कोविड-19: वैश्विक महामारी का दूसरा वर्ष ज़्यादा ‘जानलेवा’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि भारत सहित अनेक देशों में विकट हालात दर्शाते हैं कि वैश्विक महामारी कोविड-19 का दूसरा वर्ष पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रहा है. उन्होंने धनी देशों से अपील की है कि कोरोनावायरस वैक्सीन को बच्चों व किशोरों को देने में जल्दबाज़ी ना करते हुए, उन ख़ुराकों को न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये स्थापित ‘कोवैक्स’ पहल के तहत दान कर दिया जाना चाहिए.

विश्व भर में, कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक 16 करोड़ से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हुई है और 33 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/TtjhUc524Z— World Health Organization (WHO) (@WHO) May 14, 2021

महानिदेशक घेबरेयेसस ने जिनीवा में शुक्रवार को पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि भारत में हालात बेहद चिन्ताजनक बने हुए हैं.
अनेक राज्यों में संक्रमण, अस्पतालों में मरीज़ों के भर्ती होने और मौतों के बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन जवाबी कार्रवाई में सक्रियता से जुटा है और ऑक्सीजन कॉन्सनट्रेटर्स, सचल फ़ील्ड अस्पतालों के लिये टैण्ट, मास्क और अन्य चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति की गई है.
भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों को भी संक्रमण व अस्पताल में मरीज़ों की संख्या बढ़ने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.
इनमें नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, कम्बोडिया, थाईलैण्ड और मिस्र में सहित अन्य देश हैं और अमेरिकी क्षेत्र भी प्रभावित है.
पिछले सप्ताह विश्व भर में कोविड-19 के कारण कुल मृतक संख्या का 40 फ़ीसदी अमेरिकी क्षेत्र से था. अफ़्रीका के कुछ देशों में भी मामलों में तेज़ी देखी गई है.
यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि कोरोनावायरस संकट का दूसरा वर्ष, 2020 के मुक़ाबले कहीं अधिक घातक साबित हो रहा है.
सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और टीकाकरण – दोनों प्रकार के उपायों को एक साथ अपनाकर ही इस महामारी से बाहर निकला जा सकता है.
उन्होंने आगाह किया कि टीकाकरण की धीमी रफ़्तार, एक घातक वायरस से निपटने की कारगर रणनीति नहीं है, साथ ही ‘वैक्सीन राष्ट्रवाद’ के ख़तरे के प्रति भी सचेत रहना होगा.
उन्होंने क्षोभ जताया कि फ़िलहाल, कुल वैक्सीन आपूर्ति का महज़ 0.3 फ़ीसदी ही निम्न-आय वाले देशों को मिल पा रहा है.
यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक, ऐसे कुछ धनी देश जिन्होंने वैक्सीन की अधिकाँश आपूर्ति को ख़रीद लिया है, अब वहाँ कम जोखिम वाले समूहों का टीकाकरण हो रहा है.
“मैं समझता हूँ कि कुछ देश, अपने बच्चों और किशोरों का टीकाकरण क्यों करना चाहते हैं. मगर, मैं अभी उनसे आग्रह करता हूँ कि वे पुनर्विचार करें और ऐसा करने के बजाय ये वैक्सीन, कोवैक्स के लिये दान कर दें.”
महानिदेशक घेबरेयेसस ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन की आपूर्ति निम्न और निम्नतर-मध्य आय वाले देशों में इतनी भी नहीं है कि स्वास्थ्य और अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों का टीकाकरण किया जा सके., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि भारत सहित अनेक देशों में विकट हालात दर्शाते हैं कि वैश्विक महामारी कोविड-19 का दूसरा वर्ष पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रहा है. उन्होंने धनी देशों से अपील की है कि कोरोनावायरस वैक्सीन को बच्चों व किशोरों को देने में जल्दबाज़ी ना करते हुए, उन ख़ुराकों को न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये स्थापित ‘कोवैक्स’ पहल के तहत दान कर दिया जाना चाहिए.

विश्व भर में, कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक 16 करोड़ से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हुई है और 33 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/TtjhUc524Z

— World Health Organization (WHO) (@WHO) May 14, 2021

महानिदेशक घेबरेयेसस ने जिनीवा में शुक्रवार को पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि भारत में हालात बेहद चिन्ताजनक बने हुए हैं.

अनेक राज्यों में संक्रमण, अस्पतालों में मरीज़ों के भर्ती होने और मौतों के बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन जवाबी कार्रवाई में सक्रियता से जुटा है और ऑक्सीजन कॉन्सनट्रेटर्स, सचल फ़ील्ड अस्पतालों के लिये टैण्ट, मास्क और अन्य चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति की गई है.

भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों को भी संक्रमण व अस्पताल में मरीज़ों की संख्या बढ़ने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

इनमें नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, कम्बोडिया, थाईलैण्ड और मिस्र में सहित अन्य देश हैं और अमेरिकी क्षेत्र भी प्रभावित है.

पिछले सप्ताह विश्व भर में कोविड-19 के कारण कुल मृतक संख्या का 40 फ़ीसदी अमेरिकी क्षेत्र से था. अफ़्रीका के कुछ देशों में भी मामलों में तेज़ी देखी गई है.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि कोरोनावायरस संकट का दूसरा वर्ष, 2020 के मुक़ाबले कहीं अधिक घातक साबित हो रहा है.

सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और टीकाकरण – दोनों प्रकार के उपायों को एक साथ अपनाकर ही इस महामारी से बाहर निकला जा सकता है.

उन्होंने आगाह किया कि टीकाकरण की धीमी रफ़्तार, एक घातक वायरस से निपटने की कारगर रणनीति नहीं है, साथ ही ‘वैक्सीन राष्ट्रवाद’ के ख़तरे के प्रति भी सचेत रहना होगा.

उन्होंने क्षोभ जताया कि फ़िलहाल, कुल वैक्सीन आपूर्ति का महज़ 0.3 फ़ीसदी ही निम्न-आय वाले देशों को मिल पा रहा है.

यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक, ऐसे कुछ धनी देश जिन्होंने वैक्सीन की अधिकाँश आपूर्ति को ख़रीद लिया है, अब वहाँ कम जोखिम वाले समूहों का टीकाकरण हो रहा है.

“मैं समझता हूँ कि कुछ देश, अपने बच्चों और किशोरों का टीकाकरण क्यों करना चाहते हैं. मगर, मैं अभी उनसे आग्रह करता हूँ कि वे पुनर्विचार करें और ऐसा करने के बजाय ये वैक्सीन, कोवैक्स के लिये दान कर दें.”

महानिदेशक घेबरेयेसस ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन की आपूर्ति निम्न और निम्नतर-मध्य आय वाले देशों में इतनी भी नहीं है कि स्वास्थ्य और अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों का टीकाकरण किया जा सके.

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