कोविड-19: संक्रमणों की बढ़ती संख्या के बीच ‘बेफ़िक्र’ होकर बैठने का समय नहीं

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में वैक्सीन परीक्षणों के उत्साहजनक नतीजों और सम्भावित नये औज़ारों से उपजी उम्मीद के बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सचेत किया है कि यह समय संतुष्ट हो कर बैठ जाने का नहीं है.

सोमवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर घेबरेयेसस ने योरोपीय और अमेरिकी क्षेत्र के देशों में संक्रमण के बढ़ते मामलों पर चिन्ता जताई है.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/omNYXHvWf9— World Health Organization (WHO) (@WHO) November 16, 2020

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों से स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य प्रणालियों पर भीषण बोझ हैं और हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं.   
स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने सोमवार को पत्रकारों को बताया, “इस क्षण जब कुछ देशों ने पूर्ण समाज पर पाबन्दियाँ लगा दी हैं, प्रमुख प्रणालियों को पुख़्ता बनाने के लिये फिर से समय हासिल हुआ है.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझेदार संगठन राष्ट्रीय प्रशासनिक ढाँचों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि बीमार पड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों को उपयुक्त कवरेज मिल सके. 
सुरक्षित और असरदार वैक्सीन की उपलब्धता के बाद स्वास्थ्य प्रणालियों को तैयार करने में इससे मदद मिलेगी.
उन्होंने परीक्षण, संक्रमितों को अलग रखने, उनके सम्पर्क में आये लोगों की खोज करने और उपचार जैसे बुनियादी उपायों की अहमियत को फिर रेखांकित किया है और कहा है कि जिन देशों ने इन उपायों को अपनाया है उन्हें कम व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है.  
“जो देश इस वायरस को बेक़ाबू ढँग से फैलने दे रहे हैं वो आग से खेल रहे हैं.”
यूएन एजेंसी प्रमुख ने ज़ोर देते हुए कहा है कि स्वास्थ्यकर्मियों को हरसम्भव समर्थन मुहैया कराये जाने की ज़रूरत है, साथ ही स्कूलों को खुला रखना होगा, निर्बलों की रक्षा करनी होगी और अर्थव्यवस्था को सहारा देना होगा. 
वैक्सीन परीक्षण से उम्मीद
महानिदेशक घेबरेयेसस ने कोविड-19 वैक्सीन पर ताज़ा ख़बर का स्वागत किया है जिसमें उसके असरदार होने की पुष्टि की गई है, इसके अलावा अन्य सम्भावित उपचारों पर परीक्षण के आँकड़ों का इन्तेज़ार किया जा रहा है. 
बायोटैक कम्पनी मोडेर्ना ने सोमवार को घोषणा की है कि अन्तरिम नतीजे दर्शाते हैं कि उसके द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन 95 फ़ीसदी तक असरदार साबित हुई है.  
इससे पहले फ़ाइज़र और बायोएनटैक ने भी अपनी वैक्सीनों के सफल परीक्षणों की घोषणा की थी. 
एक पत्रकार द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने इस ख़बर को उत्साहजनक बताया है लेकिन सतर्कता बरते जाने के लिये भी कहा है. 
उन्होंने कहा कि अभी यह देखा जाना होगा कि वैक्सीन अन्तत: कितनी असरदार साबित होती है और यह तभी किया जा सकता है जब आँकड़ों का पूरी तरह विश्लेषण किया जाये.
साथ ही वैक्सीन परीक्षण में हिस्सा लेने वाले लगभग आधे लोगों पर लगभग दो महीनों तक नज़र रखी जाये कि कहीं वैक्सीन के दुष्प्रभाव के मामले तो सामने नहीं आये हैं. 
इसके बाद उसे नियामक एजेंसियों के बाद भेजा जायेगा. 
अहम पहल
मोडेर्ना कम्पनी द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन उन नौ वैक्सीनों में शामिल है जिन्हें COVAX Facility के तहत विकसित किया जा रहा है. 
न्यायोचित ढँग से वैक्सीन वितरण के लिये यह एक ऐसी वैश्विक पहल है जिसे वैक्सीन ऐलायन्स (GAVI),  Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (CEPI), और विश्व स्वास्थ्य संगठन की अग्रणी भूमिका है.
170 से ज़्यादा देश अब इस पहल का हिस्सा हैं जिनमें 92 निम्न और मध्य आय वाले देश हैं.
डॉक्टर स्वामीनाथन ने कहा है कि अन्य वैक्सीन परीक्षणों के नतीजे भी आने वाले हफ़्तों में उपलब्ध होंगे.
उनके मुताबिक COVAX Facility के पास ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में असरदार वैक्सीनों का होना अहम चूँकि कुछ वैक्सीन कुछ ख़ास परिस्थितियों या जनसमूहों (जैसेकि वृद्धजनों) में कारगर होंगी.
उनका मानना है कि वर्ष 2021 के पहले छह महीनों में भी बेहद सीमित संख्या में ही खुराकों के उपलब्ध होने की सम्भावना है. ग़ौरतलब है कि बहुत से देशों ने पहले ही कम्पनियों से द्विपक्षीय समझौते किये हैं जिसकी वजह से वैक्सीनों को पहले उनके लिये उपलब्ध बनाया जायेगा.  , विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में वैक्सीन परीक्षणों के उत्साहजनक नतीजों और सम्भावित नये औज़ारों से उपजी उम्मीद के बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सचेत किया है कि यह समय संतुष्ट हो कर बैठ जाने का नहीं है.

सोमवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर घेबरेयेसस ने योरोपीय और अमेरिकी क्षेत्र के देशों में संक्रमण के बढ़ते मामलों पर चिन्ता जताई है.

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों से स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य प्रणालियों पर भीषण बोझ हैं और हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं.

स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने सोमवार को पत्रकारों को बताया, “इस क्षण जब कुछ देशों ने पूर्ण समाज पर पाबन्दियाँ लगा दी हैं, प्रमुख प्रणालियों को पुख़्ता बनाने के लिये फिर से समय हासिल हुआ है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझेदार संगठन राष्ट्रीय प्रशासनिक ढाँचों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि बीमार पड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों को उपयुक्त कवरेज मिल सके.

सुरक्षित और असरदार वैक्सीन की उपलब्धता के बाद स्वास्थ्य प्रणालियों को तैयार करने में इससे मदद मिलेगी.

उन्होंने परीक्षण, संक्रमितों को अलग रखने, उनके सम्पर्क में आये लोगों की खोज करने और उपचार जैसे बुनियादी उपायों की अहमियत को फिर रेखांकित किया है और कहा है कि जिन देशों ने इन उपायों को अपनाया है उन्हें कम व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है.

“जो देश इस वायरस को बेक़ाबू ढँग से फैलने दे रहे हैं वो आग से खेल रहे हैं.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने ज़ोर देते हुए कहा है कि स्वास्थ्यकर्मियों को हरसम्भव समर्थन मुहैया कराये जाने की ज़रूरत है, साथ ही स्कूलों को खुला रखना होगा, निर्बलों की रक्षा करनी होगी और अर्थव्यवस्था को सहारा देना होगा.

वैक्सीन परीक्षण से उम्मीद

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कोविड-19 वैक्सीन पर ताज़ा ख़बर का स्वागत किया है जिसमें उसके असरदार होने की पुष्टि की गई है, इसके अलावा अन्य सम्भावित उपचारों पर परीक्षण के आँकड़ों का इन्तेज़ार किया जा रहा है.

बायोटैक कम्पनी मोडेर्ना ने सोमवार को घोषणा की है कि अन्तरिम नतीजे दर्शाते हैं कि उसके द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन 95 फ़ीसदी तक असरदार साबित हुई है.

इससे पहले फ़ाइज़र और बायोएनटैक ने भी अपनी वैक्सीनों के सफल परीक्षणों की घोषणा की थी.

एक पत्रकार द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने इस ख़बर को उत्साहजनक बताया है लेकिन सतर्कता बरते जाने के लिये भी कहा है.

उन्होंने कहा कि अभी यह देखा जाना होगा कि वैक्सीन अन्तत: कितनी असरदार साबित होती है और यह तभी किया जा सकता है जब आँकड़ों का पूरी तरह विश्लेषण किया जाये.

साथ ही वैक्सीन परीक्षण में हिस्सा लेने वाले लगभग आधे लोगों पर लगभग दो महीनों तक नज़र रखी जाये कि कहीं वैक्सीन के दुष्प्रभाव के मामले तो सामने नहीं आये हैं.

इसके बाद उसे नियामक एजेंसियों के बाद भेजा जायेगा.

अहम पहल

मोडेर्ना कम्पनी द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन उन नौ वैक्सीनों में शामिल है जिन्हें COVAX Facility के तहत विकसित किया जा रहा है.

न्यायोचित ढँग से वैक्सीन वितरण के लिये यह एक ऐसी वैश्विक पहल है जिसे वैक्सीन ऐलायन्स (GAVI),  Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (CEPI), और विश्व स्वास्थ्य संगठन की अग्रणी भूमिका है.

170 से ज़्यादा देश अब इस पहल का हिस्सा हैं जिनमें 92 निम्न और मध्य आय वाले देश हैं.

डॉक्टर स्वामीनाथन ने कहा है कि अन्य वैक्सीन परीक्षणों के नतीजे भी आने वाले हफ़्तों में उपलब्ध होंगे.

उनके मुताबिक COVAX Facility के पास ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में असरदार वैक्सीनों का होना अहम चूँकि कुछ वैक्सीन कुछ ख़ास परिस्थितियों या जनसमूहों (जैसेकि वृद्धजनों) में कारगर होंगी.

उनका मानना है कि वर्ष 2021 के पहले छह महीनों में भी बेहद सीमित संख्या में ही खुराकों के उपलब्ध होने की सम्भावना है. ग़ौरतलब है कि बहुत से देशों ने पहले ही कम्पनियों से द्विपक्षीय समझौते किये हैं जिसकी वजह से वैक्सीनों को पहले उनके लिये उपलब्ध बनाया जायेगा.

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