क्लस्टर बमों के बढ़ते उपयोग पर चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र समर्थित नागरिक समाज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में अब भी पुराने और नए संघर्षों में घातक क्लस्टर बम व गोला-बारूद का उपयोग किया जा रहा है, और इनमें सीरिया से लीबिया, नागोर्नो-काराबाख़ तक के इलाक़े शामिल हैं.

हाल ही में जारी रिपोर्ट ‘क्लस्टर विस्फोटक मॉनिटर 2020’ के अनुसार, पिछले दशक के दौरान मामूली सी हलचल से सक्रिय जो जाने यानि हेयर-ट्रिगर उपकरणों के कारण 20 देशों में 4 हज़ार 300 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हताहतों की वास्तविक संख्या, दर्ज हुए आँकड़ों से बहुत अधिक हो सकती है. 

Hot off the press!Cluster Munition Monitor 2020 covers:✅cluster munition ban policy, ✅use, production, transfers and stockpiling ✅impact of cluster munition contamination and casualties Download your free copy here ➡️ https://t.co/9C3gzcpt4O pic.twitter.com/3LGw81WYcE— UNMAS (@UNMAS) November 25, 2020

अगस्त 2010 और जुलाई 2020 के बीच, क्लस्टर गोला-बारूद सात ऐसे देशों में इस्तेमाल किये गए जिन्होंने उन हथियारों पर प्रतिबन्ध लगाने वाली वैश्विक निरस्त्रीकरण सन्धि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं: कम्बोडिया, लीबिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया, यूक्रेन और यमन.
अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइड्स वॉच’ (HRW) के सैन्य विभाग के प्रमुख और क्लस्टर विस्पोटक मॉनिटर के लिये योगदान करने वाले स्टीव गूज़ ने कहा कि हालाँकि इन देशों में पिछले दशक में उनका उपयोग ज़्यादातर “छिटपुट” या “कभी-कभार” रहा है, लेकिन 2012 के बाद से इनके “लगातार उपयोग” को देखते हुए सीरिया इसका अपवाद रहा है. 
मॉनीटर के अनुसार, दुनिया भर के सभी क्लस्टर बम के कारण, मारे गए लोगों में 80 प्रतिशत से अधिक लोग, सीरिया के कलस्टर बमों का शिकार हुए हैं, जिनमें बच्चे भी हैं.
इस्तेमाल ‘अस्वीकार्य’
शोधकर्ताओं ने वर्ष 2019 में लीबिया में हथियारों के घातक प्रयोग और अर्मेनिया और अज़रबैजान द्वारा नागोर्नो-करबाख़ संघर्ष में उनके उपयोग की पहचान की.
मॉनिटर के सम्पादकीय प्रबन्धक मैरियोन लोडो ने कहा, “सीरिया में प्रतिबन्धित क्लस्टर विस्फोटकों का निरन्तर उपयोग और हाल ही में, लीबिया व नागोर्नो-काराबाख़ में किया गया इस्तेमाल अस्वीकार्य है.” 
उन्होंने कहा कि वैश्विक सन्धि पर प्रतिबन्ध लगाने वाले उन 110 देशों के लिये यह ज़रूरी है कि वो “नागरिकों की मौत और जीवन व आजीविका के लिये ख़तरे की निन्दा करने के लिये आवाज़ उठाएँ,” विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहाँ अब भी ये हथियार फैले हुए हैं.
मॉनिटर ने बताया कि यमन में और भारत-पाकिस्तान सीमा पर कश्मीर के विवादास्पद क्षेत्र में नए क्लस्टर बमों के उपयोग के आरोपों की भी जाँच की गई, लेकिन कोई “निर्णायक निर्धारण” सम्भव नहीं हो सका. 
मॉनिटर ने कहा कि इन चिन्ताओं के बावजूद ग़नीमत यह है कि 2019 में  नए क्लस्टर बमों के कारण हताहतों की कुल संख्या 286 दर्ज की गई, जोकि वर्ष 2018 की तुलना में 92 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी थी. और ये मामले ज़्यादातर सीरिया में दर्ज किये गए. हालाँकि अब भी ये मामले, वर्ष 2016 में 971 हताहतों की वार्षिक संख्या से काफ़ी कम है. 
अन्धाधुन्ध ‘बमबारी’
क्लस्टर बम या तो ऊँचाई से छोड़े जाते हैं या सैकड़ों “छोटे-छोटे बमों” वाले कनस्तर में ज़मीन से दागे जाते हैं, जिसके ज़रिये ये छोटे-छोटे बम, व्यापक क्षेत्रों में अन्धाधुन्ध बिखेर दिये जाते हैं.
उन्हें किसी विशिष्ट लक्ष्य को निशाना बनाकर नहीं दागा जाता और 40 प्रतिशत तक विस्फ़ोटक, शुरू में फटते भी नहीं हैं. इसलिये जो भी जानदार चीज़, बाद में इनके सम्पर्क में आती है, उसके लिये इन बमों के विनाशकारी परिणाम होते हैं.
यह रिपोर्ट ऐसे समय जारी की गई है जब एक वर्चुअल सम्मेलन में सभी देश इकट्ठा होकर, क्लस्टर बमों पर प्रतिबन्ध लगाने वाली 2010 में लागू हुई सन्ध में और अधिक देशों को शामिल करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं. 

DMA/RMAC-S Iraqविशेषज्ञों की एक टीम इराक़ के एक मैदान में क्लस्टर बमों की खोज कर रही है.

भण्‍डार का सफ़ाया 
मॉनिटर योगदानकर्ता, स्टीव गूज़ ने “जीवन, अंगों व आजीविका” को बचाने में कन्वेन्शन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सन्ध के तहत चूँकि देशों ने कन्वेन्शन के अनुरूप अपने भण्डार नष्ट करना शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी, इसलिये उनमें से 36 देशों ने 15 लाख क्लस्टर बम नष्ट कर दिये थे, जो 17 करोड़ 8 लाख से अधिक छोटे बमों का संग्रह थे. 
स्टीव गूज़ ने कहा कि नष्ट किये गए क्लस्टर बमों की ये संख्या, सभी देशों द्वारा घोषित किये वैश्विक क्लस्टर बमों में से 99 प्रतिशत के बराबर है. 
उन्होंने कहा कि 18 देशों ने इनका उत्पादन बन्द कर दिया है, जिनमें ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं, और कन्वेंशन में शामिल न होने वाले 16 अन्य देश इन्हें बनाना जारी रखे हुए हैं, जिनमें से दो देश तो सक्रिय रूप से “नए प्रकार के कल्स्टर बमों” पर शोध और विकास कर रहे हैं.
जानलेवा पैदावार
कुल मिलाकर, 26 देश और अन्य क्षेत्र, क्लस्टर बमों के अवशेषों से दूषित हुए हैं, जिनमें कन्वेन्शन में शामिल वो 10 देश भी हैं, जिन्होंने हथियारों के उपयोग, उत्पादन और हस्तान्तरण पर प्रतिबन्ध लगाने वाली सन्धि पर हस्ताक्षर किये हैं. 
मॉनिटर ने बताया कि पिछले एक दशक में, छह देशों ने क्लस्टर बमों के अवशेषों से दूषित क्षेत्रों की सफ़ाई करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिसमें हाल ही में क्रोएशिया और माँण्टीनेग्रो ने जुलाई 2020 में इसे पूरा किया है. 
केवल वर्ष 2019 में, देशों ने कम से कम 82 वर्ग किलोमीटर दूषित भूमि को साफ़ किया, जिसके परिणामस्वरूप 96 हज़ार 500 से अधिक क्लस्टर बम अवशेष नष्ट किये गए. दोनों ही, वर्ष 2018 की तुलना में काफ़ी अधिक हैं., संयुक्त राष्ट्र समर्थित नागरिक समाज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में अब भी पुराने और नए संघर्षों में घातक क्लस्टर बम व गोला-बारूद का उपयोग किया जा रहा है, और इनमें सीरिया से लीबिया, नागोर्नो-काराबाख़ तक के इलाक़े शामिल हैं.

हाल ही में जारी रिपोर्ट ‘क्लस्टर विस्फोटक मॉनिटर 2020’ के अनुसार, पिछले दशक के दौरान मामूली सी हलचल से सक्रिय जो जाने यानि हेयर-ट्रिगर उपकरणों के कारण 20 देशों में 4 हज़ार 300 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हताहतों की वास्तविक संख्या, दर्ज हुए आँकड़ों से बहुत अधिक हो सकती है. 

अगस्त 2010 और जुलाई 2020 के बीच, क्लस्टर गोला-बारूद सात ऐसे देशों में इस्तेमाल किये गए जिन्होंने उन हथियारों पर प्रतिबन्ध लगाने वाली वैश्विक निरस्त्रीकरण सन्धि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं: कम्बोडिया, लीबिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया, यूक्रेन और यमन.

अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइड्स वॉच’ (HRW) के सैन्य विभाग के प्रमुख और क्लस्टर विस्पोटक मॉनिटर के लिये योगदान करने वाले स्टीव गूज़ ने कहा कि हालाँकि इन देशों में पिछले दशक में उनका उपयोग ज़्यादातर “छिटपुट” या “कभी-कभार” रहा है, लेकिन 2012 के बाद से इनके “लगातार उपयोग” को देखते हुए सीरिया इसका अपवाद रहा है. 

मॉनीटर के अनुसार, दुनिया भर के सभी क्लस्टर बम के कारण, मारे गए लोगों में 80 प्रतिशत से अधिक लोग, सीरिया के कलस्टर बमों का शिकार हुए हैं, जिनमें बच्चे भी हैं.

इस्तेमाल ‘अस्वीकार्य’

शोधकर्ताओं ने वर्ष 2019 में लीबिया में हथियारों के घातक प्रयोग और अर्मेनिया और अज़रबैजान द्वारा नागोर्नो-करबाख़ संघर्ष में उनके उपयोग की पहचान की.

मॉनिटर के सम्पादकीय प्रबन्धक मैरियोन लोडो ने कहा, “सीरिया में प्रतिबन्धित क्लस्टर विस्फोटकों का निरन्तर उपयोग और हाल ही में, लीबिया व नागोर्नो-काराबाख़ में किया गया इस्तेमाल अस्वीकार्य है.” 

उन्होंने कहा कि वैश्विक सन्धि पर प्रतिबन्ध लगाने वाले उन 110 देशों के लिये यह ज़रूरी है कि वो “नागरिकों की मौत और जीवन व आजीविका के लिये ख़तरे की निन्दा करने के लिये आवाज़ उठाएँ,” विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहाँ अब भी ये हथियार फैले हुए हैं.

मॉनिटर ने बताया कि यमन में और भारत-पाकिस्तान सीमा पर कश्मीर के विवादास्पद क्षेत्र में नए क्लस्टर बमों के उपयोग के आरोपों की भी जाँच की गई, लेकिन कोई “निर्णायक निर्धारण” सम्भव नहीं हो सका. 

मॉनिटर ने कहा कि इन चिन्ताओं के बावजूद ग़नीमत यह है कि 2019 में  नए क्लस्टर बमों के कारण हताहतों की कुल संख्या 286 दर्ज की गई, जोकि वर्ष 2018 की तुलना में 92 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी थी. और ये मामले ज़्यादातर सीरिया में दर्ज किये गए. हालाँकि अब भी ये मामले, वर्ष 2016 में 971 हताहतों की वार्षिक संख्या से काफ़ी कम है. 

अन्धाधुन्ध ‘बमबारी’

क्लस्टर बम या तो ऊँचाई से छोड़े जाते हैं या सैकड़ों “छोटे-छोटे बमों” वाले कनस्तर में ज़मीन से दागे जाते हैं, जिसके ज़रिये ये छोटे-छोटे बम, व्यापक क्षेत्रों में अन्धाधुन्ध बिखेर दिये जाते हैं.

उन्हें किसी विशिष्ट लक्ष्य को निशाना बनाकर नहीं दागा जाता और 40 प्रतिशत तक विस्फ़ोटक, शुरू में फटते भी नहीं हैं. इसलिये जो भी जानदार चीज़, बाद में इनके सम्पर्क में आती है, उसके लिये इन बमों के विनाशकारी परिणाम होते हैं.

यह रिपोर्ट ऐसे समय जारी की गई है जब एक वर्चुअल सम्मेलन में सभी देश इकट्ठा होकर, क्लस्टर बमों पर प्रतिबन्ध लगाने वाली 2010 में लागू हुई सन्ध में और अधिक देशों को शामिल करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं. 


DMA/RMAC-S Iraq
विशेषज्ञों की एक टीम इराक़ के एक मैदान में क्लस्टर बमों की खोज कर रही है.

भण्‍डार का सफ़ाया 

मॉनिटर योगदानकर्ता, स्टीव गूज़ ने “जीवन, अंगों व आजीविका” को बचाने में कन्वेन्शन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सन्ध के तहत चूँकि देशों ने कन्वेन्शन के अनुरूप अपने भण्डार नष्ट करना शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी, इसलिये उनमें से 36 देशों ने 15 लाख क्लस्टर बम नष्ट कर दिये थे, जो 17 करोड़ 8 लाख से अधिक छोटे बमों का संग्रह थे. 

स्टीव गूज़ ने कहा कि नष्ट किये गए क्लस्टर बमों की ये संख्या, सभी देशों द्वारा घोषित किये वैश्विक क्लस्टर बमों में से 99 प्रतिशत के बराबर है. 

उन्होंने कहा कि 18 देशों ने इनका उत्पादन बन्द कर दिया है, जिनमें ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं, और कन्वेंशन में शामिल न होने वाले 16 अन्य देश इन्हें बनाना जारी रखे हुए हैं, जिनमें से दो देश तो सक्रिय रूप से “नए प्रकार के कल्स्टर बमों” पर शोध और विकास कर रहे हैं.

जानलेवा पैदावार

कुल मिलाकर, 26 देश और अन्य क्षेत्र, क्लस्टर बमों के अवशेषों से दूषित हुए हैं, जिनमें कन्वेन्शन में शामिल वो 10 देश भी हैं, जिन्होंने हथियारों के उपयोग, उत्पादन और हस्तान्तरण पर प्रतिबन्ध लगाने वाली सन्धि पर हस्ताक्षर किये हैं. 

मॉनिटर ने बताया कि पिछले एक दशक में, छह देशों ने क्लस्टर बमों के अवशेषों से दूषित क्षेत्रों की सफ़ाई करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिसमें हाल ही में क्रोएशिया और माँण्टीनेग्रो ने जुलाई 2020 में इसे पूरा किया है. 

केवल वर्ष 2019 में, देशों ने कम से कम 82 वर्ग किलोमीटर दूषित भूमि को साफ़ किया, जिसके परिणामस्वरूप 96 हज़ार 500 से अधिक क्लस्टर बम अवशेष नष्ट किये गए. दोनों ही, वर्ष 2018 की तुलना में काफ़ी अधिक हैं.

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