कोवैक्स: सीरिया में सबसे निर्बलों के लिये पहुँचीं वैक्सीन ख़ुराकें

वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिये वैक्सीन की ढाई लाख से ज़्यादा ख़ुराकों की खेप गुरुवार को सीरिया पहुँच गई है. न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘कोवैक्स’ पहल के तहत भेजी गई इन ख़ुराकों के ज़रिये, महामारी के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई में अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा.

भारत के सीरम संस्थान में निर्मित ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की अधिकांश ख़ुराकें, सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुँची हैं. लगभग 53 हज़ार ख़ुराकें पश्चिमोत्तर इलाक़े में भेजी गई हैं, जोकि विस्थापन व हिंसक संघर्ष से प्रभावित है.

💙💉Syria received 256,800 doses of the COVID-19 vaccine, the first COVAX delivery of vaccines to reach the country: https://t.co/uuxyt46zMT@TedChaiban @bvnylund @WHOEMRO @gavi pic.twitter.com/qC5KGKcAta— UNICEF MENA – يونيسف الشرق الأوسط وشمال إفريقيا (@UNICEFmena) April 22, 2021

सीरिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉक्टर ऐक्जेमल मैग्तेमॉवा ने बताया कि वैश्विक महामारी के ख़िलाफ़ सामूहिक लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
इससे देशों को वैक्सीन समता के नज़दीक लाया जा रहा है और उन लोगों में आशा का संचार हो रहा है, जिनके जीवन एक दशक से जारी हिंसक संघर्ष में तबाह हो गए हैं.
कोवैक्स पहल के तहत, सीरिया उन 92 देशों में है जहाँ वैक्सीनों का अग्रिम वितरण किया जाना तय हुआ है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, वैक्सीन अलायन्स (GAVI) के साथ मिलकर, सीरियाई स्वास्थ्य एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं ताकि इस महीने के अन्त में राष्ट्रीय टीकाकरण मुहिम शुरू की जा सके.
आगामी खेप से पहले, यूएन मानवीय राहतकर्मियों ने ज़ोर देकर कहा है कि सीरिया के स्वास्थ्यकर्मियों को इससे कहीं ज़्यादा मदद की आवश्यकता है – चाहे वे देश में कहीं भी हों.
साथ ही बुज़ुर्गों सहित उन अन्य व्यक्तियों व समूहों पर भी ध्यान दिया जाना होगा जो पहले से ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं.
डॉक्टर मैग्तेमॉवा ने कहा कि पहली खेप पहुँच चुकी है और भविष्य में और वैक्सीन ख़ुराकें भेजे जाने की योजना है.
इससे यह उम्मीद है कि वर्ष 2021 के अन्त तक, स्वास्थ्यकर्मियों, वृद्धजनों और लम्बे समय से बीमार चल रहे लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिये टीके लगाए जा सकेंगे – यह कुल आबादी का 20 फ़ीसदी है.
‘उम्मीद भरा दिन’
सीरिया में यूनीसेफ़ के प्रतिनिधि बो विक्टोर निलुण्ड ने वैक्सीन ख़ुराकों के पहुँचने को एक ‘आशा भरा बड़ा दिन’ क़रार दिया.
उन्होंने कहा कि जल्द टीकाकरण अभियान शुरू किये जाने से उन स्वास्थ्यकर्मियों की रक्षा की जा सकेगी, जो महामारी के दौरान लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने में जुटे हैं.
यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने कोविड-19 वैक्सीन की खेप की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये भारत का आभार जताया है.
साथ ही उन्होंने धनी देशों से आग्रह किया है कि कोवैक्स साझीदारों के साथ प्रयास जारी रखने होंगे, ताकि सीरिया जैसे अन्य हिंसक-संघर्ष प्रभावित देशों में वैक्सीन ख़ुराकें जल्द से जल्द पहुँचाई जा सकें.
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सीरिया में अब तक कोरोनावायरस संक्रमण के 50 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज किये जा चुके हैं.
मगर यूनीसेफ़ और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने, संक्रमितों का वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं ज़्यादा होने की आशंका जताई है, क्योंकि 10 वर्षों से युद्ध पीड़ित देश में परीक्षण की समुचित व्यवस्था का अभाव है., वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिये वैक्सीन की ढाई लाख से ज़्यादा ख़ुराकों की खेप गुरुवार को सीरिया पहुँच गई है. न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘कोवैक्स’ पहल के तहत भेजी गई इन ख़ुराकों के ज़रिये, महामारी के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई में अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा.

भारत के सीरम संस्थान में निर्मित ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की अधिकांश ख़ुराकें, सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुँची हैं. लगभग 53 हज़ार ख़ुराकें पश्चिमोत्तर इलाक़े में भेजी गई हैं, जोकि विस्थापन व हिंसक संघर्ष से प्रभावित है.

सीरिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉक्टर ऐक्जेमल मैग्तेमॉवा ने बताया कि वैश्विक महामारी के ख़िलाफ़ सामूहिक लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.

इससे देशों को वैक्सीन समता के नज़दीक लाया जा रहा है और उन लोगों में आशा का संचार हो रहा है, जिनके जीवन एक दशक से जारी हिंसक संघर्ष में तबाह हो गए हैं.

कोवैक्स पहल के तहत, सीरिया उन 92 देशों में है जहाँ वैक्सीनों का अग्रिम वितरण किया जाना तय हुआ है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, वैक्सीन अलायन्स (GAVI) के साथ मिलकर, सीरियाई स्वास्थ्य एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं ताकि इस महीने के अन्त में राष्ट्रीय टीकाकरण मुहिम शुरू की जा सके.

आगामी खेप से पहले, यूएन मानवीय राहतकर्मियों ने ज़ोर देकर कहा है कि सीरिया के स्वास्थ्यकर्मियों को इससे कहीं ज़्यादा मदद की आवश्यकता है – चाहे वे देश में कहीं भी हों.

साथ ही बुज़ुर्गों सहित उन अन्य व्यक्तियों व समूहों पर भी ध्यान दिया जाना होगा जो पहले से ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं.

डॉक्टर मैग्तेमॉवा ने कहा कि पहली खेप पहुँच चुकी है और भविष्य में और वैक्सीन ख़ुराकें भेजे जाने की योजना है.

इससे यह उम्मीद है कि वर्ष 2021 के अन्त तक, स्वास्थ्यकर्मियों, वृद्धजनों और लम्बे समय से बीमार चल रहे लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिये टीके लगाए जा सकेंगे – यह कुल आबादी का 20 फ़ीसदी है.

‘उम्मीद भरा दिन’

सीरिया में यूनीसेफ़ के प्रतिनिधि बो विक्टोर निलुण्ड ने वैक्सीन ख़ुराकों के पहुँचने को एक ‘आशा भरा बड़ा दिन’ क़रार दिया.

उन्होंने कहा कि जल्द टीकाकरण अभियान शुरू किये जाने से उन स्वास्थ्यकर्मियों की रक्षा की जा सकेगी, जो महामारी के दौरान लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने में जुटे हैं.

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने कोविड-19 वैक्सीन की खेप की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये भारत का आभार जताया है.

साथ ही उन्होंने धनी देशों से आग्रह किया है कि कोवैक्स साझीदारों के साथ प्रयास जारी रखने होंगे, ताकि सीरिया जैसे अन्य हिंसक-संघर्ष प्रभावित देशों में वैक्सीन ख़ुराकें जल्द से जल्द पहुँचाई जा सकें.

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सीरिया में अब तक कोरोनावायरस संक्रमण के 50 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज किये जा चुके हैं.

मगर यूनीसेफ़ और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने, संक्रमितों का वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं ज़्यादा होने की आशंका जताई है, क्योंकि 10 वर्षों से युद्ध पीड़ित देश में परीक्षण की समुचित व्यवस्था का अभाव है.

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