कोवैक्स के वास्ते, धन जुटाने के लिये, त्वरित कार्रवाई की दरकार, अभी

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शुक्रवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैसे तो वैश्विक स्तर पर किये गए एक ऐतिहासिक सहभागिता कार्यक्रम की बदौलत, कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने व वितरण के साथ-साथ, दुनिया भर में जाँच व इलाज भी सम्भव हुआ है मगर, इस कार्यक्रम के लिये धन की भारी कमी अब भी बनी हुई है.

ये रिपोर्ट, कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिये एसीटी ऐक्सेलेटर कार्यक्रम शुरू होने की पहली वर्षगाँठ के मौक़े पर जारी की गई है. 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने रिपोर्ट जारी करने के लिये, शुक्रवार को आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में कहा, “एसीटी ऐक्सेलेरेटर कार्यक्रम शुरू होने के एक वर्ष बाद, विश्व नेताओं के सामने एक विकल्प है: हर जगह महामारी के कारणों का मुक़ाबला करने और लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने में संसाधन निवेश किया जाए, अभी…” 
“या फिर ऐसा नहीं करने के परिणामों का सामना करने पर ट्रिलियन डॉलर की भारी-भरकम रक़म ख़र्च करते रहा जाए, वो भी तब. जब इसका कोई अन्त सामने नज़र ना आए.”
उन्होंने कहा, “वर्ष 2021 के लिये, 19 अरब डॉलर रक़म की कमी है, और उत्पादों की सीमित आपूर्ति के साथ, हम महामारी का ख़ात्मा, केवल धन उपलब्ध कराकर, संसाधान साझा करके, और बीमारी का मुक़ाबला करने में काम आने वाले औज़ारों की उपलब्धता का स्तर बढ़ाकर ही कर सकते हैं. सही क़दम उठाने का सही समय बिल्कुल अभी है.”
त्वरित वैज्ञानिक प्रगति
एसीटी-ऐक्सेलेरेटर में देशों की सरकारें, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन, वैज्ञानिक, औषधि निर्माता उद्योग और अन्य महत्वपूर्ण साझीदार – महामारी की जाँच, वैक्सीन और इलाज विकसित करने के लिये, एक साथ इकट्ठा हुए हैं.
शुक्रवार, 23 अप्रैल तक, दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के संक्रमण के, 14 करोड़ 43 लाख से भी ज़्यादा मामले हो चुके थे, और 30 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
एक वर्ष पहले, इस नई बीमारी के बारे में वैश्विक जानकारी व समझ सीमित थी, और ना ही त्वरित जाँच-पड़ताल और वैक्सीन उपलब्ध थे.
एसीटी-ऐक्सेलेरेटर के नेतृत्व में त्वरित वैज्ञानिक प्रगति और असाधारण वैश्विक सहभागिता वजूद में आई है, जिसके ज़रिये, ये औज़ार और संसाधन हर किसी को, हर जगह उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें इनकी ज़रूरत है.
जीवन बचाने के साथ, आशा का संचार
संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने एक वीडियो सन्देश में कहा कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में, एसीटी-ऐक्सेलेरेटर कार्यक्रम, एक अति महत्वपूर्ण बहुपक्षीय औज़ार साबित हुआ है.
“ये कार्यक्रम लोगों की ज़िन्दगियाँ बचा रहा है. ये कार्यक्रम, समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को, महामारी से उबरने का काम शुरू करने के योग्य बना रहा है. ये हम सभी में आशा का संचार कर रहा है.”
इस कार्यक्रम के ज़रिये कम व मध्य आय वाले देशों के लिये, लाखों जाँच-पड़ताल व उपचार किटों के साथ-साथ, लगभग 5 करोड़ डॉलर की क़ीमत के बराबर निजी बचाव उपकरण (पीपीई) सुनिश्चित किये गए हैं.
इस कार्यक्रम के वैक्सीन स्तम्भ – कोवैक्स ने फ़रवरी में ही, विकासशील देशों को वैक्सीन आपूर्ति शुरू कर दी थी जिसके तहत पहली खेप घाना भेजी गई थी.
उसके बाद से, कोवैक्स के तहत, लगभग 120 देशों को, 4 करोड़ से ज़्यादा खुराकें भेजी जा चुकी हैं. इसके अतिरिक्त, कोवैक्स के तहत, क़रीब 5 करोड़ के निजी बचाव उपकरण (पीपीई) भी भेजे गए हैं.
प्रगति जोखिम में
लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोविड-19 का फैलाव अभी जारी है, और इसके नए रूप या प्रकार उभर रहे हैं, क्योंकि इस महामारी का मुक़ाबला करने के उपकरणों व संसाधनों के समतापूर्ण वितरण में प्रगति अपेक्षानुसार तेज़ नहीं रही है.
उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने आगाह करने के अन्दाज़ में कहा कि वैक्सीन राष्ट्रवाद, विश्व के निर्धनतम और बेहद कमज़ोर हालात वाले देशों को, वैक्सीन आपूर्ति को धीमा कर रहा है.
उन्होंने देशों से, एसीटी-ऐक्सेलेरेटर कार्यक्रम के लिये पूर्ण वित्त पोषण सुनिश्चित करने का आहवान किया है.
उन्होंने कहा, “आइये, हम ये भी समझें कि एक पूर्ण और सही मायनों में टिकाऊ पुनर्बहाली ही, हमें टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करेगी.”, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शुक्रवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैसे तो वैश्विक स्तर पर किये गए एक ऐतिहासिक सहभागिता कार्यक्रम की बदौलत, कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने व वितरण के साथ-साथ, दुनिया भर में जाँच व इलाज भी सम्भव हुआ है मगर, इस कार्यक्रम के लिये धन की भारी कमी अब भी बनी हुई है.

ये रिपोर्ट, कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिये एसीटी ऐक्सेलेटर कार्यक्रम शुरू होने की पहली वर्षगाँठ के मौक़े पर जारी की गई है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने रिपोर्ट जारी करने के लिये, शुक्रवार को आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में कहा, “एसीटी ऐक्सेलेरेटर कार्यक्रम शुरू होने के एक वर्ष बाद, विश्व नेताओं के सामने एक विकल्प है: हर जगह महामारी के कारणों का मुक़ाबला करने और लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने में संसाधन निवेश किया जाए, अभी…” 

“या फिर ऐसा नहीं करने के परिणामों का सामना करने पर ट्रिलियन डॉलर की भारी-भरकम रक़म ख़र्च करते रहा जाए, वो भी तब. जब इसका कोई अन्त सामने नज़र ना आए.”

उन्होंने कहा, “वर्ष 2021 के लिये, 19 अरब डॉलर रक़म की कमी है, और उत्पादों की सीमित आपूर्ति के साथ, हम महामारी का ख़ात्मा, केवल धन उपलब्ध कराकर, संसाधान साझा करके, और बीमारी का मुक़ाबला करने में काम आने वाले औज़ारों की उपलब्धता का स्तर बढ़ाकर ही कर सकते हैं. सही क़दम उठाने का सही समय बिल्कुल अभी है.”

त्वरित वैज्ञानिक प्रगति

एसीटी-ऐक्सेलेरेटर में देशों की सरकारें, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन, वैज्ञानिक, औषधि निर्माता उद्योग और अन्य महत्वपूर्ण साझीदार – महामारी की जाँच, वैक्सीन और इलाज विकसित करने के लिये, एक साथ इकट्ठा हुए हैं.

शुक्रवार, 23 अप्रैल तक, दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के संक्रमण के, 14 करोड़ 43 लाख से भी ज़्यादा मामले हो चुके थे, और 30 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

एक वर्ष पहले, इस नई बीमारी के बारे में वैश्विक जानकारी व समझ सीमित थी, और ना ही त्वरित जाँच-पड़ताल और वैक्सीन उपलब्ध थे.

एसीटी-ऐक्सेलेरेटर के नेतृत्व में त्वरित वैज्ञानिक प्रगति और असाधारण वैश्विक सहभागिता वजूद में आई है, जिसके ज़रिये, ये औज़ार और संसाधन हर किसी को, हर जगह उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें इनकी ज़रूरत है.

जीवन बचाने के साथ, आशा का संचार

संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने एक वीडियो सन्देश में कहा कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में, एसीटी-ऐक्सेलेरेटर कार्यक्रम, एक अति महत्वपूर्ण बहुपक्षीय औज़ार साबित हुआ है.

“ये कार्यक्रम लोगों की ज़िन्दगियाँ बचा रहा है. ये कार्यक्रम, समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को, महामारी से उबरने का काम शुरू करने के योग्य बना रहा है. ये हम सभी में आशा का संचार कर रहा है.”

इस कार्यक्रम के ज़रिये कम व मध्य आय वाले देशों के लिये, लाखों जाँच-पड़ताल व उपचार किटों के साथ-साथ, लगभग 5 करोड़ डॉलर की क़ीमत के बराबर निजी बचाव उपकरण (पीपीई) सुनिश्चित किये गए हैं.

इस कार्यक्रम के वैक्सीन स्तम्भ – कोवैक्स ने फ़रवरी में ही, विकासशील देशों को वैक्सीन आपूर्ति शुरू कर दी थी जिसके तहत पहली खेप घाना भेजी गई थी.

उसके बाद से, कोवैक्स के तहत, लगभग 120 देशों को, 4 करोड़ से ज़्यादा खुराकें भेजी जा चुकी हैं. इसके अतिरिक्त, कोवैक्स के तहत, क़रीब 5 करोड़ के निजी बचाव उपकरण (पीपीई) भी भेजे गए हैं.

प्रगति जोखिम में

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोविड-19 का फैलाव अभी जारी है, और इसके नए रूप या प्रकार उभर रहे हैं, क्योंकि इस महामारी का मुक़ाबला करने के उपकरणों व संसाधनों के समतापूर्ण वितरण में प्रगति अपेक्षानुसार तेज़ नहीं रही है.

उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने आगाह करने के अन्दाज़ में कहा कि वैक्सीन राष्ट्रवाद, विश्व के निर्धनतम और बेहद कमज़ोर हालात वाले देशों को, वैक्सीन आपूर्ति को धीमा कर रहा है.

उन्होंने देशों से, एसीटी-ऐक्सेलेरेटर कार्यक्रम के लिये पूर्ण वित्त पोषण सुनिश्चित करने का आहवान किया है.

उन्होंने कहा, “आइये, हम ये भी समझें कि एक पूर्ण और सही मायनों में टिकाऊ पुनर्बहाली ही, हमें टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करेगी.”

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