगठन में टीकाकरण, वैक्सीन और बायोलॉजीकल्स की निदेशक डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन ने इस वैक्सीन के बारे में  और ज़्यादा जानकारी की उपलब्धता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, क्योंकि इसके बारे में अभी जानकारी, प्रैस विज्ञप्ति में सामने आई है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रैस विज्ञप्ति के अनुसार, 3 हज़ार से कम लोगों को ये वैक्सीन दी गई, और उन सभी की उम्र 55 वर्ष या उससे ज़्यादा थी.
उन्होंने बताया कि जबकि अन्य समूह में विभिन्न उम्रों के 8 हज़ार लोग शामिल थे, इसलिये दोनों समूहों के बारे में किसी नतीजे पर पहुँचना मुश्किल है, किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने के नज़रिये से ये संख्या काफ़ी कम थी.
डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि इस समय, कुछ भी कहना, क़यासबाज़ी होगी.
उन्होंने कहा कि ऐस्ट्राज़ेनेका कम्पनी ने संगठन को सूचित किया है कि कम्पनी वैक्सीन का पूर्ण टैस्ट करने का इरादा रखती है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने के मुखिया ने कहा है कि कोविड-19 का मुक़ाबला करने के उपायों में, अगर वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू भी कर दिया जाए, तब भी टैस्ट यानि परीक्षण, एक अति महत्वपूर्ण विकल्प रहेगा.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को स्वास्थ्य महामारी पर अपनी नियमित प्रेस वार्ता में ऐसे देशों की तरफ़ ध्यान दिलाया जहाँ कोरोनावायरस पर नियन्त्रण पाया गया है, वहाँ, किस तरह से, परीक्षण का विकल्प मुस्तैदी से अपनाया गया.

उन्होंने कहा, “निसन्देह, वैक्सीन जारी किये जाने के बहुत नज़दीक हैं, मगर फिर फिर भी, टैस्ट बहुत अहम भूमिका निभाते रहेंगे.”

“शुरू में तो, स्वास्थ्यकर्मी, उम्र दराज़ लोग और अन्य जोखिम का सामना करने वाले समूहों को वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिये प्राथमिकता पर रखा जाएगा.

उसके बाद भी कोरोनावायरस को अपना क़हर बरपाने के लिये बहुत जगह बची रहेगी, इसलिये टैस्ट, तब भी, इस महामारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों में एक अति महत्वपूर्ण विकल्प रहेगा.”

महानिदेशक ने टैस्ट की अहमियत पर और ज़्यादा ज़ोर देते हुए कहा, “टैस्ट करने से ये मालूम होता है कि वायरस कहाँ मौजूद है. जिस तरह से और जिस स्तर पर, एकान्तवास सुविधाओं, क्लीनिकल देखभाल, स्वास्थ्यकर्मियों की संरक्षा, संक्रमण के वाहकों का पता लगाना व अन्य सामूहिक गतिविधियों में संसाधन निवेश किये जा रहे हैं, उसी तरह से टैस्ट करने के उपायों में भी संसाधन निवेश करने होंगे.”

मूल्याँकन की ज़रूरत

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, इस बीच ये भी कहा है कि ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय और फ़ार्मास्यूटिकल कम्पनी ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित की गई वैक्सीन के बारे में अभी और ज़्यादा जानकारी एकत्र किये जाने की ज़रूरत है.

इन दोनों साझीदारों ने कुछ ही दिन पहले घोषणा की थी कि एक वैक्सीन के क्लीनिकल परीक्षणों में पाया गया कि उनकी एक वैक्सीन की आधी ख़ुराक और उसके एक महीने बाद उसकी पूरी ख़ुराक देने के नतीजे ज़्यादा असरदार थे, बनिस्बत, दो ख़ुराक देने के.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में टीकाकरण, वैक्सीन और बायोलॉजीकल्स की निदेशक डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रायन ने इस वैक्सीन के बारे में  और ज़्यादा जानकारी की उपलब्धता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, क्योंकि इसके बारे में अभी जानकारी, प्रैस विज्ञप्ति में सामने आई है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रैस विज्ञप्ति के अनुसार, 3 हज़ार से कम लोगों को ये वैक्सीन दी गई, और उन सभी की उम्र 55 वर्ष या उससे ज़्यादा थी.

उन्होंने बताया कि जबकि अन्य समूह में विभिन्न उम्रों के 8 हज़ार लोग शामिल थे, इसलिये दोनों समूहों के बारे में किसी नतीजे पर पहुँचना मुश्किल है, किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने के नज़रिये से ये संख्या काफ़ी कम थी.

डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि इस समय, कुछ भी कहना, क़यासबाज़ी होगी.

उन्होंने कहा कि ऐस्ट्राज़ेनेका कम्पनी ने संगठन को सूचित किया है कि कम्पनी वैक्सीन का पूर्ण टैस्ट करने का इरादा रखती है.

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