कोविड-19: शिक्षा में व्यवधान से निपटने के लिये भारत में यूएन एजेंसियों के सक्रिय प्रयास

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में, शिक्षण कार्य में व्यापक व्यवधान पैदा हुआ है, जिससे भारत समेत अन्य देशों में करोड़ों छात्रों की पढ़ाई-लिखाई पर भारी असर हुआ है. इसके मद्देनज़र, भारत में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए स्कूलों को फिर से खोलने और शिक्षण कार्यक्रमों को जारी रखने के लिये ज़रूरी दिशानिर्देशों सहित सरकारी एजेंसियों को हरसम्भव सहायता मुहैया करा रही हैं. 

पिछले वर्ष कोविड-19 के फैलाव की रोकथाम के लिये ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र स्कूलों को पूर्ण व आंशिक रूप से बन्द किया गया, जिससे दुनिया भर में 90 फ़ीसदी से ज़्यादा छात्र प्रभावित थे. 
बच्चों को घर तक सीमित रखने से उनके स्वास्थ्य, विकास, सुरक्षा और कल्याण पर जोखिम बढ़ता है. सबसे ज़्यादा निर्बल बच्चों को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है.
भारत में भी स्कूल-कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों में तालाबन्दी होने से करोड़ों बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई.  
यूएन एजेंसियों द्वारा भारत में शिक्षा मोर्चे पर आए संकट से निपटने के लिये वंचित और हाशिये पर धकेल दिये गए समुदायों के लड़के-लड़कियों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है. 
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने देश के 17 राज्यों में घर बैठकर पढ़ाई-लिखाई करने की सम्भावना को साकार करने में अपना योगदान दिया है. 
इस मुहिम के तहत छह करोड़ बच्चों को मदद मुहैया कराई गई है, जिनमें आधी संख्या लड़कियों की है.
साथ ही शुरुआती बचपन में शिक्षा सुनिश्चित करने के लिये ई-लर्निंग पाठ्यक्रम जैसे उपायों का भी सहारा लिया गया है. 
यूएन एजेंसियाँ प्रयासरत
इस क्रम में प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिये बाल विकास से जुड़े चार लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है. 

CC0 Public Domainअनेक देशों में कोविड-19 महामारी के कारण कक्षाएँ खाली हैं.

खेल के ज़रिये सीखने को बढ़ावा देते हुए एक करोड़ से ज़्यादा बच्चों तक पहुँच पाना भी सम्भव हुआ है. 
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने स्कूलों में कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिये 22 हज़ार शिक्षकों और पाँच लाख बच्चों तक, उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने के सन्देश पहुँचाए हैं. 
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने वीडियो और प्रचार सामग्री तैयार की है, जिसके माध्यम से समावेशी शिक्षा और बाल स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा दिया जा रहा है.   
वहीं, शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) की मदद से, लगभग साढ़े तीन हज़ार शरणार्थी बच्चों के लिये शिक्षा जारी रख पाना सम्भव हुआ है. 
इस क्रम में, तीन हज़ार से ज़्यादा बच्चों को ज़रूरी शिक्षा सामग्री व टैबलेट प्रदान किये गए हैं. 
संयुक्त राष्ट्र टीमें, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना के लिये एक हज़ार 800 से ज़्यादा राज्यस्तरीय अधिकारियों को जानकारी व परामर्श प्रदान कर रही हैं. 
साथ ही, सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए स्कूलों को फिर खोलने व इस सम्बन्ध में दिशानिर्देश विकसित करने में, प्रशासनिक एजेंसियों को सहायता मुहैया कराई जा रही है.  , वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में, शिक्षण कार्य में व्यापक व्यवधान पैदा हुआ है, जिससे भारत समेत अन्य देशों में करोड़ों छात्रों की पढ़ाई-लिखाई पर भारी असर हुआ है. इसके मद्देनज़र, भारत में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए स्कूलों को फिर से खोलने और शिक्षण कार्यक्रमों को जारी रखने के लिये ज़रूरी दिशानिर्देशों सहित सरकारी एजेंसियों को हरसम्भव सहायता मुहैया करा रही हैं. 

पिछले वर्ष कोविड-19 के फैलाव की रोकथाम के लिये ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र स्कूलों को पूर्ण व आंशिक रूप से बन्द किया गया, जिससे दुनिया भर में 90 फ़ीसदी से ज़्यादा छात्र प्रभावित थे. 

बच्चों को घर तक सीमित रखने से उनके स्वास्थ्य, विकास, सुरक्षा और कल्याण पर जोखिम बढ़ता है. सबसे ज़्यादा निर्बल बच्चों को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है.

भारत में भी स्कूल-कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों में तालाबन्दी होने से करोड़ों बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई.  

यूएन एजेंसियों द्वारा भारत में शिक्षा मोर्चे पर आए संकट से निपटने के लिये वंचित और हाशिये पर धकेल दिये गए समुदायों के लड़के-लड़कियों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने देश के 17 राज्यों में घर बैठकर पढ़ाई-लिखाई करने की सम्भावना को साकार करने में अपना योगदान दिया है. 

इस मुहिम के तहत छह करोड़ बच्चों को मदद मुहैया कराई गई है, जिनमें आधी संख्या लड़कियों की है.

साथ ही शुरुआती बचपन में शिक्षा सुनिश्चित करने के लिये ई-लर्निंग पाठ्यक्रम जैसे उपायों का भी सहारा लिया गया है. 

यूएन एजेंसियाँ प्रयासरत

इस क्रम में प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिये बाल विकास से जुड़े चार लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है. 


CC0 Public Domain
अनेक देशों में कोविड-19 महामारी के कारण कक्षाएँ खाली हैं.

खेल के ज़रिये सीखने को बढ़ावा देते हुए एक करोड़ से ज़्यादा बच्चों तक पहुँच पाना भी सम्भव हुआ है. 

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने स्कूलों में कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिये 22 हज़ार शिक्षकों और पाँच लाख बच्चों तक, उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने के सन्देश पहुँचाए हैं. 

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने वीडियो और प्रचार सामग्री तैयार की है, जिसके माध्यम से समावेशी शिक्षा और बाल स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा दिया जा रहा है.   

वहीं, शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) की मदद से, लगभग साढ़े तीन हज़ार शरणार्थी बच्चों के लिये शिक्षा जारी रख पाना सम्भव हुआ है. 

इस क्रम में, तीन हज़ार से ज़्यादा बच्चों को ज़रूरी शिक्षा सामग्री व टैबलेट प्रदान किये गए हैं. 

संयुक्त राष्ट्र टीमें, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना के लिये एक हज़ार 800 से ज़्यादा राज्यस्तरीय अधिकारियों को जानकारी व परामर्श प्रदान कर रही हैं. 

साथ ही, सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए स्कूलों को फिर खोलने व इस सम्बन्ध में दिशानिर्देश विकसित करने में, प्रशासनिक एजेंसियों को सहायता मुहैया कराई जा रही है.  

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