कोविड-19: सात हफ़्तों में पहली बार संक्रमणों में बढ़ोत्तरी

लगातार छह सप्ताह तक कोविड-19 महामारी के मामलों में गिरावट आने के बाद पहली बार, पिछले हफ़्ते कोरोनावायरस संक्रमणों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इस बीच, कोवैक्स पहल के तहत घाना और आइवरी कोस्ट में वैक्सीन ख़ुराकों के पहुँचने के पश्चात टीकाकरण की शुरुआत हो गई है और पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों और निर्बल समूहों को टीके लगाए जा रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के छह क्षेत्रीय कार्यालयों में से चार में कोरोनावायरस संक्रमण के मामले बढ़े हैं. इनमें पश्चिमी प्रशान्त और अफ़्रीका भी है. 
यूएन एजेंसी प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा, “यह निराशाजनक है, लेकिन हैरत भरा नहीं है.”

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/b7twPwxt4d— World Health Organization (WHO) (@WHO) March 1, 2021

“इसकी आंशिक वजह, सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में ढिलाई बरता जाना, नए प्रकारों का फैलना और लोगों द्वारा सतर्कता ना बरतना प्रतीत होती है.”
संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी, अनेक देशों में कोविड-19 टीकाकरण प्रयासों में आई तेज़ी के बीच दर्ज की गई है.  
यूएन एजेंसी प्रमुख ने आगाह किया है कि वैक्सीनों से ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिलेगी, लेकिन अगर देश महज़ टीकाकरण पर निर्भर रहते हैं, तो वे ग़लती कर रहे होंगे. 
महानिदेशक घेबरेयेसस ने दोहराया है कि बुनियादी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का पालन, जैसेकि परीक्षण, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, मास्क पहनना और भीड़भाड़ भरे स्थानों से दूर रहना, अब भी महत्वपूर्ण है.
कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक 11 करोड़ 38 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 25 लाख 27 हज़ार लोगों की मौत हुई है. 
ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन की पाँच-पाँच लाख से ज़्यादा ख़ुराकों को पिछले सप्ताह, पश्चिम अफ़्रीकी देशों के लिये रवाना किया गया था. 
इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में हुआ है, जहाँ इसे कोविशील्ड नाम दिया गया है.  
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने 15 फ़रवरी को आपात इस्तेमाल सूची में शामिल किये जाने की मंज़ूरी दी थी. 
वैश्विक टीकाकरण अभियान
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वैक्सीनों की खेप रवाना होना, इतिहास के सबसे बड़े, सबसे तेज़ और जटिल वैश्विक वितरण अभियान की शुरुआत को दर्शाता है.
इस बीच, आने वाले दिनों में, कोवैक्स पहल के तहत, एक करोड़ 10 लाख से ज़्यादा ख़ुराकों को भेजे जाने पर काम चल रहा है. 
यह पहल उन वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत कोरोनावायरस वैक्सीन की दो अरब ख़ुराकों को ज़रूरतमन्द देशों तक इस वर्ष के अन्त तक उपलब्ध कराया जाना है. 
घाना गणराज्य के राष्ट्रपति नाना अकुफ़ो-अड्डो ने कोविड-19 वैक्सीन की खेप पहुँचने का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे महामारी के गम्भीर चरण पर पार पाने में मदद मिलेगी. 
घाना के राष्ट्रपति ने बताया कि पहली ख़ुराकें स्वास्थ्य व अग्रिम मोर्चे पर जुटे अन्य कर्मियों के साथ-साथ उन लोगों को दी जाएँगी, जिन्हें गम्भीर कोविड-19 संक्रमण होने का जोखिम है.
“इस महत्वपूर्ण पड़ाव से घाना के लिये फिर से सुचारू कामकाज शुरु कर पाना और अर्थव्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मज़बूत बना पाना सम्भव होगा.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने इसे एक ऐसा दिन बताया जिसका सपना बहुत से लोग देखते आ रहे थे. “उस मेहनत के परिणाम को देखना संतोषदायक है. लेकिन और सफलता अभी मिलनी बाक़ी है.”
“कोवैक्स जिन उद्देश्यों को हासिल करने के लिये स्थापित किया गया था, यह उसकी शुरुआत भर है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस वर्ष के पहले 100 दिनों में सभी देशों में टीकाकरण की शुरुआत के लक्ष्य को पूरा करने के लिये अभी बहुत कुछ किये जाने की ज़रूरत है. “अब महज़ 40 दिन ही शेष हैं.”
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख हेनरीएटा फ़ोर ने टीकाकरण की शुरुआत को, एक अंधेरी सुरंग के आख़िर में उम्मीद भरी किरण बताया.  
उन्होंने कहा कि कोवैक्स पहल के तहत यह सुनिश्चित किये जाने की शुरुआत हो गई है कि वो रौशनी सभी के लिये चमके. 
ज़मीनी स्तर पर काम
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक के अनुसार, इस अभूतपूर्व वैश्विक प्रयास के ज़रिये, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकार्य वैक्सीनों की शिनाख़्त करने, उन्हें ख़रीदने के लिये धनराशि का इन्तज़ाम करने, और इतिहास में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को संचालित करने के लिये ज़मीन तैयार की गई है.
यूएन स्वास्थ्य एजीं का कहना है कि पहले दौर के अन्तर्गत, कोवैक्स वैक्सीन वितरण की पुष्टि के सम्बन्ध में जानकारी मंगलवार को प्रकाशित की जाएगी. 
अब तक कोवैक्स वैक्सीन की ख़ुराकों को, घाना, आइवरी कोस्ट भेजा गया है, जबकि Pfizer-BioNTech वैक्सीन की ख़ुराकों को कोरिया गणराज्य के लिये रवाना किया गया है. 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में कोवैक्स पहल में, वैक्सीन अलायन्स (GAVI) और महामारी से मुक़ाबले की तैयारी के लिये गठबन्धन (Coalition for Epidemic Preparedness Innovations/CEPI), यूनीसेफ़ सहित अन्य साझीदार संगठन शामिल हैं. 
इस पहल का उद्देश्य सभी ज़रूरतमन्द देशों तक वैक्सीन का न्यायसंगत ढँग से वितरण सुनिश्चित करना है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की अफ़्रीका के लिये क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मातशिदिसो मोएती ने बताया, “कोवैक्स सुविधा के ज़रिये, इतिहास में, अफ़्रीका के सबसे बड़ी टीकाकरण अभियान की शुरुआत, कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ महाद्वीप की लड़ाई में एक बड़ा क़दम प्रदर्शित करता है.” 
उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इस शुरुआत से टीकाकरण मुहिम से दूर खड़े अफ़्रीकी देशों को फिर से इस दौड़ में शामिल करना सम्भव होगा और वैश्विक वितरण में पसरी विषमता पर क़ाबू पाने में मदद मिलेगी. , लगातार छह सप्ताह तक कोविड-19 महामारी के मामलों में गिरावट आने के बाद पहली बार, पिछले हफ़्ते कोरोनावायरस संक्रमणों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इस बीच, कोवैक्स पहल के तहत घाना और आइवरी कोस्ट में वैक्सीन ख़ुराकों के पहुँचने के पश्चात टीकाकरण की शुरुआत हो गई है और पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों और निर्बल समूहों को टीके लगाए जा रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के छह क्षेत्रीय कार्यालयों में से चार में कोरोनावायरस संक्रमण के मामले बढ़े हैं. इनमें पश्चिमी प्रशान्त और अफ़्रीका भी है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा, “यह निराशाजनक है, लेकिन हैरत भरा नहीं है.”

“इसकी आंशिक वजह, सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में ढिलाई बरता जाना, नए प्रकारों का फैलना और लोगों द्वारा सतर्कता ना बरतना प्रतीत होती है.”

संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी, अनेक देशों में कोविड-19 टीकाकरण प्रयासों में आई तेज़ी के बीच दर्ज की गई है.  

यूएन एजेंसी प्रमुख ने आगाह किया है कि वैक्सीनों से ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिलेगी, लेकिन अगर देश महज़ टीकाकरण पर निर्भर रहते हैं, तो वे ग़लती कर रहे होंगे. 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने दोहराया है कि बुनियादी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का पालन, जैसेकि परीक्षण, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, मास्क पहनना और भीड़भाड़ भरे स्थानों से दूर रहना, अब भी महत्वपूर्ण है.

कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक 11 करोड़ 38 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 25 लाख 27 हज़ार लोगों की मौत हुई है. 

ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन की पाँच-पाँच लाख से ज़्यादा ख़ुराकों को पिछले सप्ताह, पश्चिम अफ़्रीकी देशों के लिये रवाना किया गया था. 
इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में हुआ है, जहाँ इसे कोविशील्ड नाम दिया गया है.  

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने 15 फ़रवरी को आपात इस्तेमाल सूची में शामिल किये जाने की मंज़ूरी दी थी. 

वैश्विक टीकाकरण अभियान

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वैक्सीनों की खेप रवाना होना, इतिहास के सबसे बड़े, सबसे तेज़ और जटिल वैश्विक वितरण अभियान की शुरुआत को दर्शाता है.

इस बीच, आने वाले दिनों में, कोवैक्स पहल के तहत, एक करोड़ 10 लाख से ज़्यादा ख़ुराकों को भेजे जाने पर काम चल रहा है. 

यह पहल उन वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत कोरोनावायरस वैक्सीन की दो अरब ख़ुराकों को ज़रूरतमन्द देशों तक इस वर्ष के अन्त तक उपलब्ध कराया जाना है. 

घाना गणराज्य के राष्ट्रपति नाना अकुफ़ो-अड्डो ने कोविड-19 वैक्सीन की खेप पहुँचने का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे महामारी के गम्भीर चरण पर पार पाने में मदद मिलेगी. 

घाना के राष्ट्रपति ने बताया कि पहली ख़ुराकें स्वास्थ्य व अग्रिम मोर्चे पर जुटे अन्य कर्मियों के साथ-साथ उन लोगों को दी जाएँगी, जिन्हें गम्भीर कोविड-19 संक्रमण होने का जोखिम है.

“इस महत्वपूर्ण पड़ाव से घाना के लिये फिर से सुचारू कामकाज शुरु कर पाना और अर्थव्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मज़बूत बना पाना सम्भव होगा.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने इसे एक ऐसा दिन बताया जिसका सपना बहुत से लोग देखते आ रहे थे. “उस मेहनत के परिणाम को देखना संतोषदायक है. लेकिन और सफलता अभी मिलनी बाक़ी है.”

“कोवैक्स जिन उद्देश्यों को हासिल करने के लिये स्थापित किया गया था, यह उसकी शुरुआत भर है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस वर्ष के पहले 100 दिनों में सभी देशों में टीकाकरण की शुरुआत के लक्ष्य को पूरा करने के लिये अभी बहुत कुछ किये जाने की ज़रूरत है. “अब महज़ 40 दिन ही शेष हैं.”

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख हेनरीएटा फ़ोर ने टीकाकरण की शुरुआत को, एक अंधेरी सुरंग के आख़िर में उम्मीद भरी किरण बताया.  

उन्होंने कहा कि कोवैक्स पहल के तहत यह सुनिश्चित किये जाने की शुरुआत हो गई है कि वो रौशनी सभी के लिये चमके. 

ज़मीनी स्तर पर काम

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक के अनुसार, इस अभूतपूर्व वैश्विक प्रयास के ज़रिये, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकार्य वैक्सीनों की शिनाख़्त करने, उन्हें ख़रीदने के लिये धनराशि का इन्तज़ाम करने, और इतिहास में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को संचालित करने के लिये ज़मीन तैयार की गई है.

यूएन स्वास्थ्य एजीं का कहना है कि पहले दौर के अन्तर्गत, कोवैक्स वैक्सीन वितरण की पुष्टि के सम्बन्ध में जानकारी मंगलवार को प्रकाशित की जाएगी. 

अब तक कोवैक्स वैक्सीन की ख़ुराकों को, घाना, आइवरी कोस्ट भेजा गया है, जबकि Pfizer-BioNTech वैक्सीन की ख़ुराकों को कोरिया गणराज्य के लिये रवाना किया गया है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में कोवैक्स पहल में, वैक्सीन अलायन्स (GAVI) और महामारी से मुक़ाबले की तैयारी के लिये गठबन्धन (Coalition for Epidemic Preparedness Innovations/CEPI), यूनीसेफ़ सहित अन्य साझीदार संगठन शामिल हैं. 

इस पहल का उद्देश्य सभी ज़रूरतमन्द देशों तक वैक्सीन का न्यायसंगत ढँग से वितरण सुनिश्चित करना है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की अफ़्रीका के लिये क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मातशिदिसो मोएती ने बताया, “कोवैक्स सुविधा के ज़रिये, इतिहास में, अफ़्रीका के सबसे बड़ी टीकाकरण अभियान की शुरुआत, कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ महाद्वीप की लड़ाई में एक बड़ा क़दम प्रदर्शित करता है.” 

उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इस शुरुआत से टीकाकरण मुहिम से दूर खड़े अफ़्रीकी देशों को फिर से इस दौड़ में शामिल करना सम्भव होगा और वैश्विक वितरण में पसरी विषमता पर क़ाबू पाने में मदद मिलेगी. 

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